Funny Stories in Hindi - दोस्तों, आज की इस पोस्ट में हम आपके लिए Funny Stories इन हिंदी में लेकर आये है। दोस्तों यह stories बहुत मजेदार है। आपको इन stories को पढ़ कर बहुत हँसी आएगी। उम्मीद है कि आपको यह stories पसंद आयेगी। 

Funny Stories in Hindi

Funny Stories in Hindi List

सियारों का झुंड और हाथी

लड़ने वाले मुर्गे और बाज

ज्ञान की प्यास

कोयल

सूरज का विवाह

बंदर और मगरमच्छ

मुर्गी और बिल्ली

हंस और मूर्ख कछुआ

गरीब विधवा

चूहे और सरकार

मच्छर की कहानी

बच्चे की शिक्षा

टोपीवाला और बंदर

दर्जी और हाथी

नन्ही लाल मुर्गी

खुजली

आलसी चिड़िया

खरगोश और उसके मित्र

भेड़िया आया, भेड़िया आया

गाने वाली बुलबुल

टिन का बहादुर सिपाही

चालाकी नहीं चली

चतुर मेमना

हिरण और शिकारी

आस्था

कंजूस व्यक्ति

भेड़िया और सारस

भेड़िया और मेमना

चतुर राजा

जैसे को तैसा

भेड़ की खाल में भेड़िया

टीचर के सवाल पप्पू के जवाब!

तारे ही तारे

मुल्ला नसीरुद्दीन

बंदर का मज़ाक

डॉक्टर और चंदु मियां

सूअर और लड़के

घंटी की कीमत

प्रयासों में कमी

जैसे को तैसा

भगवान कहाँ है?

बेचारे बसीर भाई

संता और सर्दी

तारीफ़ भी महँगी पड़ गई!

पति का मुरब्बा

नकली नोट

शैतान पप्पू!

भेड़िया-भेड़िया चिल्लाने वाला बालक

पाशुओं की भाषा जानने वाला राजा

किसान और लोमड़ी

बिजली और तूफान की कहानी

सच्ची सेवा

उलटी गंगा

लकड़ियों का गट्ठर

अबाबील की दूरदर्शिता

शहरी चूहा और देहाती चूहा

पहेली

घमंडी पेड़

सियारों का झुंड और हाथी – Kids Story in Hindi

सियारों के एक झुंड ने एक हाथी को देखा। उनका मन उस हाथी का मॉस खाने का करने लगा। एक बूढ़ा सियार बोला, “चलो, मैं तुम लोगों को तरीका सुझाता हूँ। हाथी को मारने का एक तरीका है मेरे पास ।”

हाथी इधर-उधर घूम रहा था। बूढ़ा सियार उसके पास पहुँचा। “महोदय, मैं एक सियार हूँ। मैं सारे जानवरों ने मुझे आपके पास भेजा है । हम लोगों ने मिलकर तय किया है कि आपको जंगल का राजा बनाया जाना चाहिए। आपके अंदर राजा के सारे गुण हैं। कृपया मेरे साथ चलिए और राजा का काम सँभाल लीजिए।”

हाथी सियार की चापलूसी भरी बातों में आ गया। वह सियार के साथ चल पड़ा। सियार उसे एक झील के पास ले गया, जहाँ हाथी फिसल पड़ा और गहरे कीचड़ में फँस गया।

“मेरी सहायता करो मित्र,” हाथी असहाय होकर चिल्लाने लगा। सियार कुटिलता से मुस्कराया और कहने लगा, “महोदय, आपने मेरे जैसे जानवर पर विश्वास किया। अब आपको इसकी कीमत जान देकर ही चुकानी पड़ेगी।”

हाथी कीचड़ में फँसा रहा और कुछ देर में मर गया। सारे सियारों ने मिलकर उसके गोश्त की दावत उड़ाई।

लड़ने वाले मुर्गे और बाज – Kids Story in Hindi

कुछ समय पहले की बात है। दो मुर्गे एक कूड़े के ढेर पर लड़ रहे थे । दोनों पूरी शक्ति से एक-दूसरे पर आक्रमण कर रहे थे।

लड़ाई में जीतने वाला ही उस ढेर का राजा घोषित होने वाला था। आखिरकार एक मुर्गा बुरी तरह से घायल होकर गिर पड़ा। धीरे-धीरे उठकर वह अपने दड़बे में चला गया।

जीतने वाले मुर्गे ने एक उड़ान मारी और जोर से बाँग लगाने लगा। उसी समय एक बाज ऊपर से उड़कर जा रहा था।

बाज ने एकदम से झपट्टा मारा और उस मुर्गे को दबोचकर ले गया। हारा हुआ मुर्गा यह सब देख रहा था। वह दड़बे से बाहर निकला और कूड़े के ढेर पर खड़ा हो गया।

उसने बाँग लगाकर अपने को राजा घोषित कर दिया। घमंड करने वाले की सदैव हार होती है।

ज्ञान की प्यास

उन दिनों महादेव गोविंद रानडे हाई कोर्ट के जज थे। उन्हें भाषाएँ सीखने का बड़ा शौक था। अपने इस शौक के कारण उन्होंने अनेक भाषाएँ सीख ली थीं; किंतु बँगला भाषा अभी तक नहीं सीख पाए थे।

अंत में उन्हें एक उपाय सूझा। उन्होंने एक बंगाली नाई से हजामत बनवानी शुरू कर दी। नाई जितनी देर तक उनकी हजामत बनाता, वे उससे बँगला भाषा सीखते रहते।

रानडे की पत्नी को यह बुरा लगा। उन्होंने अपने पति से कहा, “आप हाई कोर्ट के जज होकर एक नाई से भाषा सीखते हैं! कोई देखेगा तो क्या इज्जत रह जाएगी! आपको बँगला सीखनी ही है तो किसी विद्वान् से सीखिए।”

रानडे ने हँसते हुए उत्तर दिया, “मैं तो ज्ञान का प्यासा हूँ। मुझे जाति-पाँत से क्या लेना-देना?” यह उत्तर सुन पत्नी फिर कुछ न बोलीं।

शिक्षा - ज्ञान ऊँच-नीच की किसी पिटारी में बंद नहीं रहता।

कोयल

गरमियों की एक सुबह घनिष्ठ मित्र तोताराम और कल्लू एक जंगल में गए। सहसा उन्हें कोयल की कुहुक सुनाई पड़ी। “यह एक पक्षी की आवाज है जो किसी मंगल की सूचना देती है।”

अंधविश्वासी तोताराम ने कहा, “मैंने इसकी आवाज सुबह-सुबह सुनी है। मुझे विश्वास है कि आज का दिन बड़ा भाग्यशाली होगा। अवश्य ही मुझे रुपयों से भरा थैला मिलेगा।”

“नहीं!” कल्लू ने तोताराम की बात का प्रतिवाद किया, जो उससे भी अधिक वहमी था, “तुम मुझसे अधिक भाग्यशाली नहीं हो। मुझे विश्वास है, यह आवाज मेरे लिए अधिक भाग्यशाली साबित होगी।

तुम देखना, जरूर मुझे अच्छी-खासी रकम प्राप्त होगी।” खूबसूरत मौसम का मजा लेने के बजाय वे दोनों इसी बात पर लड़ने लगे। तू-तू, मैं-मैं के बाद हाथापाई पर उतारू हो गए।

कुछ ही समय में वे बुरी तरह जख्मी हो गए। दोनों डॉक्टर के पास पहुँचे। डॉक्टर ने उनसे पूछा कि 1. वे आखिर इस स्थिति में पहुँचे कैसे? सारी घटना बयान करने के बाद उन दोनों ने डॉक्टर से पूछा,

“आप बताएँ कि कोयल ने किसके भाग्यशाली होने की सूचना दी थी?” डॉक्टर ने हँसते हुए कहा, “कोयल ने मेरे भाग्यशाली होने की सूचना दी थी। अगर तुम दोनों इसी तरह लड़-झगड़कर हाथ-पैर तोड़ते रहे तो मुझे रुपयों का ढेर तुम्हारे इलाज के एवज में मिलता रहेगा।”

शिक्षा - बेकार के झगड़े से दूसरों का ही फायदा होता है।

सूरज का विवाह – Kids Story in Hindi

गर्मी का दिन था। पृथ्वी पर अचानक लोगों ने खबर सुनी सूरज का कि जल्द ही विवाह होने वाला है। सारे लोग बहुत प्रसन्न हुए।

मेंढक भी बहुत प्रसन्न हुए और पानी में उछल-कूद मचाने लगे। एक बूढ़ा मेंढक पानी के ऊपर आया और सारे मेंढकों को समझाने लगा कि यह प्रसन्नता की नहीं दुख की बात है,

“मेरे साथियो! तुम लोग इतने प्रसन्न क्यों हो रहे हो? क्या यह वाकई खुशी मनाने की खबर है? एक अकेला सूरज तो अपनी गर्मी से हमें झुलसा देता है।

जरा सोचो, जब इस सूरज के दर्जन भर बच्चे हो जाएंगे तो हमारा क्या हाल होगा। हमारा कष्ट कई गुना बढ़ जाएगा और हम लोग जीवित नहीं रह पाएँगे।“

बंदर और मगरमच्छ – Kids Story in Hindi

एक बंदर और एक मगरमच्छ आपस में दोस्त थे। मगरमच्छ की माँ को बंदर का हृदय बहुत स्वादिष्ट लगता था। उसने मगरमच्छ से कहा कि वह उसके लिए बंदर का हृदय लाए।

मगरमच्छ ने बंदर से कहा, “उस टापू के फल पक गए हैं। मैं तुम्हें वहाँ ले चलता हूँ।” बंदर के मुँह में पानी आने लगा।

वह उछलकर मगरमच्छ की पीठ पर बैठ गया। दोनों टापू की ओर चल पड़े। रास्ते में मगरमच्छ ने बताया, “मेरी माँ तुम्हारा हृदय खाना चाहती है और मैं तुम्हें उसके पास ही लिए जा रहा हूँ।”

बंदर चुपचाप सोचने लगा। कुछ देर बाद वह बोला, “अरे, लेकिन मैं तो अपना हृदय पेड़ पर ही छोड़ आया हूँ।

तुम्हें मेरा हृदय चाहिए तो मुझे वापस वहीं ले चलो।” चतुर बंदर ने बात बनाई।

मूर्ख मगरमच्छ बंदर को वापस नदी के तट पर ले आया। जैसे ही वे तट के पास पहुंचे, बंदर उछलकर पेड़ पर चढ़ गया और उसकी जान बच गई।

मुर्गी और बिल्ली – Kids Story in Hindi

एक बार एक बहुत चालाक मुर्गी थी। एक दिन वह बीमार पड़ गई और अपने घोंसले में पड़ी थी। तभी एक बिल्ली उसे देखने आई।

उसके घोंसले में घुसकर बिल्ली बोली, “मेरी दोस्त, क्या हुआ तुम्हें? क्या मैं तुम्हारी कोई मदद कर सकती हूँ?

तुम्हें कुछ चाहिए हो तो बताओ, मैं ला दूँगी। अभी तुम्हें कुछ चाहिए क्या?”

मुर्गी ने बिल्ली की प्यार भरी बातें सुनीं। उसे खतरे का आभास हो गया। वह बोली, “हाँ, बिलकुल।

मेरे लिए एक काम कर दो। यहाँ से चली जाओ। मैं बीमार हूँ और किसी अनचाहे मेहमान को बुलाकर कोई खतरा नहीं उठाना चाहती।”

हंस और मूर्ख कछुआ

एक बार की बात है। एक कछुआ और दो हंस आपस में बहुत अच्छे मित्र थे। एक साल बारिश बिलकुल नहीं हुई और जिस तालाब में वे रहते थे, वह सूख गया।

कछुए ने एक योजना बनाई और हंसों से बोला, “एक लकड़ी लाओ। मैं उसे बीच में दाँतों से दबा लूँगा और तुम लोग उसके किनारे अपनी चोंच में दबाकर उड़ जाना और फिर हम तीनों किसी दूसरे तालाब में चले चलेंगे।” हंस मान गए।

उन्होंने कछुए को चेतावनी दी, “तुम्हें पूरे समय अपना मुँह बंद रखना होगा। वरना तुम सीधे धरती पर आ गिरोगे और मर जाओगे।”

कछुआ तुरंत मान गया। जब सब कुछ तैयार हो गया तो हंस कछुए को लेकर उड़ चले। रास्ते में कुछ लोगों की नजर हंस और कछुए पर पड़ी। वे 1. उत्साह में आकर चिल्लाने लगे, “देखो, ये हंस कितने चतुर हैं। वे

अपने साथ कछुए को भी ले जा रहे हैं।” कछुए से रहा नहीं गया। वह उन लोगों को बताना चाहता था कि यह विचार तो उसके मन में आया था।

वह बोल पड़ा लेकिन जैसे ही उसने मुँह खोला, लकड़ी उसके मुँह से छूट गई और वह सीधे धरती पर आकर गिर पड़ा। अगर उसने अपने अहंकार पर नियंत्रण कर लिया होता तो वह भी सुरक्षित नए तालाब में पहुँच जाता।

गरीब विधवा

विधवा कमला देवी अपनी दो पुत्रियों के साथ बड़ी गरीबी में दिन बिता रही थी। अब तक जो भी जमा-पूँजी उसके पास थी, सब खर्च हो चुकी थी। तिसपर आय का एकमात्र सहारा उसकी गाय भी मर गई। वह बड़ी परेशान थी। आखिर करे क्या?

“बस, एक ही रास्ता है, अगर भगवान् हमें कहीं से एक गाय दे दे।” “विश्वास और हिम्मत से काम करो, ईश्वर अवश्य तुम्हारी मदद करेगा।” उनके पड़ोसी ने उनसे कहा। “पर हम करें क्या?” कमला देवी ने निराशा से भरकर कहा।

“तुम अपनी आमदनी बढ़ाओ। तुम सब बहुत अच्छी कढ़ाई-बुनाई जानती हो। प्रतिदिन तीन-चार घंटा यह काम अतिरिक्त करो, ताकि कुछ ऊपरी आमदनी हो सके। उसे जमा करो।

दूसरी बात यह कि अपनी चाय का खर्चा कम कर दो। रोज सुबह दलिया बनाकर उसका पानी पियो, जो स्वास्थ्यवर्धक भी होगा और बचत भरा भी। इस तरह जल्दी ही दूसरी गाय खरीदने के लिए पैसे इकट्ठे हो जाएँगे।”

कमला देवी और उसकी पुत्रियों ने अपने पड़ोसी के सुझाव के मुताबिक काम करना शुरू कर दिया। साल के अंत में उनके पास इतना पैसा इकट्ठा हो गया कि वे एक अच्छी गाय खरीद सके।

शिक्षा - मेहनत, बचत और समझदारी आदमी के लिए दूसरा ईश्वर है।

चूहे और सरकार

दोपहर तक यह बात एक समस्या के रूप में सचिवालय के सारे कॉरीडोरों में घूमने लगी कि दफ्तर में चूहे काफी हो गए हैं, क्या किया जाए ?

‘‘मेरी तो आधी रैक ही खा डाली।’’

‘‘अरे तुम्हारी फाइलें तो चलो बाहर थीं। बेचारे दावत का माल समझकर कुतर गए होंगे। मेरी तो आलमारी में बंद थी। लोहे की आलमारी में…गोदरेज, समझे !’’

‘‘अच्छा ! कमाल हो गया। गोदरेज की अलमारी में से खा गए !’’ आश्चर्य ने गुप्ताजी का चश्मा हटवा दिया।

‘‘ये बात मेरी समझ से भी बाहर है कि आखिर उसमें घुसे कैसे ? सूत भर भी तो रास्ता नहीं है उसमें जाने का।’’

‘‘अजी घुसने की जरूरत ही क्या है, अंदर ही घर होगा उनका। घुसे तो आप हैं उनके घर में।’’ किसी ने वर्माजी को छेड़ा।

‘‘लकड़ी का तो सुना है, चूहे काट सकते हैं, पर लोहा ! स्टील ! मान गए भाई, चूहों को भी। आजादी के जितने पुराने दस्तावेज थे, सबका चूरन बना दिया दुष्टों ने।’’

‘‘सर ! जिधर मैं बैठती हूँ, वहां भी बहुत हैं। इसीलिए तो मैं अपने पास कोई फाइल नहीं रखती।’’

‘‘और इसलिए, मैं आपसे फिर कह रहा हूं कि आप अपनी सीट मेरे कमरे में ही लगवा लें। दिल में जगह होनी चाहिए…मुझे तो कोई तकलीफ नहीं होगी।’’

तो फिर क्या करना चाहिए ?

‘‘सर ! हमें तुरंत प्रशासन को इत्तिला करनी चाहिए। ये उनका काम है–ड्यूटी लिस्ट के अनुसार।’’

‘‘और क्या ? आखिर प्रशासन करता क्या है जो उनसे चूहे भी नहीं मारे जाते।’’

‘‘अजी क्या पता इन्होंने खुद चूहे मंगवाकर छोड़ दिए हों। ऑडिट वालों को कह तो भी देंगे कि सारे रिकार्ड चूहे खा गए, अब कहां से लाएं ?’’

‘‘मामला गंभीर है सर ! हमें तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।’’ बड़े बाबू ने सबको जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया।

‘‘हां सर ! इससे गंभीर बात क्या हो सकती है ! जिन रिकार्डों को द्वितीय विश्व-युद्घ में जापान नहीं छीन पाया उसे आजाद भारत के ये चूहे इतने मजे-मजे में हजम कर गए और कानों-कान पता भी नहीं चला !’’

‘‘सर, आपको कब पता चला ?’’

‘‘आज ही, मैंने तो ये आलमारी दो साल से खोली ही नहीं थी। आज जरा ये डायरी रखने के लिए जैसे ही ये अलमारी खोली तो ये माजरा…’’

‘‘अच्छा हुआ सर ! वरना ये नई डायरियां भी खा जाते।’’

‘‘नहीं, वो मैं कभी नहीं करता। नई डायरियां तो मैं सीधे घर ही ले जाता हूं।’’

‘‘सर ठीक कहते हैं, चूहों की जाति का क्या भरोसा। इनके लिए नई-पुरानी, गोरी-काली सब बराबर हैं।’’

तो फिर क्या किया जाए ? प्रश्न गंभीर से भी बड़ा होता जा रहा था।

‘‘सर, मैं एक डिटेल नोट तैयार करता हूं। चूहे कब आए ? ये बिल्डिंग कब बनी ? शुरू में कितने थे और आज कितने ? हर पंचवर्षीय योजना में उनका प्रतिशत कितना बढ़ा है ? किस कमरे में सबसे ज्यादा हैं और किसमें सबसे कम ? कितनी जातियां हैं इनकी, और हर जाति कितनी उम्र तक जिंदा रहती है। इन्होंने प्रतिवर्ष कितनी फाइलें कुतरी हैं और किस विभाग की सबसे ज्यादा ? आसपास के किन-किन मंत्रालयों में उनका आना-जाना है।’’

‘‘सर, आप मानें या न मानें, इसमें विदेशी हाथ भी हो सकता है। जब जम्मू, पंजाब और आसाम में गुपचुप आतंकवादी उतारे जा सकते हैं तो ये तो चूहे हैं। सोचा होगा, हम दुश्मनों को बरबाद करेंगे और चूहे उनके रिकार्डों को। हमारी तो सारी मेहनत पर ही पानी फिर गया।’’

‘‘कब तक तैयार हो जाएगा ये नोट ?’’

‘‘सर ! ज़्यादा टाइम नहीं लगेगा। अभी तो मैं मच्छरों वाली रिपोर्ट बना रहा हूं। आप हुक्म दें तो मैं उसे बीच में छोड़कर पहले इसे शुरू कर दूं।’’

‘‘सर ! मच्छरों वाली रिपोर्ट तो बरसात के बाद भी बन सकती है। और फिर मच्छर-मलेरिया तो आजादी से भी पहले से चल रहा है। महीने-दो-महीने में ही क्या बिगड़ जाएगा। कहिए तो सर, मैं अभी टूर प्रोग्राम बनाकर लाता हूं। पटना, लखनऊ, भोपाल, कलकत्ता के सचिवालयों की स्थिति पर भी हमारी रिपोर्ट में कुछ होना चाहिए, आखिर हम केंद्र सरकार के नुमाइंदे हैं।’’

‘‘सर, मेरा मानना है कि इसमें रूस का अनुभव बहुत महत्त्वपूर्ण हो सकता है। जारशाही के समय कहते हैं कि ऐसे-ऐसे चूहे हो गए थे जो आदमियों पर भी हमला करने लगे थे।’’

‘‘अरे ! ये तो बहुत खतरनाक बात है। यहां किसी पर हमला हो गया तो डिपार्टमेंटल एक्सन हो जाएगा।’’ मातहतों की गंभीरता से सर घबराए जा रहे थे।

‘‘सर ! हमें तो अपनी सीट पर बैठने में भी डर लगता है। कम से कम कैंटीन में चूहे तो नहीं हैं।’’ स्टेनो बोली।

बूढ़ा गरीबदास एक कोने में अपने काम में व्यस्त था। इतनी लंबी-लंबी बहसें तो उसने अंग्रेजों के जमाने में भी नहीं सुनी थी और वह भी चूहों पर। आखिर जैसे ही उसके कान इस चक-चक से पकने को हुए, उसने सुझाव देना ही उचित समझा। ‘‘रुपये दो रुपये की दवा आएगी। आटे की गोलियों में मिलाकर रख देते हैं, चूहे खत्म। घर पर भी तो हम यही करते हैं।’’

‘‘गरीबदास, ये तुम्हारा घर नहीं है, सरकारी दफ्तर है। परमिशन ले ली है दवा लाने की ? जहर होता है जहर–असली। उठाकर किसी बाबू ने खा ली तो ? बंधे-बंधे फिरोगे। नौकरी तो जाएगी ही, पेंशन भी बंद हो जाएगी प्यारे !’’

गरीबदास सिकुड़कर पीछे बैठ गया।

‘‘ये तो वही रहेगा जिसे कहते हैं…’’

‘‘सर, मैं एक बात और कहना चाहता था ?’’

‘‘कहो मिस्टर गुप्ता ! जल्दी कहो। मेरे पास इतना वक्त नहीं है कि उसे बेकार की बहस में गवाऊं। मुझे तीन बजे एक सेमिनार में जाना है।’’

गुप्ताजी सर के कानों तक गरदन लंबी करके फुसफुसाने लगे, ‘‘सर मिस्टर सिंह को अमेरिका भिजवा दो। यह इस बीच वहां की रिपोर्ट ले जाएगा। एक तो हमें कम्युनिस्ट देश के साथ-साथ कैपिटलिस्ट देश की जानकारी भी होनी चाहिए, वरना वित्त मंत्रालय हमारे प्लान को स्वीकृत नहीं करेगा और दूसरे सिंह साहिबान भी चुप बने रहेंगे, वरना कहेंगे अपने अपनों को (सवर्णों) तो विदेश भेज दिया और हमें यहां चूहों से कटवाने के लिए छोड़ दिया। सामाजिक न्याय का भी तो ध्यान रखना है।

मिस्टर गुप्ता की गरदन जब लौटकर पीछे हुई तो सर उसे गर्वित नजरों से देख रहे थे।

‘‘तो ठीक है इस टॉप प्रायरटी दी जाए।’’

मच्छर की कहानी

क्या तुमको पता है कि केवल मादा मच्छर ही काटती हैं? खून पीती हैं? बहुत पहले की बात है। वियतनाम के एक गाँव में टॉम और उसकी पत्नी न्हाम रहते थे।

टॉम खेती करता था और पत्नी रेशम के कीड़े पालती थी। टॉम बड़ा मेहनती था, पर न्हाम जिंदगी में तमाम ऐशो-आराम की आकांक्षी थी। एक दिन न्हाम एकाएक बीमार पड़ गई।

टॉम उस वक्त खेतों में काम कर रहा था। जब वह घर लौटा, उसने पाया कि न्हाम अब इस दुनिया में नहीं है। टॉम घुटने टेककर ईश्वर से प्रार्थना करने लगा। तभी उसे आकाशवाणी सुनाई दी कि वह समुद्र के बीच स्थित एक विशाल पहाड़ी पर न्हाम का शव ले जाए।

कई दिनों की यात्रा के बाद टॉम न्हाम के शव के साथ उस पहाड़ी पर पहुँचा और एक खूबसूरत फूलों के बाग में ले जाकर शव को लिटा दिया। उसकी पलकें थकान से झपक ही रही थीं कि सहसा सफेद बालों तथा तारों सी चमकती आँखोंवाले एक महापुरुष वहाँ प्रकट हुए।

उन महापुरुष ने टॉम से कहा कि वह उनका शिष्य बनकर इसी जगह शांति से रहे। पर टॉम ने कहा कि वह अपनी पत्नी न्हाम को बेहद प्यार करता है और उसके बगैर रह नहीं सकता।

महापुरुष टॉम की इच्छा जानकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा कि वह अपनी उँगली काटकर खून की तीन बूंदें न्हाम के शव पर चुआ दे। टॉम ने वैसा ही किया। तभी जादू-सा हुआ।

खून की बूंदें पड़ते ही न्हाम उठ बैठी। तब महापुरुष ने न्हाम को चेतावनी दी कि अगर वह ईमानदार और मेहनती नहीं बनेगी तो उसे सजा भुगतनी पड़ेगी।

यह कहकर वह महापुरुष वहाँ से अचानक गायब हो गए। टॉम और न्हाम नाव पर बैठकर चल दिए। रास्ते में एक गाँव के किनारे उन्होंने नाव रोकी। टॉम खाने-पीने का कुछ सामान खरीदने चला गया।

नाव में बैठी न्हाम टॉम के लौटने की प्रतीक्षा कर रही थी। तभी एक विशाल सुसज्जित नाव उसके पास आई। उस नाव का मालिक एक अमीर था। उसने न्हाम को अपनी नाव पर आकर चाय पीने की दावत दी।

चायपान खत्म हुआ तो अमीर ने न्हाम से उसकी खूबसूरती की प्रशंसा की और उससे शादी का प्रस्ताव रखा। यह भी वादा किया कि वह उसे अपने महल की एकमात्र रानी बनाकर रखेगा।

न्हाम का तो सपना ही था कि वह धनी महिला बने, उसकी सेवा में ढेरों नौकर चाकर हों। वह चट से उस अमीर का प्रस्ताव मान बैठी। टॉम जब गाँव से चीजें खरीदकर लौटा तो एक बूढ़े नाविक ने उसे पूरा किस्सा सुनाया।

टॉम न्हाम की धोखेबाजी से आगबबूला हो उठा। वह फौरन उस अमीर के घर की तरफ रवाना हुआ। कुछ ही दिनों में वह वहाँ जा पहुँचा। उसके महल में पहुँच उसने एक नौकर से प्रार्थना की कि वह महल के मालिक से मिलना चाहता है।

तभी अचानक न्हाम फूल तोड़ने के लिए बगीचे में आई और टॉम को वहाँ देख चकित रह गई। उसने टॉम से कहा कि वह यहाँ बेहद सुखी है और यहाँ से कहीं नहीं जाना चाहती। टॉम ने कहा कि वह उसे कतई वापस नहीं ले जाना चाहता।

वह तो अपने खून की तीन बूंदें वापस लेने आया है। वह न्हाम उसे लौटा दे। बस! न्हाम इस बात से बेहद खुश हुई, ‘चलो खून की तीन बूँदें देकर ही छुटकारा मिल जाएगा।’

ऐसा कहकर उसने तुरंत अपनी एक उँगली में गुलाब का काँटा चुभोया और टॉम की बाँह पर खून टपकाने लगी। जैसे ही खून की तीसरी बूंद गिरी, न्हाम का शरीर सिकुड़ने लगा और वह मादा मच्छर के रूप में तब्दील हो गई।

यही न्हाम के लिए सजा थी। वह मादा मच्छर बनकर टॉम के सिर पर मँडराने लगी, जैसे भन्नाकर कह रही हो, ‘मुझे खून लौटा दो! मैं माफी माँगती हूँ, मैं माफी माँगती हूँ!’ तभी से मादा मच्छर खून पीने के लिए आदमियों के आसपास भन्नाती रहती हैं।

शिक्षा - धोखाधड़ी हमें मौत की ओर ले जाती है।

बच्चे की शिक्षा

फ्रांसिस वेलेंड पार्कर अमरीका के प्रसिद्ध शिक्षा विशेषज्ञ थे। बहुत दूर-दूर से लोग बच्चों की शिक्षा के बारे में उनसे परामर्श लेने आया करते थे। एक दिन उनका कहीं भाषण हो रहा था।

भाषण पूरा होने पर एक महिला उनके पास आई। उसने पार्कर महोदय से पहला सवाल किया, “मैं अपने बच्चे का शिक्षण प्रारंभ करना चाहती हूँ। इसके लिए कौन सा समय ठीक होगा?”

पार्कर ने पूछा, “आपका बच्चा कब पैदा होगा?” यह सुनकर महिला को बड़ा आश्चर्य हुआ। बोली, “बच्चा तो आज से पाँच वर्ष पहले पैदा हो चुका है। ” पार्कर ने कहा,

“श्रीमतीजी, तब तो आपने अपने बच्चे के पाँच सुनहरे वर्ष बरबाद कर दिए। शिक्षण का कार्य तो बच्चे के जन्म के साथ ही शुरू हो जाना चाहिए। जल्दी घर जाइए और बच्चे का शिक्षण अभी से शुरू कर दीजिए।”

शिक्षा - ज्ञान और शिक्षा के लिए कोई समय बंधन नहीं है।

टोपीवाला और बंदर

बहुत पुरानी बात है… एक टोपीवाला था। वह मस्ती में हाँक लगाता, “टोपियाँ ले लो, टोपियाँ… रंग बिरंगी टोपियाँ, पाँच की, दस की, हर उम्र के लिए टोपियाँ ले लो…” एक शहर से दूसरे शहर टोपियाँ बेचने जाया करता था।

एक बार जंगल से गुजरते समय वह थककर एक पेड़ के नीचे विश्राम करने बैठ गया। शीघ्र ही उसकी आँख लग गई। पेड़ पर ढेर सारे बंदरों का बसेरा था।

उन्होंने टोपीवाले को सोते देखा तो नीचे उतर आए और उसकी गठरी खोलकर टोपियाँ ले लीं और वापस पेड़ पर जाकर बैठ गए। सभी टोपियाँ पहनकर खुशी से ताली बजाने लगे।

ताली की आवाज सुनकर टोपीवाले की आँख खुल गई। उसने अपनी गठरी खोली और टोपियों को गायब पाया। इधर-उधर देखा पर टोपियाँ नहीं दिखी।

अचानक उसकी दृष्टि पेड़ पर टोपी पहने बंदरों पर पड़ी। टोपीवाले को कुछ सूझा। उसने अपनी टोपी उतारी और नीचे फेंक दी।

नकलची बंदरों ने उसकी नकल उतारी और उन्होंने भी अपनी- अपनी टोपियाँ उतारकर नीच फेंक दीं। टोपीवाले ने उन्हें समेटा और गठरी बनाकर खुशी-खुशी हॉक लगाता हुआ चल पड़ा…, “टोपी ले लो भाई, टोपी… रंग बिरंगी टोपी…

शिक्षा : बुद्धिमता मनुष्य की सबसे महत्वपूर्ण निधि है।

दर्जी और हाथी

एक समय की बात है, एक गाँव के मंदिर में एक हाथी रहता था। वह प्रतिदिन संध्या के समय, नदी में स्नान करने जाया करता था। नदी में पानी से थोड़ी देर खेलता और फिर स्नान कर मंदिर वापस आ जाता था।

लौटते समय वह एक दर्जी की दुकान पर रुकता था। दर्जी उसे प्यार से केला खिलाया करता था। यह उसकी नियमित दिनचर्या थी।

एक दिन दर्जी किसी काम से शहर गया हुआ था। दुकान पर दर्जी का बेटा बैठा था। हाथी आया और उसने केले के लिए अपनी सूँढ़ उसकी ओर बढ़ाई।

बेटे को शरारत सूझी। उसने हाथी की सूंड में सूई चुभो दी। हाथी दर्द से तिलमिलाकर चुपचाप वापस चला गया।

अगले दिन हाथी फिर नदी पर नहाने गया। लौटते समय दर्जी की दुकान पर रुका और केले के लिए सूँढ़ बढ़ाया। इस बार भी लड़के ने उसे सूई चुभो दी।

क्रुद्ध हाथी ने अपनी सूँढ़ में भरा हुआ कीचड़ का फव्वारा दर्जी के बेटे पर डाल दिया। उसी समय दर्जी वापस आ गया । सच्चाई जानकर दर्जी ने अपने पुत्र को डाँटा,

“यह हाथी हमारा मित्र है, उससे क्षमा माँगो…” और फिर दर्जी ने हाथी को प्यार से अपने हाथों से केले खिलाए। हाथी वापस चला गया।

शिक्षा : दया अपने आप में ही एक गुण है।

नन्ही लाल मुर्गी

एक नन्ही लाल मुर्गी अपने तीन मित्रों कुत्ता, बत्तख, और बिल्ली के साथ रहती थी। नन्ही लाल मुर्गी बहुत मेहनती थी परन्तु उसके दोस्त आलसी थे।

एक दिन उसे एक मक्के का दाना मिला। मेहनती मुर्गी ने अकेले ही दाना बोया। जब उसमें मक्के लगे तो अकेले ही काटा। फिर वो उसे चक्की वाले के पास ले गई।

चक्की वाला मुर्गी की मेहनत से बहुत प्रसन्न हुआ। उसने मक्के का आटा पीसा और उसे दे दिया। घर आकर अपने आलसी मित्रों को शिक्षा देने के लिए नन्ही लाल मुर्गी ने मात्र अपने लिए सूप बनाया और सब देखते रह गए।

शिक्षा : मेहनत का फल मीठा होता है।

खुजली

एक दिन एक राजा ने एक भिखारी को महल के दरवाजे के सामने अपनी पीठ रगड़ते हुए देखा। उसने अपने सिपाहियों से भिखारी को पकड़कर राजदरबार में ले आने को कहा।

सिपाही फौरन गए और भिखारी को पकड़कर ले आए। राजा ने उससे पूछा, “तुम महल के दरवाजे के सामने अपनी पीठ क्यों खुजला रहे थे?” भिखारी बोला,

“महाराज, मेरी पीठ में खुजली हो रही थी, इसलिए मैं महल के दरवाजे के सामने पीठ खुजला रहा था।” राजा ने यह सुनने के बाद अपने सिपाहियों को आदेश दिया,

“इस भिखारी को बीस स्वर्ण मुद्राएँ दी जाएँ।” जल्दी ही यह खबर पूरे राज्य में आग की तरह फैल गई। कुछ समय बाद राजा ने दो अन्य भिखारियों को महल के सामने अपनी पीठ रगड़ते देखा।

उन्हें भी बुलवाकर राजा ने उनसे पीठ खुजाने का कारण पूछा। उन्होंने भी जवाब दिया कि उनकी पीठ में खुजली हो रही थी। यह सुनकर राजा ने अपने सिपाहियों से कहा,

“इन भिखारियों की पीठ की खुजली ठीक करने के लिए इनकी पीठ पर बीस-बीस कोड़े लगाओ।” यह सुनकर दोनों तुरंत बोले, “लेकिन महाराज,

आपने तो एक अन्य भिखारी को वीस स्वर्ण मुद्राएँ दी थीं।” राजा बोला, “उसने सच कहा था, लेकिन तुम दोनों झूठ बोल रहे हो। यदि चाहते तो तुम दोनों एक-दूसरे की पीठ खुजला सकते थे। तुम दोनों यहाँ सिर्फ लालच के कारण ही आए हो।” दोनों भिखारी अपनी करनी पर शर्मिंदा थे।

आलसी चिड़िया - Hindi story for kids

चिक्की, मिक्की नाम की दो चिड़िया एक घोंसले में रहती थीं। दोनों बहुत आलसी थीं। सर्दी का मौसम था। चारों तरफ ठंडी हवा चल रही थी।

बर्फवारी भी हो रही थी। संयोग से उनके घोंसले में एक छेद हो गया। छेद से ठंडी हवा आने के कारण उनका घोंसला एकदम ठंडा हो जाता था।

चिक्की और मिक्की दोनों को भारी ठंड लगती। चिक्की ने सोचा, ‘मुझे आश्चर्य है कि मिक्की इस छेद को क्यों ठीक नहीं करवाती है।’ वहीं दूसरी तरफ मिक्की ने सोचा, ‘चिक्की बड़ी आलसी है।

वह क्यों नहीं इस छेद को ठीक करती?’ इस तरह दोनों ही एक-दूसरे से उस छेद को बंद करवाने की उम्मीद लगाए बैठी थीं। फलस्वरूप उनके घोंसले का छेद वैसे ही बना रहा।

धीरे-धीरे बर्फवारी तेज हो गई और हवा भी तेज चलने लगी। अब छेद के रास्ते बर्फ उनके घोंसले में प्रवेश कर गई। अब आलसी चिड़िया ठंड से काँपने लगीं,

लेकिन किसी ने भी छेद को बंद करने की कोशिश नहीं की अंतिम दोनों ठंड से मर गईं। इस प्रकार, अपने आलसी स्वभाव के कारण दोनों चिड़ियाँ अकाल मौत का शिकार बनीं।

खरगोश और उसके मित्र

एक जंगल में एक खरगोश रहता था। उसके ढेर सारे मित्र थे। एक दिन खरगोश ने कुछ शिकारी कुत्तों की आवाज सुनी। वे जंगल की ओर आ रहे थे।

खरगोश बहुत डर गया। अपनी जान बचाने के लिए वह अपने मित्रों के पास सहायता मांगने गया। घोड़े के पास पहुँचकर उसने सारी बात बताई और कहा, “क्या आप मेरी सहायता करेंगे? कृपया मुझे अपनी पीठ पर बिठाकर यहाँ से ले चलिए।”

घोड़े ने कहा, “क्षमा करना भाई, मुझे अभी बहुत काम है।” खरगोश बैल के पास गया और बोला, “मेरी जान पर बन आई है… क्या आप अपने नुकीले सींगों से शिकारी कुत्तों को डरा देंगे?” बैल ने कहा कि उसे किसान की पत्नी के पास जाना है।

खरगोश भालू के पास गया। उसने भी व्यस्तता का बहाना बनाया। खरगोश ने बकरी के पास जाकर कहा, “बहन, शिकारी कुत्तों से मुझे बचा लो।” बकरी बोली, “मुझे उनसे बहुत डर लगता है । क्षमा करो, मैं जरा जल्दी में हूँ। तुम किसी और से सहायता ले लो।”

शिकारी कुत्ते बहुत पास आ चुके थे खरगोश ने अब भागना शुरु किया। सामने ही उसे एक बिल दिखाई दिया। उसमें छिपकर खरगोश ने अपनी जान बचाई।

शिक्षा : दूसरों पर निर्भर रहने की जगह स्वयं पर भरोसा करना चाहिए।

भेड़िया आया, भेड़िया आया

एक गाँव में एक गड़ेरिये का बेटा था। वह प्रतिदिन अपने भेड़ों को चराने के लिए पहाड़ी पर ले जाया करता था। सारे दिन पहाड़ी पर भेड़ों के साथ अकेले रहने में उसे बड़ी ऊब होती थी।

एक दिन बैठे-बैठे उसने मनोरंजन हेतु कुछ करने का सोचा। पहाड़ी पर से वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा, “बचाओ! बचाओ! भेड़िया आया, भेड़िया आया, बचाओ।”

गाँव वालों ने उसकी चीख सुनी। सभी किसानों ने अपना काम छोड़ा और उसे बचाने के लिए भागे आए। उनका इस प्रकार भागकर आना गड़ेरियें के बेटे को बड़ा रोचक लगा।

वह खुश होकर ताली बजाता हुआ बोला, “मैं तो मजाक कर रहा था।” गाँव वालों को लड़के का मजाक अच्छा नहीं लगा और वे बहुत क्रोधित हुए। थोड़े दिनों के बाद उस लड़के ने फिर से झूठा शोर मचाया। गाँव वालों को बहुत बुरा लगा।

कुछ दिनों बाद सचमुच अचानक से भेड़िया आ गया। गड़ेरिये का बेटा डरकर एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ गया और चिल्लाने लगा, “बचाओ-बचाओ,

भेड़िया आया, बचाओ” किसानों ने उसकी आवाज सुनी पर सोचा कि यह फिर से मजाक कर रहा होगा। भेड़िए ने कई भेड़ों को मार डाला और लड़का कुछ न कर सका।

शिक्षा : झूठे व्यक्ति का सच बोलने पर भी विश्वास नहीं करा जाता है।

गाने वाली बुलबुल

वर्षों पुरानी बात है… चीन में एक राजा था। उसके महल के पास में ही एक जंगल था। इस जंगल में रहने वाली एक बुलबुल बहुत ही मीठी आवाज में गाती थी।

एक दिन राजा ने अपने मंत्री को उसे लाने का आदेश दिया। मंत्री किसी तरह उसे पकड़ने में सफल हो गया। एक पिंजरे में बंद कर राजा के सामने बुलबुल को लाया गया।

पर कैद हो जाने के कारण बुलबुल उदास हो गई। उसने खाना-पीना-गाना सब छोड़ दिया। कई दिन व्यतीत हो गए। रानी को बुलबुल पर दया आई और उसने पिंजरा खोल दिया। बुलबुल उड़ती हुई अदृश्य हो गई।

राजा बुलबुल के संगीत का दीवाना था। उसने मंत्री से दूसरी चिड़िया लाने के लिए कहा। मंत्री ने राज्य के शिल्पकार से हू-ब-हू वैसी ही मिट्टी की बुलबुल बनवाई जो गाती भी थी।

राजा सोने से पहले उसका गाना सुनता था। एक दिन वह गिरकर टूट गई। राजा उदास और बीमार रहने लगा। एक दिन रानी की कृपा का प्रतिदान देने वही बुलबुल आई और खिड़की पर बैठकर गाने लगी।

राजा ठीक होने लगा। अब प्रतिदिन रात को बुलबुल आती, गाना गाती और राजा को सुलाकर चली जाया करती थी।

शिक्षा : स्वतंत्रता अनमोल है।

टिन का बहादुर सिपाही

शानू एक बहुत ही प्यारा बच्चा था। उसके पास रंग-बिरंगे खिलौने थे। उनमें टिन के सिपाही की पूरी सेना भी थी पर एक सिपाही लंगड़ा था। खिलौनों में एक गत्ते का महल और एक नर्तकी भी थी।

शानू ने लंगड़े सिपाही में कुछ विशेषता देखी और उसे सेना का कप्तान बना दिया। शाम के समय शानू जब बाहर खेलने जाता तो खिलौने सजीव होकर आपस में खेलना शुरु कर देते। कप्तान नर्तकी की सुंदरता से उसकी ओर आकर्षित होने लगा था।

एक दिन शानू के मित्र आए। एक मित्र ने लंगड़े कप्तान को बेकार समझकर खिड़की से बाहर नाली में फेंक दिया। कप्तान बहता-बहुता गटर चला गया और वहाँ से समुद्र में।

वहाँ उसे एक बड़ी मछली ने निगल लिया। वह मछली एक मछुआरे द्वारा पकड़ी गई। मछुआरे से उसे एक बावर्ची ने खरीद लिया। बावर्ची ने जब उसे काटा तो कप्तान बाहर निकला।

कप्तान को वह जगह जानी पहचानी सी लगी। तभी उसे नर्तकी दिखाई दी। बावर्ची कप्तान को शानू को देने जा रहा था कि अचानक उसका पैर एक छोटी गाड़ी पर पड़ा और बावर्ची फिसलकर गिरा ।

कप्तान हाथ से छूटकर अलाव में गिर पड़ा। कप्तान जलने लगा तभी हवा का झोंका नर्तकी को उड़ाकर आग में ले गया। अंततः कप्तान को उसकी नर्तकी मिल गई।

शिक्षा : कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

चालाकी नहीं चली

भोलू और गोलू नामक दो कौवे अच्छे मित्र थे। एक दिन उन दोनों में अपनी-अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए झगड़ा होने लगा।

उन्होंने तय किया कि जो चुनौती को पूरा कर लेगा, वही श्रेष्ठ होगा। चुनौती यह थी कि दोनों को अपनी चोंच में एक एक भरा हुआ थैला लेकर उड़ना था।

जो अपने थैले को लेकर आकाश में अधिक ऊपर उड़ेगा, वही श्रेष्ठ होगा। गोलू बहुत ही चालाक कौआ था। उसने अपने थैले में रूई और भोलू के थैले में नमक भरा और दोनों ने उड़ान भरी।

जल्दी ही थैले का वजन कम होने के कारण गोलू भोलू से अधिक ऊपर उड़ने लगे। और भारी वजन होने के कारण भोलू ऊँची उड़ान भरने में असमर्थ था।

तभी बारिश शुरू हो गई। रूई पानी सोखने के कारण भारी हो गई और नमक घुलनशील होने के कारण पानी में घुल गया। इसके फलस्वरूप गोलू का थैला भारी और भोलू का थैला हल्का हो गया।

अब भोलू ने गोलू के मुकाबले अधिक ऊँची उड़ान भरी। इस तरह भोलू वह चुनौती जीत गया।

चतुर मेमना

एक भेड़िया भूखा था। वह भोजन की तलाश में जंगल में इधर से उधर भटक रहा था। तभी उसे नहर के किनारे से आती एक मेमने के मिमियाने की आवाज सुनाई पड़ी।

यह आवाज सुनकर उसका दिल खुशी से झूम उठा। उसने मन ही मन सोचा, ‘चलो, अब अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ेगा। क्यों न मैं इस मेमने को खाकर अपनी भूख शांत कर लो।

उसने जल्दी से नहर के पास जाकर देखा कि सामने स्थित एक पहाड़ी पर वह मेमना खड़ा है। उनके बीच पर्याप्त दूरी थी। भेड़िये के वहाँ पहुँचने से पहले मेमना भाग भी नहीं सकता था।

इसलिए भेड़िये ने एक योजना बनाई और बोला, “प्यारे छोटे मेमने! यहाँ नीचे चरागाह में आ जाओ। यहाँ पर चरने के लिए हरी-हरी नर्म घास है।

तुम यहाँ पर नहर का ठंडा मधुर जल भी पी सकते हो।” चालाक मेमना भेड़िए की चालाकी भाँपकर बोला, “सुझाव के लिए धन्यवाद भेड़िया भाई।

लेकिन मैं यहीं पर ठीक हूँ। यहाँ मेरे लिए पर्याप्त घास है। इस तरह भेड़िए की योजना असफल हो गई। किसी ने ठीक ही कहा है कि मक्का से होशियारी अच्छी होती है।

हिरण और शिकारी

एक हिरण था। पोखर में पानी पीने गया। पानी पीते समय उसने पानी में अपनी परछाई देखी। हिरण प्रसन्न होते हुए सोचने लगा, “ईश्वर ने मुझे इतने सुंदर सींग दिए हैं…

काश! मेरे पैर भी इतने ही खूबसूरत होते। ये इतने पतले हैं कि मैं इन्हें देखकर दुखी हो जाता हूँ।” तभी एक शिकारी ने निशाना साधकर हिरण पर तीर छोड़ दिया।

हिरण ने अपने फुर्तीले पैरों से छलांग लगाई और दूर निकल गया। पर उसके सींग एक पेड़ में उलझ गए। हिरण ने बहुत जोर लगाया पर भागने में सफल नहीं हुआ। शिकारी ने उसे पकड़ लिया।

शिक्षा : अपनी ताकत को पहचानो।

आस्था

धर्मदास एक मेहनती एवं ईश्वर में आस्था रखने वाला व्यक्ति था। अपनी सफलता के लिए वह हमेशा ईश्वर को धन्यवाद दिया करता था। धीरे-धीरे कठिन परिश्रम कर वह एक सफल व्यवसायी बन गया।

लेकिन अब उसे अपने ऊपर घमंड हो गया। वह सोचता कि वह सिर्फ अपने कठिन परिश्रम से ही सफल हुआ है, इसमें भगवान का कोई हाथ नहीं है।

इसलिए उसकी भगवान में आस्था कम हो गई और उसने भगवान की पूजा करनी छोड़ दी। एक बार लोगों के बीच भगवान को लेकर बहस होने लगी.

तो धर्मदास बोला,”भगवान कौन है? वह है ही नहीं! देखो मैं अपने कठिन परिश्रम के कारण ही आज सफल हुआ हूँ। और यदि वास्तव में भगवान शक्तिशाली है,

तो वह मुझे दो मिनट में मारकर दिखाए। मैं उसे चुनौती देता हूँ।” दो मिनट बाद धर्मदास स्वयं को जिंदा पाकर भगवान के ऊपर हँसने लगा। तब एक बूढ़ा बोला,

“यदि तुम्हारा बेटा तुमसे ऐसा करने को कहता तो क्या तुम उसे मार डालते? भगवान हमारे पिता के समान हैं। वह कभी तुम्हें हानि नहीं पहुंचा सकते।

तुम्हारी सफलता में भगवान का ही आशीर्वाद है।” धर्मदास को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने घमंड करना छोड़ दिया। और वह एक बार फिर ईश्वर में विश्वास करने लगा।

कंजूस व्यक्ति

एक दिन एक कंजूस व्यक्ति के दोस्त ने अपने मित्र की कंजूसी की आदत छुड़ाने की सोची। वह उसे बाजार ले गया और बोला, “प्रिय मित्र, तुम क्या खाना पसंद करोगे?”

कंजूस बोला, “भूख लगी है, चलो भोजन किया जाए।” वे एक होटल में जाकर। कंजूस के दोस्त ने होटल मालिक से पूछा, “भोजन कैसा है?” होटल मालिक ने कहा,

“मिठाई की तरह स्वादिष्ट!” कंजूस का दोस्त बोला, “क्यों न भोजन के स्थान पर कुछ मीठा खाया जाए।” फिर वे एक शहद बेचने वाले की दुकान पर गए और पूछा.

“शहद कैसा है?” शहद बेचने वाला बोला, “एकदम शुद्ध बिल्कुल पानी की तरह।'” कंजूस का दोस्त बोला, “अरे, फिर यूँ ही पैसे क्यों व्यर्थ करें।

चलो, घर चलते हैं। मैं तुम्हें घर पर शुद्ध शहद के रूप में पानी दूंगा।” फिर घर पहुँचकर कंजूस के दोस्त ने उसे पानी से भरा एक बर्तन थमा दिया।

कंजूस समझ गया कि उसके दोस्त ने उसे सबक सिखाने के लिए ही ऐसा किया है। इसलिए उसने उस दिन से कंजूसी छोड़ दी।

भेड़िया और सारस

एक बार एक भेड़िया अपना शिकार खा रहा था। तभी एक हड्डी का टुकड़ा उसके गले में अटक गया। जिससे उसे गले में दर्द होने लगा। भेड़िया दर्द से छटपटाने लगा।

उसे साँस लेने में भी कठिनाई होने लगी। कइयों से उसने सहायता माँगी और बदले में पुरस्कार देने का भी वायदा किया पर किसी ने उसकी सहायता नहीं की।

अंत में एक सारस को उस पर दया आई। उसने भेड़िए को कहा, “तुम करवट लेकर अपना मुँह खोलकर लेट जाओ।”

भेड़िया अपना मुँह खोलकर लेट गया। सारस ने अपनी लंबी चोंच उसके गले में डाली और फँसी हुई हड्डी को खींचकर निकाल दिया। भेड़िए की जान में जान आ गई।

सारस ने भेड़िए से अपने पुरस्कार की माँग की तो भेड़िए ने कहा, “मूर्ख पक्षी, तुम अपने भाग्य को सराहो कि अभी तक जीवित हो।

जब तुमने अपनी चोंच मेरे मुँह में डाली थी, चाहता तो तभी तुम्हें चट कर जाता। क्या तुम्हारा जीवित रहना किसी पुरस्कार से कम है?”

शिक्षा : भले के साथ ही भलाई करनी चाहिए।

भेड़िया और मेमना

एक बार एक भेड़िया, किसी पहाड़ी झरने पर, ऊपर की ओर पानी पी रहा था। उसकी दृष्टि नीचे की ओर पानी पी रहे एक मेमने पर पड़ी। मेमने के नरम माँस को खाने की कल्पना से ही भेड़िए के मुँह में पानी भर आया और वह तरकीब सोचने लगा।

उसने मेमने को डाँटते हुए कहा, “अरे ओ मेमने! इस पानी को गंदा करने का तुम्हारा साहस कैसे हुआ? देखते नहीं हो, मैं पानी पी रहा हूँ…’ “

मेमना भेड़िए को देखकर डर गया फिर भी साहस बटोर कर बोला , “श्रीमान्! मैं भला पानी कैसे गंदा कर सकता हूँ? पानी तो आपकी ओर से बहकर नीचे आ रहा है।

“ठीक है-ठीक है, पर तुमने मुझे पिछले वर्ष गाली क्यों दी थी?” क्रोधित भेड़िए ने पूछा।

सहमे हुए मेमने ने कहा, “मैं तो कुल 6 महीने का हूँ… आपको साल भर पहले गाली कैसे दे सकता हूँ? मेरा तो जब जन्म ही नहीं हुआ था…” और वह काँपने लगा।

“तो फिर तुम्हारे पिता होंगे। मैं तुम्हें नहीं छोडूँगा…” और भेड़िया मेमना पर टूट पड़ा।

शिक्षा : झगड़ालू झगड़े का कोई न कोई बहाना ढूँढ ही लेते हैं।

चतुर राजा

राजा कालहेतु एक कर एवं लालची राजा था। उसने सभी पडोसी राज्यों पर आक्रमण कर उन्हें पराजित कर दिया था। लेकिन सिर्फ राजा उदयमान को पराजित करने में वह असफल रहा था।

उदयमान को बंदी बनाने के लिए राजा कालहेतु ने एक चाल चली। उसने उदयमान को अपने महल में भोज पर आमंत्रित किया। राजा उदयमान ने उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।

जब राजा उदयभान राजा कालकेतु के महल पहुँचा तो उसे बंदी बना लिया गया। अब राजा के हेतु अपने एकमात्र दुश्मन को बंदी हो सुनकर बहुत खुश था।

उसे अपने ऊपर अत्यधिक गर्व महसूस रहा था। वह यह सोच-सोचकर फूला नहीं समा रहा था कि भले मैंने छल का सहारा लिया है, लेकिन अब मेरा कोई शत्रु नहीं रहा।

अब उसे किसी का भय नहीं रहा था। तभी अचानक एक सिपाही दौड़ता हुआ उसके पास आया और बोला, “महाराज, राजा उदयमान ने हमारे राज्य पर आक्रमण कर दिया है और उसकी सेना ने हमें चारों तरफ से घेर लिया है।

जिस व्यक्ति को आपने बंदी बनाया है, वह राजा उदयमान नहीं है, बल्कि एक बहरूपिया है।” उदयमान की इस युद्ध में विजय हुई। फिर उसने कालहेतु से दूसरे राज्यों के राजाओं को आजाद करने के लिए कहा।

जैसे को तैसा

एक आम विक्रेता घूम-घूमकर आम बेच रहा था। कुछ देर बाद वह एक पान की दुकान के पास पान खाने के लिए रुका। उधर पान बेचने वाले ने आम देखे तो वह आम बेचने वाले से चिल्लाकर बोला,

“आम वाले! अगर तुम्हें बुरा न लगे तो पान के बदले आम दोगे?” आम विक्रेता खुशी-खुशी तैयार हो गया। लेकिन पान बेचने वाला उसे धोखा देना चाहता था।

उसने एक छोटा-सा पान का पत्ता लिया और एक छोटा पान बनाकर आम विक्रेता को दे दिया। आम विक्रेता ने उससे चूना डालने को कहा। लेकिन पान वाला बोला,

“जाओ और पान को दीवार से रगड़ो। चूना अपने आप मिल जाएगा।” आम विक्रेता समझ गया कि पान वाला उसे धोखा दे रहा है। इसलिए उसने पान वाले को हरा आम दिया।

हरा आम देखकर पान वाला बोला, “मुझे पीला पका हुआ आम दो।” उसकी बात सुनकर आम विक्रेता हँसते हुए बोला, “जाओ और पीले रंग से पुती हुई दीवार से आम को रगड़ो तो वह पीला हो जाएगा।”

इस प्रकार आम विक्रेता ने पान वाले के साथ वैसा ही व्यवहार किया, जैसा कि उसने किया था। इसे ही कहा जाता है- ‘जैसे को तैसा’।

सूर्य और हवा

एक समय की बात है… सूर्य और हवा में बहस छिड़ गई कि कौन अधिक बलवान है। हवा अपने आपको बलशाली बता रही थी पर सूर्य उसे बड़ा नहीं मान रहा था। मामला उलझता ही जा रहा था।

तभी उन्हें सामने से एक यात्री आता दिखाई दिया। यात्री को देखकर हवा को एक युक्ति सूझी। उसने सूर्य से कहा, “देखो, एक यात्री आ रहा है। हममें से जो भी उसकी चादर उतरवा देगा वही बलशाली होगा। तुम बादलों की ओट में हो जाओ।”

सूर्य बादलों के पीछे छिप गया। हवा जोर से चलने लगी। हवा की गति जितनी बढ़ती यात्री उतनी ही तेजी से अपनी चादर को पकड़ लेता ताकि ठंड से बचा रहे। जोर लगा-लगा कर हवा थक गई, हार गई पर किसी भी प्रकार वह यात्री की चादर नहीं उतरवा पाई। अंततः वह शांत हो गई।

अब सूर्य की बारी आई। वह बादलों के पीछे से निकलकर चमकने लगा। तेज गर्मी से परेशान होकर यात्री ने अपनी चादर उतार दी। हवा ने अपनी हार मान ली और सूर्य विजयी हुआ।

शिक्षा : कभी भी अपनी ताकत और योग्यता पर घमंड नहीं करना चाहिए।

भेड़ की खाल में भेड़िया

किसी जंगल के पास एक बेड़े में बहुत सारी भेड़ें रहती थीं। जंगल में रहने वाला भेड़िया उन्हें खाना चाहता था पर उसकी इच्छा कभी पूरी नहीं हो पाती थी।

भेड़ों की रखवाली के लिए गड़ेरियें ने बड़े ही चौकन्ने कुत्ते रखे हुए थे। भेड़िया कुत्तों के कारण उन्हें पकड़ नहीं पाता था। एक दिन भेड़िये ने एक भेड़ की खाल को जमीन पर पड़ा हुआ देखा।

उसने सोचा, “इसे पहनकर मैं भेड़ों के झुंड में मिल जाऊँगा और गड़रियें को शंका भी नहीं होगी। रात में अवसर पाकर जी भरकर इन्हें खाऊँगा । भेड़ की खाल भेड़िए ने पहन ली और भेड़ों के झुंड में मिल गया।

एक भेड़ भेड़िये के पीछे-पीछे चली गयी। भेड़िये मौका देखकर उसे चट कर गया। अगले दिन फिर भेड़िया खाल ओढ़कर भेड़ों के झुण्ड मे जा मिला।

एक दिन बेड़े के मालिक ने अपने रसोइये से भेड़ के भोजन की फरमाईश करी। रसोइया ने भेड़िये को भेड़ समझकर मार डाला।

शिक्षा - बुरा करने वाले का बुरा ही होता है।

टीचर के सवाल पप्पू के जवाब!

टीचर: टीपू सुल्‍तान की मृत्‍यु किस युद्ध में हुई थी?

पप्पू: उनके आखिरी युद्ध में। 

टीचर: गंगा किस स्‍टेट में बहती है?

पप्पू: लिक्विड स्‍टेट में।

टीचर: महात्‍मा गांधी का जन्‍म कब हुआ था? 

पप्पू: उनके जन्‍मदिन के दिन।

टीचर: 15 अगस्‍त को क्‍या होता है? 

पप्पू: 15 अगस्‍त।

टीचर: 6 लोगों के बीच 8 आम कैसे बांटे?

पप्पू: मैंगो शेक बनाकर।

टीचर: अगर मेरे एक हाँथ में १० संतरे हो और दुसरे में उसके दुगने से पांच कम और मैं उनमे से तीन शीला को और दो मुन्नी को दे दिए तो मेरे पास क्या है ? 

पप्पू: दो बहुत बड़े हाँथ जिसमे इतने सारे संतरे समा सकते है 

टीचर: “एक दिन मेरा देश भ्रष्टाचार मुक्त होगा “ – ये किस टेंस (काल) का वाक्य है ?

पप्पू: फ्यूचर इम्पॉसिबल टेंस .

टीचर: राम की लम्बाई 5 फीट है और श्याम का घर उसके स्कूल से चार किलोमीटर दूर है , तो ये बताओ की मेरी उम्र क्या है ?

पप्पू: ४४ साल 

टीचर: सही जवाब ! तुमने कैसे निकाला ?

पप्पू: मेरे बड़े भाई की उम्र २२ साल है … वो आधा पागल है … तो आप पूरे पागल है तो २२ का दुगना – ४४… 

टीचर: बताओ की कुतुबमीनार कहा है ?

पप्पू: नहीं पता 

टीचर:जाओ जाके पिछली बेंच पर खड़े हो जाओ 

पप्पू: क्यू? वहाँ से कुतुबमीनारदिखेगा क्या ?

टीचर:उत्तरी ध्रुव पर रहने वाले दो जानवरों का नाम बताओ ?

पप्पू: पोलर बियर और पोलर बियर की पत्नी 

टीचर:अगर दस लोग मिल कर १० दिन में एक गड्ढा खोदते हैं . उसी गड्ढे को 5 लोग कितने दिन में खोदेगे?

पप्पू: तुरंत ! गड्ढा तो पहले से खुदा हुआ है ?

तारे ही तारे

महान जासूस शर्लाक होम्स और उनके मित्र डॉक्टर वाटसन एक बार जंगल में कैंप लगाने और पिकनिक मनाने पहुचे .

डॉक्टर वाटसन ने पूछा – होम्स ! तुम कठिन से कठिन केस सुलझा लेते हो .. ऐसा कैसे कर लेते हो .

शर्लाक होम्स – देखो तुमको किसी भी चीज़ के तह तक जाना हो तो तर्क लगाओ .. किसी चीज़ को वो जैसा हैं वैसा ही मत देखा .. सोचो की अगर ये ऐसा है तो ऐसा क्यू हुआ ..

डॉक्टर वाटसन – मैं भी तुम्हारे तरह महान जासूस बनाना चाहता हूँ

शर्लाक होम्स – ठीक हैं आज से हर चीज़ में तर्क लगाना शुरू करो

देर रात तक बाते होती रही और बाद में खाना खा कर दोनों अपने टेंट के अन्दर जाके सो गए ..

रात में होम्स ने अचानक से डॉक्टर को जगाया ..

शर्लाक होम्स – वाटसन ! ऊपर देखो … तुमको क्या दिखता हैं ?

डॉक्टर वाटसन – मुझे असंख्य तारे दिख रहे हैं ..

शर्लाक होम्स – तो इसका क्या मतलब हुआ ?

डॉक्टर वाटसन समझ गए की उनको तर्क लगा कर बोलना है और जो जैसा है वो वैसा क्यू है और जो जैसा नहीं है वो वैसा क्यू नहीं है इत्यादि इत्यादि .. वो अपना चश्मा लगा के बैठ गए और गला साफ़ करके बोलने लगे ..

डॉक्टर वाटसन – एस्ट्रोनॉमी के अनुसार इसका मतलब हैं की ब्रह्माण्ड में लाखो तारामंडल हैं और करोडो ग्रह .

ज्योतिष के अनुसार मुझे लगता है शनि इस वक़्त सिंह लग्न में है

समय विज्ञान से मैं बता सकता हूँ की इस वक़्त पौने तीन बजे है

अध्यात्म के अनुसार मैं कहता हूँ की भगवान कितना शक्तिशाली है जो इतने तारे और ग्रह बनाये और हम कितने छुद्र

मौसम विज्ञान से बोलू तो आसमान साफ़ है और कल एक सुबह तेज़ धुप खिलेगी

शर्लाक होम्स की तरफ देख कर बोले – तुमको क्या लगता हैं होम्स?

शर्लाक होम्स ने गहरी सांस खिंची और एक मिनट चुप रह के चिल्लाया – अबे गधे !! इसका मतलब ये है की किसी ने हमारा टेंट चुरा लिया है … और हम खुले आसमान के नीचे है …

मुल्ला नसीरुद्दीन - Funny stories in hindi

एक दिन एक शख्स एक पेड़ पर चढ़ गया। थोड़ी देर बाद उसे लगा कि यहां से नीचे उतरना उतना आसान नहीं है।

अब उसके पास बस एक ही रास्ता था कि वह पेड़ से कूद जाए लेकिन पेड़ इतना ज्यादा ऊंचा था कि उसे लगा कि अगर कूदने की कोशिश की तो चोट लग सकती है।

कोई चारा न देख उसने आसपास से गुजर रहे लोगों से मदद मांगी, लेकिन किसी को कोई तरीका नहीं सूझा।

वहां लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। तभी भीड़ में से मुल्ला नसीरुद्दीन निकलकर बाहर आए और बोले – घबराओ मत।

मैं कुछ करता हूं। मुल्ला ने एक रस्सी उस आदमी की तरफ फेंकी और बोले कि इस रस्सी को अपनी कमर में कसकर बांध लो। नी

कुछ ही देर में उस आदमी ने रस्सी को अपनी कमर में बांध लिया। मुल्ला ने रस्सी का दूसरा छोर पकड़कर खींचा।

ऐसा करते ही वह आदमी पेड़ से धड़ाम से नीचे आ गिरा। गिरने से उसे बहुत चोट आईं।

लोग मुल्ला पर भड़क गए और बोले : बेवकूफ आदमी, यह क्या किया तूने?

मुल्ला ने भोलेपन से कहा : मैंने पहले भी एक आदमी की इसी तरीके से जान बचाई है।

मैंने इस तरीके को पहले भी आजमाया है, लेकिन मुझे यह याद नहीं आ रहा कि उसे मैंने कुएं में से बचाया था या पेड़ पर से?

बंदर का मज़ाक - Funny Stories in Hindi

बंदर- क्यों शेर तू तो बड़ा राजा बना फिरता है अब आ गयी अक्ल ठिकाने।

ये बोल कर बंदर जोर जोर से हँसने लगा तभी जिस डाल पर वो बैठा था बह टूट गयी और बंदर गड्ढे में जा गिरा।

और गिरते ही बोला- मां कसम….माफी मांगने के लिए कूदा हूँ।

डॉक्टर और चंदु मियां

डॉक्टर बीमार चंदू मियां से-कैसी तबीयत है मियां?

चंदू मियां-ठीक होती तो आपके पास काहे आते..

डॉक्टर-मैंने जो दवा दी थी वो खा ली थी।

चंदू मियां-कैसी बातें करते हैं, दवा तो बोतल में भरी हुई थी। खाली काहे होगी?

डॉक्टर-अमा, मेरा मतलब है, दवा पी ली थी।

चंदू मियां-क्या कह रहे हैं, आपने ही तो दी थी दवा पीली नहीं लाल थी।

डॉक्टर-अबे मेरा मतलब है दवा को पी लिया था?

चंदू मियां-डॉक्टर साहब अपना इलाज कराओ दवा को नहीं मुझे पीलिया था।

डॉक्टर सिर पीटते हुए-तू मुझे पागल कर देगा।

चंदू मियां-मेरी नजर में पागलों का एक उम्दा डॉक्टर है।

डॉक्टर-मेरे बाप यहां से जाने का क्या लेगा।

चंदू- बस 500 रुपए दे दो।

डॉक्टर- ये ले 700 और दफा हो जा।

चंदू- डॉक्टर साहब अगली बार दिखाने कब आना है!

डॉक्टर- कोई जरूरत नहीं, तू बिल्कुल ठीक है।

चंदू- मैं ठीक हूं तो फिर तुमने मुझे पलंग पर लिटाकर शर्ट उतरवाकर सांस लेने को क्यों कहा।

डॉक्टर-मैं तुम्हारा चेकअप कर रहा था।

चंदू-जब मैं ठीक हूं तो तुम मेरा चेकअप क्यों कर रहे थे?

डॉक्टर-गलती हो गई थी मेरे बाप।

चंदू- गलती नहीं, तुम मेरी इज्जत लूटना चाहते थे।

डॉक्टर-ये क्या कह रहे हो यार बाहर और मरीज बैठे हैं मेरा पूरा स्टाफ है मेरी इज्जत का सवाल है।

चंदू- पहले ये बताओ कि मेरी इज्जत क्यों लूटना चाहते थे?

डॉक्टर-यार मैं भला तुम्हारी इज्जत क्यों लूटूंगा?

चूंदू- तो फिर किसकी इज्जत लूटना है तुम्हें?

डॉक्टर-यार मुंह बंद करने का क्या लेगा।

चंदू- एक काम करो 1000 रुपए दे दो।

डॉक्टर-ये ले और दफा हो जा यहां से।

चंदू-डॉक्टर साहब अगली बार कब आना है?

डॉक्टर-कभी मत आना मेरे ससुर मैं ये क्लीनिक बंद करके आज ही हरिद्वार तीरथ करने जा रहा हूं।

तेरे कारण इस दुनिया से मेरा दिल उठ गया है!

सूअर और लड़के

दो शहरी लड़के रास्ता भूल गए। अँधेरा बढ़ रहा था, अतः मजबूरन उन्हें एक सराय में रुकना पड़ा। आधी रात को एकाएक उनकी नींद उचट गई।

उन्होंने पास के कमरे से आती हुई एक आवाज को सुना-‘कल सुबह एक हंडे में पानी खौला देना। मैं उन दोनों बच्चों का वध करना चाहता हूँ।

दोनों लड़कों का खून जम गया। ‘हे भगवान्!’ वे बुदबुदाए, ‘इस सराय का मालिक तो हत्यारा है!’ तुरंत उन्होंने वहाँ से भाग जाने का निश्चय किया। कमरे की खिड़की से वे बाहर कूद गए।

पर बाहर पहुँचकर उन्होंने पाया कि बाहर दरवाजे पर ताला लगा हुआ है। अंत में उन्होंने सूअरों के बाड़े में छिपने का निर्णय किया।

रात भर उन्होंने जागते हुए बिताई। सुबह सराय का मालिक सूअरों के बाड़े में आया। बड़ा सा छुरा तेज किया और पुकारा-“आ जाओ मेरे प्यारे बच्चो, तुम्हारा आखिरी वक्त आ पहुँचा है!

दोनों लड़के भय से काँपते हुए सराय के मालिक के पैरों पर गिर पड़े और गिड़गिड़ाने लगे। सराय का मालिक यह देखकर चकित रह गया। फिर पूछा, “बात क्या है?” “हमने रात में आपको किसीसे कहते सुना था कि सुबह आप हमें मौत के घाट उतारने वाले हैं।” लड़कों ने जवाब दिया।

सराय का मालिक यह सुनकर हँसा, “बेवकूफ लड़को! मैं तुम लोगों के बारे में नहीं कह रहा था। मैंने तो दो ननहे सूअरों के बारे में कहा था, जिन्हें मैं इसी तरह पुकारता हूँ।

शिक्षा - पूरी बात जाने बिना दूसरों की बातों पर कभी कान नहीं देने चाहिए।

घंटी की कीमत

रामदास एक ग्वाले का बेटा था। रोज सुबह वह अपनी गायों को चराने जंगल में ले जाता। हर गाय के गले में एक-एक घंटी बंधी थी। जो गाय सबसे अधिक सुंदर थी उसके गले में घंटी भी अधिक कीमती बँधी थी।

एक दिन एक अजनबी जंगल से गुजर रहा था। वह उस गाय को देखकर रामदास के पास आया, “यह घंटी बड़ी प्यारी है! क्या कीमत है इसकी?” “बीस रुपए।” रामदास ने उत्तर दिया। “बस, सिर्फ बीस रुपए! मैं तुम्हें इस घंटी के चालीस रुपए दे सकता हूँ।’ “

सुनकर रामदास प्रसन्न हो उठा। झट उसने घंटी उतारकर उस अजनबी के हाथ में थमा दी और पैसे अपनी जेब में रख लिये। अब गाय के गले में कोई घंटी नहीं थी।

घंटी की टुनक से उसे अंदाजा हो जाया करता था। अतः अब इसका अंदाजा लगाना रामदास के लिए मुश्किल हो गया कि गाय इस वक्त कहाँ चर रही है। जब चरते-चरते गाय दूर निकल आई तो अजनबी को मौका मिल गया। वह गाय को अपने साथ लेकर चल पड़ा।

तभी रामदास ने उसे देखा। वह रोता हुआ घर पहुँचा और सारी घटना अपने पिता को सुनाई। उसने कहा, “मुझे तनिक भी अनुमान नहीं था कि वह अजनबी मुझे घंटी के इतने अच्छे पैसे देकर ठग ले जाएगा।”

पिता ने कहा, “ठगी का सुख बड़ा खतरनाक होता है। पहले वह हमें प्रसन्नता देता है, फिर दुःख। अतः हमें पहले ही उसका सुख नहीं उठाना चाहिए।”

शिक्षा - लालच से कभी सुख नहीं मिलता।

प्रयासों में कमी

एक बार जंगल का राजा शेर बहुत बीमार हो गया।

उसे लगा कि अब वो नही बचेगा।

तभी उसने एक बंदर को अपना उत्तराधिकारी बना दिया।

फिर एक दिन एक बकरी अपनी समस्या लेकर बंदर के पास पहुँची।

समस्या सुनने के बाद बन्दर एक डाल से दूसरी डाल पर कूदने लगा, करीब एक घंटे तक कूदा फांदी करने के बाद बन्दर नीचे आया।

तब बकरी ने पूछा- राजा जी इससे मेरी समस्या कैसे हल होगी?

बन्दर- हां समस्या तो हल नही होगी, लेकिन मेरे प्रयासो में कोई कमी हो तो बताओ।

जैसे को तैसा

एक जमींदार के लिए उसके कुछ किसान एक भुना हुआ मुर्गा और एक बोतल फल का रस ले आए। जमींदार ने अपने नौकर को बुलाकर चीजें उनके घर ले जाने को कहा। नौकर एक चालाक, शरीर लड़का था। यह जानते हुए जमींदार ने उससे कहा, “देखो, उस कपड़े में जिंदा चिड़िया है और बोतल में जहर है। खबरदार, जो रास्ते में उस कपड़े को हटाया, क्योंकि अगर उसने ऐसा किया तो चिड़िया उड़ जाएगी। और बोतल सूंघ भी ली तो तुम मर जाओगे। समझे?”

नौकर भी अपने मालिक को खूब पहचानता था। उसने एक आरामदेह कोना ढूंढा और बैठकर भुना मुर्गा खा गया। उसने बोतल में जो रस था वह भी सारा पी डाला। एक बूंद भी नहीं छोड़ा।

उधर जमींदार भोजन के समय घर पहुँचा और पत्नी से भोजन परोसने को कहा। उसकी पत्नी ने कहा, “जरा देर ठहरो। खाना अभी तैयार नहीं है।” जमींदार ने कहा, “मैंने जो मुर्गा और रस की बोतल नौकर के हाथ वही दे दो। वही काफी है।”

उसके गुस्से की सीमा न रही जब उसकी पत्नी ने बताया कि नौकर तो सुबह का गया अभी तक लौटा ही नहीं।

बिना कुछ बोले गुस्से से भरा जमींदार अपने काम की जगह वापस गया तो देखा नौकर तान कर सो रहा है। उसने उसे लात मारकर जगाया और किसान द्वारा लाई गई भेंट के बारे में पूछा।

लड़के ने कहा, “मालिक, मैं घर जा रहा था तो इतने जोर की हवा चली कि मुर्गे के ऊपर ढका कपड़ा उड़ गया और जैसा आपने कहा था, वह भी उड़ गया। मुझको बहुत डर लगा कि आप सज़ा देंगें और मैंने बचने के लिए बोतल में जो जहर था वह पी लिया। और अब यहाँ लेटा-लेटा मौत के आने का इंतजार कर रहा था।”

भगवान कहाँ है?

एक गांव में दो भाई रहते थे दोनो बहुत शरारती थे।

पूरा मुहल्ला उनसे परेशान रहता था।

एक बार गांव में एक बहुत पहुचे हुए महात्मा आए।

लोगो का कहना था महात्मा जिसको आशीर्बाद दे दें उसका कल्याण हो जाता था।

पड़ोसन ने बच्चो की माँ को सलाह दी कि बच्चों को महात्मा के पास ले जाओ क्या पता इससे उनकी बुद्धि कुछ ठीक हो जाएं।

मां को उसकी बात पसंद आई और वो पहले छोटे बच्चे को लेकर महात्मा के पास पहुच गयी।

महात्मा ने मां से बाहर इंतेज़ार करने को बोला।

तभी महात्मा बच्चे से पूछते हैं – बेटा तुम भगवान को जानते हो न?

बताओ भगवान कहाँ है?

पर बच्चे ने कुछ जवाब नही दिया।

महात्मा फिर पूछते हैं- बताओ भगवान कहाँ है?

बच्चा फिर कुछ नही बोला, जिससे । महात्मा की थोड़ी चिढ़ सी गयी।

उन्होंने नाराज़गी प्रकट करते हुए तेज़ आवाज़ में कहा तुम्हे सुनाई नही देता मैं कुछ पूछ रहा हु बताओ भगवान कहाँ है?

अचानक बच्चा उठा और बाहर की ओर भागा और घर आकर बेड के नीचे छिपने लगा।

बड़े भाई में पूछा क्या हुआ तो छुप क्यों रहा है।

छोटा भाई- भईया आप भी छुप जाओ।

बड़ा भाई- पर हुआ क्या?

छोटा- अबकी बार हम बडी मुसीबत में फस गए हैं भगवान कहीं गुम हो गया है और लोंगो को लग रहा है कि इसमें अपना हाथ है।

बेचारे बसीर भाई

एक बार रमेश नाम का ब्यक्ति बैलगाड़ी में अनाज के बोरे लादकर शहर ले जा रहा था।

तभी अचानक गढ्ढे में बैलगाड़ी पलट गई । रमेश बैलगाड़ी को सीधा करने की कोसिस करने लगा।

थोड़ी ही दूर पर पेड़ के नीचे बैठे राहगीर ने रमेश को आवाज़ दी- अरे भाई परेशान मत हो, आ जाओ पहले मेरे साथ खाना खा लो फिर मैं तुम्हारी गाड़ी सीधी करा दूंगा।

रमेश – धन्यबाद पर मैं अभी नही आ सकता मेरे दोस्त बशीर नाराज़ हो जाएगा

राहगीर- अरे तुमसे अकेले नजी उठेगी गाड़ी, आओ खाना खा लो फिर दोनों मिल कर उठाते है।

रमेश नही बशीर गुस्सा हो जाएगा।

राहगीर- अब मान भी जाओ।

रमेश- ठीक है आप कहते हैं तो आ जाता हूं।

खाना खाने के बाद रमेश बोला चलो चलते है गाड़ी के पास बशीर गुस्सा हो रहा होगा।

राहगीर ने मुस्कुराते हुए कहा तुम इतना डर क्यों रहे हो बैसे इस समय कहाँ होगा बशीर?

रमेश- गाड़ी के नीचे दबा हुआ है।

संता और सर्दी

एक बार संता को गांव का सरपंच बना दिया गया। गांव वालों ने सोचा कि छोरा पढ़ा-लिखा है, समझदार है, अगर ये सरपंच बन गया तो गांव की भलाई के लिए काम करेगा।

मौसम बदला, सर्दियों के आने के महीने भर पहले गांव वालों ने संता से पूछा – सरपंच साहब इस बार सर्दी कितनी तेज पड़ेगी।

संता ने गांव वालों से कहा कि मैं आपको कल बताऊंगा। संता तुरंत ही शहर की ओर निकल गया। वहां जाकर मौसम विभाग में पता किया तो मौसम विभाग वाले बोले – सरपंच साहब इस बार बहुत तेज सर्दी पड़ने वाली है।

संता भी दूसरे दिन गांव में आकर ऐसा ही बोल दिया। गांव वालों को विश्वास था कि अपने सरपंच साहब पढ़े-लिखे हैं। शहर से पता करके आये हैं तो सही कह रहे होंगे। गांव वालों की नजर में संता की इज्जत और बढ़ गयी।

तेज सर्दी पड़ने की बात सुनकर गांव वालों ने सर्दी से बचने के लिए लकड़ियां इकट्ठी करनी शुरू कर दी।

महीने भर बाद जब सर्दियों का कोई नामोंनिशान नहीं दिखा तो गांव वालों ने संता से फिर पूछा। संता ने उन्हें फिर दूसरे दिन के लिए टाला, और शहर के मौसम विभाग में पहुंच गया।

मौसम विभाग वाले बोले कि सरपंच साहब आप चिंता मत करो। इस बार सर्दियों के सारे रिकॉर्ड टूट जायेंगे।

संता ने ऐसा ही गांव में आकर बोल दिया। संता की बात सुनकर गांव वाले पागलों की तरह लकड़ियां इकट्ठी करने लग गए। इस तरह पंद्रह दिन और बीत गए लेकिन सर्दियों का कोई नामोंनिशान नहीं दिखा। गांव वाले संता के पास आये। संता फिर मौसम विभाग जा पहुंचा।

मौसम विभाग वालों ने फिर वही जवाब दिया कि सरपंच साहब आप देखते जाइये कि सर्दी क्या जुल्म ढाती है। संता फिर से गांव में आकर ऐसा ही बोल दिया। अब तो गांव वाले सारे काम-धंधे छोड़कर सिर्फ लकड़ियां इकट्ठी करने के काम में लग गए। इस तरह पंद्रह दिन और बीत गए। लेकिन सर्दियां शुरू नहीं हुईं।

गांव वाले संता को कोसने लगे। संता ने उनसे एक दिन का वक्त और मांगा। संता तुरंत मौसम विभाग पहुंचा तो उन्होंने फिर ये जवाब दिया कि सरपंच साहब इस बार सर्दियों के सारे रिकॉर्ड टूटने वाले हैं। अब संता का भी धैर्य जवाब दे गया।

संता ने पूछा – आप इतने विश्वास से कैसे कह सकते हैं।

मौसम विभाग वाले बोले कि सरपंच साहब हम पिछले दो महीने से देख रहे हैं। पड़ोस के गांव वाले पागलों की तरह लकड़ियां इकट्ठी कर रहे हैं। इसका मतलब सर्दी बहुत तेज पड़ने वाली है।

संता वहीं चक्कर खाकर गिर गया।

तारीफ़ भी महँगी पड़ गई! - Lazy Hindi Funny Story

एक आदमी की शादी को 20 साल हो गए थे लेकिन उसने आज तक अपनी पत्नी के हाथ से बने खाने की तारीफ नहीं की।

एक दिन जब वो दफ्तर से घर वापस आ रहा था तो रास्ते में उसे एक बाबा मिले। बाबा ने उस आदमी को रोका और कुछ खाने को माँगा तो आदमी ने बाबा को खाना खिला दिया। बाबा आदमी से बहुत प्रसन्न हुए तो उन्होंने आदमी से कहा कि अगर उसे कोई समस्या है तो बताओ, हम उसका हल कर देंगे।

आदमी बोला, “बाबा जी, बहुत समय से कोशिश कर रहा हूँ लेकिन काम में तरक्की नहीं हो रही।”

बाबा: बेटा, तुमने अपनी पत्नी के खाने की कभी तारीफ नहीं की। अपनी पत्नी के खाने की तारीफ करो, तुम्हें अवश्य तरक्की मिलेगी।

आदमी बाबा को धन्यवाद बोल कर चल दिया।

घर पहुँच कर उसकी पत्नी ने खाना परोसा, आदमी ने खाना खाया और खाने की जम कर तारीफ की।

पत्नी एक दम से उठी और रसोई घर से बेलन लेकर आई और आदमी की पिटाई शुरू कर दी।

आदमी: क्या हुआ? मैं तो तुम्हारे खाने की तारीफ कर रहा हूँ।

पत्नी: 20 साल हो गए आज तक तो खाने की तारीफ नहीं की और आज जब पड़ोसन खाना दे कर गयी है तो तुम्हें ज़िन्दगी का मज़ा आ गया।

पति का मुरब्बा

यदि आपके पास पति है, तो कोई बात नहीं। न हो तो अच्छे, उत्तम कोटि के, तेज-तर्रार पति का चुनाव करें। क्योंकि जितना बढ़िया पति होगा, मुरब्बा भी उतना ही बढ़िया बनेगा। दागी पति कभी भी प्रयोग में न लाएँ। आवश्यकता से अधिक पके का चुनाव करने से भी मुरब्बा जल्दी खराब हो सकता है। नए ताजे पति का मुरब्बा डाल देने ठीक होता है। नहीं तो मौसम बदलते ही, अन्य सुन्दरियों के सम्पर्क में आने से उसके खराब होने की सम्भावना है।

अभी से मुरब्बा डालकर रखेंगी, तो जीवन भर उंगलियाँ चाटकर, चटखारे लेकर उसका आनन्द उठा सकेंगी। आपके घर की शोभा बढ़ेगी। भविष्य में आर्थिक दृष्टि से लाभ होगा। मुरब्बा डला पति मर्तबान के दायरे में ही रहता है। ट्रान्सपोर्टेशन में भी आसानी होती है। किसी भी मौसम में उसका उपयोग कर सकती हैं। पड़ोसियों और सहेलियों को जला सकती हैं।

आवश्यक सामग्री : प्रेम की चीनी, पति के बराबर तोल के मुस्कान की दालचीनी, हँसी की इलायची, जीवन के रंग, आवश्यकतानुसार नैनों की छुरी, एक मर्तबान।

विधि : पति को धो-पोंछकर साफ करें। मन के ऊपर लगी धूल अच्छी तरह रगड़कर दिल के कपड़े से पोंछ दें। पति चमकने लगेंगे। फिर प्रेम की तीन-तार चाशनी बनाएँ। इसमें पति को पूरा-का-पूरा डुबो दें। कम से कम हफ़्ते भर तक डुबोकर रखें। गरम सांसों की हल्की आंच पर पकने दें। सास-ननदों को पास न आने दें। पड़ोसिनों (विशेष कर जवान) के इनफ़ेक्शन से बचाकर रखें। इनके संपर्क में आने से खराब होने का भय रहता है। पति पूरी तरह प्रेम की चाशनी में सराबोर हो गए हैं, इसकी गारंटी कर लें। मुस्कान की दालचीनी, हँसी की इलायची, जीवन के रंग मिलाकर अच्छी तरह हिला लें।

लीजिए, आपके पति का मुरब्बा तैयार है। जब जी में आए इसके मधुर स्वाद का आनन्द लीजिए।

सावधानियाँ : बीच-बीच में नाराजगी की धूप गर्मी दिखाना जरूरी है, नहीं तो फफूंदी लग सकती है। पड़ोसिनों और सहेलियों की नज़रों से दूर रखें। यदा-कदा चल कर देखती रहें। अधिक चीनी हो गयी हो तो झिड़कियों के पानी का छिड़काव करें। कभी-कभी ज्यादा मिठास से भी मुरब्बा खराब हो जाता है। चीटिंयाँ लग सकती हैं।

विशेष सावधानियां :-

खाई-खेली औरतों से बचाकर रखें।

मर्तबान तभी खोलें जब मुरब्बा खाना हो

नकली नोट

एक आदमी नकली नोट छपता था . एक दिन गलती से उसने पंद्रह रूपये की एक नोट छाप दी.. अब पंद्रह रूपये की नोट आती तो हैं नहीं ..

उसने बहुत सोचा – “शहर में तो सब समझदार लोग होते हैं . अगर ये नोट यहाँ चलाने गया तो मैं पकड़ा जाऊंगा. हाँ अगर किसी दूर दराज़ के गाँव में गया तो शायद ये चल जाए .. “

ये सोच कर वो बहुत दूर बसे एक छोटे से गाँव में गया ..

उसने देखा की लोहार लोहे की धौकनी में काम कर रहा हैं ..

उसने लोहार से कहा – “अरे भाई ! मेरे एक नोट का छुट्टा करा दो .. “

ये कहके उसने पंद्रह रुपये का नोट आगे बढ़ा दिया …

लोहार ने अपना हाँथ पोंछा और नोट को पकड़ कर देखने लगा … साथ ही साथ उसने नोट छापने वाले को भी एक नज़र देखा ..

उस आदमी की तो हलक सुख गयी … उसे लगा “लगता है लोहार ने पकड़ लिया …”

लोहार बोला – “भाई जी ! मेरे पास पंद्रह रूपये शायद ना हो .. मैं चौदह रूपये दे सकता हूँ “

नोट छापने वाले ने सोचा – “अरे चलो मेरा क्या जाता है .. चौदह ही सही”

उसने लोहार से कहा – “अब पंद्रह मिलते तो अच्छा होता .. पर लाईये चौदह ही दें दें ..”

लोहार अन्दर गया और बहार आके उसको पैसे पकड़ा दिए …

उस आदमी ने गिनना चाहा तो देखा – दो सात रूपये के नोट हैं …

बिना कुछ कहे वो वह से चला गया …

शैतान पप्पू!

एक बार एक एक बुज़ुर्ग आदमी ने देखा कि पप्पू घर के दरवाज़े पर लगी घंटी बजाने कि कोशिश कर रहा होता परन्तु उसका हाथ घंटी तक नहीं पहुँच पा रहा होता है, यह देख बुज़ुर्ग आदमी पप्पू के पास गया और उस से पूछा, “क्या हुआ बेटा?”

पप्पू: कुछ नहीं मुझे यह घंटी बजानी है पर मेरा हाथ नहीं पहुँच रहा तो क्या आप मेरे लिए ये घंटी बजा देंगे?

यह सुन बूढ़ा आदमी तुरंत हाँ कर देता है और घंटी बजा देता है, और घंटी बजाने के बाद पप्पू से पूछता है, “और बताओ बेटा क्या मै तुम्हारे लिए कुछ और कर सकता हूँ?”

यह सुन पप्पू बोला, “हाँ अब मेरे साथ भाग बुढ्ढे वरना तू भी पिटेगा अगर मकान का मालिक बाहर आ गया तो।”

भेड़िया-भेड़िया चिल्लाने वाला बालक – Kids Story in Hindi

बहुत समय पहले एक चरवाहा था जो अपनी भेड़ों को चराने जंगल ले जाया करता था। एक दिन, उसने गाँव वालों के साथ मजाक करने का निश्चय किया। वह चिल्लाने लगा, “बचाओ! भेड़िया आया!”

गाँव वाले उसकी पुकार सुनकर दौड़े-दौड़े गए। जब वे लोग चरवाहे के पास पहुंचे तो वहाँ उन्हें कोई भेड़िया नहीं दिखा।

चरवाहा गाँव वालों को देखकर जोर-जोर से हँसने लगा। उसने कई बार गाँव वालों के साथ यही मजाक किया। अब गाँव वालों को उसकी पुकार पर भरोसा नहीं रहा।

एक दिन ऐसा हुआ कि सचमुच एक भेड़िया आ गया। चरवाहा गाँव वालों की ओर भागा और चिल्लाने लगा, “बचाओ! भेड़िया आया!”

गाँव वालों ने समझा कि चरवाहा तो हमेशा की तरह मजाक कर रहा है।

गाँव वाले उसका चिल्लाना सुनकर हँसते रहे। जब चरवाहा बहुत गिड़गिड़ाया तो अनिच्छापूर्वक कुछ गाँव वाले उसके साथ गए।

वहाँ सबने देखा कि भेड़िए ने कई सारी भेड़ों को मार डाला था।

पाशुओं की भाषा जानने वाला राजा – Kids Story in Hindi

एक बार एक राजा ने एक साँप की जान बचाई। साँप ने प्रसन्न होकर राजा को ऐसी शक्ति दी जिससे कि वह पशुओं की भाषा समझने लगा।

हालाँकि उसने इस शक्ति को गुप्त रखने की भी शर्त लगा दी और कहा कि अगर किसी को भी उसने यह बता बताई तो उसकी मृत्यु हो जाएगी।

एक बार राजा, रानी के साथ बगीचे में बैठा था। उसने एक चींटी को मिठाई के टुकड़े के बारे में बोलते सुना। राजा चींटी की बात सुनकर मुस्कराने लगा।

रानी ने उससे मुस्कराने का कारण पूछा। राजा ने रानी को बहुत समझाने की कोशिश की पर वह बार- बार कारण पूछती ही रही।

आखिरकार राजा उसे रहस्य बताने को तैयार गया। तभी आकाशवाणी सुनाई दी, “हे राजन, तुम क्यों उसके लिए अपने प्राणों का बलिदान दे रहे हो,

जो स्वयं तुम्हारे प्राणों का मूल्य नहीं समझ रही थी?” राजा ने रानी को बताया कि वह कितनी स्वार्थी है। रानी को भी अपनी गलती समझ में आ ई।

किसान और लोमड़ी – Kids Story in Hindi

एक लोमड़ी थी, जो एक किसान को बहुत परेशान किया करती थी। वह किसान के मुर्गीबाड़े में घुसकर हमेशा उसके मुगेर्-मिर्गयाँ खा जाया करती थी।

किसान उस लोमड़ी से बहुत तंग आ चुका था। उसने लोमड़ी को सबक सिखाने का निश्चय किया। कई दिनों बाद, एक दिन आखिरकार वह लोमड़ी को पकड़ने में सफल हो ही गया |

गुस्से में उसने एक रस्सी को तेल में भिगोकर लोमड़ी की पूँछ से बाँध दिया और उसमें आग लगा दी।

लोमड़ी आग से परेशान होकर किसान के पूरे खेत में दौड़ने लगी। देखते ही देखते किसान की पूरी फसल में आग लग गई।

लोमड़ी की पूँछ तो जली ही, साथ ही किसान भी बर्बाद हो गया! किसान ने गुस्से में आकर अगर इस तरह का काम न किया होता तो उसे इतना बड़ा नुकसान न झेलना पड़ता।

उसे अपने किए पर बहुत पछतावा होने लगा। उसने तय किया कि अब वह गुस्से में आकर कभी भी ऐसा काम नहीं करेगा।

बिजली और तूफान की कहानी

बहुत समय पहले बिजली और तूफान धरती पर मनुष्यों के बीच रहा करते थे। राजा ने उन्हें मनुष्यों की बस्ती से दूर रखा था।

बिजली तूफान की बेटी थी। जब कभी किसी बात पर बिजली नाराज हो उठती, वह तड़ककर किसी घर पर गिरती और उसे जला देती या किसी पेड़ को राख कर देती, या खेत की फसल नष्ट कर देती। मनुष्य को भी वह अपनी आग से जला देती थी।

जब-जब बिजली ऐसा करती, उसके पिता तूफान गरज गरजकर उसे रोकने की चेष्टा करते। किंतु बिजली बड़ी ढीठ थी। वह पिता का कहना बिलकुल नहीं मानती थी। यहाँ तक कि तूफान का लगातार गरजना मनुष्य के लिए सिरदर्द हो उठा। उसने जाकर राजा से इसकी शिकायत की।

राजा को उसकी शिकायत वाजिब लगी। उन्होंने तूफान और उसकी बेटी बिजली को तुरंत शहर छोड़ देने की आज्ञा दी और बहुत दूर जंगलों में जाकर रहने को कहा। किंतु इससे भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

बिजली जब नाराज होती, जंगल के पेड़ जला डालती। कभी-कभी पास के खेतों का भी नुकसान कर डालती। मनुष्य को यह भी सहन न हुआ। उसने फिर राजा से शिकायत की।

राजा बेहद नाराज हो उठा। उसने तूफान और बिजली को धरती से निकाल दिया और उन्हें आकाश में रहने की आज्ञा दी, जहाँ से वे मनुष्य का उतना नुकसान नहीं कर सकते थे जितना कि धरती पर रहकर करते थे।

शिक्षा - क्रोध का फल बुरा होता है।

सच्ची सेवा

एक थी बिल्ली। मुरगी के बच्चे उसे बहुत ही भाते थे। रोजाना दो-चार बच्चों को वह कहीं-न-कहीं से खोज खाजकर खा जाती थी। एक दिन उसे भनक मिली कि एक मुरगी बीमार है।

वह हमदर्दी जताने मुरगी के दरबे के पास आई और कहा, “कहो बहन, कैसी हो? क्या मैं तुम्हारी ऐसी हालत में तुम्हारे कुछ काम आ सकती हूँ? तुम्हारी सेवा करना मेरा फर्ज भी तो है।”

बीमार मुरगी क्षण भर सोचती रही। फिर बोली, “अगर तुम सचमुच मेरी सेवा करना चाहती हो तो मेरे परिवार से दूर रहा-और अपनी जमातवालों से भी ऐसा ही करने को कहो।”

शिक्षा - दुश्मन की शुभकामनाओं पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

उलटी गंगा

एक बनिया था। भला था। भोला था। नीम पागल था। एक छोटी सी दुकान चलाता था। दाल, मुरमुरे, रेवड़ी जैसी चीजें बेचता था और शाम तक दाल-रोटी का जुगाड़ कर लेता था।

एक रोज दुकान बंद कर देर रात वह अपने घर जा रहा था, तभी रास्ते में उसे कुछ चोर मिले। बनिये ने चोरों से पूछा, “इस वक्त अँधेरे में आप लोग कहाँ जा रहे हैं?” चोर बोले, “भैया, हम तो सौदागर हैं। आप हमें क्यों टोक रहे हैं?”

बनिये ने कहा, “लेकिन एक पहर रात बीतने के बाद आप जा कहाँ रहे हैं?” चोर बोले, “माल खरीदने।” बनिये ने पूछा, “माल नकद खरीदोगे या उधार ?” चोरे बोले, “न नकद, न उधार। पैसे तो देने ही नहीं हैं।”

बनिये ने कहा, “आपका यह पेशा तो बहुत बढ़िया है। क्या आप मुझे भी अपने साथ ले चलेंगे?” चोरे बोले, “चलिए। आपको फायदा ही होगा ।” बनिये ने कहा, “बात तो ठीक है।

लेकिन पहले यह तो बताओ कि यह धंधा कैसे किया जाता है?” चोर बोले, “लिखो-किसीके घर के पिछवा….” बनिये ने कहा, “लिखा।” चोर बोले, “चुपचाप सेंध लगाना…” बनिये ने कहा,

“लिखा। चोर बोले, “फिर दबे पाँव घर में घुसना…” बनिये ने कहा, “लिखा।” चोर बोले, “जो भी लेना हो, सो इकट्ठा करना…” बनिये ने कहा, “लिखा।” 

चोर बोले, “न तो मकान मालिक से पूछना और न उसे पैसे देना…” बनिये ने कहा, “लिखा।” चोर बोले, “जो भी माल मिले उसे लेकर घर लौट जाना।”

बनिये ने सारी बातें कागज पर लिख लीं और लिखा हुआ कागज जेब में डाल लिया। बाद में सब चोरी करने निकले। चोर एक घर में चोरी करने घुसे और बनिया दूसरे घर में चोरी करने पहुँचा।

वहाँ उसने ठीक वही किया जो कागज में लिखा था। पहले पिछवाड़े सेंध लगाई। दबे पाँव घर में घुसा। दियासलाई जलाकर दीया जलाया। एक बोरा खोजकर उसमें पीतल के छोटे-बड़े बरतन बेफिक्री से भरने लगा।

तभी एक बड़ा तसला उसके हाथ से गिरा और सारा घर उसकी आवाज से गूंज उठा। घर के लोग जाग गए। सबने ‘चोर-चोर’ चिल्लाकर बनिये को घेर लिया और उसे मारने-पीटने लगे।

बनिये को ताज्जुब हुआ। मार खाते खाते उसने अपनी जेब में रखा कागज निकाला और उसे एक नजर पढ़ डाला। फिर तो वह जोश में आ गया। जब सब लोग उसकी मरम्मत कर रहे थे, तब बनिया बोला “भाइयो, यह तो लिखा-पढ़ी से बिलकुल उलटा हो रहा है। यहाँ तो उलटी गंगा बह रही है।”

बनिये की बात सुनकर सब सोच में पड़ गए। मारना पीटना रोककर सबने पूछा, “यह तुम क्या बक रहे हो?”बनिये ने कहा, “लीजिए, यह कागज देख लीजिए । इसमें कहीं पिटाई का जिक्र है”? घर के लोग तुरंत समझ गए। उन्होंने बनिये को घर से बाहर धकेल दिया।

शिक्षा - सोच-विचारकर किया कार्य कभी कष्टदायक नहीं होता।

लकड़ियों का गट्ठर

एक वृद्ध पिता अपने तीन पुत्रों के साथ रहता था। तीनों पुत्र बहुत मेहनती थे पर आपस में झगड़ते रहते थे। एक दिन पिता ने सब बच्चों को बुलाया।

अपने बड़े पुत्र से पिता ने वह गट्ठर तोड़ने के लिए कहा। पुत्र अत्यंत बलशाली था। अपनी पूरी शक्ति लगाकर भी वह उसे तोड़ने में असफल रहा।

बारी-बारी से अन्य पुत्रों ने भी अपना जोर आजमाया पर सभी असफल रहे। अब पिता ने गट्ठर को खोलकर उन्हें एक-एक लकड़ी उठाने के लिए कहा।

सभी पुत्रों ने गट्ठर में से एक-एक लकड़ी उठा ली। पिता ने पुत्रों से कहा, “इन्हें तोड़ो।” सबने बड़ी सरलता से अपनी-अपनी लकड़ियाँ तोड़ डालीं और आश्चर्य से पिता की ओर देखने लगे ।

मुस्कराते हुए पिता ने कहा, “मेरी मृत्यु के पश्चात् तुम सब इसी गट्ठर की तरह इकट्ठे रहना। आपस में कभी लड़ाई नहीं करना। एकता बनाए रखना।

कोई भी शक्ति तुम्हें तोड़ नहीं पाएगी। यदि अलग हो जाओगे तो उस लकड़ी की भांति तुरंत टूट जाओगे।” पुत्रों को बात समझ आ गयी और उन्होंनें प्रेम से साथ रहने का वादा किया।

शिक्षा : एकता में बहुत बल होता हैं।

जिंजरब्रेड मैन

एक समय की बात है, एक बूढ़ी औरत थी। उसकी कोई संतान नहीं थी। वह बहुत ही अकेली थी। एक दिन उसने जिंजरब्रेड का एक लड़का बनाने का निर्णय किया।

उसने आटा गूंथकर उसे एक लड़के का आकार दिया। किशमिश से आँखें और मुँह बनाकर चीनी से बाल और कपड़े बनाए।

मीठी गोलियों के बटन लगाकर उसे पकने के लिए तंदूर में डाल दिया और दूसरे काम करने लगी। कुछ समय के बाद उसने तंदूर खोला तो जिंजरब्रेड मैन कूदकर बाहर निकला और भागने लगा।

बूढ़ी औरत उसके पीछे-पीछे भागी पर वह भागता ही जाता था। साथ में गाता जाता था, “भागो-भागो, पूरी ताकत से भागो… तुम मुझे नहीं पकड़ सकते, मैं जिंजरब्रेड मैन हूँ। ”

दौड़ते-दौड़ते उसकी मुलाकात एक गाय, एक घोड़े और एक बकरी से हुई पर कोई उसे न पकड़ सका। वह एक तालाब के किनारे पहुँचा। वहाँ उसकी मुलाकात एक लोमड़ी से हुई।

उसे देखकर जिंजरब्रेड मैन ने अपनी शेखी बघारी, “मुझे कोई नहीं पकड़ सका है, मैं जिंजरब्रेड मैन हूँ।

लोमड़ी ने कहा, “मैं तो तुम्हारी सखी हूँ, तुम्हें खाना नहीं चाहती। तुम थोड़ा आराम कर लो… थक गए हो…” ज्योंही वह आराम करने बैठा लोमड़ी ने लपककर उसे खा लिया।

शिक्षा : जल्दी का काम शैतान का।

अबाबील की दूरदर्शिता

बहुत साल पहले की बात है… पक्षियों का एक झुंड एक खेत के ऊपर से जा रहा था। पक्षियों के झुंड में एक नन्ही अबाबील भी थी। अबाबील अपनी दूरदर्शिता के लिए प्रसिद्ध है।

उसने सभी चिड़ियों से कहा, “इस किसान से सावधन रहना। चलो, नीचे चलकर, हम सब मिलकर, सारे बीजों को चुगकर निकाल लेते हैं। किसान सन के बीज बो रहा है। “

सभी चिड़ियों ने कहा, “तो बोने दो, हमें उससे क्या करना है?” अबाबील ने समझाया, “सन से रस्सियाँ बनाई जाती हैं और फिर उन्हीं रस्सियों से जाल बनाया जाता है जो हम जैसी चिड़ियों तथा मछलियों को पकड़ने के काम में लाया जाता है। इन्हें निकाल दो अन्यथा पछताओगे । “

अबाबील के कहने पर किसी ने भी उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। थोड़े समय बाद सन में अंकुर फूट गए और पौधे बनने लगे। फसल तैयार हो गई और उससे रस्सी बनाई गई।

रस्सी से जाल बुना गया और वही जाल चिड़ियों को पकड़ने में काम लाया जाने लगा। अबाबील का कहना सही निकला।

शिक्षा : पहले से ही सावधानी बरतना अच्छा होता है।

शहरी चूहा और देहाती चूहा

बहुत समय पहले की बात है, दो चूहे भाई थे। एक भाई शहर में रहता था और दूसरा गाँव में। एक दिन शहर वाला चूहा गाँव वाले भाई से मिलने गया। गाँव वाले चूहे ने अपने भाई को जलपान के रूप में कुछ अन्न के दाने खाने के लिए परोसा।

शहर वाले चूहे की नाक चढ़ गई। उसे मोटा अन्न खाने की आदत जो नहीं थी। शहर वाले चूहे ने शहर की बड़ी तारीफ करी और अपने भाई को शहर आने के लिए आमंत्रित किया।

वह राजी हो गया और दोनों चूहे शहर आ गए। शहरी चूहा एक बड़े से मकान के गैराज में रहता था। वहाँ की तड़क-भड़क गाँव वाले चूहे को आकर्षित कर रही थी।

दोनों भोजन करने खाने वाले हॉल में पहुँचे। वहाँ नाश्ते से बचा हुआ ढेर सारा भोजन पड़ा था। दोनों केक खाने लगे।

अचानक उन्हें गुर्राहट सुनाई दी। दरवाजा खुला और मालिक के दो बड़े कुत्ते भीतर आए। शहरी चूहा अपने भाई को लेकर भागा और छिप गया। गाँव वाला चूहा सारी स्थिति समझ गया और वापस अपनी शांतिपूर्ण जिंदगी जीने गाँव चला गया।

शिक्षा : जीवन में सुरक्षा और शांति सर्वोपरि है।

पहेली

एक बार एक राजा किसी बुद्धिमान व्यक्ति को अपना प्रधानमंत्री नियुक्त करना चाहता था। इसलिए उसने एक योजना बनाई और पूरे राज्य में घोषणा करवा दी कि जो भी एक पहेली का जवाब देगा,

वह उसे ही अपना प्रधानमंत्री नियुक्त करेगा। पहेली इस प्रकार थी- एक आदमी के पास एक शेर, एक बकरी और घास का एक परिंदा है। वह व्यक्ति तीनों को किस प्रकार नदी पार ले जाए ताकि शेर बकरी को व बकरी घास को न खा सके।

जबकि नाव में एक वक्त में सिर्फ दो ही लोग जा सकते हैं। वह आदमी क्या करेगा? बहुत से लोगों ने इस पहेली को हल करने की कोशिश की, लेकिन कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए।

तब एक युवक राजा के पास आया और बोला, “महाराज, पहेली के लिए मेरा हल इस प्रकार है, वह व्यक्ति पहले बकरी को नदी के पार लेकर जाएगा।

फिर वह शेर को नदी पार लेकर जाएगा, बकरी को अपने साथ वापस ले जाएगा। तब वह घास को लेकर जाएगा और फिर बकरी को लेकर जाएगा।

इस प्रकार तीनों नदी पार हो जाएंगे।” राजा उसकी चतुराई एवं बुद्धिमानी से अत्यधिक प्रसन्न एवं प्रभावित हुआ और उसे अपना प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया।

घमंडी पेड़

सड़क के किनारे एक बरगद और एक आम का पेड़ था। आम के पेड़ पर रसीले एवं मीठे आम लगते थे। सभी लोग उसकी छाँव में विश्राम करने के साथ-साथ उसके मीठे फलों का भी आनंद लेते थे।

बूढ़े बरगद की तरफ कोई भी ध्यान नहीं देता था। धीरे-धीरे उस आम के पेड़ को अपने ऊपर बड़ा घमंड हो गया। वह बरगद के पेड़ से बोला,

“प्रत्येक व्यक्ति मुझे ओ मेरे स्वादिष्ट फलों को ही पसंद करता है, तुम्हें तो कोई पूछता भी नहीं।” बरगद का पेड़ बोला. “इतना घमंड अच्छा नहीं,

प्रत्येक वस्तु का अपना एक विशेष महत्व और उपयोग होता है।” इसके अगले ही दिन कुछ बच्चों ने उस घमंडी पेड़ के सारे आम तोड़ डाले और टहनियों एवं पत्तों को भी नुकसान पहुंचाया।

अब आम का पेड़ बड़ा ही भद्दा लग रहा था। आम के पेड़ की ऐसी स्थिति देखकर बरगद का पेड़ बोला, “घमंड हमेशा मुसीबत में डालता है। तुम्हारी खूबसुरती ही तुम्हारे लिए मुसीबत बन गई, जबकि मैं अब भी यहाँ पर वैसे ही सुरक्षित खड़ा हूँ।”

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