हेलो आज की इस पोस्ट में हम आपके साथ Moral Stories in Hindi में शेयर करने जा रहे है। इन stories आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।आप इन Moral Stories को पूरा पढ़े। आपको यह Moral Stories बहुत पसंद आएगी। 

Moral Stories in Hindi

Moral Stories List

लालची शेर की कहानी

मेहनत का फल

संघर्ष आपको मजबूत बनाएगा

हैमलिन का बांसुरी वाला

कालिया को मिली सजा

लालची आदमी की कहानी

हब्शी गुलाम

जिसकी लाठी उसकी भैंस

मुफ्त का नारियल

रास्ते में बाधा की कहानी

लोमड़ी और अंगूर की कहानी

पानी का कटोरा

रास्ते का पत्थर और ज़िम्मेदारी

शेख चिल्ली का सपना

बच्चे और उनके दादाजी

नकलची कौआ

चालाक गधा

एक बूढ़े व्यक्ति की कहानी

अहंकारी गुलाब की कहानी

अद्भुत कपड़ा

खुनी झील

अतीत की एक भी असफलता को भविष्य में कभी भी पीछे न आने दें

गरीब भक्त

अपनी मदद आप स्वयं करते हैं

खर्चीली लड़की

राजकुमार का कुत्ता

बच्चे, परी और चुड़ैल

न्याय

चतुर सियार

शरणागत की उपक्षा का फल

घमंडी गधा

भूखे कुत्ते

बंदर की जिज्ञासा और कील

रेलगाड़ी

शरारती चूहा

बिल्ली बच गई

कौआ और घड़ा

सोने के अण्डे वाला हंस

गलत फैसला

चालाक सोमू

रेत भरी सड़क

अब तुम पत्थर गिनो

हँसना मना है

अलीबाबा और खजाना

जादुई पत्थर

लालची शेर की कहानी

गर्मी के एक दिन में, जंगल के एक शेर को बहुत जोरों से भूख लगी. इसलिए वो इधर उधर खाने की तलाश करने लगा. कुछ देर खोजने के बाद उसे एक खरगोश मिला, लेकिन उसे खाने के बदले में उसे उसने छोड़ दिया क्यूंकि उसे वो बहुत ही छोटा लगा.

फिर कुछ देर धुंडने के बाद उसे रास्ते में एक हिरन मिला, उसने उसका पीछा किया लेकिन चूँकि वो बहुत से खाने की तलाश कर रहा था ऐसे में वो थक गया था, जिसके कारण वो हिरन को पकड़ नहीं पाया.

अब जब उसे कुछ भी खाने को नहीं मिला तब वो वापस उस खरगोश को खाने के विषय में सोचा. वहीँ जब वो वापस उसी स्थान में आया था उसे वहां पर कोई भी खरगोश नहीं मिला क्यूंकि वो वहां से जा चूका था. अब शेर काफ़ी दुखी हुआ और बहुत दिनों तक उसे भूखा ही रहना पड़ा.

शिक्षा - इस कहानी से हमें ये सिख मिलती है की अत्यधिक लोभ करना कभी भी फलदायक नहीं होता है.

मेहनत का फल

एक गांव में दो मित्र नकुल और सोहन रहते थे। नकुल बहुत धार्मिक था और भगवान को बहुत मानता था। जबकि सोहन बहुत मेहनती थी। एक बार दोनों ने मिलकर एक बीघा जमीन खरीदी। जिससे वह बहुत फ़सल ऊगा कर अपना घर बनाना चाहते थे।

सोहन तो खेत में बहुत मेहनत करता लेकिन नकुल कुछ काम नहीं करता बल्कि मंदिर में जाकर भगवान से अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करता था। इसी तरह समय बीतता गया। कुछ समय बाद खेत की फसल पक कर तैयार हो गयी।

जिसको दोनों ने बाजार ले जाकर बेच दिया और उनको अच्छा पैसा मिला। घर आकर सोहन ने नकुल को कहा की इस धन का ज्यादा हिस्सा मुझे मिलेगा क्योंकि मैंने खेत में ज्यादा मेहनत की है।

यह बात सुनकर नकुल बोला नहीं धन का तुमसे ज्यादा हिस्सा मुझे मिलना चाहिए क्योकि मैंने भगवान से इसकी प्रार्थना की तभी हमको अच्छी फ़सल हुई। भगवान के बिना कुछ संभव नहीं है। जब वह दोनों इस बात को आपस में नहीं सुलझा सके तो धन के बॅटवारे के लिए दोनों गांव के मुखिया के पास पहुंचे।

मुखिया ने दोनों की सारी बात सुनकर उन दोनों को एक – एक बोरा चावल का दिया जिसमें कंकड़ मिले हुए थे। मुखिया ने कहा की कल सुबह तक तुम दोनों को इसमें से चावल और कंकड़ अलग करके लाने है तब में निर्णय करूँगा की इस धन का ज्यादा हिस्सा किसको मिलना चाहिए।

दोनों चावल की बोरी लेकर अपने घर चले गए। सोहन ने रात भर  जागकर चावल और कंकड़ को अलग किया। लेकिन नकुल चावल की बोरी को लेकर मंदिर में गया और भगवान से चावल में से कंकड़ अलग करने की प्रार्थना की।

अगले दिन सुबह सोहन जितने चावल और कंकड़ अलग कर सका उसको ले जाकर मुखिया के पास गया। जिसे देखकर मुखिया खुश हुआ। नकुल वैसी की वैसी बोरी को ले जाकर मुखिया के पास गया।

मुखिया ने नकुल को कहा की दिखाओ तुमने कितने चावल साफ़ किये है। नकुल ने कहा की मुझे भगवान पर पूरा भरोसा है की सारे चावल साफ़ हो गए होंगे। जब बोरी को खोला गया तो चावल और कंकड़ वैसे के वैसे ही थे।

जमींदार ने नकुल को कहा की भगवान भी तभी सहायता करते है जब तुम मेहनत करते हो। जमींदार ने धन का ज्यादा हिस्सा सोहन को दिया। इसके बाद नकुल भी सोहन की तरह खेत में मेहनत करने लगा और अबकी बार उनकी फ़सल पहले से भी अच्छी हुई।

शिक्षा - इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की हमें कभी भी भगवान के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। हमें सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत करनी चाहिए।

संघर्ष आपको मजबूत बनाएगा

एक बार की बात है, एक आदमी को एक तितली मिली जो अपने कोकून से निकलने लगी थी। वह बैठ गया और घंटों तक तितली को देखता रहा क्योंकि वह एक छोटे से छेद के माध्यम से खुद को मजबूर करने के लिए संघर्ष कर रही थी। फिर, इसने अचानक प्रगति करना बंद कर दिया और ऐसा लग रहा था कि यह अटका हुआ है।

इसलिए, आदमी ने तितली की मदद करने का फैसला किया। उसने कैंची की एक जोड़ी ली और कोकून के शेष हिस्से को काट दिया। तितली तब आसानी से निकली, हालाँकि उसका शरीर सूजा हुआ था और छोटे, सिकुड़े हुए पंख थे।

उस आदमी ने इसके बारे में कुछ नहीं सोचा, और वह वहीं बैठकर तितली को सहारा देने के लिए पंखों के बढ़ने की प्रतीक्षा कर रहा था। हालांकि, ऐसा कभी नहीं हुआ। तितली ने अपना शेष जीवन उड़ने में असमर्थ, छोटे पंखों और सूजे हुए शरीर के साथ रेंगते हुए बिताया।

आदमी के दयालु हृदय के बावजूद, वह यह नहीं समझ पाया कि सीमित कोकून और छोटे छेद के माध्यम से खुद को पाने के लिए तितली द्वारा आवश्यक संघर्ष एक बार उड़ने के लिए खुद को तैयार करने के लिए तितली के शरीर से तरल पदार्थ को अपने पंखों में मजबूर करने का भगवान का तरीका था। यह मुफ़्त था।

हैमलिन का बांसुरी वाला

जर्मनी में हैमलिन नामक एक छोटा-सा शहर था। वहाँ बहुत सारे चूहे रहते थे। वहाँ के लोग चूहों से परेशान होकर मेयर के पास गए। मेयर को चूहों से बचने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा था।

तभी बाँसुरी धरी एक व्यक्ति ने मेयर से कहा, “श्रीमान! मैं बाँसुरी बजाता हूँ। मुझे पता चला है कि चूहों ने आपके नाक में दम कर रखा है। मैं उन्हें यहाँ से ले जा सकता हूँ पर मुझे बदले में क्या मिलेगा?”

मेयर ने कहा, “मैं तुम्हें एक हजार सोने की अशर्पिफयाँ दूँगा । बाँसुरी वाला राजी हो गया। सड़क पर चलते-चलते उसने अपनी बाँसुरी की धुन छेड़ दी। हर दिशा से चूहे निकल-निकल कर उसके पीछे-पीछे चलने लगे।

बांसुरी वाला चलते-चलते उन्हें नदी के किनारे ले गया। सभी चूहे पानी में गिरकर डूब गए।

अब अपना पुरस्कार लेने के लिए बांसुरी वाला मेयर के पास गया। मेयर ने उसे एक हजार चाँदी के सिक्कों की थैली दी। क्रुद्ध बांसुरी वाला चुपचाप बाहर चला गया और दूसरी धुन अपनी बाँसुरी पर बजाने लगा।

इस बार चूहों की जगह शहर के सभी बच्चे सम्मोहित होकर उसके पीछे-पीछे चलने लगे। बांसुरी वाला उन्हें एक पहाड़ी पर ले गया और कभी दोबारा दिखाई नहीं दिया।

शिक्षा - बुरे काम का बुरा नतीजा होता है।

कालिया को मिली सजा

कालिया से पूरा गली परेशान था। गली से निकलने वाले लोगों को कभी भों भों करके डराता। कभी काटने दौड़ता था। डर से बच्चों ने उस गली में अकेले जाना छोड़ दिया था।

कोई बच्चा गलती से उस गली में निकल जाता तो , उसके हाथों से खाने की चीज छीन कर भाग जाता ।

कालिया ने अपने दोस्तों को भी परेशान किया हुआ था।

सब को डरा कर वाह अपने को गली का सेट समझने लगा था। उसके झुंड में एक छोटा सा शेरू नाम का डॉगी भी था।

वह किसी को परेशान नहीं करता, छोटे बच्चे भी उसे खूब प्यार करते थे।

एक दिन शेरू को राहुल ने एक रोटी ला कर दिया।

शेरू बहुत खुश हुआ उस रोटी को लेकर गाड़ी के नीचे भाग गया। वहीं बैठ कर खाने लगा।

कालिया ने शेरू को रोटी खाता हुआ देख जोर से झटका और रोटी लेकर भाग गया।

शेरू जोर-जोर से रोने लगा।

राहुल ने अपने पापा से बताया। उसके पापा कालिया की हरकत को जानते थे। वह पहले भी देख चुके थे।

उन्हें काफी गुस्सा आया।

एक लाठी निकाली और कालिया की मरम्मत कर दी।

कालिया को अब अपनी नानी याद आ गई थी।

वह इतना सुधर गया था , गली में निकलने वालों को परेशान भी नहीं करता।

छोटे बच्चे को देखते ही छुप जाता था।

शिक्षा - बुरे काम का बुरा ही नतीजा होता है बुरे कामों से बचना चाहिए।

लालची आदमी की कहानी

एक बार एक छोटे से शहर में एक लालची आदमी रहता था। वह बहुत ही धनी था, लेकिन इसके वाबजुद भी उसकी लालच का कोई अंत नहीं था। उसे सोना और क़ीमती वस्तुएँ काफ़ी प्रिय थीं। 

लेकिन एक बात ज़रूर थी की, वह अपनी बेटी को किसी भी चीज से ज्यादा प्यार करता था। एक दिन उसे एक परी दिखाई दी। जब वो उसके पास आया तो उसने देखा की, पेड़ की कुछ शाखाओं में परी के बाल फंस गए थे। 

उसने उसकी मदद की और परी उन शाखाओं से आज़ाद हो गयी। लेकिन जैसे-जैसे उसका लालच हावी हुआ, उसने महसूस किया कि उसके इस मदद के बदले में एक इच्छा माँगकर (उसकी मदद करके) वो आसानी से अमीर बन सकता है। 

ये सुनकर, परी ने उसे एक इच्छा की पूर्ति करने का मौक़ा भी दिया। ऐसे में उस लालची आदमी ने कहा की, “जो कुछ मैं छूऊं वह सब सोना हो जाए।” बदले में ये इच्छा को भी उस परी ने पूरी कर दी थी। 

जब उसकी इच्छा पूर्ण हो गयी, तब वो लालची आदमी अपनी पत्नी और बेटी को अपनी इच्छा के बारे में बताने के लिए घर भागा। उसने हर समय पत्थरों और कंकड़ को छूते हुए और उन्हें सोने में परिवर्तित होते देखा, जिसे देखकर वो बहुत ही खुश भी हुआ।

घर पहुंचते ही उसकी बेटी उसका अभिवादन करने के लिए दौड़ी। जैसे ही वह उसे अपनी बाहों में लेने के लिए नीचे झुका, वह एक सोने की मूर्ति में बदल गई। ये पूरी घटना अपने सामने देखते ही उसे अपनी गलती का एहसास हुआ।

वो काफ़ी ज़ोर से रोने लगा और अपनी बेटी को वापस लाने की कोशिश करने लगा। उसने परी को खोजने की काफ़ी कोशिश करी लेकिन वो उसे कहीं पर भी नहीं मिली। उसे अपनी मूर्खता का एहसास हुआ, लेकिन अब तक काफ़ी देर हो गयी थी।

शिक्षा - इस कहानी से हमें ये सिख मिलती है की लालच हमेशा पतन की ओर ले जाता है। ज़रूरत से ज़्यादा लालच करना हमें हमेशा दुःख प्रदान करता है।

हब्शी गुलाम

कभी एक काला गुलाम था। और उसका मालिक वास्तव में क्रूर था। वह इलाज करेगा कि जानवरों से भी बदतर बचाओ। वह काला दास बचने के लिए भाग गया ऐसे क्रूर गुरु के चंगुल से। अगर मैं इस शहर में रहूं, तो फिर से पकडूंगा। इतना सोचकर वह जंगल में भाग गया।

जंगल में घूमते हुए वह एक शेर की दहाड़ सुनता है। वह डर गया। और वह एक पेड़ के पीछे छिप गया। हे भगवान! वह शेर दहाड़ रहा है। और वह करीब हो रहा है। किया करू अब? के लिए किया जाता है। यह शेर गंभीर रूप से घायल लग रहा है।

लगता है जैसे एक सिंहासन उसके पंजे को चुभ गया हो। इसे चोट पहुंचाना ही चाहिए। मुझे उस कांटे को निकालना पड़ेगा। लेकिन अगर यह शेर मुझे खा जाए तो क्या होगा? नहीं। दास सोच रहा था और दास और शेर एक दूसरे को देखते थे।

और शेर उसे देखते ही बैठ गया। उसने उस घायल पंजे का सामना गुलाम की ओर किया और आशा से उसकी ओर देखने लगा।

दास ने शेर पर दया की। और उसने उस कांटे को निकाल दिया। कांटे को हटाते ही शेर का दर्द कम हो गया। और वह गुलाम को कृतज्ञता से देखने लगा। गुलाम ने शेर को प्यार से पीठ पर थपथपाया। और शेर चुपचाप निकल गया।

कई दिन बीत गए। वह दास जंगल में रहने लगा। एक दिन उस दास का गुरु शिकार पर जंगल में आया। उसने अपने सेवकों की मदद से विभिन्न प्रकार के जानवरों को पकड़ लिया था। और उन्हें लकड़ी के पिंजरे में रख दिया।

मे अब जा रहा हु। कड़ी निगरानी रखें। वैन कल सुबह आने वाली है और इन सभी पिंजरों को ले जाओ। समझ गया?

ठीक है, मास्टर। – गुरुजी। गुरुजी। क्या हुआ? वह काला गुलाम जो हमसे बच निकला था, इस जंगल में है। क्या? तुम क्या कह रहे हो? – हाँ। मैं उसे देख चुका हूं। तो जाओ उसे ले आओ। कमीने। तुम मुझसे बचकर इस जंगल में छिप गए हो। रुको। मैं तुम्हें एक अच्छा सबक सिखाऊंगा।

तुम मुझसे स्वतंत्रता चाहते थे, है ना? रुको। आपको इस गुलामी से ही नहीं बल्कि इस दुनिया से भी मुक्त करता है। मेरे जाते ही सैनिकों ने उसे शेर के पिंजरे में डाल दिया। तीन दिन भूखे शेर को अच्छा भोजन मिलेगा। ठीक है, मास्टर। आओ। – आओ। अब चलो सो जाओ। – यहां तक कि मुझे बहुत नींद आ रही है।

लेकिन क्या होगा अगर मास्टर हमसे सुबह उस दास के बारे में पूछें? खैर, उसे बताएं कि शेर ने उसे खा लिया। मास्टर बहुत खुश हो जाएगा। आओ। हमें कल जल्दी उठना होगा। – ठीक है। पिंजरे में बंद दास वास्तव में डर गया था। वह इंतजार कर रहा था कि शेर उसके सिर के साथ हमला करे और आँखें बंद हो जाए।

लेकिन तभी उसे लगा कि कोई उसके पैर चाट रहा है। जब उसने सिर उठाया तो वह चौंक गया। क्योंकि शेर जिसके पंजे से उसने कांटा निकाला था उसके सामने खड़ा था। वह उस शेर को देखकर वास्तव में बहुत खुश हुआ। उसने शेर को डंडा मारा। और उसे पीठ पर पटकना शुरू कर दिया।

और फिर उसने शेर और अन्य सभी जानवरों को मुक्त कर दिया। और वे जंगल में भाग गए। मेरी कहानी समाप्त हो गई है। तो बच्चों, हमने इस कहानी से क्या सीखा? हमें हमेशा किसी ऐसे व्यक्ति की मदद करनी चाहिए जो मुसीबत में हो। हाँ। तुम सही हो। सही बात। हमें भी इससे फायदा होता है। समझ गया?

जिसकी लाठी उसकी भैंस – Might is Right

एक गाँव में एक दूधवाला रहता था। उसके पास बहुत सारी भैंसें थीं। वह अपनी भैंसों का बहुत ख्याल रखता था। वह अपना दूध अलग-अलग गाँवों में बेचता था। वह बहुत ईमानदार थे। उन्होंने दूध को पानी की तरह कभी भी अन्य दूधियों से नहीं जोड़ा।

इसलिए गाँव वाले उससे दूध खरीदना पसंद करते थे। उनके ग्राहकों की संख्या कई गुना बढ़ गई। उसने दूध कम चलाना शुरू कर दिया।

कभी-कभी वह अपने सभी ग्राहकों को दूध देने में असमर्थ था। अंकल, क्या मुझे आधा लीटर दूध मिलेगा? बेटे, मेरे पास कोई दूध नहीं बचा है। यह समाप्त हो गया है। दूधवाले ने अपने सभी ग्राहकों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए एक और भैंस खरीदने का फैसला किया। वह पैसे लेकर भैंस खरीदने निकला।

भैंस के शेड में पहुंचने के बाद उसने कहा। भाई, मैं एक भैंस खरीदना चाहता हूं। आप कौन सी भैंस खरीदना चाहेंगे? आप उस भैंस को खरीद सकते हैं। दूधवाले ने भैंस को सूक्ष्मता से देखा।

उसने एक बड़ा काला भैंसा चुना। मैं यह भैंस खरीदना चाहता हूं। आप बहुत स्मार्ट हैं। आपने भैंस को चुना जो रोज 6-7 लीटर दूध देती है। वास्तव में? यह भैंस दिन में दो बार दूध देती है।

यदि आप इस भैंस को खरीदते हैं तो आप बहुत लाभ कमाएंगे। महान! उसने भैंस का भुगतान किया और भैंस को लेकर चला गया। घर पहुंचने के लिए उसे जंगल से गुजरना पड़ा। दूधवाले के सामने अचानक एक चोर आ गया। चोर के हाथ में एक छड़ी थी।

चोर ने कहा..मुझे भैंस दो या बीमार अपने सिर को छड़ी से तोड़ दो। दूधवाले ने कुछ देर सोचा और फिर कहा। ठीक है भाई। भैंस पाल लो। तुम मूर्ख हो। आप डर गए और मुझे अपनी भैंस दे दी। चोर भैंस को लेकर खुश होकर जाने वाला था …. तभी दूध वाले ने कहा। तुमने मेरी भैंस ले ली है।

कृपया मुझे अपनी छड़ी दें। मैं खाली हाथ घर कैसे जा सकता हूं? चोर ने सोचा कि वह अपनी छड़ी उसे दे देगा। तुम बहुत मूर्ख हो। छड़ी ले लो।

दफा हो जाओ। जैसे ही दूधवाले को छड़ी मिली दूधवाले ने छड़ी से उसे धमकाया और कहा। मुझे मेरी भैंस दो या बीमार इस छड़ी से अपना सिर तोड़ दो। चोर को अपनी मूर्खता का एहसास हुआ। यहाँ तुम्हारी भैंस है। अपनी छड़ी मुझे वापस दे दो।

चलो यहाँ से खो जाता है या बीमार आपको इस छड़ी के साथ बुरी तरह से पिटाई करते हैं और आपको पुलिस स्टेशन ले जाते हैं। चोर डर गया और भाग गया। दूधवाला खुशी-खुशी भैंस लेकर घर लौटा।

शिक्षा - यदि आप चालाकी से काम लेते हैं तो आप शक्तिशाली हो सकते हैं।

मुफ्त का नारियल

एक व्यक्ति नारियल खरीदने के लिए गया। नारियल बेचने वाले ने एक नारियल की कीमत दस रुपए बताई। वह व्यक्ति बोला, “मैं तुम्हें एक नारियल के पाँच रुपए दूंगा।”

नारियल बेचने वाले ने कहा, “यदि तुम्हें पाँच रुपए में नारियल चाहिए तो यहाँ से दो मील दूर थोक बाजार में मिल जाएगा।” वह व्यक्ति दो मील चलकर थोक बाजार पहुँचा।

वहाँ उसने नारियल बेचने वाले से कहा,   “मैं तुम्हें एक नारियल के तीन रुपए दूँगा।” नारियल बेचने वाला बोला, “यहाँ से तीन मील दूर समुद्र किनारे तुम्हें तीन रुपए में नारियल मिल जाएगा।”  

तब वह व्यक्ति समुद्र किनारे पहुँचा। वहाँ उसने कहा, “मैं नारियल के लिए एक रुपया दूँगा।” “एक रुपया! नहीं, मैं इतने में नहीं दे सकता।” नारियल बेचने वाला उसे सुझाव देते हुए आगे बोला,   “यदि तुम नारियल के पेड़ पर चढ़ोगे तो तुम्हें नारियल मुफ्त में मिल जाएगा।”

तब वह व्यक्ति एक पेड़ पर चढ़ गया। लेकिन फिसलकर जमीन पर गिर जाने से उसका पैर टूट गया। अब उसे अपने इलाज पर पाँच हजार रुपए खर्च करने पड़े।   इस तरह मुफ्त का नारियल पानी का चक्कर उसे बहुत भारी पड़ा।  

युद्ध समाप्त होने के बाद राजा की सेना वापस जा रही थी। वे सभी भूखे थे क्योंकि उनकी खाद्य आपूर्ति समाप्त हो गई थी। राजा ने अपने सिपाहियों से अन्न की व्यवस्था करने को कहा। सिपाही पास के एक गाँव की ओर चल दिए।

रास्ते में उन्हें एक किसान मिला। सिपाही उससे बोले, “हमें गाँव के सबसे बड़े खेत में ले चलो।”   तभी उनकी नजर वहीं स्थित एक बड़े से खेत पर पड़ी।

सिपाही उस खेत से अनाज एकत्र करने लगे तो किसान ने उन्हें ऐसा करने से मना करते हुए कहा,   “मेरे साथ आओ, मैं तुम्हें एक दूसरे बड़े खेत में लेकर चलता हूँ।” सिपाही किसान के साथ हो लिए।

फिर उन्होंने उस खेत से अनाज एकत्र किया और किसान से पूछा,   “तुमने हमें उस पहले वाले खेत से अनाज एकत्र करने से मना क्यों कर दिया?” किसान ने जवाब दिया,   “क्योंकि वह खेत किसी और का था जबकि यह खेत मेरा है।

मैं कैसे तुम्हें किसी दूसरे के खेत को नष्ट करने देता?”   राजा ने जब किसान की दयालुता के बारे में सुना तो उन्होंने उसे बुलाकर फसल के मूल्य स्वरूप स्वर्णमुद्राएँ भेंट की।

रास्ते में बाधा की कहानी

बहुत पुराने समय की बात है, एक राजा ने जानबूझकर एक बड़ा सा चट्टान रास्ते के बीचों बीच में रखवा दिया। वहीं वो पास के एक बड़े से झाड़ी में छुप गया। वो ये देखना चाहता था की आख़िर कौन वो चट्टान रास्ते से हटाता है। 

उस रास्ते से बहुत से लोग आने जाने लगे लेकिन किसी ने भी उस चट्टान को हटाना ठीक नहीं समझा। यहाँ तक की राजा के दरबार के ही बहुत से मंत्री और धनी व्यापारी भी उस रास्ते से गुजरे, लेकिन किसी ने भी उसे हटाना ठीक नहीं समझा। उल्टा उन्होंने राजा को ही इस बाधा के लिए ज़िम्मेदार ठहराया।

बहुत से लोगों ने राजा पर सड़कों को साफ न रखने के लिए जोर-जोर से आरोप लगाया, लेकिन उनमें से किसी ने भी पत्थर को रास्ते से हटाने के लिए कुछ नहीं किया।

तभी एक किसान सब्जियों का भार लेकर आया। शिलाखंड (चट्टान) के पास पहुंचने पर किसान ने अपना बोझ नीचे रखा और पत्थर को सड़क से बाहर धकेलने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद आखिरकार उसे सफलता मिली।

जब किसान अपनी सब्जियां लेने वापस गया, तो उसने देखा कि सड़क पर एक पर्स पड़ा था, जहां पत्थर पड़ा था।

पर्स में कई सोने के सिक्के और राजा का एक नोट था जिसमें बताया गया था कि सोना उस व्यक्ति के लिए था जिसने सड़क से चट्टान को हटाया था।

शिक्षा - इस कहानी से हमें ये सिख मिलती है की जीवन में हमारे सामने आने वाली हर बाधा हमें अपनी परिस्थितियों को सुधारने का अवसर देती है, और जबकि आलसी शिकायत करते हैं, दूसरे अपने दयालु हृदय, उदारता और काम करने की इच्छा के माध्यम से अवसर पैदा कर देते हैं।

लोमड़ी और अंगूर की कहानी

बहुत दिनों पहले की बात है, एक बार एक जंगल में एक लोमड़ी को बहुत भूख लगी। उसने पूरी जंगल में छान मारा लेकिन उसे कहीं पर भी खाने को कुछ भी नहीं मिला। इतनी मेहनत से खोज करने के बाद भी , उसे कुछ ऐसा नहीं मिला जिसे वह खा सके।

अंत में, जैसे ही उसका पेट गड़गड़ाहट हुआ, वह एक किसान की दीवार से टकरा गया। दीवार के शीर्ष पर पहुँचकर, उसने अपने सामने बहुत से बड़े, रसीले अंगूरों को देखा। वो सभी अंगूर दिखने में काफ़ी ताज़े और सुंदर थे। लोमड़ी को ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वे खाने के लिए तैयार हैं।

अंगूर तक पहुँचने के लिए लोमड़ी को हवा में ऊंची छलांग लगानी पड़ी। कूदते ही उसने अंगूर पकड़ने के लिए अपना मुंह खोला, लेकिन वह चूक गया। लोमड़ी ने फिर कोशिश की लेकिन फिर चूक गया।

उसने कुछ और बार कोशिश की लेकिन असफल रहा।

अंत में, लोमड़ी ने फैसला किया कि वो अब और कोशिश नहीं कर सकता है और उसे घर चले जाना चाहिए। जब वह चला गया, तो वह मन ही मन बुदबुदाया, “मुझे यकीन है कि अंगूर वैसे भी खट्टे थे।”

शिक्षा - इस कहानी से हमें ये सिख मिलती है की जो हमारे पास नहीं है उसका कभी तिरस्कार न करें; कुछ भी आसान नहीं आता।

पानी का कटोरा

राहुल ने कहा की मै अभी जाकर फूफा जी से पूछता हूँ की वह आखिर कब जायेंगे। राहुल ने बातों बातों में फूफा जी से कहा की 1 महीना हो गया है। आपके जॉब की छुट्टियाँ तो खत्म हो गयी होंगी न।

फूफा जी बोले राहुल मैंने जॉब तो कब की छोड़ दी। अब तो मै बिज़नेस करता हूँ और अब मै इस शहर में भी कुछ बिज़नेस खोलने की सोच रहा हूँ। पहले इस शहर को अच्छे से समझ लूँ जिसमे 2-3 महीने तो लग ही जायेंगे।

यह सुनकर राहुल समझ गया की फूफा जी अभी जाने वाले नहीं है । उसने यह बात अपनी पत्नी और माँ को बताई। सीमा बोली जब घी सीधी ऊँगली से नहीं निकलता तो ऊँगली टेढ़ी करनी पड़ती है।

इनके साथ भी कुछ ऐसा ही करना होगा। आप यह काम अब मुझ पर छोड़ दीजिये। उसी रात बुआ और फूफा जी छत पर थे। तभी उनका लड़का सोनू चिल्लाता हुआ उनके पास गया और बोला की मैंने अभी एक चुड़ैल को देखा है।

तभी एक चुड़ैल वहाँ आ गयी और बुआ और फूफा जी को बोली की तुम में से कौन पहले मेरा भोजन बनना चाहेगा। चुड़ैल को देखकर वह बहुत डर गए और उस घर से भाग गए। उनके जाने के बाद सीमा ने अपना चुड़ैल का मुखौटा उतारा।

बुआ के परिवार के जाने के बाद सबने चैन की सास ली। सीमा की सास ने सीमा से कहा की तू तो बड़ी अच्छी चुड़ैल बनती है। यह कहकर सब हॅसने लगे।

शिक्षा - इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की हमें किसी भी रिश्ते का ग़लत फायदा नहीं उठाना चाहिए। जिस तरह बुआ के परिवार ने अपनी रिश्तेदारी का ग़लत फायदा उठाया और दूसरों को परेशान किया।

रास्ते का पत्थर और ज़िम्मेदारी

एक महाराजा थे। वह बहुत बुद्धिमान और चतुर था। एक दिन वह परीक्षण करना चाहता था कि उसके विषय जिम्मेदार हैं या नहीं। वह सुबह जल्दी उठा, एक दाना दान किया और गाँव चला गया। उसने रास्ते से एक बड़ा पत्थर उठाया और उसे सड़क के केंद्र में रख दिया।

और उसने इसके नीचे एक पत्र रखा। पत्र में उन्होंने लिखा था। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में आपने अपना कर्तव्य पूरा किया है। यह पुरस्कार है।

पत्थर को सड़क के केंद्र में रखने के बाद राजा पास के एक पेड़ के पीछे छिप गया। कुछ समय बाद राजा ने एक घोड़ा गाड़ी को आते देखा। मैं एक घोड़ा गाड़ी की सवारी हूँ। दुश्मन मुझे क्या मारेगा? मेरा दोस्त भाग्यशाली है। अरे! इस रास्ते पर क्या है?

किसी ने पत्थर पर हल्दी, लाल रंग और माला डाल दी। राहगीर पैसा फेंक देगा। मैं एक घोड़ा गाड़ी की सवारी हूँ। पत्थर को उठाए बिना, घोड़ा गाड़ी सवार निकल गया। यह देखकर राजा दुखी हुआ। उसके बाद, राजा ने एक बैलगाड़ी देखी।

उसने उम्मीद से बैठे लोगों की तरफ देखा। मैं आपको बता दूँ। कोई सिवाइलिटी नहीं बची है। मैं एक विनम्र आदमी हूं। – यह सच है। बेशक। यहां तक कि अगर मुझे सड़क पर कोई कागज दिखाई देता है तो मैं उसे उठाकर किनारे रख देता हूं। यह पत्थर?

सड़क पर पत्थर को देखकर बैलगाड़ी सवार धीमा पड़ गया। और उसने पत्थर के किनारे से बैलगाड़ी की सवारी की। मैंने तुमसे कहा था। कोई सिवाइलिटी नहीं बची है। हाँ। हाँ। पत्थर यहाँ क्या कर रहा है? क्या यह अपने आप यहाँ आया? नहीं। और कोई भी इसे नहीं उठाएगा।

चलो इसे करते हैं। चलो इसे उठाएं और इसे किनारे पर रखें। मैं ऐसी बातें नहीं करता। हम ऐसा नहीं करेंगे। कोई और इसे संभाल लेगा। अगर हम पत्थर को उठाकर एक तरफ रख देंगे तो क्या कोई कहेगा, तुमने बहुत बड़ा काम किया है? महान! महान।

आपने बहुत बड़ा काम किया है। क्या कोई ऐसा कहेगा? या कोई हमें इनाम देगा? मुझे बताओ। आओ। आओ। आओ। यह कहते हुए कि बैलगाड़ी सवार भी निकल गया।

राजा को बहुत गुस्सा आया। राजा ने अपने एक मंत्री को घोड़े पर आते देखा। मंत्री निश्चित रूप से पत्थर उठाएगा और उसे किनारे रखेगा। जो भी आप कहें, उसके बाद, वह मेरा मंत्री है। यह क्या है? मुझे लगता है कि लोग पागल हो गए हैं।

क्या आपको रास्ते में एक पत्थर रखना चाहिए? अगर किसी की मृत्यु हो जाती है तो वे समझदारी हासिल करेंगे। मुझे जाकर राजा को बताना पड़ेगा।

वह निश्चित रूप से एक समाधान के बारे में सोचेंगे। उसका अपना मंत्री बिना पत्थर उठाए चला गया। राजा यह देखकर बहुत दुखी हुआ। वह वहां से जाने वाला था। तभी उन्होंने कुछ महिलाओं को पानी के बर्तन ले जाते हुए देखा। मैं आप दोनों को बताना भूल गया। – क्या?

कल मैंने 10 किलो वजन वाली एक निफ्टी चेन खरीदी। यह देखो। ऐसा क्या? वाह! ओह मेरी! क्या हुआ? – क्या हुआ? क्या हुआ? – अरे मेरा! मैं नीचे गिर गया। मेरा बर्तन भी टूट गया। मैं क्या करूं? मैं क्या करूं? आश्चर्य है कि किस तरह के लोग हैं।

वे रास्ते में एक पत्थर रखते हैं। अब मुझे फिर से सब कुछ करना पड़ेगा। हे भगवान! मैं क्या करूं? अंत में, महिलाएं भी बिना पत्थर उठाए चली गईं। भारी मन से राजा ने पत्थर उठाया और किनारे रख दिया। विषयों को नागरिकता सिखाने की जरूरत है।

जिसके लिए कुछ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। उसे यह पता चला था। उन्होंने सख्त कदम उठाने और अपने लोगों को विनम्र बनाने का फैसला किया।

शिक्षा - शब्द केवल पर्याप्त नहीं हैं।

शेख चिल्ली का सपना – Sheikh Chilli’s Dream

शेख चिल्ली का सपना (शेख चिल्ली के सपने)। एक गाँव में शेख चिल्ली नाम का एक लड़का रहता था। वह हमेशा बहुत सपने देखता था। अपने सपनों में खो जाना और अपने काम को भूल जाना उसकी आदत थी। उनकी मां ने हमेशा उन्हें बदलने की कोशिश की। आप हमेशा यहां बैठते हैं और पूरे दिन सपने देखते हैं। लेकिन, आपको उन सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करने की जरूरत है।

शेख चिल्ली, सपने देखना और समय दूर करना आपके सपनों को पूरा करने में मदद नहीं करेगा। माँ, मैं सोने के बाद ही सपने देख सकता हूँ। जैसे कि आप अपनी आँखों के साथ सपने नहीं देखते हैं। आप हमेशा अपने विचारों और सपनों में खोए रहते हैं।

आपको यह भी याद नहीं है कि आप क्या कर रहे हैं। सपने देखना बंद करो और उचित काम पाओ तभी तुम्हारे सपने सच होंगे। शेख चिल्ली किसी तरह उठकर तैयार हुआ। वह काम की तलाश में निकल पड़ा। वह आलसी नहीं था।

लेकिन जब भी वह कोई काम करता था तो उसे भूल जाता था और अपने सपनों में खो जाता था। इसलिए वह अपनी नौकरी को बरकरार रखने में असमर्थ था। शेख चिल्ली जो काम ढूंढने निकलता था, सोच रहा था कि वह क्या कर सकता है जब उसने एक व्यापारी को एक पेड़ के नीचे बैठे देखा।

उसके पास एक बड़ी टोकरी थी। उसमें अंडे थे। शेख चिल्ली ने व्यापारी से पूछा कि क्या उसके पास कोई काम है।

भाई, तुम किसका इंतजार कर रहे हो? क्या मैं आपकी सहायता कर सकता हूँ?

मुझे इन अंडों को अपने गाँव ले जाना है।

अगर कोई मेरी मदद करता है तो मैं उस व्यक्ति को अपनी टोकरी से चार अंडे दूंगा। केवल चार अंडे? मैं तुम्हारे लिए काम कर सकता हूं लेकिन मुझे छह अंडे चाहिए। नहीं, भाई। मैं तुम्हें छह अंडे नहीं दे सकता। आपके पास पाँच अंडे हो सकते हैं। लेकिन, आपको अंडे को ध्यान से रखना चाहिए। किसी भी अंडे को मत तोड़ो। चिंता मत करो। आगे चलो, मैं तुम्हारा पीछा करूंगा।

शेख चिल्ली बहुत खुश था। जब उसने चलना शुरू किया। वह अपने विचारों में खो गया और खुद से बोलना शुरू कर दिया। चार अंडों से चार चूजे निकलेंगे। वे बड़े होंगे और अधिक अंडे देंगे। मैं बाजार में कुछ अंडे बेचूंगा। बचे हुए अंडों से ज्यादा चूजे निकलेंगे। चूजे बड़े होकर ढेर सारे अंडे देंगे। मैं उन अंडों को बाज़ार में बेचूँगा।

मैं मुर्गियाँ बेचूँगा और अधिक पैसे कमाऊँगा। मैं पैसे से गाय और भैंस खरीदूंगा। मैं अपने दूध और दूध उत्पादों के साथ एक डेयरी व्यवसाय शुरू करूँगा। यह मुझे अमीर बना देगा। मैं एक बड़ा घर बनाऊंगा। मैं अपने माता-पिता को खुश रखूंगा।

ठीक है, हमारे पास उपस्थित होने के लिए नौकर रखें। कुछ पैसे बचाने के बाद मैं कपड़े की दुकान शुरू करूंगा। मेरा स्टोर आसपास के गांवों में चर्चा का विषय होगा। मेरे पास हर जगह सफल व्यावसायिक उद्यम होंगे। मैं दुकानों को बेचूंगा और सोने और चांदी का कारोबार शुरू करने के लिए इसमें और पूंजी लगाऊंगा।

मुझे गांव से शहर की यात्रा करने के लिए कार की आवश्यकता होगी। मैं एक नई कार और एक बड़ा घर खरीदूंगा। मेरी भव्य जीवनशैली को देखकर लोग दंग रह जाएंगे।

मुझे अमीर परिवारों से वैवाहिक प्रस्ताव मिलेंगे। मैं एक खूबसूरत लड़की से शादी करूँगा। खैर, सुंदर बच्चे हैं। काम के लिए निकलते समय बच्चे मुझे रोकने की कोशिश करेंगे। बच्चे मुझे काम पर जाने से रोकने की कोशिश करेंगे लेकिन बीमार ने उन्हें मना कर दिया।

जब वह यह सब देख रहा था, शेख चिल्ली ने उसकी गर्दन पर जोर से सिर हिलाया। जैसे ही उसने अपनी गर्दन हिलाई टोकरी उसके सिर से नीचे गिर गई और सभी अंडे जमीन पर गिर गए और टूट गए।

लड़का, तुमने क्या किया है? आपने मेरे द्वारा खरीदे गए सभी अंडों को तोड़ दिया। मुझे आपकी वजह से भारी नुकसान हुआ है। इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा? कृपया मुझे क्षमा करें। मैंने एक गलती की है। आपके द्वारा खरीदे गए केवल अंडे जो टूट गए हैं। लेकिन, मेरे सपने चकनाचूर हो गए।

रुको, मैं तुम्हें सबक सिखाऊंगा। शेख चिल्ली वहाँ से संकीर्ण रूप से भागने में सफल रहा। लेकिन, वह बहुत डरा हुआ था।

उसने सपनों में खो जाने के लिए एक अच्छा सबक सीखा। उस दिन शेख चिल्ली ने अपने सपनों में खो जाने और अपने जीवन को बर्बाद नहीं करने का फैसला किया। सपने में कहानी का नैतिक खो जाना हमें उन्हें पूरा करने में मदद नहीं करेगा। अपने सपनों को सच करने के लिए हमें कड़ी मेहनत करनी चाहिए।

बच्चे और उनके दादाजी

एक गाँव में दो चतुर बच्चे अपने माता-पिता के साथ रहते थे। एक दिन उनके दादाजी उनके साथ रहने के लिए आए। वह एक नाविक रह चुके थे। बच्चों को उनसे कहानियाँ सुनना अच्छा लगता था।

वह उन्हें बताते, कैसे वह समुद्री डाकुओं से लड़े। धीरे-धीरे दादाजी कहानियाँ सुनाकर ऊब गए। वह अपने हमउम्र लोगों से बातें करना चाहते थे। गाँव के पास ‘नाविक की वापसी’ नामक एक सराय थी।

बच्चों ने दादाजी को उसके बारे में बताते हुए कहा-“आपको वहाँ जाना चाहिए। वह नाविकों से भरा रहता है।” लेकिन दादाजी ने कहा-” अब मैं नए दोस्त नहीं बना सकता।”

बच्चों ने उस सराय के मालिक के बच्चों को बताया-“हमारे दादाजी एक नाविक थे। वह समुद्री डाकुओं और गड़े हुए खजाने की बहुत सी कहानियाँ जानते हैं और यह भी जानते हैं कि डाकुओं ने खज़ाना कहाँ छुपाया था।”

जल्दी ही, दादाजी को सराय से निमंत्रण आने लगे। दादाजी अब अपना समय सराय में बिताने लगे और वह अब यहाँ पर खुश थे। बच्चे भी खुश थे क्योंकि अब दादाजी हमेशा उनके साथ ही रहने वाले थे।

नकलची कौआ Crow Stories in Hindi with Moral

एक बार एक जंगल में एक मूर्ख कौआ रहता था। एक दिन उसने एक चील को एक कमज़ोर मेमने पर हमला करते हुए देखा। उसके देखते-देखते,

उस चील ने मेमने को अपने ताकतवर पंजों में उठा लिया और फिर वह उसे अपने घोंसले में ले गया। कौआ उस चील से बहुत प्रभावित हुआ। कौए ने सोचा वह भी ऐसा कर सकता है।

उसने भी अपना शिकार ढूंढना शुरु किया। आकाश में उड़ते हुए उसे भी एक मेमना दिखा। वह आकाश से सीधा उस पर जा गिरा। उसने मेमने को अपने पंजों में पकड़ने की कोशिश की, परंतु वह उसके लिए बहुत भारी था।

यही नहीं, वह उसके बालों में बुरी तरह से फंस गया। चरवाहे ने उसे देख लिया और पिंजरे में बंद कर दिया। इस तरह मूर्ख कौआ चील की नकल करने के कारण खुद ही जाल में फंस गया।

चालाक गधा – Moral Based Stories in Hindi

एक दिन एक शेर अपनी प्यास बुझाने के लिए नदी के तट पर गया। वहाँ नदी के दूसरे तट पर एक गधा भी पानी पी रहा था। गधे को देखकर शेन ने उसे अपना भोजन बनाने के लिए एक योजना बनाई।

शेर बोला, “प्यारे गधे, क्या नदी के उस किनारे कोई घोड़ा भी है? मेरी इच्छा उसका गाना सुनने की है।” गधे को उसकी नीयत पर तनिक भी संदेह नहीं है। वह बोला.”श्रीमान क्या घोड़ा ही गा सकता है, मैं नहीं?

लीजिए मेरा गाना सुनिए।” यह कहकर उसने अपनी आँखें बंद की और जोर-जोर से रेंकना शुरू कर दिया। मौका पाकर शेर ने नदी पार की और गधे को पकड़ लिया। गधा भी चालाक था।

वह बोला, “श्रीमान् ! मैं आपका भोजन बनने के लिए तैयार हूँ। लेकिन मैंने सुना है कि ताकतवर एवं बलशाली शेर अपना भोजन करने से पहले भगवान की प्रार्थना करते हैं।” शेर अपने को जंगल का सबसे शक्तिशाली जानवर मानता था।

इसलिए उसने प्रार्थना करने के लिए अपनी आँखें बंद कर ली। अब गधे को भागने का अच्छा मौका मिल गया। वह वहाँ से तेजी से भाग निकला। इस तरह चालाकी में वह गधा शेर पर भारी पड़ा।  

एक बूढ़े व्यक्ति की कहानी

गाँव में एक बुढ़ा व्यक्ति रहता था। वह दुनिया के सबसे बदकिस्मत लोगों में से एक था। सारा गाँव उसके अजीबोग़रीब हरकत से थक गया था।

क्यूँकि वह हमेशा उदास रहता था, वह लगातार शिकायत करता था और हमेशा खराब मूड में रहता था।

जितना अधिक वह जीवित रहा, उतना ही वो दुखी रहता और उसके शब्द उतने ही जहरीले थे। लोग उससे बचते थे, क्योंकि उसका दुर्भाग्य संक्रामक हो गया था।

उससे जो भी मिलता उसका दिन अशुभ हो जाता। उसके बगल में खुश रहना अस्वाभाविक और अपमानजनक भी था।

इतना ज़्यादा दुखीं होने के वजह से उसने दूसरों में दुख की भावना पैदा की।

लेकिन एक दिन, जब वह अस्सी साल के हुए, एक अविश्वसनीय बात हुई। ये बात लोगों में आज के तरह फैल गयी।  

“वह बूढ़ा आदमी आज खुश था, वह किसी भी चीज़ की शिकायत नहीं कर रहा था, बल्कि पहली बार वो मुस्कुरा रहा था, और यहाँ तक कि उसका चेहरा भी तरोताज़ा दिखायी पड़ रहा था।”

यह देख कर पूरा गांव उसके घर के सामने इकट्ठा हो गया। और सभी ने बूढ़े आदमी से पूछा की : तुम्हें क्या हुआ है?

जवाब में बूढ़ा आदमी बोला : “कुछ खास नहीं। अस्सी साल से मैं खुशी का पीछा कर रहा हूं, और यह बेकार था, मुझे ख़ुशी कभी नहीं मिली। और फिर मैंने खुशी के बिना जीने और जीवन का आनंद लेने का फैसला किया। इसलिए मैं अब खुश हूं।” 

शिक्षा - इस कहानी से हमें ये सिख मिलती है की खुशी का पीछा मत करो। जीवन का आनंद लो।

अहंकारी गुलाब की कहानी

एक बार की बात है, दूर एक रेगिस्तान में, एक गुलाब का पौधा था जिसे अपने सुंदर रूप (गुलाब का फ़ुल) पर बहुत गर्व था। उसकी एकमात्र शिकायत यह थी की, एक बदसूरत कैक्टस के बगल में बढ़ रही थी।

हर दिन, सुंदर गुलाब कैक्टस का अपमान करता था और उसके लुक्स पर उसका मजाक उड़ाता था, जबकि कैक्टस चुप रहता था। आस-पास के अन्य सभी पौधों ने गुलाब को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह भी अपने ही रूप से प्रभावित थी।

एक चिलचिलाती गर्मी, रेगिस्तान सूख गया, और पौधों के लिए पानी नहीं बचा। गुलाब जल्दी मुरझाने लगा। उसकी सुंदर पंखुड़ियाँ सूख गईं, अपना रसीला रंग खो दिया।

एक दिन दोपहर में, गुलाब ने ये नज़ारा देखा की एक गौरैया कुछ पानी पीने के लिए अपनी चोंच को कैक्टस में डुबा रही थी। यह देखकर गुलाब के मन में कुछ संकोच आयी। 

हालांकि शर्म आ रही थी फिर भी, गुलाब ने कैक्टस से पूछा कि क्या उसे कुछ पानी मिल सकता है? इसके जवाब में, दयालु कैक्टस आसानी से सहमत हो गया। गुलाब को अपनी गलती की एहसास हुआ, वहीं उसने एक दूसरे का मदद किया इस कठिन गर्मी को पार करने के लिए।

शिक्षा - इस कहानी से हमें ये सिख मिलती है की कभी भी किसी को उनके दिखने के तरीके से मत आंकिए।

अद्भुत कपड़ा | Tenali rama story hindi

अब जब भी कोई व्यक्ति मंदिर में दर्शन करने आता तो मूर्ति को फूलों से पूजा करता, दूध से स्नान कराता और उस पत्थर पर नारियल फोड़ता था। जब लोग उस पत्थर पर नारियल फोड़ते तो बहुत परेशान होता।

उसको दर्द होता और वह चिल्लाता लेकिन कोई उसकी सुनने वाला नहीं था । उस पत्थर ने मूर्ति बने पत्थर से बात करी और कहा की तुम तो बड़े मजे से हो लोग तो तुम्हारी पूजा करते है। तुमको दूध से स्नान कराते है और लड्डुओं का प्रसाद चढ़ाते है।

लेकिन मेरी तो किस्मत ही ख़राब है मुझ पर लोग नारियल फोड़ कर जाते है। इस पर मूर्ति बने पत्थर ने कहा की जब शिल्पकार तुम पर कारीगरी कर रहा था यदि तुम उस समय उसको नहीं रोकते तो आज मेरी जगह तुम होते।

लेकिन तुमने आसान रास्ता चुना इसलिए अभी तुम दुःख उठा रहे हो। उस पत्थर को मूर्ति बने पत्थर की बात समझ आ गयी थी। उसने कहा की अब से मै भी कोई शिकायत नहीं करूँगा। इसके बाद लोग आकर उस पर नारियल फोड़ते।

नारियल टूटने से उस पर भी नारियल का पानी गिरता और अब लोग मूर्ति को प्रसाद का भोग लगाकर उस पत्थर पर रखने लगे।

शिक्षा - हमें कभी भी कठिन परिस्थितियों से घबराना नहीं चाहिए।

खुनी झील | Moral Story in Hindi

एक बार की बात है एक जंगल में एक झील थी। जो खुनी झील के नाम से प्रसिद्ध थी। शाम के बाद कोई भी उस झील में पानी पिने के लिए जाता तो वापस नहीं आता था। एक दिन चुन्नू हिरण उस जंगल में रहने के लिए आया।

उसकी मुलाकात जंगल में जग्गू बन्दर से हुई। जग्गू बन्दर ने चुन्नू हिरण को जंगल के बारे में सब बताया लेकिन उस झील के बारे में बताना भूल गया। जग्गू बन्दर ने दूसरे दिन चुन्नू हिरण को जंगल के सभी जानवरों से मिलाया।

जंगल में चुन्नू हिरण का सबसे अच्छा दोस्त एक चीकू खरगोश बन गया। चुन्नू हिरण को जब ही प्यास लगती थी तो वह उस झील में पानी पिने जाता था। वह शाम को भी उसमें पानी पिने जाता था।

एक शाम को वह उस झील में पानी पिने गया तो उसने उसमें बड़ी तेज़ी से अपनी और आता हुआ एक मगरमच्छ देख लिया। जिसे देखकर वह बड़ी तेज़ी से जंगल की तरफ भागने लगा। रास्ते में उसको जग्गू बन्दर मिल गया।

जग्गू ने चुन्नू हिरण से इतनी तेज़ भागने का कारण पूछा। चुन्नू हिरण ने उसको सारी बात बताई। जग्गू बन्दर ने कहा की मै तुमको बताना भूल गया था की वह एक खुनी झील है। जिसमे जो भी शाम के बाद जाता है वह वापिस नहीं आता।

लेकिन उस झील में मगरमच्छ क्या कर रहा है। उसे तो हमनें कभी नहीं देखा। इसका मतलब वह मगरमच्छ ही सभी जानवरों को खाता है जो भी शाम के बाद उस झील में पानी पिने जाता है।

अगले दिन जग्गू बन्दर जंगल के सभी जानवरों को ले जाकर उस झील में गया। मगरमच्छ सभी जानवरों को आता देखकर छुप गया। लेकिन मगरमच्छ की पीठ अभी भी पानी से ऊपर दिखाई दे रही थी।

सभी जानवरों ने कहा की यह पानी के बाहर जो चीज़ दिखाई दे रही है वह मगरमच्छ है। यह सुनकर मगरमच्छ कुछ नहीं बोला। चीकू खरगोश ने दिमाग लगाया और बोला नहीं यह तो पत्थर है। लेकिन हम तभी मानेंगे जब यह खुद बताएंगा।

यह सुनकर मगरमच्छ बोला की मै एक पत्थर हूँ। इससे सभी जानवरों को पता लग गया की यह एक मगरमच्छ है। चीकू खरगोश ने मगरमच्छ को कहा की तुम इतना भी नहीं जानते की पत्थर बोला नहीं करते। इसके बाद सभी जानवरों ने मिलकर उस मगरमच्छ को उस झील से भगा दिया और खुशी खुशी रहने लगे।

शिक्षा - इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की यदि हम किसी भी मुसीबत का सामना बिना घबराये मिलकर करते है तो उससे छुटकारा पा सकते है।

अतीत की एक भी असफलता को भविष्य में कभी भी पीछे न आने दें

जब एक आदमी हाथियों के पास से गुजर रहा था, वह अचानक रुक गया, इस तथ्य से भ्रमित होकर कि इन विशाल जीवों को केवल उनके सामने के पैर से बंधी एक छोटी सी रस्सी से पकड़ा जा रहा था। कोई जंजीर नहीं, कोई पिंजरा नहीं। यह स्पष्ट था कि हाथी कभी भी, अपने बंधनों को तोड़ सकते थे, लेकिन किसी कारण से, उन्होंने ऐसा नहीं किया।

उसने पास में एक प्रशिक्षक को देखा और पूछा कि ये जानवर बस वहीं खड़े क्यों हैं और उसने दूर जाने का कोई प्रयास नहीं किया। ट्रेनर ने कहा, ‘जब वे बहुत छोटे होते हैं और बहुत छोटे होते हैं तो हम उन्हें बांधने के लिए एक ही आकार की रस्सी का उपयोग करते हैं और उस उम्र में, उन्हें पकड़ने के लिए पर्याप्त है। जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, उन्हें विश्वास होता है कि वे अलग नहीं हो सकते। उनका मानना ​​है कि रस्सी उन्हें अभी भी पकड़ सकती है, इसलिए वे कभी भी मुक्त होने की कोशिश नहीं करते हैं।’

वह आदमी चकित था। ये जानवर किसी भी समय अपने बंधनों से मुक्त हो सकते हैं, लेकिन क्योंकि उनका मानना ​​​​था कि वे नहीं कर सकते, वे वहीं फंस गए जहां वे थे।

भले ही इससे आपको दुख पहुंचे दूसरों के प्रति दयालु रहें

“उन दिनों में जब एक आइसक्रीम संडे की कीमत बहुत कम थी, एक 10 साल का लड़का एक होटल की कॉफी शॉप में घुस गया और एक टेबल पर बैठ गया। एक वेट्रेस ने उसके सामने एक गिलास पानी रखा।

‘आइसक्रीम संडे कितने का होता है?’ ’50 सेंट,’ वेट्रेस ने जवाब दिया।

छोटे लड़के ने अपनी जेब से हाथ निकाला और उसमें कई सिक्कों का अध्ययन किया।

‘सादे आइसक्रीम की एक डिश कितने की है?’ उसने पूछा। कुछ लोग अब टेबल का इंतजार कर रहे थे और वेट्रेस थोड़ी अधीर थी।

’35 सेंट,’ उसने बेरहमी से कहा। छोटे लड़के ने फिर से सिक्के गिन लिए। ‘मेरे पास सादा आइसक्रीम होगा,’ उन्होंने कहा। वेट्रेस आईसक्रीम ले आई, बिल टेबल पर रख कर चली गई। लड़के ने आइसक्रीम खत्म की, खजांची को पैसे दिए और चला गया।

जब वेट्रेस वापस आई, तो उसने टेबल को पोंछना शुरू कर दिया और फिर जो कुछ उसने देखा उसे परेशान कर दिया । वहाँ खाली बर्तन के पास बड़े करीने से रखा गया, 15 सेंट थे – उसकी बक्शीश ।”

गरीब भक्त Moral Story in Hindi of a Poor Devotee

एक गाँव में एक निर्धन व्यक्ति रहता था। वह इतना निर्धन था कि मुश्किल से अपने परिवार के लिए एक वक्त का खाना जुटा पाता था। लेकिन उसने कभी अपनी निर्धनता की शिकायत किसी से नहीं की।

उसके पास जो कुछ था, वह उसी में संतुष्ट था। वह देवी का बहुत बड़ा भक्त था। इसीलिए वह पूजा करने के लिए हमेशा मंदिर जाता था। मंदिर जाने के बाद ही वह अपने कार्य पर जाता था।

एक दिन देवी को अपने इस गरीब भक्त पर दया आ गई। इसलिए एक दिन सुबह-सुबह देवी ने अपनी दिव्य शक्ति से मंदिर के बाहर एक सोने के सिक्कों से भरा थैला रख दिया।

वह भक्त मंदिर आया और आँखें बंद करके मंदिर के चारों ओर देवी का ध्यान करते हुए परिक्रमा करने लगा। आँखें बंद होने के कारण वह सोने के सिक्कों से भरा थैला नहीं देख पाया और यूँ ही चला गया। यह देखकर देवी ने सोचा, ‘समय से पहले और भाग्य से अधिक किसी को कुछ नहीं मिलता।’.

अपनी मदद आप स्वयं करते हैं – Moral Based Stories in Hindi

एक बार एक धनी व्यापारी व्यापार के उद्देश्य से पानी के जहाज द्वारा अपने शहर से दूसरे शहर जा रहा था। वह अपने साथ कीमती रत्न एवं सोने के सिक्कों से भरा एक संदूक भी ले जा रहा था।

रास्ते में तूफान आ गया। जहाज इधर-उधर हिलोरें लेने लगा। कुछ घंटों के बाद तूफान तो थम गया, लेकिन जहाज की तली में एक छेद हो गया। अब जहाज में पानी भरने लगा।

यह देखकर कुछ लोग जहाज में ही डूब गए और कुछ सौभाग्यशाली तैरकर किनारे पहुँच गए। यह देखकर व्यापारी ने प्रार्थना करनी शुरू की, “हे भगवान! कृपा करके मेरा जीवन बचा लो।”

एक व्यक्ति व्यापारी के पास गया और बोला, “कूदो और तैरकर समुद्र के किनारे पहुँचो। भगवान उसकी मदद करता है जो अपनी मदद स्वयं करते हैं।” लेकिन व्यापारी ने उसकी एक न सुनी।

वह जहाज में ही रहा। थोड़ी देर में जहाज डूब गया और वह व्यापारी भी जहाज के साथ डूबकर अकाल मृत्यु का ग्रास बना।

खर्चीली लड़की

अंजली एक बहुत सुंदर और अमीर लड़की थी। वह स्वभाव से बहुत फिजूल खर्च करने वाली थी। वह अपने कपड़े एक या दो बार पहनने के बाद ही फेंक दिया करती थी।

उसकी एक बहुत मेहनती रोमा नाम की नौकरानी थी। वह बहुत ही नम्र स्वभाव की थी। जो भी कपड़े अंजली फेंकती थी, वह उनको सम्भाल कर रखती थी। एक दिन एक सुंदर और अमीर युवक ने अंजली का हाथ मांगा।

अंजली मान गई और उसने अपनी शादी में अपनी सभी सहेलियों को बुलाया। रोमा भी वहाँ अपनी मालकिन की फेंकी हुई, सुंदर पोशाक पहन कर आई। जिसे देखकर अंजली को जलन महसूस हुई और वह रोमा का अपमान करने लगी।

यह देखकर युवक अंजली का स्वभाव समझ गया। उसे रोमा की सादगी बहुत अच्छी लगी। अंजली को छोड़कर उसने रोमा से शादी कर ली। अंजली को उसका सबक मिल गया था।

राजकुमार का कुत्ता

एक बार एक बहादुर राजकुमार था। वह अपने कुत्ते से बहुत प्यार करता था। उसने कई लड़ाईयाँ जीतीं और कई देशों पर राज किया। एक दिन उसके दुश्मनों ने योजना बना कर उसे पकड़ लिया।

राजकुमार को एक अनजान जगह पर रखा गया, जहाँ चारों ओर जंगल था। उसके दुश्मनों ने उसे आजाद करने की बहुत बड़ी कीमत मांगी थी।

राजकुमार चालाक था। वह अपने कुत्ते वीर के साथ उस जगह से भाग निकला। लेकिन अपने देश जाने का उसको रास्ता नहीं पता था। अनजान देश में वह किसी से रास्ता पूछ भी नहीं सकता था।

अचानक, उसे याद आया कि कुत्ते कई मील दूर से भी अपना घर ढूंढ सकते हैं। उसने अपने कुत्ते से कहा- “वीर, हमारे घर का रास्ता ढूंढो और देश को बचाओ।”

वीर ने हवा को सूंघा और अपने देश की दिशा की ओर चल पड़ा। कई दिन चलने के बाद वे अपने देश पहुंचे। केवल वीर की वजह से ही राजकुमार अपने घर वापस आ सका।

बच्चे, परी और चुड़ैल

बहुत समय पहले, एक भाई-बहन पार्क में खेल रहे थे। एक चुडैल ने उन्हें देखा और उनका अपहरण कर लिया। वह उन बच्चों को एक अंधेरे कमरे में बंद करके खाना खाने चली गई। भाग्य से, एक खिड़की खुली हुई थी।

वे बच्चे उसमें से निकल भागे। जल्दी ही चुडैल वापस आ गई। उसने देखा, बच्चे कमरे में नहीं थे।   वह उनको घर के बाहर ढूंढने के लिए निकली। उधर, बच्चे अपने घर का रास्ता ढूंढ रहे थे।  

तभी,उन्हें एक दयालु परी मिली। उस परी ने उनकी मदद करने का वादा किया। लेकिन, बहुत जल्द चुडैल वहाँ पहुँच गई।   परी ने बच्चों के चारों ओर आग का घेरा बना दिया। चुडैल ने फूंक मार कर आग बुझा दी।  

तब परी ने बच्चो के चारों ओर काँच की दीवार बना दी। उस दीवार को तोड़ने के लिए, चुड़ैल अपने घर हथौड़ा लेने भागी।   लेकिन उसके आने से पहले ही परी ने बच्चों को उनके घर पहुंचा दिया।  

न्याय

एक बार एक क्रूर व्यक्ति ने धन के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी। व्यापारी की हत्या करने के बाद जब वह वहाँ से भाग रहा था, तभी उसे व्यापारी के परिवारजनों ने देख लिया।  

वे सभी चिल्लाने लगे। फलस्वरूप वहाँ पर लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई और वे लोग हत्यारे का पीछा करने लगे।   दौड़ते-दौड़ते वह हत्यारा नदी के किनारे पहुंच गया। अचानक एक शेर ने उस पर हमला कर दिया।

यह देखकर वह अपनी जान बचाने के लिए एक पेड़ पर चढ़ गया। तभी उसे पेड़ की पत्तियों में से किसी के (कराने की आवाज सुनाई पड़ी। उसने वहाँ देखा तो उसे पेड़ की टहनियों से लिपटा हुआ एक बड़ा सा अजगर दिखाई दिया।

वह हत्यारे को काटने के लिए ज्यों ही आगे बढ़ा, त्यों ही उसने नदी में छलांग लगा दी। लेकिन उसकी जिंदगी का अंत निश्चित था। नदी के अन्दर रहने वाले एक मगरमच्छ ने उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। इस तरह प्रकृति ने स्वयं ही हत्यारे का न्याय कर दिया था। उसने किसी की जान ली थी तो प्रकृति ने स्वयं उसकी जान लेकर उसे सजा दे दी थी।

चतुर सियार

एक बार की बात है एक गांव में एक बैल रहता था। जिसको घूमना बहुत पसंद था। वह घूमता घूमता जंगल में जा पहुंचा और आते समय गांव का रास्ता भूल गया। वह चलता हुआ एक तालाब के पास पहुंचा।

जहाँ पर उसने पानी पिया और वहाँ की हरी हरी घास खायी। जिसको खाकर वह बहुत खुश हुआ और ऊपर मुँह करके चिल्लाने लगा। उसी समय जंगल का राजा शेर तालाब की ओर पानी पिने जा रहा था।

जब शेर ने बैल की भयानक आवाज़ सुनी तो उसने सोचा जरूर जंगल में कोई खतरनाक जानवर आ गया है। इसलिए शेर बिना पानी पिए ही अपनी गुफा की तरफ भागने लगा। शेर को इस तरह डर कर भागते हुए 2 सियार ने देख लिया।

वह शेर के मंत्री बनना चाहते थे। उनने सोचा यही सही समय है शेर का भरोसा जितने का। दोनों सियार शेर की गुफा में गए और बोले हमने आपको डर कर गुफा की ओर आते हुए देखा था। आप जिस आवाज़ से डर रहे थे वह एक बैल की थी।

यदि आप चाहे तो हम उसको लेकर आपके पास आ सकते है। शेर की आज्ञा से दोनों बैल को अपने साथ लेकर आ गए और शेर से मिलाया। कुछ समय बाद शेर और बैल बहुत ही अच्छे मित्र बन गए।

शेर ने बैल को अपना सलाहकार रख लिया। यह बात जानकर दोनों सियार उनकी दोस्ती से जलने लगे क्योकि उनने जो मंत्री बनने का सोचा था वह भी नहीं हुआ। दोनों सियार ने तरकीब निकाली और शेर के पास गए।

वह शेर से बोले बैल आपसे केवल मित्रता का दिखावा करता है। लेकिन हमने उसके मुँह से सुना है वह आपको अपने दोनों बड़े सींगो से मारकर जंगल का राजा बनना चाहता है। पहले तो शेर ने विश्वास नहीं किया लेकिन उसको ऐसा लगने लगा।

दोनों सियार इसके बाद बैल के पास गए। वह बैल से बोले शेर तुमसे केवल मित्रता का दिखावा करता है। मौका मिलने पर वह तुमको मार कर खा जायेगा। बैल को यह जानकर बहुत गुस्सा आया और वह शेर से मिलने के लिए जाने लगा।

सियार पहले ही शेर के पास जाकर बोले की बैल आपको मारने के लिए आ रहा है। बैल को गुस्से में आता देख शेर ने सियार की बात सच समझी और बैल पर हमला कर दिया। बैल ने भी शेर पर हमला किया और दोनों आपस में लड़ने लगे। अंत में शेर ने बैल को मार दिया और दोनों सियारों को अपना मंत्री बना लिया।

शिक्षा - इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की हमें कभी भी दूसरों के कहने पर अपनी मित्रता पर शक नहीं करना चाहिए। अच्छे मित्र बड़ी मुश्किल से मिलते है।

शरणागत की उपक्षा का फल

किसी नगर में चित्ररय नाम का एक राजा रहता था। उसके राज्य में पद्मसर नाम का एक सरोवर या, जिसकी सुरक्षा राजा के कर्मचारी किया करते थे। उस वा में स्वर्णपखी हंस निवास करते थे।  

वे हंस छ: छः माह के उपरांत अपने स्वर्ण पंख सरोवर में गिराते रहते थे। राजा के कर्मचारी उन पंखों को एकत्रित कर राजा को सौंप देते थे। एक दिन वहा एक बहुत बड़ा स्वर्ण पक्षी आ गया।  

हंसों ने उस पक्षी से कहा- तुम इस सरोवर में मत रहो। हम इस सरोवर में मुल्य देकर रहते है। हम प्रति छः महीने बाद राजा को अपने स्वर्ण पंख देकर इसका मूल्य चुकाते हैं। हमने यह तालाब किराए पर ले रखा है।’  

किंतु उस पक्षी ने उनकी बातों पर ध्यान न दिया इस प्रकार परस्पर दोनों के बीच विवाद पैदा हो गया। विवाद ज्यादा बढ़ गया तो वह पक्षी राजा की शरण में पहुंचा और उसके उल्टे-सीधे कान भरने लगा।  

उसने राजा से शिकायत की कि हंस उसको वहां ठहरने नहीं दे रहे हैं। वे कहते हैं कि सरोवर उन्होंने खरीद लिया है। राजा उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकता। उन्होंने आपके प्रति अपशब्द भी कहे।

मैंने उन्हें मना किया, तब भी वे नहीं माने।   इसी कारण मैं आपकी शरण में आया हूं। राजा कानों का कच्चा या। उसने पक्षी की बात को सत्य मानकर तालाब के स्वर्ण हंसों को मारने के लिए अपने कर्मचारियों को भेज दिया।  

हंसों ने जब राज कर्मचारियों को लाठियां लेकर अपनी ओर आते देखा तो वे सब समझ गए कि अब इस स्थान पर रहना उचित नहीं है। अपने वृद्ध नेता की सलाह पर वे उसी समय जलाशय से उड़ गए।  

हरिदत्त ने अपने स्वजनों को यह कया सुनाने के बाद फिर से उस क्षेत्रपाल सर्प को प्रसन्न करने का प्रयास किया दूसरे दिन वह पहले की तरह दूध लेकर सर्प की बांबी पर पहुंचा और सर्प की स्तुति की।  

सर्प बहुत देर की प्रतीक्षा के बाद अपने बिल से थोड़ा बाहर निकला और उस ब्राह्मण से बोला-‘ब्राह्मण ! अब तू पूजाभाव प्रेम नहीं हो सकता। तेरे पुत्र ने लोभवश मुझे मारना चाहा, किंतु मैंने उसे डस लिया।  

अब न तो तू अपने पुत्र के वियोग को ही भूल सकता है और न ही मैं तेरे पुत्र द्वारा स्वयं पर किए गए उसके लाठी के प्रहार को भुला सकता हूं।’   से नहीं, लोभ के वशीभूत होकर यहां आया है

अब तेरा-मेरा यह कहकर वह सर्प ब्राह्मण को एक बहुत बड़ा हीरा देकर अपने बिल में घुस गया और जाते-जाते कह गया कि अब से कभी इघर आने का कष्ट न करना।   ब्राह्मण उस हीरे को लेकर पश्चात्ताप करता हुआ अपने घर लौट आया।

यह कथा सुनाकर रक्ताक्ष ने कहा-‘महाराज! इसलिए मैं कहता हूं कि मित्रता एक बार टूट जाने पर कृत्रिम स्नेह से जुड़ा नहीं करती।   अतः शत्रु के इस मंत्री को समाप्त कर अपना साम्राज्य निष्कंटक कर लीजिए।’

रक्ताक्ष की बात सुन लेने के बाद उल्लूराज ने अपने दूसरे मंत्री क्रूराक्ष से पूछा तो उसने परामर्श दिया-‘देव ! मैं समझता हूं कि शरणागत का वध नहीं किया जाना चाहिए। एक कबूतर ने तो अपना मांस देकर भी अपने शरणागत की रक्षा की थी।’  

घमंडी गधा

एक दिन एक जौहरी एवं एक लौह व्यापारी अपने-अपने गधों पर सवा होकर कहीं जा रहे थे। जौहरी के गधे की पीठ पर रेशम का कपड़ा था और वह स्वर्ण मुद्राओं एवं कीमती जवाहरातों से भरे हुए दो थैले ढो रहा था।

वहीं लौह व्यापारी का गधा साधारण था। वह कुछ लोहे की छड़ें ढो रहा था। जौहरी के गधे को अपनी पीठ पर कीमती सामान होने के कारण घमंड हो गया। उसकी घमंड पूर्ण बातें दूसरा गधा सुन रहा था। दुर्भाग्य से,

जब वे एक जंगल से गुजर रहे थे, डाकुओं के एक गिरोह ने उन्हें रोक लिया। डाकुओं को देखकर जौहरी एवं व्यापारी अपने-अपने गधों को छोड़कर भाग खड़े हुए। डाकू सामान को देखने लगे।

उन्हें लौह व्यापारी के गधे की पीठ पर रखे सामान में कुछ भी कीमती सामान नहीं मिला। इसलिए उन्होंने उसे छोड़ दिया। जौहरी के घमंडी गधे की पीठ पर कीमती सामान देखकर वे उस पर लदे थैलों से सामान निकालने लगे।

जब गधा जरा-सा भी विरोध करता, है उसे खूब जोर-जोर से मारते। इस प्रकार उस घमंडी गधे को सबक मिल गया कि घमंड करना ठीक नहीं है। घमंडी  लोगों को हमेशा नीचा देखना पड़ता है।

भूखे कुत्ते – Moral Story in Hindi

तीन कुत्ते थे, जो आपस में गहरे मित्र थे। एक दिन, तीनों कुत्ते भूखे थे और उन्हें खाने-पीने को कुछ नहीं मिल रहा था।

अचानक उन्हें पानी की धारा में नीचे एक हड्डी पड़ी दिखी। उन्होंने वह हड्डी उठाने की बहुत कोशिश की लेकिन उस तक नहीं पहुंच पाए।

तीनों ने निश्चय किया कि अगर सारा पानी पी लिया जाए तो उन्हें हड्डी मिल जाएगी।

तीनों ने पानी पीना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में उनके पेट भर गए और फूलने लगे। वे तब भी नहीं रुके और लगातार पानी पीते गए।

उनके पेट और अधिक फूलते गए और फट गए। उनके पेटों से सारा पानी भी बाहर निकल पड़ा। तीनो कुत्ते उसी पानी की धारा में नीचे मरे पड़े थे।

शिक्षा - अगर तुम मूर्खतापूर्ण तरीकों से किसी असंभव कार्य करने की कोशिश करोगे तो तुम्हें हानि होना निश्चित है।

बंदर की जिज्ञासा और कील - Moral Story in Hindi

एक व्यापारी ने एक मंदिर बनवाना शुरू किया और मजदूरों को काम पर लगा दिया। एक दिन, जब मजदूर दोपहर में खाना खा रहे थे, तभी बंदरों का एक झुंड वहाँ आ गया।

बंदरों को जो सामान हाथ लगता, उसी से वे खेलने लगते। एक बंदर को लकड़ी का एक मोटे लट्टे में एक बड़ी-सी कील लगी दिखाई दी।

कील की वजह से लट्टे में बड़ी दरार सी बन गई थी। बंदर के मन में आया कि वह देखे कि आखिर वह है क्या।

जिज्ञासा से भरा बंदर जानना चाहता था कि वह कील क्या चीज है। बंदर ने उस कील को हिलाना शुरू कर दिया।

वह पूरी ताकत से कील को हिलाने और बाहर निकालने की कोशिश करता रहा। आखिरकार, कील तो बाहर निकल आई लेकिन लट्टे की उस दरार में बंदर का पैर फँस गया।

कील निकल जाने की वजह से वह दरार एकदम बंद हो गई। बंदर उसी में फँसा रह गया और पकड़ा गया। मजदूरों ने उसकी अच्छी पिटाई की।

शिक्षा - जिस बात से हमारा कोई लेना-देना न हो, उसमें अपनी टाँग नहीं अड़ाना चाहिए।

रेलगाड़ी

पिंकी बहुत प्यारी लड़की है। पिंकी कक्षा दूसरी में पढ़ती है। एक दिन उसने अपनी किताब में रेलगाड़ी देखी।  उसे अपनी रेल – यात्रा याद आ गई, जो कुछ दिन पहले पापा-मम्मी के साथ की थी। पिंकी ने चौक उठाई और फिर क्या था, दीवार पर रेलगाड़ी का इंजन बना दिया। उसमें पहला डब्बा जुड़ गया , दूसरा डब्बा जुड़ गया , जुड़ते – जुड़ते कई सारे डिब्बे जुड़ गए। जब चौक खत्म हो गया पिंकी उठी उसने देखा कक्षा के आधी दीवार पर रेलगाड़ी बन चुकी थी। फिर क्या हुआ  – रेलगाड़ी दिल्ली गई  ,  मुंबई गई , अमेरिका गई , नानी के घर गई , और दादाजी के घर भी गई।

शिक्षा - बच्चों के मनोबल को बढ़ाइए कल के भविष्य का निर्माण आज से होने दे।

शरारती चूहा

गोलू के घर में एक शरारती चूहा आ गया। वह बहुत छोटा सा था मगर सारे घर में भागा चलता था। उसने गोलू की किताब भी कुतर डाली थी। कुछ कपड़े भी कुतर दिए थे। गोलू की मम्मी जो खाना बनाती और बिना ढके रख देती , वह चूहा उसे भी चट कर जाता था। चूहा खा – पीकर बड़ा हो गया था। एक दिन गोलू की मम्मी ने एक बोतल में शरबत बनाकर रखा। शरारती चूहे की नज़र बोतल पर पड़ गयी। चूहा कई तरकीब लगाकर थक गया था, उसने शरबत पीना था।

चूहा बोतल पर चढ़ा किसी तरह से ढक्कन को खोलने में सफल हो जाता है।  अब उसमें चूहा मुंह घुसाने की कोशिश करता है। बोतल का मुंह छोटा था मुंह नहीं घुसता। फिर चूहे को आइडिया आया उसने अपनी पूंछ बोतल में डाली। पूंछ  शरबत से गीली हो जाती है  उसे चाट-चाट कर  चूहे का पेट भर गया। अब वह गोलू के तकिए के नीचे बने अपने बिस्तर पर जा कर आराम से करने लगा।

शिक्षा - मेहनत करने से कोई कार्य असम्भव नहीं होता।

बिल्ली बच गई

ढोलू-मोलू दो भाई थे। दोनों खूब खेलते, पढ़ाई करते और कभी-कभी खूब लड़ाई भी करते थे। एक दिन दोनों अपने घर के पीछे खेल रहे थे। वहां एक कमरे में बिल्ली के दो छोटे-छोटे बच्चे थे। बिल्ली की मां कहीं गई हुई थी , दोनों बच्चे अकेले थे। उन्हें भूख लगी हुई थी इसलिए  खूब रो रहे थे। ढोलू-मोलू ने दोनों बिल्ली के बच्चों की आवाज सुनी और अपने दादाजी को बुला कर लाए।

दादा जी ने देखा दोनों बिल्ली के बच्चे भूखे थे। दादा जी ने उन दोनों बिल्ली के बच्चों को खाना खिलाया और एक एक कटोरी दूध पिलाई। अब बिल्ली की भूख शांत हो गई। वह दोनों आपस में खेलने लगे। इसे देखकर ढोलू-मोलू बोले बिल्ली बच गई दादाजी ने ढोलू-मोलू को शाबाशी दी।

शिक्षा - दूसरों की भलाई करने से ख़ुशी मिलती है।

कौआ और घड़ा - Moral Story in Hindi

तेज गर्मी का दिन था। एक कौए को जोर से प्यास लगी थी। उसने आसपास पानी की खोज की। उसे एक घड़ा दिखाई दिया।

कौआ उड़कर घड़े के पास गया और घड़े में झाँककर देखने लगा। घड़े में तली में बहुत थोड़ा-सा पानी बचा था।

कौआ समझ गया कि पानी के लिए या तो घड़ा उलटना पड़ेगा या उसे फोड़ना पड़ेगा। दोनों ही काम उसके बस के नहीं थे।

हालाँकि, कौए ने आस नहीं छोड़ी और किसी दूसरे उपाय के बारे में सोचने लगा । उसने घड़े के पास बहुत सारे कंकड़ पड़े देखे।

उसके मन में एक विचार आया। कौए ने एक-एक करके सारे कंकड़ घड़े में डालने शुरू कर दिए।

जब काफी सारे कंकड़ घड़े में पहुँच गए तो पानी का स्तर धीरे-धीरे ऊपर आ गया। कौए की चोंच पानी तक पहुँचने लगी। उसने भरपेट पानी पिया।

शिक्षा - आवश्यकता आविष्कार की जननी है।

सोने के अण्डे वाला हंस - Moral Story in Hindi

एक दिन एक किसान ने देखा कि उसके नए हंस ने एक सुनहरे रंग का अंडा दिया है।

वह अंडा बहुत चमक रहा था। किसान ने अंडा उठा लिया। वह बहुत भारी भी था।

उसे लगा कि किसी ने उसके साथ भद्दा मजाक किया है। फिर वह अंडे को लेकर अपनी पत्नी के पास गया।

पत्नी अंडे को देखकर आश्चर्यचकित होती हुई बोली, “अरे, यह तो सोने का अंडा है, तुम्हें कहाँ से मिला?”

प्रतिदिन सुबह अब किसान को एक सुनहरा अंडा मिलने लगा। अंडे बेचकर शीघ्र ही किसान दम्पत्ति धनवान हो गए।

धन के साथ-साथ लालच ने भी आ घेरा।

एक दिन उसकी पत्नी ने कहा, “क्यों न हम हंस को मार दें हमें सारे अण्डे एक दिन में मिल जाएंगे।

हम बहुत अमीर हो जाएंगे” किसान को पत्नी की बात सही लगी। उन्होंने हंस को मार डाला पर उन्हे अण्डे मिले ही नहीं।

बेचारे हंस को भी मार डाला और कुछ हाथ भी न लगा। अब उनके पास पछताने के अलावा कोई चारा न था।

शिक्षा - लालच बुरी बला है।

गलत फैसला

एक शहर में, बाज़ार के पास घोड़ों का अस्तबल था। एक दिन, एक घोड़े का बच्चा बाज़ार के शोरगुल से घबराकर पागलों की तरह दौड़ने लगा। उसने दो बैलों को देखा तो उनके पीछे जा छुपा।

उसे ढूंढते हुए उसका मालिक वहाँ आया और उसने किसान से अपना घोड़ा वापस मांगा। लेकिन किसान ने कहा-“घोड़े ने बैलों को चुना है। बैल मेरे हैं, तो घोड़ा भी मेरा हुआ।”

यह मामला राजा के दरबार में पहुँचा। राजा ने फैसला सुनाया “घोड़ा अब किसान के पास ही रहेगा और बैल ही उसके माता-पिता होंगे।” अगली सुबह, राजा एक गली से गुज़र रहा था।

उसने देखा, घोड़े का मालिक मछली पकड़ने का जाल बिछा रहा था। राजा ने उससे पूछा-“यह क्या कर रहे हो?” उसने जवाब दिया-“जब बैल घोड़े के माता-पिता हो सकते हैं, तो मैं गली में मछली क्यों नहीं पकड़ सकता?”

इतना सुनते ही राजा को अपनी गलती का एहसास हो गया। इस तरह से घोड़े के मालिक को उसका घोड़ा वापस मिल गया।

चालाक सोमू

एक बार सीमा नाम का एक गरीब युवक था। उसके पास एक लंगड़ा घोड़ा और एक फटा हुआ कोट था। एक दिन, चारों ओर बर्फ पड़ रही थी। सोमू अपने लंगड़े घोड़े पर उदास बैठा था।

तभी उसने गर्म कपड़े पहने, घोड़े पर सवार एक आदमी को आते देखा। उसे देख सोमू अपने घोड़े पर अकड़कर बैठ गया और गाना गाने लगा। आदमी उसे देखकर बहुत हैरान हुआ।

उसने सोमू से पूछा-“क्या तुम्हें ठंड नहीं लगती?” सोमू ने जवाब दिया-“इन छेदों से हवा बाहर निकल जाती है, इसलिए यह कोट काफी गर्म है। परंतु लगता है, तुम्हें ठंड लग रही है।”

सीमा ने कहा-“तुम ठीक कह रहे हो। कृप्या, अपना कोट मुझे बेच दो।” “नहीं, इसके अलावा मेरे पास इस ठंड में पहनने को कुछ नहीं है।-सोनू ने कहा।

“मैं तुम्हें अपना कोट दे दूंगा और हम अपने घोड़े भी बदल लेंगे।” वह गिड़गिड़ाया। “ठीक है।”-सोनू ने कहा। उसने जल्दी से उस आदमी का कोट और घोड़ा लिया और वहाँ से भाग गया।

रेत भरी सड़क – New Moral Stories in Hindi

एक दिन एक व्यापारी ने व्यापार करने के लिए शहर जाने का निश्चय किया। उसने अपने साथ कुछ और लोगों को भी ले लिया। शहर जाने के लिए उन्हें रेगिस्तान से गुजरना था।

जब वे लोग रेगिस्तान पहुंचे, तो उन्हें बहुत गर्मी लगने लगी। व्यापारी और उसके साथियों ने तय किया कि शेष यात्रा वे रात में करेंगे। जब रात हुई, तो उन्होंने अपनी यात्रा फिर शुरू कर दी।

उनमें से एक व्यक्ति को सितारों की जानकारी थी। वह सितारों की स्थिति के अनुसार लोगों को आगे बढ़ने का रास्ता बताने लगा। उन लोगों ने बिना रुके सारी रात यात्रा की। दिन होने पर वे रुक गए और वहीं आराम करने लगे।

दो दिन इसी तरह यात्रा करते रहे। अब उनकी यात्रा एक दिन की और बची थी। अचानक, उनके पास का सारा पानी समाप्त हो गया। सारे लोग थक चुके थे और बिना पानी पिए यात्रा करने की उनमें शक्ति नहीं बची थी। वे बैठ गए।

व्यापारी ने पानी खोजने का निश्चय किया। वह चल पड़ा। आखिरकार, उसे कुछ घास दिखाई दी। वह सोचने लगा, “यहाँ घास होने का मतलब है कि यहीं धरती के नीचे पानी भी होगा।”

उसके सारे साथी भागकर वहाँ आ गए और खुदाई करने लगे। उन लोगों के खोदे गड्ढे में व्यापारी कूद गया और उसमें पड़ी चट्टान से कान लगाकर कुछ सुनने की कोशिश करने लगा।

उसने अपने साथियों से कहा, “मुझे इस चट्टान के अंदर पानी बहने की आवाज सुनाई दे रही है। हमें उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।”

ऐसा कहकर वह व्यापारी गड्ढे से बाहर निकल आया और अपने साथियों से बोला, “अगर तुम लोगों ने हिम्मत खो दी, तो हम भी खो जाएँगे। इसलिए हिम्मत मत हारो और खुदाई करते रहो। “

सारे साथी हथौड़े से चट्टान तोड़ने में जुट गए। व्यापारी की बात मानकर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आखिरकार, चट्टान टूट गई और गड्ढा पानी से लबालब भर गया। सारे लोगों ने छककर पानी पिया। उन्होंने अपने बैलों को भी पानी पिलाया और जमकर स्नान भी किया।

नहाने-धोने के बाद वे अपने साथ लाई लकड़ियाँ चीरने लगे । उन लकड़ियों से उन्होंने आग जलाई और चावल पकाए । सभी ने खाना खाया और दिन भर आराम किया।

उन लोगों ने उस गड्ढे के पास एक झंडा भी गाड़ दिया, ताकि आने-जाने वाले यात्रियों को भी पानी का पता लग जाए।

दिन ढलने के बाद सभी ने फिर से यात्रा शुरू कर दी और सुबह तक शहर पहुँच गए। वहाँ उन्होंने अच्छी तरह से व्यापार किया और अच्छा मुनाफा कमाकर अपने गाँव लौट आए।

शिक्षा - इच्छा और संकल्प से सब कुछ हासिल किया जा सकता है।

अब तुम पत्थर गिनो – Ab Tum Patthar Gino

एक अमीर आदमी एक गाँव में रहा करता था। वह बहुत कंजूस था। उसके पास कई सोने के सिक्के थे। उसने एक सिक्के में सोने के सिक्के रखे थे और उसे पिछवाड़े में गाड़ दिया। हर दिन आधी रात को कंजूस जागता था और पिछवाड़े जाकर देखता था कि सोने के सिक्के सुरक्षित हैं या नहीं।

आओ। देखते हैं कि मेरे सोने के सिक्के सुरक्षित हैं या नहीं। एक। दो। तीन। चार पाच। छह। और 1000 में।

वह हर दिन आधी रात को उठता था और सोने के सिक्के गिनता था। यह कंजूस की दिनचर्या थी। आओ। चलो देखते हैं। एक। दो। तीन। चार। पांच। और 1000 में। एक दिन कंजूस के पड़ोसी उसके पास किसी काम के लिए आए। और कहा।

मैं अपने बेटे को शिक्षा के लिए शहर भेजना चाहता हूं। लेकिन मेरे पास पैसा नहीं है। अगर आप मेरी मदद करेंगे, तो यह बहुत अच्छा होगा। महान! महान! नहीं ऐसा नहीं है। मेरा मतलब है, एक बार मेरे पास पैसा होगा, तो मैं इसे चुकाऊंगा।

तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई! आप अन्य पैसे पर आनंद लेना चाहते हैं। क्या आपको शर्म नहीं आती? दफा हो जाओ। आपको एक पैसा नहीं मिलेगा। अपने बेटे को शिक्षित करना चाहते हैं।

मुझे क्या परवाह है कि आप अपने बेटे को शिक्षित करते हैं या नहीं?

आओ। जाने देना। अपने पड़ोसियों को छोड़ने के लिए कहने के बाद, कंजूस  फिर से सोने के सिक्के गिनने के लिए रात को पिछवाड़े गया। आओ। मुझे मेरे सोने के सिक्के की जाँच करने दो।

एक। दो। तीन। चार। पांच। छह। आज भी सोने के सिक्के वही हैं। जब कंजूस सोने के सिक्के गिन रहा था तभी पिछवाड़े में छिपे एक चोर ने उसे देख लिया। चोर चुपके से हर्षित हो गया 8९, 999 और 1000 में। शानदार! महान!

आज भी सोने के सिक्के वही हैं। कंजूस के घर लौटने के बाद चोर ने बर्तन से सोने के सभी सिक्के निकाल दिए। और उसने बर्तन को पत्थरों से भर दिया। और चोर वहां से चला गया।

अगली रात कंजूस सोने के सिक्के गिनने के लिए पिछवाड़े में आया। आओ। चलो देखते हैं। सोने के सिक्के कहां हैं? पत्थर। ये कैसे हुआ? मैं बर्बाद हो गया हूं। मैं नष्ट हो गया हूं। मैं नष्ट हो गया हूं। मैं नष्ट हो गया हूं।

मेरे सोने के सिक्के चोरी हो गए हैं। मैं समाप्त हो चुका हूँ। मैं समाप्त हो चुका हूँ। मैं समाप्त हो चुका हूँ। बात सुनो। बात सुनो। हमारा पड़ोसी जोर-जोर से चिल्ला रहा है। क्या हुआ? चलो देखते हैं। आओ। रुको। मैं जाकर देखूंगा। – मैं भी आऊंगा।

मैं समाप्त हो चुका हूँ। मैं समाप्त हो चुका हूँ। – क्यों? क्या हुआ? आपको क्या हुआ? – क्या हुआ? क्या हुआ? मैं बर्बाद हो गया हूं। मैं नष्ट हो गया हूं। मगर क्या हुआ? – हाँ।

एक बर्तन में मेरे पास रखे 1000 सोने के सिक्के चोरी हो गए। चोरी हो गया। – क्या?

चार साल तक यह बर्तन में था। मैं रोज आकर उसे गिनता। लेकिन आज, मैं बर्बाद हो गया हूं। मैं बर्बाद हो गया हूं। – शांत हो जाओ। पहले शांत हो जाओ। शांत हो जाओ? मैं कैसे शांत होऊं? अब मैं क्या करूंगा? हे भगवान! – बात सुनो। देखो, मेरी बात सुनो।

चार साल से यहां सोने के सिक्के नहीं थे? हाँ। हाँ। आपको इतने सालों में इसकी आवश्यकता नहीं थी। हाँ। सच। सच। इसका मतलब है आपको भविष्य में भी इसकी आवश्यकता नहीं होगी। यह भी सच है।

आप बस यहाँ आते हैं और इसे गिनते हैं। है न? हां। हाँ।

आप भविष्य में भी गिन सकते हैं। अभी तक आप सोने के सिक्के गिनते थे। आज से आप पत्थर गिन सकते हैं। – क्या! बेशक। सोने के सिक्कों का एकमात्र उपयोग यह था कि आप इसे गिनते थे। अगर यह नहीं है तो क्या फर्क पड़ता है? आज आपके पास सोने के सिक्कों की जगह पत्थर हैं। बस।

और क्या? दोनों का कोई फायदा नहीं है। मैं समझ गया हूं कि आप क्या कह रहे हैं। – हाँ। केवल धन दौलत नहीं होनी चाहिए। – हाँ।

मेरे पास मौजूद सोने के सिक्के …. आपके बेटे को ही नहीं, बल्कि गाँव के सभी बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते थे। हाँ। – मुझे अपनी गलती का अहसास हो गया है। और मुझे सजा भी मिली है। मैं इस गलती को नहीं दोहराऊंगा। मैं नहीं करूंगा ।

शिक्षा - अत्यधिक लालच हानिकारक है।

हँसना मना है – No Smiles Today

शांति और अरुण अच्छे दोस्त थे। उन्होंने साथ में बहुत मस्ती की। उन्होंने कक्षा में रहस्य साझा किए। उन्होंने साथ में बहुत मस्ती की। उन्होंने कक्षा में रहस्य साझा किए। वे घर के रास्ते पर दौड़ पड़े। वह हमेशा हंसमुख थी। एक दिन, शांति धीरे-धीरे कक्षा में आई।

उसका सिर मुड़ा हुआ था। वह उदास लग रही थी। क्या किसी ने तुम्हें डाँटा था? अरुण से पूछा। शांति ने सिर हिला दिया। शांति ने सिर हिला दिया।

वह बैठ गई और उसने ऊपर नहीं देखा। उसने प्रेजेंट का जवाब नहीं दिया! जब सोना ने अपना नाम मिसकॉल किया। सोना मिस ने फिर कहा, इस बार जोर से, शांति कुमार! शांति ने हाथ उठाया। क्या आपके गले में खराश है? उसके शिक्षक ने उससे पूछा। शांति ने सिर हिला दिया।

उसके गाल लाल थे और ऐसा लग रहा था जैसे उसे बुखार था। क्या आप ठीक महसूस कर रहे हैं? सोना मिस ने पूछा। क्या आप ठीक महसूस कर रहे हैं? सोना मिस ने पूछा। शांति ने सिर हिलाया, फिर भी हिम्मत नहीं हुई।

अभी भी देखने की हिम्मत नहीं कर रहा है। शांति इतनी उदास क्यों दिखती है? शांति इतनी उदास क्यों दिखती है? क्या आपका छोटा भाई ठीक है? क्या आपका पिल्ला ठीक है? क्या आपका पिल्ला ठीक है? क्या आपकी दादी ठीक हैं?

शांति अपने प्रत्येक मित्र को अपना सिर हिलाती रही। शांति अपने प्रत्येक मित्र को अपना सिर हिलाती रही। लेकिन उसने नहीं देखा। अरुण उसे मुस्कुराना चाहता था। उसका अंदाजा था! उसने अपने बैग से कुछ निकाला। उसने अपने बैग से कुछ निकाला।

जैसे ही वह इसे शांति को दिखाने के लिए दौड़ा, यह उसके हाथ से फिसल गया। शांति ने उसकी ओर कुछ उड़ते हुए देखा और उसने उसे पकड़ लिया। यह एक बड़ा, हरा, रबर मेंढक था! यह एक बड़ा, हरा, रबर मेंढक था!

शांति की आँखें खुली की खुली रह गईं। फिर उसने हँसने के लिए अपना मुँह खोला। फिर उसने हँसने के लिए अपना मुँह खोला। अरुण और उसके दोस्तों ने देखा कि वह पूरे दिन मुस्कुराया या बात क्यों नहीं की! उसके सामने के चार दांत गायब हो गए थे!

अलीबाबा और खजाना – Hindi Moral Stories

पर्शिया में अलीबाबा और कासिम नामक दो भाई रहते थे। कासिम एक धनवान सौदागर था पर अलीबाबा एक गरीब लकड़हारा था।

एक दिन अलीबाबा जंगल में लकड़ी काटने गया हुआ था। वहाँ उसने चालीस लुटेरों को घोड़े पर सवार आते देखा। एक गुफा के सामने उनका नेता घोड़े से उतरा और बोला,

“खुल जा सिमसिम!” गुफा का दरवाजा खुल गया और लुटेरे भीतर चले गए। थोड़ी देर बाद वे बाहर आए। उनके नेता ने फिर कहा,

“बंद हो जा सिम सिम!” और गुफा का दरवाजा बंद हो गया। उनके जाने के बाद अलीबाबा उसी तरह बोलकर गुफा में चला गया।

वहाँ उसने ढेर सारे सोने, जवाहरात, अशर्पिफयाँ और तरह तरह की बहुमूल्य वस्तुएँ देखीं। जितना भर सकता था अपने थैले में भरकर, गधे की पीठ पर लादा और घर आ गया।

अलीबाबा ने अपने भाई कासिम को जाकर सारी बातें बताईं। कासिम उन जादुई शब्दों को याद करता हुआ गुफा के पास जाकर बोला, “खुल जा सिमसिम!” गुफा का दरवाजा खुला, कासिम भीतर गया और दरवाजा बंद हो गया।

अपार संपत्ति देखकर वह अपने सुध-बुध खो बैठा। थैले भरे पर जादुई शब्द वह भूल गया। वह वहीं बंद रहा और लुटेरों के आने पर वह मारा गया।

शिक्षा - सोच समझ कर कार्य करना चाहिए।

जादुई पत्थर – Hindi Moral Stories

किसी समय की बात है, एक प्यारी सी बालिका थी पर वह बहुत ही गरीब थी। उसे भरपेट खाना भी नहीं मिलता था। एक दिन भूख से बेहाल बालिका जंगल में फल ढूँढने गई। वहाँ उसकी मुलाकात एक वृद्धा से हुई।

बालिका ने वृद्धा से कहा, “नमस्ते, दादी माँ!” वृद्धा ने आशीर्वाद देते हुए कहा, “नन्ही बालिका, बड़ी प्यारी हो। बताओ, तुम्हें क्या चाहिए?”

बालिका ने बताया कि वह बहुत भूखी है। वृद्धा ने एक पात्र निकाला और कहा, “नन्हे पात्र, पकाओ!” पात्र ने दलिया पकाया। कटोरा भर जाने पर वृद्धा बोली, “नन्हे पात्रा, रुक जाओ!” पात्रा ने आदेश का पालन किया और पकाना बंद कर दिया ।

बालिका ने जी भरकर दलिया खाया। जाते समय वृद्धा ने वह पात्र उसे देते हुए कहा कि इन जादुई शब्दों को सदा याद रखना।

बालिका ने घर आकर अपनी माँ को वह पात्र दिया और सोने चली गई। माँ ने पात्र से कहा, “नन्हे पात्रा, पकाओ!” पात्र ने दलिया पकाया। घर के सारे बर्तन दलिये से भर गए।

धीरे-धीरे पूरा कमरा भर गया। माँ उसे रोकने वाले जादुई शब्द नहीं जानती थी। सोकर उठने पर बालिका ने कहा, “नन्हे पात्र, रुक जाओ!” पात्र ने पकाना बंद कर दिया और फिर पूरे गाँव ने जी भरकर दलिया खाया।

शिक्षा - कुछ मिलने से बेहतर है कुछ बाँटना।

दोस्तों उम्मीद है कि आपको हमारे दुबारा शेयर की Moral Stories in Hindi पसंद आयी होगी। अगर आपको हमरी यह पोस्ट पसंद आयी है तो आप इससे अपने Friends के साथ शेयर जरूर करे। दोस्तों अगर आपको हमारी यह साइट StoryLiterature.Com पसंद आयी है तो आप इसे bookmark भी कर ले।

Post a Comment

Previous Post Next Post