Short Story in Hindi for Class 1 - हेलो आज की इस पोस्ट में हम आपके साथ Short Story in Hindi for Class 1 में शेयर करने जा रहे है। इन stories आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।आप इन Short Story in Hindi for Class 1 को पूरा पढ़े। आपको यह Stories बहुत पसंद आएगी। 

Short Story in Hindi for Class 1

Short Story in Hindi for Class 1 List 

पिता और पुत्री

खजाने की खोज

सुंदर फुल

पालतू कुत्ता और बाघ

अंधे व्यक्ति की सूझ-बूझ

झूठा आदमी

घोड़े की जीत 

शेर और व्हेल की मित्रता

एक कृतघ्न बाघ

मुखिया की सलाह

न्याय-अन्याय

बकरी और भेड़िये की कहानी

कछुआ और चिड़िया की कहानी

मेंढक और उसके मित्र

सेवा

नुकसान

बुरी संगत

पिंजरे में कैद बाघ

लोमड़ी और लकड़हारा

पूँछकटी लोमड़ी

भगवान की दूत

दया क्या है

सौतेली मां और बेटा

करनी का नतीजा

पर्वत कैसे बने

जनता की राय साहबी

जादुई छड़ी

बत्तख और लोमड़ी

सच्चा दोस्त

लालची कुत्ता

किसान और उसके आलसी बेटे

कौआ और चील

झूठी शपथ

पिता और पुत्री – Moral story in Hindi for class 1 Short

एक बार की बात है, एक युवती अपने पिता के साथ बैठे गाड़ी चला रही थी। बस कुछ ही मील के बाद, बह दोनों एक तूफान में आ गए। फिर लड़की ने पिता से पूछा, “मुझे क्या करना चाहिए?”

पिता ने जवाब दिया, “गाड़ी चलाते रहो।” कुछ मील के बाद ही उसने देखा, कि तूफान के कारण अन्य गाड़ी एक तरफ खींचने लगी। इसके कारण लेकिन थोड़ा डर गई।

फिर पिता से पूछा, “क्या मुझे भी खींचना चाहिए?” पिता ने जवाब दिया, “नहीं, तुम बस गाड़ी चलाते रहो।” तूफान और अधिक भयानक लग रहा था।

उसके लिए गाड़ी आगे ले जाना मुश्किल हो गया। उसे लगा गाड़ी अभी रोकनी चाहिए और किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाना चाहिए।

लेकिन, उसने तूफान के माध्यम से गाड़ी चलाना जारी रखा। क्योंकि उसके पिता ने उसे कहा, कि वह गाड़ी चलाते रहे। वह तूफान के माध्यम से गाड़ी चलाता रहा।

जल्द ही उसने, पहले की तुलना में थोड़ा अधिक बेहतर देखने में सक्षम रहा। कुछ मील के बाद, वह एकदम तूफान से बाहर आ गया। पिता ने कहा, “अब तुम बाहर निकल सकते हो।”

लड़की ने कहा, “लेकिन, अब क्यों? अभी तो हम तूफान से बाहर हैं।” पिता ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, ‘जब आप बाहर निकलते हैं, तो आप उन सभी लोगों को देख सकते हैं।

जिन्होंने हार मान ली है और कुछ तूफान के साथ अभी संघर्ष कर रहे हैं। आपने कभी हार नहीं मानी और हमेशा आगे बढ़ते रहे। क्योंकि, आपने कभी तूफान को नहीं छोड़ा।”

नैतिक शिक्षा - जीवन में कठिन समय के माध्यम से मानसिक तनाव को समाप्त करना सफलता की कुंजी है।

खजाने की खोज

एक बार की बात है, एक गांव में विजय नाम की एक बूढ़ा किसान अपनी तीनों बेटे के साथ रहता था। पिता ने अपनी तीनों बेटे को बहुत बार अपने साथ खेत में काम करने के लिए कहा।

लेकिन, वह तीनों बहुत आलसी थे। वह अपनी पिता की तरह धूप और बारिश में काम नहीं करना चाहते थे। एक दिन, किसान बीमार पड़ गया, वह मरने वाले थे।

उसने अपनी तीनों बेटे को बुलाकर कहा, “बेटे, मरने से पहले तुम तीनों को कुछ रहस्य बताना चाहता हूं। हमारी खेत में जमीन के नीचे कुछ छुपे हुए खजाना है।

यदि तुम तीनों जमीन को ठीक से खोजते हो तो तुम्हें वह खजाना मिलेगी। यह कहकर बूढ़ा किसान मर गई। लड़कों ने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया।

फिर, एक दिन तीनो भाई खेत में गया छुपे हुए खजाने को खोजने के लिए। वह तीनों जमीन को अच्छे से खुदाई किया। लेकिन उन्हें वह खजाना नहीं मिली, वह तीनों निराश हो गई थी।

फिर बड़े भाई अन्य तीनों भाइयों को जमीन में बीज बोने के लिए कहा। क्योंकि तीनों भाई ने जमीन को अच्छी तरह से खुदाई किए थे, फिर उन्होंने ऐसा किया।

फिर कुछ महीने बाद उन्हें अपने खेत में अच्छी फसल मिली। उन्होंने फसल काट ली और उन्हें बेचकर बहुत पैसा कमाया। अब बड़े भाई अपने दो भाइयों को कहा,

मैं समझ गया हूं, हमारी पिता को छुपे हुए खजाने से क्या मतलब था। छुपे हुए खजाने यह फसल है। जो हमें मिली केवल जमीन को अच्छी तरह से खोदकर और वहां बीज बोने के हमें यह खजाना मिली।

नैतिक शिक्षा - मेहनत का फल हमेशा मीठा होता है।

सुंदर फुल – Story in Hindi for class 1 with moral

एक बार की बात है, एक लड़की था जिसे बागबानी का बहुत शौक था। वह फूलों से प्यार करती थी और अपने घर के बाहर एक सुंदर बगीचा बना रखी थी।

एक दिन, नए फूलों की तलाश में, उसे एक बहुत सुंदर फूल मिला। उसने इसे अपने बगीचे में लगाना चाहती थी। इसीलिए, लड़की ने उसकी बीज लेकर घर आया।

जब यह आया, तो वह अपने घर के पीछे, वहां उसने दीवार के आधार पर लगाया। फिर कुछ दिन बाद, पूरी दीवार पर सुंदर पत्तियों के साथ पौधे बड़े हो गए। लेकिन, एक भी फूल नहीं थे।

बस उस खूबसूरत फूल को देखने के लिए। बह रोज उसमें पानी डालता गया और उसकी बहुत देखभाल की। फिर भी, दीवार पर उन पत्तियों के बीच एक भी फूल नहीं था।

एक महीने बीत गए, लेकिन अभी भी फूल नहीं खिले। फिर, उसने निराश होकर उस पौधे को काटने के बारे में सोचा। तभी उनके पड़ोसी ने उसके दीवार के पीछे से बुलाया।

वह हैरान थी। क्योंकि, उसने कभी एक दूसरे से ज्यादा बात नहीं की थी। उसके पड़ोसी ने कहा, “धन्यवाद! इतने खूबसूरत फूल लगाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

आप सोच नहीं सकते, मुझे उन फूलों को देखकर कितना खुशी महसूस होता है। वास्तव में यह फूल बहुत ही सुंदर है।” उसकी बात सुनकर लड़की पड़ोसी के घर के पीछे चली गई।

और अपने दीवार को पड़ोसी की ओर से देखा। उसने देखा, दीवार फूलों से भरी थी। वे सबसे सुंदर फूल थे, जिन्हें उसने कभी नहीं देखा था।

उसने देखा की लताएं दीवार से गुजरती है। और उसकी दीवार की तरफ पौधे में कोई भी फूल नहीं था। लेकिन, दीवार की दूसरी तरफ फूलों से भरी हुई थी।

नैतिक शिक्षा - आप अपने श्रम के अच्छा परिणाम नहीं देख सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि कोई फल नहीं है।

पालतू कुत्ता और बाघ – Hindi story for class 1 with moral

कुछ साल पहले की बात है, एक बार शाम को एक पालतू कुत्ता गांव के पास जंगल किनारे रास्ते में टहल रहा था। तभी उनके साथ एक बाघ का मुलाकात हुआ।

दो दिन से खाना ना खाने की वजह से बाघ बहुत कमजोर था। उसे चलने में तकलीफ हो रहा था। पालतू कुत्ता की तंदुरुस्त शरीर को देखकर बाघ उससे पूछा,

“तुम तो बहुत तंदुरुस्त हो। तुम्हें खाना कहां से मिलता है? तुमको देख कर ऐसा लगता है तुम्हें खाना ढूंढने के लिए कष्ट नहीं होता, मुझे देखो मैं दो दिन से कुछ भी नहीं खाया बूढ़ा हो गया हूं।

पहले की तरह रोज रोज शिकार नहीं कर सकता, इसीलिए रोज खाना भी नहीं मिलता।” बाघ की हालत देखकर कुत्ता की मन में दया आया।

उसने कहा, “हां, मुझे खाना नहीं ढूंढना पड़ता है। मेरे मालिक मुझे रोज दो वक्त का खाना देता है और वह भी बहुत स्वादिष्ट। मैं जो काम करता हूं,

अगर तुम भी मेरे साथ काम करोगी तो तुम्हें भी रोज दो वक्त का स्वादिष्ट खाना मिलेगा। फिर तुमको रोज रोज शिकार नहीं करना पड़ेगा। बाघ कुत्ता की बात सुनकर उसके साथ काम करने के लिए राजी हो गए।

फिर बाघ कुत्ता के साथ उसके मालिक के घर जा रहा था। थोड़ी दूर जाने के बाद बाघ आश्चर्य होकर कुत्ता से पूछा, “भाई, तुम्हारे गले में यह क्या है?”

कुत्ता जवाब दिया, “कुछ नहीं, यह तो एक पट्टा है अरे दिन में तो मैं जंजीरों में बांधे रहता हूं।” कुत्ता की बात सुनकर बाघ हैरान हो गया।

उसने कहा, “मुझे ऐसा सुख नहीं चाहिए। मैं भोजन के लिए अपनी आजादी का सौदा नहीं कर सकता। मैं किसी का गुलाम होने से अच्छा भूखा रहूंगा।” यह कहकर बाघ जंगल में लौट गए।

नैतिक शिक्षा - जंजीरों की तुलना में बेहतर भूख हो।

अंधे व्यक्ति की सूझ-बूझ

एक नगर में एक अंधा व्यक्ति रहता था। वह स्पर्श मात्र से ही किसी भी चीज को पहचान लेता था। उसका एक बेटा था।

एक दिन उसका बेटा जंगल से एक भेड़िए का एक बच्चा पकड़ लाया और उसे अपने पिता की गोद में डालते हुए बोला,

“पिताजी! बताइए, यह क्या है? ” अंधे ने भेड़िए के बच्चे के शरीर पर हाथ फेरा और बोला, “मुझे पूरी तरह तो नहीं मालूम,

पर फिर भी कह सकता हूँ कि यह जानवर लोमड़ी या उसी की प्रजाति का है।

साथ ही, यह बात तो मैं दावे से कह सकता हूँ कि यह भेड़ से अलग है।”

इस तरह उस अंधे व्यक्ति ने अपनी बुद्धिमानी से बिना देखे ही दिए गए जानवर को पहचान लिया और सिद्ध कर दिया कि आँखों के न होने पर भी व्यक्ति को सामान्य काम करने में बाधाएँ नहीं आती।

शिक्षा - सूझ-बूझ व समझदारी से हर काम किया जा सकता है।

झूठा आदमी

एक बार एक व्यक्ति बहुत बीमार पड़ गया। उसके बचने की कोई आशा नहीं थी। लेकिन मरते-मरते भी उस आदमी ने भगवान से प्रार्थना की,

“हे भगवान! यदि आप मुझे थोड़ी उम्र और दे दें तो मैं आपको सौ बैलों की बलि चढ़ाऊंगा।” भगवान ने उसकी प्रार्थना सुन ली और उसे स्वस्थ कर दिया।

परंतु स्वस्थ होने पर उस आदमी की नीयत बदल गई और उसने सौ बैलों की मिट्टी की मूर्तियाँ बनाईं और उन्हें हवनकुंड में डाल कर बोला, “है भगवान!

मैं तुम्हें अपनी शपथ के अनुसार सौ बैलों की बलि दे रहा हूं। कृपया इसे स्वीकार करें।%” उस व्यक्ति की बेईमानी पर भगवान बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने उसे स्वप्न में आकर कहा,”बेटा!

समुद्र तट पर कल तुम्हें सोने की सौ मोहरें मिलेंगी।” वह व्यक्ति लालची तो था ही, इसलिए रात में ही समुद्र की ओर चल पड़ा।

वहाँ पहुँचने पर समुद्री डाकुओं ने उस पर जमकर कोड़े बरसाए और दास बनाकर अपने साथ ले गए।

शिक्षा - झूठ बोलना पाप है।

घोड़े की जीत 

एक दिन एक घोड़े और एक हिरण में इस बात पर बहस शुरू हो गई कि दोनों में कौन अधिक तेज दौड़ सकता है।

घोड़ा कह रहा था कि मैं सबसे तेज दौड़ सकता हूँ। दूसरी ओर हिरण भी अपनी जिद पर अड़ा हुआ था।

उसका भी यही कहना था कि वह सबसे अधिक तेज दौड़ सकता है। आखिरकार घोड़ा एक व्यक्ति के पास जाकर बोला,

“क्या, आप मेरी मदद कीजिए, ताकि मैं हिरण को हरा सकूँ।

” वह आदमी बोला, “ठीक है ! मैं तुम्हारी मदद करने को तैयार हूँ लेकिन सबसे पहले मैं तुम्हारी पीठ पर काठी डाल कर बैठना चाहूंगा।”

घोड़ा इस बात के लिए राजी हो गया। आदमी तुरंत उसकी पीठ पर काठी डाल कर बैठ गया।

फिर दोनों ने हिरण को हरा दिया। हिरण को हराने के बाद घोड़ा आदमी से बोला,”अब आप मेरी पीठ से उतर जाओ।” आदमी बोला,

“मैं नहीं उतरूंगा क्योंकि अब तुम पर मेरा अधिकार हो गया है और तुम्हें अब वही करना पड़ेगा, जो मैं चाहूंगा।”

शिक्षा - में अनजान व्यक्ति पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

शेर और व्हेल की मित्रता

एक दिन एक शेर समुद्र के किनारे खड़ा होकर लहरों को तट से टकराते हुए देख रहा था। तभी उसकी नजर पानी की सतह पर आई व्हेल पर पड़ी। वह बोला, “व्हेल! तुम कितनी सुंदर और बड़ी हो।

जिस तरह मैं जंगल के जानवरों का राजा हूँ, उसी तरह तुम समुद्र के सभी जीवों की रानी हो। क्यों न हम दोनों दोस्त बन जाएँ,

ताकि मुसीबत के वक्त एक दूसरे के काम आ सकें?” “विचार तो अच्छा है,” कहकर व्हेल समुद्र के अंदर चली गई।

कुछ दिनों बाद अचानक व्हेल ने देखा कि एक बैल शेर के पीछे पड़ा है। समुद्र तट पर आकर शेर ने व्हेल को मदद के लिए पुकारा, पर जैसे ही व्हेल समुद्र से बाहर निकलने लगी, उसका दम घुटने लगा।वह दोबारा समुद्र में चली गई।

यह देखकर शेर को बहुत बुरा लगा। बाद में शेर ने व्हेल से पूछा कि वह मुसीबत के समय उसकी मदद के लिए क्यो नहीं आई तो वह बोली,

“इसमें मेरी कोई गलती नहीं है, क्योंकि भगवान ने मुझे सिर्फ पानी में ही शक्तिशाली बनाया है। पानी से बाहर आकर मैं जीवित नहीं रह सकती।”

शिक्षा - दोस्ती बराबर वालों में ही अच्छी होती है।

एक कृतघ्न बाघ

एक बार, एक जंगल में एक बाघ रहता था। एक दिन वह किसी जानवर का शिकार करके खा रहा था। एक हड्डी उसके दांतों में फस गया।

हड्डी दातों में फंसने के कारण बाघ कुछ भी खाने का समर्थन नहीं रहा। उसकी दातों में और गले में बहुत तेज दर्द महसूस हो रहा था। वह दर्द में पूरा दिन रोता रहा।

जंगल की सभी जानवर उससे डरते थे। किसी ने भी उसके पास जाने का हिम्मत नहीं की। एक बहादुर सरस रोते हुए बाघ को देखा उसे बाघ पर दया आई।

सरस उसके पास गया और पूछा, “आपके साथ क्या गलत हो गया दोस्त?” “एक हड्डी मेरी दांतों में फस गई है,” बाघ ने कहा। सरस ने कहा, “यदि आप आज्ञा दे तो मैं इसे आपकी दांतो से बाहर निकल सकता हूं।”

बाघ ने कहा, यदि तुम ऐसा करते हो तो मैं तुम्हारा आभारी रहूंगा। सरस ने कहा मुझसे वादा करो के तुम मुझे नहीं खाओगे। बाघ सरस से वादा किया हड्डी निकालने के बाद वह उसे नहीं खाएगा।

सरस बहुत दयालु था परंतु चतुर भी था। जैसे ही वह अपनी मुंह खोला सरस एक छोटा स्टिक उसके मुंह में रख दी। फिर उसने हड्डी को बाहर खींच लिया अपने लंबी चोच की मदद से.

हड्डी निकाल देने से बाघ की मुंह में दर्द बिल्कुल चला गया था। भूखा बाघ अब सरस को पकड़कर खाना चाहता था। लेकिन उसके मुंह में स्टिक होने के कारण वह ऐसा नहीं कर पाया।

सरस दूर उड़ गया यह कहते हुए तुम एक कृतघ्न बाघ हो। मैं तुम्हारा मदद किया और तुम मुझे ही खाना चाहते हो।

शिक्षा - कभी-कभी अकल से काम लेने से बड़ी से बड़ी मुश्किल को हराया जा सकता है।

मुखिया की सलाह

उन्होंने तुरंत जाल खींचा। जाल में मछली नहीं, बल्कि पत्थर और कूड़ा-करकट फँसा था।

यह देखकर मछुआरे निराश हो गए। उन्हें निराश देखकर उनका मुखिया बोला, “इस तरह निराश मत हो।

थोडा हिम्मत व धैर्य रखो। देखना, हम लोग मछली पकड़ने में जरूर सफल होंगे। तुम लोग जाल को भारी जानकर अति उत्साहित हो गए थे।

हमें हमेशा सफलता की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। लेकिन जब तक सफलता न मिल जाए, तब तक प्रयास करते रहना चाहिए।”

मुखिया की बातें सुनकर मछुआरों की हिम्मत बंधी और वे फिर से जाल फेंकने के लिए तैयार हो गए।

शिक्षा - हमें असफलता से निराश नहीं होना चाहिए।

न्याय-अन्याय

उस समय की बात है, जब ईश्वर ने सृष्टि का निर्माण किया था। मानव ने शक्तिशाली जानवरों और उड़ते पक्षियों को देखकर सोचा कि भगवान ने उसके साथ अन्याय किया है।

एक दिन वह भगवान से बोला, “हे भगवान! तुमने किसी जीव को शक्ति दी है, किसी को गति तो किसी को पंख|

लेकिन मुझे ऐसी कोई शक्ति नहीं दी। आपने मेरे साथ अन्याय किया है।

मुझे भी ऐसा ही कोई अच्छा तोहफा दीजिए।” भगवान ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैंने सबसे अच्छा तोहफा तुम्हें ही तो दिया है।

वह है, ‘बोलने की शक्ति’।

इसी के कारण तुम अपनी इच्छा और नाखुशी मुझे बता पा रहे हो, जबकि बाकी जीव अपनी बात मुझ तक नहीं पहुँचा सकते।

तुम्हें अपनी शक्ति को पहचानना चाहिए।” भगवान की बातों से आश्वस्त होकर मानव ने उन्हें अनमोल तोहफा देने के लिए धन्यवाद दिया और लौट आया।

शिक्षा - हमें अपनी विशेषताओं का आकलन करना आना चाहिए।

बकरी और भेड़िये की कहानी

एक बार एक जंगल में एक बकरी घास खा रही होती है की तभी वहां एक भेड़िया आ जाता है।

बकरी उसे देखते ही भागने लगती है और भागते हुए उसे दूर एक सारस दाने खा रहा है तो वो दौड़ती हुई उसके पास पहुंच जाती है।

वहां पहुचंते ही वह बत्तख से बातें करने लग पड़ती है। तभी वहां भेड़िया भी पहुंच जाता है।

बकरी अपनी जान बचाने के लिए भेड़िए को कहती है की तुम इस बत्तख को खा लो ये मरने को तैयार है।

भेड़िया बत्तख को देखता है तो वह सोचता है इस बत्तख का मांस खाकर उसका पेट नहीं भरेगा इसी अच्छा है इस बकरी को ही खा लेता हूं और वह बकरी की तरफ जाने लगता है।

भेड़िये को अपनी ओर आते देख बकरी भागने की कोशिश करती है लेकिन भेड़िया उस को मारकर खा जाता है।

कछुआ और चिड़िया की कहानी

एक बार एक पेड़ के नीचे कछुआ आराम कर रहा था।

उसी पेड़ के ऊपर चिड़िया अपने बच्चों के साथ एक घोंसले में रहती थी कछुआ चिड़िया के घोंसले को देखकर उसकी बहुत बुराई करता है।

वो चिड़िया को कहता है कि तुमने ये कैसा घोंसला बनाया हुआ है जो इतने टूटे हुए तिनकों से बना है ना बारिश में बच पाता है और ना ही धूप में। और मुझे देखो मेरे पास मेरा शैल(कवच) है जो मेरा घर है।

तो चिड़िया कहती है मानती हूं कि मेरा घर टूटे तिनकों से बना है लेकिन मेरे घर में मेरे साथ मेरा पूरा परिवार रहता है लेकिन तुम्हारे घर में तुम्हारे अलावा कोई नहीं रह सकता।

मेंढक और उसके मित्र

एक बार की बात है। बहुत से मेंढक एक घने जंगल से अपने घर जा रहे थे। वे सभी आपसी बातचीत में कुछ ज्यादा ही व्यस्त थे। तभी उनमें से दो मेंढक एक जगह एक गड्ढे में गिर पड़े। बाकी मेंढकों ने देखा कि उनके दो साथी बहुत गहरे गड्ढे में गिर गए हैं।

गड्ढा बहुत ही गहरा था और इसलिए बाकी साथियों को लगा कि अब उन दोनों का गड्ढे से बाहर निकल पाना मुश्किल है। 

मेंढकों के साथियों ने गड्ढे में गिरे उन दो मेंढकों को आवाज लगाकर कहा “अब तुम खुद को मरा हुआ मानो। इतने गहरे गड्ढे से बाहर निकल पाना असंभव है।” पर गड्ढा बहुत गहरा होने के कारन निचे मौजूद दो मेंढकों को आवाज़ ठीक से नहीं आया और वे बाहर निकलने के लिए कूदने लगे।

बाहर झुंड में खड़े मेंढक उनसे चीख कर कहने लगे “बाहर निकलने की कोशिश करना बेकार है। अब तुम बाहर नहीं आ पाओगे।”

थोड़ी देर तक कूदा-फांदी करने के बाद भी जब गड्ढे से बाहर नहीं निकल पाए तो एक मेंढक ने आस छोड़ दी और गड्ढे में और नीचे की तरफ लुढ़क गया। नीचे लुढ़कते ही उसकी जान चली गयी।

दूसरे मेंढक ने अपनी कोशिश जारी रखी और अंतः में पूरा जोर लगाकर एक छलांग लगाई और वह गड्ढे से बाहर आई। जैसे ही दूसरा मेंढक गड्ढे से बाहर आया तो बाकी मेंढक साथियों ने उससे पूछा “जब हम तुम्हें कह रहे थे कि गड्ढे से बाहर आना संभव नहीं है तो भी तुम क्यों छलांग मार रहे थे?”

इस पर उस मेंढक कहा “जब मैं छलांग लगा रहा था तो मुझे लगा कि आप मेरा हौसला बढ़ा रहे हैं और इसलिए मैंने कोशिश जारी रखी और देखिए मैं बाहर आ गया।”

शिक्षा - सुनो सबकी, करो मन की।

सेवा

मुहम्मद साहब के बाद हजरत अबू बकर सिद्दीकी को खलीफा बनाया गया। सेवा की भावना उनमें इतनी थी कि वे किसीके घर का सौदा ला देते, किसीका पानी भर देते।

यहाँ तक कि मुहल्लेवालों की बकरियाँ तक दुह देते। जब वे खलीफा हो गए तो मुहल्ले की एक लड़की ने दुःख से कहा, “अबू बकर तो खलीफा हो गए, अब हमारी बकरियाँ कौन दुहेगा?” “

अबू बकर ने जब यह सुना तो बोले, “सच कहता हूँ, मैं अब भी बकरियाँ दुह दिया करूँगा। खलीफत का भार मुझे सेवा करने से नहीं रोक सकता।’ “

शिक्षा - विद्वान् पुरुष सारी समृद्धि के बाद भी विनम्रता का गुण नहीं त्यागते ।

नुकसान

एक गाँव था, जिसके चारों ओर जंगल था । जंगल में तरह-तरह के फलों के वृक्ष थे। वसंत ऋतु में वे फूलों से भर जाते। उनकी महक हवा में तैरती रहती । शाखाओं पर तरह-तरह के पक्षी अपना घोंसला बनाते और अपनी चहचहाहट का संगीत बिखेरते। सर्दियों में डालें सेब नाशपातियों से लद जातीं।

कुछ शरारती लड़कों ने जंगल में घूम-घूमकर घोंसले खोजे और उन्हें नष्ट कर डाला। बेचारी चिड़ियाँ फिर किसी दूसरी जगह जाकर अपना घोंसला बनाने लगीं।

अब हुआ यह कि फलों और पत्तियों को चाट जानेवाले कीड़े-मकोड़े, जो पहले चिड़ियों द्वारा खा लिये जाते थे, फिर से पनपने लगे और सारे फलों को नष्ट करने लगे। सर्दियों में बच्चों को जो मीठे और अच्छे फल खाने को मिलते थे, अब तोड़ने पर कीड़ेवाले निकलते थे।

शिक्षा - जो लोग पेड़-पौधों और पक्षियों को स्नेह देते हैं वे उनसे बदले में उतना ही स्नेह पाते हैं।

बुरी संगत

एक बार की बात है, एक गांव में एक बूढ़ा आदमी रहता था। उसके चार बेटे थे, बे बुरी संगत में पड़ गई थी चारों लड़के ने जुआरियों से मिल गई थी।

एक दिन पिता ने उन्हें सलाह दी, उन्हें जुआरियों से मिलने के लिए मना की। लेकिन, सलाह का उन पर कोई असर नहीं पड़ी।

एक दिन, शाम को बूढ़े आदमी ने बाजार से एक टोकरी आम खरीद के घर ले आया। फिर उन्होंने चार सड़ा हुआ आम टोकरी में उन आमों के बीच रख दिया।

अगले दिन सुबह उन्होंने आम खाने के लिए चारों बेटे को कहां। बेटों ने आम की पास जाकर देखा अधिकांश आम सड़े हुए थे।

फिर, पिता ने उन्हें इसका कारण बताया। इस बात से चारों बेटे ने सबक सीखा फिर उन्होंने बुरी संगति छोड़ दी।

शिक्षा - एक सड़ा हुआ आम अन्य सभी आमों को खराब कर सकता है। 

पिंजरे में कैद बाघ

एक छोटी सी गांव के पास एक बहुत बड़ा जंगल था।  उस जंगल में रहता था एक शक्तिशाली शेर। शेर रोज गांव मैं बकरी, गायों को पकड़कर अपना खुराक बनाता था।

वह कभी कभी गांव में लोगों के ऊपर भी आक्रमण करता था। एक दिन, गांव वालों ने बाघ को पकड़कर एक पिंजरे में बंद करके रखा। दो दिन से बाघ को पीने के लिए पानी भी नहीं दिया था।

बाघ रास्ते से जाते हुए सभी को निवेदन करता था। उसे पिंजरे से बाहर निकालने के लिए। लेकिन, बाघ को किसी ने भी पिंजरे से से बाहर नहीं निकाला।

एक दिन एक दयालु पादरी उसी रास्ते से जा रहा था। बाघ पादरी से निवेदन किया, उसे पिंजरे में से बाहर निकालने की। पादरी बाघ को पिंजरे से बाहर निकालने के लिए मान गई।

बाघ पादरी से वादा किया उसे ना मरने की। जैसे ही पादरी बाघ को मुक्त किया, बाघ पिंजरे से बाहर आकर पादरी को मारकर आना चाहता था। पादरी अपनी वादा को याद करते हुए बाघ से अपनी जान भीख मांगा।

लेकिन बाघ पादरी की प्रार्थना नहीं सुनना चाहता था. उसने कहा, “मैं कुछ दिन से भूखा हूं और आप मेरे शिकार हो, मैं कैसे आपको खाए बिना छोड़ दूं।” फिर वहां एक लोमड़ी आया।

लोमड़ी ने बाघ और पादरी की सारी बात सुनकर कहां, “मुझे विश्वास नहीं हो रहा है, इतना बड़ा बाघ इस छोटी सी पिंजरे में कैसे रह सकता है।” बाघ कहा, “मुझे देखो मैं कैसे पिंजरे में बंद था।”

यह कहकर बाघ लोमड़ी को दिखाने के लिए, पिंजरे में घुसा और तुरंत चालाक लोमड़ी बाहर से पिंजरे का दरवाजा बंद कर दिया। पादरी लोमड़ी को अपनी जान बचाने के लिए धन्यवाद दिया और दोनों वहां से चला गया।

शिक्षा - हमें अपनी किए हुए वादा को कभी नहीं भूलना चाहिए।

लोमड़ी और लकड़हारा

एक बार एक लोमड़ी शिकारी से बचते-बचाते एक लकड़हारे के पास जा पहुँची। उसने लकड़हारे से विनती की,

“कृपा करके मुझे शिकारी से बचा लो। मैं तुम्हारी एहसानमंद रहूंगी।”

लकड़हारे ने लोमड़ी से अपनी झोपड़ी में छिप जाने को कहा। कुछ देर बाद शिकारी वहाँ आया और उसने लकड़हारे से लोमड़ी के बारे में पूछा तो लकड़हारे ने मुँह से तो ‘न’ कह दिया,

लेकिन उंगली से अपनी झोंपड़ी की तरफ इशारा कर दिया। शिकारी की समझ में कुछ नहीं आया और वह वहाँ से चला गया।

शिकारी के जाने के बाद लोमड़ी झोंपड़ी से बाहर आई और जाने लगी तो लकड़हारा बोला,

“मैंने तुम्हारी जान बचाई। कम से कम शुक्रिया तो अदा करती जाओ।” अच्छा! तुम तो विश्वासघाती हो।

मैंने तुम्हें झोंपड़ी की तरफ इशारा करते हुए देख लिया था। तुम जैसे व्यक्ति को धन्यवाद क्यों कहूँ?” यह कहकर लोमड़ी वहाँ से चली गई।

शिक्षा - हमें कभी भी दूसरों का विश्वास नहीं तोड़ना चाहिए।

पूँछकटी लोमड़ी

एक बार एक लोमड़ी जंगल में खाने की तलाश में भटक रही थी। दुर्भाग्यवश वह शिकारियों द्वारा बिछाए गए जाल में फंस गई।

खुद को जाल से छुड़ाने के चक्कर में उसकी पूँछ जाल में फँसकर कट गई।

लोमड़ी दर्द के मारे कराहने लगी। दर्द से ज्यादा उसे पूँछ कटने पर शर्मिंदगी महसूस हो रही थी।

उसने तुरंत एक योजना बनाई। अगले दिन उसने सभी लड़कियों की एक सभा बुलाकर कहा,

“दोस्तों! जैसा कि तुम देख रहे हो कि मेरी पूँछ कटने से छोटी और सुंदर हो गई है तो मेरी सलाह है कि तुम लोग भी अपनी पूँछ कटवा लो। लंबी पूँछ से बेवजह वजन बढ़ता है और यह भद्दी भी लगती है।”

एक लोमड़ी बोली, “तुम बड़ी चालाक हो। तुम्हारी पूँछ कट गई तो तुम हमारी पूँछ भी कटवाना चाहती हो।

तुम सिर्फ अपना भला सोच रही हो, न कि हमारा। अपनी सलाह अपने पास रखो।” यह सुनकर पूँछकटी लोमड़ी चुपचाप वहाँ से चली गई।

शिक्षा - हमें अपने स्वार्थ के लिए दूसरों का बुरा नहीं सोचना चाहिए।

भगवान की दूत

एक दिन लड़कियों का एक दल पानी पीने के लिए नदी किनारे पहुँचा। नदी उस समय अपने पूरे उफान पर थी।

उन्हें पानी पीने के लिए आगे बढ़ने में डर लग रहा था। तब उनमें से एक लोमड़ी शेखी बघारते हुए बोली,

“कायरों! मुझे तुम्हें अपना साथी कहते हुए शर्म आती है। मैं तुम्हें दिखाती हूँ कि मैं कितनी निडर व साहसी हूँ।”

यह कहकर वह लोमड़ी छपाक से नदी में कूद गई। जल्दी ही वह नदी के बहाव के साथ बहने लगी।

यह देखकर नदी किनारे खड़ी हुईं लोमड़ियों ने मजाक करते हुए पूछा, “अरे! तुम कहाँ जा रही हो? क्या तुम हमें पानी पीकर नहीं दिखाओगी?”

“अभी नहीं, साथियो! मैं भगवान की भेजी हुई दूत हूँ। बस उसी से मिलने जा रही हूँ।”लोमड़ी बमुश्किल कह सकी।

देखते ही देखते वह दूर बह गई।

शिक्षा - कभी-कभी हमारा बड़बोलापन हमारे लिए घातक साबित होता है। इसलिए हमें शेखी नहीं बघारनी चाहिए।

दया क्या है – Best Hindi short story for class 1

एक बार, एक युवा शिष्य अपने गुरु से पूछा, “गुरुजी, मुझे बताइए दया क्या है?” गुरु उसे खिड़की के पास ले गए। और सड़क के कोने पर बैठे भिखारी को देखने के लिए कहा।

कुछ समय तक भिखारी की ओर देखते हुए उन्होंने देखा, एक बूढ़ी औरत वहां से गुजर रही थी। उसने भिखारी को एक सिक्का दिया।

जैसे एक व्यापारी ने भिखारी के पास आया, तो उसने पांच सिक्के दिए। फिर उसने देखा, उस भिखारी के पास से गुजरने वाले एक छोटे लड़के ने उसे एक फूल दिया।

अब गुरु ने शिष्य से सवाल किया, “इन तीनों में से कौन आपको लगता है, भिखारी के लिए सबसे अधिक दया है।” युवा शिष्यों ने उत्तर दिया, “व्यापारी सबसे दयालु है।”

गुरु ने मुस्कुराते हुए समझाया, “तुमने देखा, कि उस बूढ़ी औरत बहुत गरीब था। इसीलिए, उसने उसे एक सिक्का दिया। बुढ़िया ने उस भिखारी की ओर दया से काम लिया।

उसके बाद हमने देखा, कि एक व्यापारी भिखारी को पांच सिक्के दिए और जल्दी से निकल गया। क्योंकि, वह लोगों को अपनी दौलत और बड़ा दिल दिखाना चाहता था।

बाद में हमने एक छोटे लड़के को देखा। जिसने, अपनी मां के लिए हाथों में कुछ फूल इकट्ठे किए थे। और जब वह उस भिखारी के पास से गुजरा। तो वह भिखारी को देख कर मुस्कुराया।

और उसे एक फूल दिए। वह छोटा लड़का जिसने दया से काम लिया था। जब प्यार किसी के दर्द को छूता है, तो वह दया बन जाता है।

इसलिए, दया को समझने के लिए हमें यह समझना चाहिए। की सभी प्राणी समान है। और जो समान रूप से पीड़ित है, हमें उन सभी का सम्मान करना चाहिए।

शिक्षा - हमें हमेशा, बेसहारे लोगों की मदद करना चाहिए।

सौतेली मां और बेटा

एक बार, एक गांव में एक युवा लड़का अपने सौतेले परिवार के साथ रहता था। उस गांव में पानी की कमी थीv इसलिए, लोगों को पानी लाने के लिए गांव के अंत में पानी की धारा के पास जाना पड़ता था।

युवा लड़का अपने परिवार के लिए, पानी लेने के लिए रोज सुबह जल्दी उठता था। अफसोस की बात, यह कठिन काम था। क्योंकि, रास्ता बहुत लंबा था और उसे अकेला ही चलना पड़ता था।

एक बार, लड़का पानी के बर्तन के साथ धारा से घर वापस आ रहा था। वापस आते समय उसने देखा कि एक बूढ़ा व्यक्ति, एक पेड़ के नीचे आराम कर रहा है।

लड़के को पानी के बर्तन के साथ देखकर, बूढ़े व्यक्ति ने उसकी प्यास बुझाने के लिए पानी मांगी। लड़के ने उसे पानी पिलाया। बाद में, रास्ते में उसकी मुलाकात एक महिला से हुई।

जिसने उससे पानी मांगा। लड़के ने उसे पानी पिलाया और फिर घर चला गया। उस लड़के का पानी का बर्तन आधा खाली हो गया था।

घर में, उसकी सौतेली मां ने आधा बर्तन पानी ले आने के लिए उस पर गुस्सा किया। क्योंकि, आधा बर्तन पानी परिवार के लिए पर्याप्त नहीं था। यह लगभग हर रोज होता है।

रास्ते में, हर रोज लोग उससे पानी मांगता रहा। और उसने यह जाने के बावजूद, कि उसकी सौतेली मां उससे नाराज हो जाएगी। उसने लोगों को पानी पिलाया गया।

एक दिन, वह अपनी सौतेली मां से यातना सहन नहीं कर पा रहा था। उसने कसम खा लिया था, कि घर लौटते वक्त रास्ते में किसी को भी पानी नहीं देगा।

उस दिन फिर से, जब वह धारा से घर वापस आ रहा था। उसने एक आदमी को देखा, जो घायल लग रहा था। और उस आदमी ने, लड़के को बर्तन में से कुछ पानी देने के लिए कहा।

उसने रास्ते में किसी को भी पानी नहीं देने की कसम खाई थी। लेकिन, आखिरकार वह उस आदमी को प्यासा नहीं छोड़ सका। उसने, बर्तन में से थोड़ा पानी दिया और उसकी मदद की।

जब वह घर आया। तो इस बार उसकी सौतेली मां ने आधा बर्तन पानी देख कर उस पर बहुत ज्यादा गुस्सा किया और उसे पीटा।

अगले दिन, किसी ने दरवाजा खटखटाया। लड़के ने दरवाजा खोला और उस आदमी को लिफाफा के साथ बाहर खड़ा देखा। वह वही आदमी था, जिसे पिछले दिन पानी दिया था।

वह वितरक पुरुषों था, जो गांव में पत्र भेजने के लिए आया था। लेकिन, रास्ते में घायल हो गया। आदमी ने उसे अपनी जिंदगी बचाने के लिए, कुछ पैसा के साथ धन्यवाद भी दिया।

अगर लड़के ने वहां उसकी मदद नहीं की होती। तो उस वितरक पुरुषों की मृत्यु हो सकती थी। और कॉलेज से भेजा गया पत्र गांव में कभी नहीं पहुंचता था।

शिक्षा - आपके दैनिक छोटे छोटे अच्छे कर्म,कभी व्यर्थ नहीं जाते।

करनी का नतीजा

मालकिन अपने नौकर और नौकरानी को सुबह तब उठाती थी जब तोता शोर करने लगता कि सुबह हो गई, सुबह हो गई।

एक रोज नौकरानी तोते पर नाराज हो उठी कि यही मुआ शोर करके मालकिन को जगा देता है और वह फिर हमें जगा देती है। अगर यह तोता नहीं होगा तो मजे आ जाएँगे।

हम थोड़ी देर और सो सकेंगे। यह देख नौकर और नौकरानी ने मिलकर तोते की गरदन मरोड़ दी |

मालकिन काफी बूढ़ी और बीमार थी । तोते की मौत के बाद उसे वक्त का सही अंदाजा नहीं रहता था। जब भी उसकी नींद खुलती, उसे लगता कि सवेरा हो गया। वह नौकरों को जबरन जगाकर बैठा देती। कभी-कभी तो आधी रात को ही जगा देती। तोता तो अब था नहीं, जो उसे सही समय बताता।

शिक्षा - जैसी करनी वैसी भरनी।

पर्वत कैसे बने

संसार की शुरुआत में पृथ्वी एकदम समतल थी। पर एक दिन वह आकाश से बातें करने के लिए बेचैन हो उठी और धीरे-धीरे ऊँचा उठने लगी। इतना ऊँचे कि बड़ी देर तक वह आकाश से बतियाती रही।

किंतु जब वह वापस लौटी तो उसके कुछ हिस्से अपनी जगह पर नहीं लौट सके । थकान से चूर वे जितनी ऊँचाई पर थे, वहीं जड़ हो गए और समतल पृथ्वी का रूप बदल गया । वही हिस्से अब जगह जगह पर्वत बन गए थे ।

शिक्षा - कुदरत के राज अब तक कोई समझ नहीं पाया।

जनता की राय साहबी

उत्तर प्रदेश के गवर्नर सर मातकम हेली ने जब उपन्यास सम्राट् मुंशी प्रेमचंद को संदेश भिजवाया कि वे उन्हें ‘राय साहब’ का खिताब देना चाहते हैं तो प्रेमचंद चिंतित हो उठे।

“सिर्फ खिताब ही देंगे कि और कुछ भी?” पत्नी ने पूछा। “इशारा कुछ और के लिए भी है । ” ” तो फिर इसमें चिंता की क्या बात है? ले लीजिए ! इतना सोच विचार क्यों कर रहे हैं?”

” इसलिए कि अभी तक मैंने जनता के लिए लिखा है। ‘राय साहब’ बनने के बाद मुझे सरकार के लिए लिखना पड़ेगा।” “ओह, ऐसा! तब गवर्नर को क्या जवाब दीजिएगा ?” पत्नी ने फिर पूछा। 

प्रेमचंद बोले, “लिख दूँगा, जनता की राय साहबी ले सकता हूँ, सरकार की नहीं।

शिक्षा - झूठे आदर सम्मान का कोई अर्थ नहीं होता।

जादुई छड़ी

एक मूसलाधार बारिश की रात थी। सुविधा अपने बिस्तर पर लेटी क़िताब पड़ रही थी। तभी अचानक उसके कमरे की खिड़की पर बिजली चमकी। सुविधा कमरे में अकेली थी इसलिए वह बहुत ही डर गयी। तभी उसने खिड़की के पास एक परी देखी। सुविधा उसे देखकर चौंक गई।

वह सुन्दर परी खिड़की के अंदर आके बोली “सुविधा तुम बहुत ही अच्छी लड़की हो। इसलिए में तुम्हे कुछ देना चाहती हूँ।” सुविधा यह सुनकर बहुत ही खुश हो गयी।

सुन्दर परी ने सुविधा को एक छड़ी देते हुए कहा “सुविधा ये जादू की छड़ी है। तुम इसे जिस भी चीज की तरफ मोड़ कर घुमाओगी वह चीज गायब हो जाएगी।” सुविधा छड़ी को पाकर बहुत ही खुश हो गयी।

अगले दिन सुबह सुविधा वह छड़ी लेकर अपने स्कुल गयी। वहा उसने शैतानी करना शुरू कर दिया। उसने पहले अपने पक्ष में बैठी लड़की का कंपास गायब कर दिया। फिर अनेक बच्चों की पेंसिल और रबर गायब कर दी। किसी को पता तक नहीं चला की यह सुविधा की जादुई छड़ी का करामात है।

जब वह घर पहुंची तब भी उसने शरारत करना बंध नहीं किया। सुविधा को इस जादुई छड़ी का उपयोग करने में बहुत ही मजा आ रहा था। टीवी के पास बेडरूम में एक कुरसी रखी थी। उसने सोचा, “क्यों न में इस कुरसी को गायब कर दू। जैसे ही उसने जादुई छड़ी घुमाई वैसे ही सुविधा की माँ बेडरूम से निकल कर कुरसी के सामने से गुजरीं और कुरसी की जगह सुविधा की माँ गायब हो गयी।

सुविधा अब बहुत ही घबरा गई और जोर जोर से रोने लगी। इतने में ही उसके सामने वह सुन्दर परी प्रकट हूई। सुविधा ने परी को सारी बात बताई।

सुन्दर परी ने सुविधा से कहा, “रो मत। में तुम्हारी माँ को वापस ला सकती हूँ, लेकिन उसके बाद में ये जादुई छड़ी को वापस लुंगी।”

सुविधा बोली “तुम्हे जो भी चाहिए ले लो। लेकिन मुझे मेरी माँ वापस ला दो।”

तब परी ने एक जादुई मंत्र पढ़ा और देखते ही सुविधा की माँ वापस आ गई। सुविधा ने पीछे देखा तो वह सुन्दर परी गायब हो गयी थी। वह अपनी माँ को पाकर बहुत खुश हो गयी।

बत्तख और लोमड़ी - Class 1 Hindi Story

एक दिन बत्तख और उसकी छोटी बत्तियाँ नदी में पानी पीने के लिए चले गए। बत्तखें बहुत खुश थीं, वे हस्ते-खेलते अपने माँ का पीछा कर रहे थे।

अचानक बतख माँ ने देखा की एक लोमड़ी उनकी तरफ आ रही है। वह भयभीत हो गयी और चिल्लाती हुई अपने बच्चों से कहने लगी “बच्चों, भागो यहाँ से। उस नदी में जाओ, एक लोमड़ी हमारी तरफ आ रही है।” बत्तख के छोटे छोटे बच्चें नदी में चले गए।

उनकी माँ नदी में जाने ही वाली थी तभी लोमड़ी ने उसका रास्ता बंद किया। अब वह पूरी तरह से फंस चुकी थी। अब बत्तख बहुत डरी हुई थी। उसके पास और कोई रास्ता नहीं था। वह एक पंख को जमीन पर घसीटते हुए आगे-पीछे चलने लगी।

लोमड़ी अब बहुत ही खुश हो गयी, वह सोचने लगी “लगता है यह अब घालय हो गयी है। अब में  इसे आसानी से पकड़कर खा सकता हु।”  माँ बत्तख नदी से दूर जाने लगी ताकि उसके बच्चें सुरक्षित रह सके। लोमड़ी भी उसका पीछा करने लगी और धीरे-धीरे वे नदी से दूर चले गए।

अब लोमड़ी उसके बच्चों को चोट नहीं पहुँचा सकती थी। लोमड़ी ने सोचा कि वह थक गई है और वह उसके करीब जाने लगा। लेकिन जैसेही लोमड़ी उसके करीब आया, बत्तख ने जल्दी से अपने पंख फैले और हवा में उड़ गयी । वह नदी के बीच में उतर गयी जहाँ उसके बच्चे तैर रहे थे। लोमड़ी को बहुत ही पछतावा हुआ। नाही उसे बत्तख खाने को मिला ना उसके बच्चें । अब वह उन तक नहीं पहुंच सकता था क्योंकि वे नदी के बीच में थे।

सच्चा दोस्त

दो सबसे करीबी दोस्त रामु ओर शामू जंगल से शहर की ओर जा रहे थे। दोनों दोस्त ने एक दूसरे को वादा किया था की खतरे के समय वे एक दूसरे का साथ देंगे।

जब वे दोनों जांगले के बीच पहुंच गए थे तभी अचानक एक बढ़ा भालू उनके सामने आ गया। दोनों दोस्त बहुत ही घबरा गए। शामू पेड़ पर चढ़ना जानता था, इसलिए वह भागकर एक ऊंचे से पेड़ पर चढ़ गया। रामु को पेड़ पर चढ़ना नहीं आता था। उसे समझ में ही नहीं आ रहा कि अब क्या किया जाए। उसने शामू से पेड़ पर चढ़ने के लिए मदद मांगी। लेकिन भालू उसे भी खा जायेगा ये सोचकर उसने रामु की मदद करने से इंकार कर दिया।

तब उसने अपना दिमाग लगाया। वह चुपचाप जमीन पर लेट गया और सांस रोक ली। भालू रामु के पास आया और उसे कुछ देर तक उसे सूंघता रहा, उसके चारों तरफ चक्कर लगाता रहा। रामु बिना हिले चुपचाप वही सांस रोककर मृत व्यक्ति की तरह लेटा रहा। थोड़ी देर के बाद भालू को ऐसा महसूस हुआ की रामु के अंदर जान नहीं है। इसलिए वह वहां से चुपचाप चला गया। 

भालू के जाने के बाद शामू पेड़ से उतरा और अपने रामु से बोला, “भाई भालू तुम्हारे कान में क्या कह रहा था?”

रामु ने कहा, “वह मुझसे कह रहा था कि झूठे दोस्त पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए।” यह कहकर वह आगे बढ़ गया।

शिक्षा - सच्चा दोस्त वही होता है, जो मुसीबत के समय पर आपका साथ दे और आपकी मदद भी करें।

लालची कुत्ता

एक बार एक कुत्ते को हड्डी का एक टुकड़ा मिल गया। उसे अपने मुँह में दबाकर वह एक कोने में जा बैठा। वह बहुत देर हड्डी के टुकड़े को चूसता रहा ।

बाद में वह कुछ मिनट के लिए सो गया। जब वह नींद से जाग गया तो उसे जोर की प्यास लगी। मुँह में हड्डी का टुकड़ा दबाए वह पानी की खोज में चला गया।

चलते चलते उसे एक नदी दिख गयी। वह नदी के पास गया और पानी पिने के लिए झुक गया। तो उसे पानी में अपनी ही परछाई दिखाए दी। उसे लगा नदी में कोई दूसरा कुत्ता है।

उस कुत्ते के मुँह में भी हड्डी का टुकड़ा है। कुत्ते को उसकी परछाई की हड्डी भी चाहिए थी। उसने गुस्से में आकर जैसे ही भौंकने के लिए मुँह खोला, तो उसके मुँह से हड्डी का टुकड़ा नदी में गिर गया।

शिक्षा - लालच का फल बुरा होता है।

किसान और उसके आलसी बेटे

एक गाँव में एक किसान रहता था। उसके दो बेटे थे और दोनों पहले दर्जे के आलसी थे। किसान दिन भर खेतों में मेहनत करता और दोनों बेटों का भरण पोषण करता। एक दिन किसान बीमार पड़ गया।

हर तरह के इलाज के बाद भी उसकी बीमारी ठीक होने का नाम नहीं ले रही थी। वह समझ गया था कि अब वह ज्यादा दिन तक जीवित नहीं रहेगा। उसे अपने दोनों बेटों की चिंता थी कि उसके मरने के बाद उनका क्या होगा।

एक दिन लेटे-लेटे उसे एक तरकीब सूझी। उसने दोनों बेटों को बुलाकर कहा, “मैंने अंगूरों के बाग में बहुत नीचे तुम्हारे लिए खजाना दबाया हुआ है। मेरे मरने के बाद उसे खोदकर निकाल लेना।”

किसान के मरने के बाद किसान के बेटे अंगूरों के बाग में गए। उन्होंने मिलकर पूरा खेत खोद डाला पर कुछ हाथ न लगा। वे अपने पिता को कोसने लगे।

कुछ दिनों बाद बरसात हुई और उनकी अंगूरों की बेलें लहलहाने लगी। बेलें अंगूरों से लद गई थीं। अंगूर पकने पर उन्होंने उन्हें महंगे भाव से बेचा और अमीर बन गए।अब उन्हें समझ आया कि उनके पिता ने इसी खजाने के बारे में कहा था।

शिक्षा - परिश्रम से ही सफलता मिलती है।

कौआ और चील

एक दिन एक मादा भेड़ अपने मेमने के साथ खेत में चर रही थी। अचानक एक चील मेमने पर झपटी और उसे अपने मजबूत पंजों में पकड़कर ले उड़ी। समीप ही एक पेड़ पर बैठा कौआ यह दृश्य देख रहा था।

उसने सोचा कि जब चील मेमने को उठाकर ले जा सकती है तो मैं क्यों नहीं? मैं तो उससे ज्यादा चालाक हूँ और मेरे पंजे भी उसकी तरह ही मजबूत हैं।

यह विचार आते ही वह तेजी से भेड़ पर झपटा और उसे पंजों से उठाने की कोशिश करने लगा। उसके पंजे भेड़ के शरीर पर उगी ऊन में फँस गए। वह निकालने की जितनी कोशिश करता, पंजे और ज्यादा उलझ जाते।

एक राहगीर ने जब भेड़ की ऊन में फंसे कौए को देखा तो सोचने लगा,’इस कौए को छुड़ाकर पिंजरे में डालकर अपने घर ले जाऊंगा।

इसे देखकर मेरे बच्चे खुश होंगे।’ उसने ऐसा ही किया। अब पिंजरे में बंद होकर कौआ अपनी मूर्खता पर आँसू बहाने लगा।

शिक्षा - अपनी क्षमताओं का आकलन करके ही कोई काम करें।

झूठी शपथ - Short Moral Story In Hindi For Class 1

एक दिन शाम को एक चरवाहा अपने पशुओं को घर वापस ले जाने के लिए इकट्ठा कर रहा था।

उसने जब पशुओं की गिनती की तो एक बैल कम निकला। उसने आसपास उसे काफी ढूँढा मगर वह नहीं मिला।

हारकर उसने भगवान से प्रार्थना की, “हे भगवान् ! यदि मेरा बैल और उसे चुराने वाला मिल गया तो मैं एक बछड़े की बलि दूंगा। मैं यह बात शपथ लेकर कहता हूँ। बस, मेरा बैल मिल जाए।”

फिर चरवाहा अपने पशुओं को लेकर आगे बढ़ गया। थोड़ी दूर जाने पर ही उसे अपना बैल मिल गया।

उसके बैल को चुराने वाला कोई और नहीं, बल्कि एक शेर था।

शेर को अपने सामने देखकर डरपोक चरवाहा थर-थर काँपने लगा और उसने शपथ ली, “हे भगवान! यदि आप मुझे इस शेर के पंजों से बचा लेंगे तो मैं एक बैल की बलि दूंगा।”

इस तरह उस चरवाहे ने सिद्ध कर दिया कि वह झूठा है और झूठी शपथ लेता है।

शिक्षा - व्यक्ति को अपनी बात से नहीं पलटना चाहिए।

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