Short Stories in Hindi for Class 2 - आज की इस पोस्ट में हम आपके साथ Short Stories in Hindi for Class 2 में शेयर करने जा रहे है। इन stories आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।आप इन Short Stories in Hindi for Class 2 को पूरा पढ़े। आपको यह Stories बहुत पसंद आएगी। 

Story in Hindi for Class 2

Moral Short Stories in Hindi for Class 2 List

बाँसुरी वाला मछुआरा

मूर्खता का फल

माँ का प्यार

फल वाला और पंसारी

छोटा और बड़ा काम

बंद आँखें, खुला मुँह

डब्बू और नाई

गधे की परछाई

भेड़िया और भेड़

मछुवा और मंत्री

बंदर का इंसाफ

गरीब मजदूर

बादाम किसे मिले

बनिए का बनिया

जिंदा मुरदा

भेड़िए की चाल

किसान और जादुई बतख

लालची औरत

मूर्ख मेंढक

बदला

ग्वालिन और उसका सपना

काजू खाने वाला लड़का

गधा और मूर्तिकार

बैल और मक्खी

उपकार का बदला

कोयल और बाज

चमत्कारी भोजन

एक ग्रामीण चूहा

लकड़हारा और देवदुत

सब्जी

बैल और मेढक

भाग्य की महिमा

पानी

मछुआरा और छोटी मछली

बकरी की सलाह

लोमड़ी का फूला पेट

टिड्डा और चिंटी

मुर्ख और ठग

स्वार्थी दोस्त

टोपी वाला और बंदर

बुढ़िया और उसका नौकर

बाँसुरी वाला मछुआरा

समुद्र के किनारे बसे गाँव में एक मछुआरा रहता था। वह दिन भर मछलियाँ पकड़ता और शाम को समुद्र के तट पर बैठकर चैन से बाँसुरी बजाता।

एक दिन वह एक चट्टान पर बैठकर बांसुरी बजा रहा था और सोच रहा था कि शायद इसकी मीठी धुन सुनकर मछलियाँ किनारे पर आ जाएँ, पर ऐसा नहीं हुआ। उसने बाँसुरी एक ओर रखी और समुद्र में जाल फेंका।

जल्दी ही काफी सारी मछलियाँ उसके जाल में फंस गईं। उसने जाल किनारे की ओर खींचा तो मछलियाँ तड़प रही थीं। यह देखकर वह बोला,

“तुम कितनी मूर्ख हो। जब मैं बांसुरी पर मधुर धुन बजा रहा था तब तो तुम बाहर ही नहीं आई और अब जबकि तुम जाल में फैसी हो तो नाच रही हो।”

शिक्षा : हर काम को करने का एक सही तरीका होता है।

मूर्खता का फल - Moral Stories in Hindi For Class 2

एक बढ़ई था। एक बार वह लकड़ी के लंबे लट्ठे को आरे से चीर रहा था। उसे इस लट्ठे के दो टुकडे़ करने थे। सामनेवाले पेड़ पर एक बंदर बैठा हुआ था। वह काफी देर से बढ़ई के काम को बडे़, ध्यान से देख रहा था। बढ़ई ने दोपहर का भोजन करने के लिये काम बंद कर दिया। अब तक लट्ठे का केवल आधा ही भाग चीरा जा चुका था। इसलिए उसने लट्ठे के चिरे हुए हिस्से में एक मोटी सी गुल्ली फँसा दी। इसके बाद वह खाना खाने चला गया।

बढ़ई के जाने के बाद बंदर पेड़ से कूदकर नीचे आया। वह कुछ देर तक इधर-उधर देखता रहा। उसकी नजर लकड़ी की गुल्ली पर गड़ी हुई थी। वह गुल्ली के पास गया और उसे बड़ी उत्सुकता से देखने लगा। वह अपने दोनों पाँव लट्ठे के दोनों ओर लटकाकर उस पर बैठ गया। इस तरह बैठने से उसकी लंबी पूँछ लकडी के चिरे हुए हिस्से में लटक रही थी। उसने बड़ी उत्सुकता से गुल्ली को हिलाडुला कर देखा फिर वह उसे जोर-जोर से हिलाने लगा। अंत में जोर लगा कर उसने गुल्ली खींच निकाली।

ज्योंही गुल्ली निकली की लट्ठे के दोनो चिरे हुए हिस्से आपस में चिपक गये। बंदर की पूँछ उसमे बुरी तरह से फंस गयी। दर्द के मारे बंदर जोर-जोर से चिल्लाने लगा। उसे बढ़ई का डर भी सता रहा था। वह पूँछ निकालने के लिए छटपटाने लगा। उसने जोर लगाकर उछलने की कोशिश की, तो उसकी पूँछ टूट गयी। अब वह बिना पूँछ का हो गया।

शिक्षा - अनजानी चीजो से छेड़छाड़ करना खतरनाक होता है।

माँ का प्यार - Hindi Stories with Moral for Class 2

एक परी थी। एक बार उसने घोषणा की,”जिस प्राणी का बच्चा सबसे ज्यादा सुंदर होगा, उसे मैं इनाम दूँगी।“

यह सुनकर सभी प्राणी अपने-अपने बच्चों के साथ एक स्थान पर जमा हो गए। परी ने एक-एक करके सभी बच्चों को ध्यान से देखा। जब उसने बंदरिया के चपटी नाकवाले बच्चे को देखा, तो वह बोल उठी,” छिः! कितना कुरूप है यह बच्चा! इसके माता-पिता को तो कभी पुरस्कार नही मिल सकता।“

परी की यह बात सुनकर बच्चे के माँ के दिल को बहुत ठेस लगी। उसने अपने बच्चे को हदय से लगा लिया और उसके कान के समीप अपना मुँह ले जाकर कहा,”तू चिंता न कर मेरे लाल! मैं तुझे बहुत प्यार करती हूँ। मेरे लिए तो तू ही सबसे बड़ा पुरस्कार है। मैं कोई दूसरा पुरस्कार प्राप्त करना नहीं चाहती। भगवान तुझे लंबी उम्र दे।“

शिक्षा - दुनिया की कोई चीज़ माँ के प्यार की बराबरी नहीं !

फल वाला और पंसारी - Moral Stories in Hindi for class 2

एक बार एक पंसारी ने एक फलवाले से उसका तराजू और बाट उधार लिए कुछ दिनो बाद फलवाले ने पंसारी से अपने तराजू और बाट वापस मागें पंसारी ने कहा, "कैसा तराजू और बाँट उन्हे तो चूहा खा गया इसलिए मुझे खेद है कि मै उन्हे लौटा नही सकता।"

बेईमान पंसारी की बात सुनकर फल वाले को बहुत गुस्सा आया पर उसने गुस्से को दबाते हुए कहा, "कोई बात नही मित्र! इसमे तुम्हारा कोई दोष नही है मेरी तकदीर खराब है।"

उसके बाद एक दिन फलवाले ने पंसारी से कहा,"देखो! मैं कुछ समान लेने बाहर जा रहा हूँ तुम चाहो तो मेरे साथ अपने बेटे को भेज सकते हो हम लोग कल तक वापस आ जाएगें।"

पंसारी ने बेटे को फलवाने के साथ भेज दिया दूसरे दिन फलवाला लौटा तो वह अकेला था।

अरे! मेरा बेटा कहाँ है? पंसारी ने पूछा,

"क्या बताऊँ तुम्हारे बेटे को सारस उठा ले गया फलवाले ने जवाब दिया!"

"अबे झूठे इतने बड़े लड़के को सारस कैसे उठा ले जा सकता है" पंसारी ने गुस्से से कहा, फलवाले ने जवाब दिया, "उसी तरह जैसे चूहे तराजू और बाँट खा सकते हैं।" पंसारी को अपनी भूल समझ मे आई उसने फलवाले का तराजू और बाट वापस कर दिया वह अाँसू भरी आँखो से बोला, "भाई! मैंने तुम्हारे साथ छल किया मुझे माफ कर दो और मेरा बेटा मुझे लौटा दो।" फलवाले ने पंसारी के बेटे को उसके पिता के पास लौटा दिया।

छोटा और बड़ा काम

अब्राहम लिंकन जब अमेरिका की धारा सभा के सदस्य चुने गए तो उनका अभिनंदन करने के लिए अपार मानव समूह उमड़ पड़ा। उसमें अनेक जाने-माने और धनी लोग भी थे। जब ये सारे लोग लिंकन के घर पहुँचे तो वे अपनी गाय दुह रहे थे।

कुछ समय तक विस्मय का वातावरण बना रहा । आखिर जब एक सज्जन से न रहा गया तो उसने पूछ डाला, “अरे, आप देश के अग्रणी नेता होकर अपने हाथ से गाय दुह रहे

लिंकन ने मुसकराकर उत्तर दिया, “भाइयो, काम कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। हम लोग श्रम से डरते हैं और अपना काम औरों पर छोड़ देते हैं। यह हमारे भीतर की एक बड़ी कमी है। “

शिक्षा : वही सफल होता है जिसका काम उसे निरंतर आनंद देता है ।

बंद आँखें, खुला मुँह

एक छोटे से गाँव में रहनेवाले एक मुरगे को अपनी आवाज पर बड़ा नाज था। एक दिन एक चालाक लोमड़ी उसके पास आई और बोली, “मुरगे महाशय ! सुना है, आपकी आवाज बड़ी प्यारी और बुलंद है !”

मुरगे ने गद्गद होकर अपनी आँखें मीचीं और ऊँची आवाज में चिल्लाया–कु कु डू…कूँ ! कुकुडू कूँ… पर तभी लोमड़ी ने फुरती से उसे अपने मुँह में दबोच लिया और जंगल की तरफ भाग चली।

गाँववालों की नजर उसपर पड़ी तो वे चिल्लाए, “पकड़ो, मारो ! यह तो हमारा मुरगा दबोचे लिये जा रही है।’ लोमड़ी ने उनकी चिल्लाहट पर ध्यान नहीं दिया।

यह देखकर मुरगा बोला, “लोमड़ी बहन, ये गाँववाले चिल्ला रहे हैं कि मेरा मुरगा दबोचे लिये जा रही है। आप इन्हें जवाब क्यों नहीं दे देतीं कि यह मुरगा आपका है, उनका नहीं?”

लोमड़ी को मुरगे की बात जम गई। उसने फौरन मुँह खोला और गाँववालों की ओर देखकर कहा, “भूल जाओ अपने मुरगे को। यह तो अब मेरा निवाला है।” पर यह कहने के साथ जैसे ही लोमड़ी का मुँह खुला, मुरगा उसके मुँह से छूट गया। वह सरपट भागा और अपने गाँववालों के पास पहुँच गया।

शिक्षा : प्रयत्नशील लोगों के लिए सदा आशा हैं।

डब्बू और नाई - Moral Stories for class 2 in Hindi

डब्बू नाम का एक छोटा लड़का था। वह हमेशा होशियारी दिखाता था।

एक दिन उसे नाई से मजाक करने की सूझी वह सुबह सुबह नाई

की दुकान में पहुँचा। शाीशे के सामने कुर्सी पर बैठ गया नाई ने पूछा, "क्या बात है डब्बू?" डब्बू ने शान से कहा, "जरा मेरी दाढ़ी बना दो।"

नाई को डब्बू की शैतानी समझ में आ गई। उसने कहा, "हाँ जरूर बनाऊँगा। सरकार इसके बाद नाई ने डब्बू के कंधो पर तौलिया लपेट दिया। उसने ब्रश से उसके चेहरे पर झागदार साबुन लगाया फिर वह अपने अन्य काम में लग गया।

डब्बू ने कुछ देर तक इतंजार किया चेहरे पर साबुन पोते ज्यादा देर तक बैठे रहना। उसके लिए मुश्किल हो गया उसने नाई पर नाराज होते हुए कहा आखिर तुमने मुझे इस तरह क्यों बिठा रखा है।

यह सुनकर नाई हँस पड़ा। उसने शांति से जवाब दिया इसलिए कि अभी में तुम्हारी दाढ़ी उगने का इंतजार कर रहा हूँ।

शिक्षा - दूसरे का मजाक उडानेवाला खुद मजाक का पात्र हो जाता है।

गधे की परछाई - Moral Stories in Hindi for class 2

गर्मियो के दिन थे। तेज धूप में एक यात्री को एक गाँव से दूसरे गाँव जाना था। दोनो गाँव के बीच एक निर्जन मैदान था यात्री ने किराए पर एक गधा ले लिया। गधा आलसी था। वह चलते चलते बार बार रूक जाता था। इसलिए गधे का मालिक उसके पीछे पीछे चल रहा था। जब गधा रूकता तो वह उसे डंडा मारता गधा फिर आगे चलने लगता था।

चलते चलते दोपहर हो गई। आराम करने के लिए वे रास्ते में रूक गए वहाँ आस पास कोई छाया नही थी। इसलिए यात्री गधे की परछाई मे बैठ गया।

गर्मी के कारण गधे का मालिक भी बहुत थक गया था। वह भी गधे की परछाई में बैठना चाहता था। इसलिए उसने यात्री से कहा, "देखो भाई यह गधा मेरा है। इसलिए गधे की परछाई मेरी है। तुमने केवल गधे को किराए पर लिया है उसकी परछाई से हमारा कोई सौदा नही हुआ है। इसलिए मुझे गधे की परछाई में बैठने दो।"

यात्री ने कहा, "मैंने पूरे दिन के लिए गधे को किराए पर लिया है।

इसलिए पूरे दिन गधे की परछाई का उपयोग करने का भी मेरा ही अधिकार है। तुम गधे से उसकी परछाई को अलग नही कर सकते"

दोनो आदमी आपस में झगड़ने लगे फिर उनमे मारपीट शुरू हो गई।

इतने में गधा भााग खड़ा हुआ। वह अपने साथ अपनी परछाई भी ले गया।

शिक्षा - छोटी छोटी बातो पर लड़ना अच्छा नही।

भेड़िया और भेड़ - Hindi Stories with Moral for Class 2

एक भेड़ चरानेवाला लड़का था। वह रोज भेड़ों को चराने के लिए जंगल में ले जाता था। जंगल में वह अकेला होता था। इसलिए उसका मन नही लगता था। एक दिन उसे मजाक करने की सूझी।

वह जोर जोर से चिल्लाने लगा, "बचाओ बचाओ भेडि़या आया भेडि़या आया।"

आसपास के खेतो में किसान काम कर रहे थे। उन्होने लड़के की आवाज सुनी वे अपना अपना काम छोड़कर लड़के की मदद के लिए दौड़ पड़े। जब लड़के के पास पहुचे तो उन्हे कही भेडि़या दिखाई नही दिया। किसानो ने लड़के से पूछा, "भेडि़या तो कहीं है नही फिर तुमने हमे क्यों बुलाया?",

लड़का हँसने लगा उसने कहा, "मैं तो मजाक कर रहा था। भेडि़या आया ही नही था। जाओ जाओ तुम लोग।"

किसानो ने लड़के को खूब डाटा फटकारा इसके बाद वे लौट गए।

एक बार लडके ने फिर ऐसा ही मजाक किया आसपास के किसान मदद के लिए दौड़ आए। लड़के के इस मजाक पर उन्हे बहुत गुस्सा आया लड़के को डाँट फटकार कर चले गए।

कुछ समय बाद एक दिन सचमुच भेडि़या आ पहुँचा भेड़ चरानेवाला लड़का दौडकर पेड़ पर चढ़ गया और मदद के लिए चिल्लाने लगा।

पर इस बार उसकी मदद के लिए कोई नही आया सभी ने यही सोचा कि वह बदमाश लड़का पहले तरह मजाक कर रहा है।

भेडि़ए ने कई भेड़ो को मार डाला इससे लड़के को अपने किए पर बड़ा दुख हुआ।

शिक्षा - झूठे आदमी की सच्ची बातो पर भी लोग विश्वास नही करते।

मछुवा और मंत्री - Moral Stories in Hindi for class 2

एक राजा था। उसे रोज तुरंत पकड़ी गई मछलियाँ खाने का शौक था। एक दिन समुद्र में भयंकर तूफान आया। कोई भी मछुआ समुद्र में मछली मारने नही गया। इसलिए राजा को तुरंत पकड़ी हुई मछली नही मिल सकी। राजा ने घोषणा करा दी। कि उस दिन जो भी तुरंत पकड़ी हुई मछली राजा के पास लाएगा। उसे भरपूर इनाम दिया जाएगा। एक गरीब मछुए ने यह घोषणा सुनी जान जोखिम में डालकर समुद्र से मछलियाँ पकड़ी और राजमहल पहुँचा राजमहल के पहरेदारो ने उसे फाटक पर रोक दिया वे उसे राजा के मंत्री के पास ले गए।

मंत्री ने मछुए से कहा, "मैं तुम्हे राजा के पास जरूर जाने दूँगा पर तुम्हे राजा से जो ईनाम मिलेगा। उस में आधा हिस्सा होगा।" मछुए को मंत्री का यह प्रस्ताव पसंद नही आया। फिर भी उसने मन मारकर उसे स्वीकार किया।

इसके बाद पहरेदार उसे लेकर राजा के पास गए। मछुए ने राजा को मछलियाँ दी। राजा मछुए पर बहुत प्रसन्न हुआ। बताओ क्या इनाम चाहिए। तुम जो माँगोगे वह मैं तुम्हे अवश्य दूँगा। मछुए ने कहा, "महाराज मैं चाहता हूँ मेरी पीठ पर पचास कोड़े लगाए जाएँ। बस मुझे यही इनाम चाहिए।" मछुए की यह बात सुनकर सभी दरबारी चकित रहगए। राजा ने मछुए की पीठ पर पचास हल्के कोड़े लगाने का आदेश दिया जब नौकर मछुए की पीठ पर पच्चीस कोड़े लगा चुका। तो मछुए ने कहा, "रूको! अब बाकी के पच्चीस कोड़े मेरे साझेदार की पीठ पर लगाओ।" राजा ने मछुए से कहा, "तुम्हारा हिस्सेदार कौन है?"

मछुए ने कहा,"महाराज आपके मंत्री महोदय ही मेरे हिस्सेदार है।"

मछुए का जवाब सुनकर राजा गुस्से से तमतमा उठा। उसने मंत्री को अपने सामने हाजिर करने का आदेश दिया।

मंत्री के सामने आते ही राजा ने नौकर को आदेश दिया इन्हे गिनकर पच्चीस कोड़े लगाओ ध्यान रखो। इनकी पीठ पर कोड़े जोर जोर से लगने चाहिए। इसके बाद राजा ने बेईमान मंत्री को जेल मे डाल दिया। फिर राजा ने मछुए को मुँहमाँगा इनाम दिया।

शिक्षा - जैसी करनी वैसी भरनी।

बंदर का इंसाफ (Best Hindi Moral Story for Class 2)

किसी शहर मे दो बिल्लियाँ साथ रहती थीं। एक दिन दोनों को रास्ते पर एक केक दिखाई दिया। एक बिल्ली ने उछल कर तुरंत उस केक के टुकड़े को उठा लिया। दूसरी बिल्ली उससे केक छीनने लगी।

पहली बिल्ली ने कहा, अरे चल जा यहाँ से! यह केक मेरा है क्योंकि पहले मैंने इसे उठाया है।

दूसरी बिल्ली तुरंत बोली, इसे पहले मैने देखा था, इसलिए यह मेरा हुआ। दोनो लड़ते लड़ते एक पेड़ के नीचे पहुंचे।

उसी पेड़ पर एक बंदर बैठा था। दोनो बिल्लियो को लड़ते देख वह नीचे उतर आया। बंदर को देखकर बिल्लियो ने उससे झगड़ा निपटाने की प्रार्थना की।

बंदर भी यही चाहता था, उसने तुरंत बोला - यह केक मुझे दो। मैं इसके दो बराबर बराबर हिस्से करूँगा और तुम दोनों को एक-एक हिस्सा दे दूँगा। इस तरह तुम दोनों का झगडा समाप्त हो जायेगा।

केक मिलते ही बंदर ने उसके दो टुकड़े किये। उसने दोनो टुकडो़ को बारी-बारी से देखा, फिर अपना सिर हिलाते हुए कहा, दोनो टुकड़े बराबर नही हैं। यह टुकड़ा दूसरे टुकड़े से बड़ा है। उसने बड़े से टुकड़े से थोड़ा हिस्सा खा लिया। फिर भी दोनो हिस्से बराबर नही हुए। बंदर ने फिर बड़े हिस्से में से थोड़ा खा लिया। इस प्रकार बंदर बार बार बड़े टुकड़े में से थोड़ा-थोड़ा खाता रहा।

फिर क्या था, अंत मे केक के केवल दो बहुत ही छोटे-छोटे टुकड़े बचे। बंदर नें बिल्लयो से कहा, ओ-हो-हो! अब भला इतने छोटे-छोटे टुकड़े मैं तुम्हे कैसे दे सकता हूँ? चलो इसे भी मैं ही खा लेता हूँ। यह कहकर बंदर केक के दोनो छोटे-छोटे टुकड़े मुँह में डालकर चलता बना। बिल्लयो के झगड़ने के फायदा बंदर ने अच्छी तरह लिया।

शिक्षा - दो की लड़ाई मे तीसरे का फायदा। इसी लिए हमे आपस मे नही झगड़ना चाहिए। क्योंकि झगड़ने से कुछ हासिल नही होता।

गरीब मजदूर - Best Moral Stories in Hindi for class 2

एक गरीब मजदूर था। वह खेतो में काम करता था एक दिन शााम को वह अपना काम खत्म करके। घर लौट रहा था रास्ते के किनारे मिठाई की एक दुकान थी। मिठाईयो की मीठी मीठी सुगंध रास्ते भर आ रही थी। इससे मजदूर के मुह में पानी आ गया। वह दुकान के पास गया। कुछ देर वहाँ खड़ा रहा उसके पास थोड़े पैसे थे। पर वे मिठाई खरीदने के लिये काफी नही थे। वह खाली हाथ लौटने लगा तभी उसे दुकनदार की कर्कश आवाज सुनाई दी। "रूको! पैसे तो देते जाओ।"

पैसे ? काहे के पैसे? मजदूर ने पूछा?

मिठाई के और काहे के! दुकनदार ने कहा,

"पर मैने तो मिठाई खाई नही! उसने जवाब दिया।

"लेकिन तुमने मिठाई की सुगंध तो ली है न!" दुकनदार ने कहा, "सुगंध लेना मिठाई खाने के बराबर है।"

बेचारा मजदूर घबरा गया। वहाँ खड़ा एक होशियार आदमी यह सुन रहा था। उसने मजदूर को अपने पास बुलाया उसके कान में फुसफुसाकर कुछ कहा। उस आदमी की बात सुनकर मजदूर का चेहरा खिल उठा वह दुकनदार के पास गया और अपनी जेब के पैसे खनखनाने लगा पैसो की खनखनाहट सुनकर दुकनदार खुश हो गया। चलो निकालो पैसे। मजदूर ने कहा, "पैसे तो मैने चुकता कर दिए"

दुकनदार ने कहा, "अरे तुमने पैसे कब दिए?"

मजदूर ने कहा, "तुमने पैसो की खनखनाहट नही सुनी अगर मिठाई की सुगंध लेना मिठाई खाने के बराबर है। तो पैसो की खनखनाहट सुनना पैसे लेने के बराबर है।" हा हा हा वह गर्व से सर ऊँचा किए कुछ देर वहाँ खड़ा रहा। फिर मुस्कराता हुआ चला गया।

शिक्षा - जैसे को तैसा

बादाम किसे मिले - Short Stories in Hindi for Class 2

एक दिन दो लड़के सड़क के किनारे किनारे जा रहे थे। तभी उन्हे जमीन पर गिरा हुआ एक बादाम दिखाई दिया। दोनो उस बादाम को लेने के लिए दौड़ पड़े। बादाम उनमे से एक लड़के के हाथ लगा। दूसरे लड़के ने कहा, "यह बादाम मेरा है। क्योंकि सबसे पहले मैने इसे देखा था।"

यह मेरा है। बादाम लेनेवाले लड़के ने कहा, "क्योंकी मैंने इसे उठाया था।" इतने मे वहाँ एक चलाक लंबा सा लड़का आ पहुँचा।

उसने दोनो लड़को से कहा, "बादाम मुझे दो। मैं तुम दोनो का झगड़ा निपटा देता हूँ।" लंबे लड़के ने बादाम ले लिया उसने बदाम को फोड़ डाला। उसके कठोर छिलके के दो टुकड़े कर दिये। छिलके का आधा हिस्सा एक लड़के को देकर उसने कहा, "लो यह आधा भाग तुम्हारा दूसरा भाग दूसरे लड़के के हाथ मे थमाकर बोला और यह भाग तुम्हारा। फिर लंबे लड़के ने बादाम की गिरी मुहँ मे डालते हुए कहा, "यह बाकी बचा हिस्सा मैं खा लेता हूँ। क्योंकी तुम्हारा झगड़ा निपटाने मे मैंने मदद की है।

शिक्षा - दो के झगड़े मे तीसरे का फायदा।

बनिए का बनिया

एक बनिया संत के पास पहुँचा। बोला, “भगवान् का नाम लेना चाहता हूँ, महाराज! सेवा-पूजा करना चाहता हूँ; किंतु एक दमड़ी का भी खर्चा न हो, इसका खयाल रखिएगा।”

संत बोला, “अरे भाई, भगवान् कब तुमसे पैसा-रुपया चाहता है ! उसे तो चाहिए सच्ची भक्ति | ” पैसे के बिना भक्ति हो सकती है, तब बनिए को भक्ति से क्या परहेज।

बस, लग गया राम नाम जपने उठते-बैठते, खाते-पीते, दिन-रात वह ईश्वर का नाम जपता रहता। एक दिन बनिए ने भगवान् के सामने दूध से भरा लोटा चढ़ाया। मीठा करने के लिए शक्कर डाली।

तभी उसे खयाल आया कि दूध में शक्कर ज्यादा पड़ गई है। सोचा, थोड़ा निकाल ले। मगर जैसे ही लोटे में हाथ डाला तो दंग रह गया। लोटे में शक्कर तो शक्कर, दूध भी गायब था।

बनिया समझ गया। भगवान् उससे भी ज्यादा उस्ताद निकले। हाथ आया वापस क्यों जाने दें। सच है, भगवान् बनियों का बनिया है। भक्ति तो मन में सच्ची थी, अतः भगवान् ने प्रसाद ग्रहण कर लिया। यह सोच बनिए की खुशी का ठिकाना न रहा ।

शिक्षा : भक्ति धन से नहीं, मन से होती है ।

जिंदा मुरदा

राजा राहूगण पालकी में यात्रा कर रहे थे । चार मजदूर उनकी पालकी उठाए दौड़ रहे थे। सफर लंबा था। तभी एक कुएँ के पास पालकी उतारकर मजदूरों ने कहा, “प्यास लगी है, हुजूर! जरा पानी पीकर आते हैं।”

उनमें से एक मजदूर तो इतना थक गया था कि एक कदम भी चलने की हिम्मत उसमें बाकी नहीं थी । वह वहीं से जान छुड़ाकर भाग गया। अब बच रहे तीन । पालकी कैसे उठाई जाय? इतने में सामने से जड़भरत आते दिखे। राजा ने कहा,

” पकड़ो इसे उठवाओ इससे पालकी । ” चौथे मजदूर की जगह जड़भरत ने कंधा दिया। पालकी चल पड़ी । मगर यह क्या? कभी राजा का सिर पालकी की दीवार से टकराता तो कभी लुढ़कने लगता ।

राजा ने मजदूरों को धमकाया, “ठीक तरह चलो। तीनों मजदूर गिड़गिड़ाए, “हुजूर, ठीक तो चल रहे हैं। यह जो नया मजदूर है न, यही सीधा नहीं चल रहा ।’ राजा ने जड़भरत को धमकाया, “जान है कि नहीं? क्या मरे जैसा चल रहा है!”

जड़भरत ने कह दिया, “राजा, मैं तो मरे जैसा चल रहा हूँ, पर तू तो जिंदा है, फिर अपना भार दूसरों पर क्यों डालकर चल रहा है? इस तरह तो आदमी तब चलता है जब मृत्यु को प्राप्त होता है।’ यह सुनकर राजा तुरंत पालकी से कूद पड़ा।

शिक्षा -जो उपदेश आत्मा से निकलता है, आत्मा पर सबसे ज्यादा कारगर होता है ।

भेड़िए की चाल

एक भेड़िया बीमारी की वजह से कुछ कमजोर हो गया। जंगल में शिकार कर अपने लिए भोजन जुटाना अब उसके लिए संभव न रहा। उसने एक चाल चली ।

भेड़ की खाल ओढ़कर वह भेड़ों के एक झुंड में घुस गया। किसीको पता न चला। चरवाहे को भी नहीं। बस, अब क्या था ! मौज ही-मौज। भेड़िया रोज चुपके से एक भेड़ के बच्चे को अलग ले जाता और मिनटों में गड़प कर जाता।

कुछ रोज यह युक्ति चलती रही। एक दिन चरवाहे के घर पर कुछ मेहमान आनेवाले थे। उसने एक बड़ी सी भेड़ को काटकर उसका सालन बनाने का निश्चय किया। अचानक उसकी दृष्टि भेड़ की खाल ओढ़कर भेड़ बने भेड़िए पर गई । चरवाहे ने फौरन उसकी गरदन धड़ से अलग कर दी।

शिक्षा -जैसी करनी वैसी भरनी ।

किसान और जादुई बतख (Story in Hindi for Class 2 with Moral)

बहुत समय पहले किसी गांव मे एक किसान रहता था। उसके पास एक जादुई बतख थी जो रोज एक सोने का अंडा देती थी।

किसान रोज इस सोने के अंडे को बाजार में बेच देता था। इससे उसे अच्छी आमदनी हो जाती थी। बस क्या था, थोड़े ही दिनों में किसान बहुत अमीर हो गया। उसने एक बहुत बड़ा महल बनवाया और अपनी पत्नी तथा बच्चों के साथ आनन्द से रहने लगा। अब उसे किसी चीज की कमी नही थी।

बहुत दिनों तक इसी प्रकार चलता रहा। सभी खुशी से रह रहे थे। एक दिन किसान ने सोचा, ये बतख रोज एक ही अंडे देती है, यदि मैं इस बतख के शरीर से सारे अंडे एक बार ही निकाल लूँ, तो मालामाल हो जाऊँगा।

बस क्या था, किसान ने एक बड़ा-सा चाकू लिया और बतख का पेट चीर डाला। लेकिन बतख के पेट में से उसे एक भी अंडा नही मिला। किसान को सारी बात समझ आ गयी। उसे अपनी गलती पर बहुत दुःख हुआ। उसकी हालत पागलों जैसी हो गयी। वह पछताने लगा। जिस बतख के अंडे से वह इतना अमीर हुआ था, अब वह बतख मर चुकी थी।

शिक्षा - लालच बुरी बला है।

लालची औरत

एक समय की बात है। एक गाँव में एक बूढ़ी औरत रहती थी। उसका कोई नहीं था।वह एकदम अकेली थी। उसकी आमदनी का कोई जरिया नहीं था।

बस ले- देकर उसके पास एक मुर्गी थी। मुर्गी उस बूढी औरत को हर रोज एक अंडा देती थी, जिसे वह पकाकर खा लेती थी। एक दिन वह बूढ़ी औरत बैठे-बैठे सोचने लगी,

‘यदि यह मुर्गी हर रोज एक अंडे की जगह दो अंडे देने लगे तो कितना अच्छा हो। एक अंडा मेरे खाने के काम आएगा और दूसरा अंडा बाजार में बेचकर मैं कुछ पैसे कमा सकती हूँ।

मुर्गी एक से ज्यादा अंडे दे, इस बारे में कुछ सोचना होगा।’ बहुत सोच-विचार के बाद उसने मुर्गी को ज्यादा दाना खिलाना शुरू कर दिया। ज्यादा दाना खाने से मुर्गी बीमार पड़कर मर गई। बुढ़ी औरत के पास अब अपनी गलती पर पछताने के सिवा कुछ नहीं बचा था।

शिक्षा: लालच का फल हमेशा बुरा होता है।

मूर्ख मेंढक

एक गाँव में दो मेंढक रहते थे। एक मेंढक ने एक तालाब में अपना घर बनाया हुआ था, जबकि दूसरा मेंढक सड़क के किनारे एक कच्ची पगडंडी पर अपना घर बनाकर रहता था।

एक दिन तालाब में रहने वाले मेंढक ने दूसरे से कहा, “मित्र! तुम मेरे साथ तालाब में आकर रहो। तुम्हारा घर सुरक्षित नहीं है, क्योंकि पटरी पर सारा दिन रेलगाड़ियां और तांगे आदि चलते रहते हैं।

ऐसा न हो कि किसी दिन तुम किसी गाड़ी के नीचे आ जाओ।” दूसरा मेंढक बोला, “तुम बेवजह चिंता कर रहे हो। मैं कई सालों से यहाँ रह रहा हूँ और हमेशा यहीं रहूंगा।”

इसके कुछ दिनों बाद ही वह मेंढक एक गाड़ी के पहियों के नीचे कुचल कर मर गया।

शिक्षा : जब दूसरे हमारी भलाई की बात कहें तो हमें मान लेनी चाहिए।

बदला

एक दिन एक लोमड़ी ने किसान के खेत में जाकर उसका एक कच्चा सीताफल तोड़ दिया। यह देखकर किसान को लोमड़ी पर बहुत गुस्सा आया।

वह लोमड़ी को पकड़ने के लिए उसके पीछे भागा और आखिरकार लोमड़ी की पूँछ उसके हाथ में आ गई। किसान ने उसकी पूँछ में रस्सी लपेटकर उस पर केरोसिन तेल छिड़का और आग लगा दी।

लोमड़ी ने जब अपनी पूँछ से आग की लपटें निकलती देखीं तो वह घबराई नहीं, बल्कि किसान के खेतों की ओर भागी। खेतों में गेहूँ की फसल पककर तैयार थी। लोमड़ी ने पकी फसल में आग लगा दी।

किसान की सारी फसल पलभर में जलकर राख हो गई और उसे लाखों का नुकसान हुआ। अब किसान अपने किए पर पछता रहा था कि उसने एक सीताफल के बदले अपना इतना बड़ा नुकसान कर दिया।

शिक्षा : जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहिए।

ग्वालिन और उसका सपना - Best Hindi Stories with Moral for Class 2

एक ग्वालिन थी। वह दूध बेचने जा रही थी। उसके सर पर दूध से भरा घड़ा था। चलते चलते मन ही मन विचार कर रही थी। इस दूध को बेचने से जो पैसा मिलेगा। उन पैसो से मैं अंडे खरीदूँगी उन अंडो से मुझे अनेक अच्छी अच्छी मुर्गियाँ मिलेगीं उन मुर्गियों को बेच कर मैं अपने लिए रेशमी साड़ी खरीदूंगी। उस रेशमी साड़ी मे मैं बहुत सुंदर दिखाई दूँगी फिर अच्छे अच्छे लड़के मेरे पास आएग। मुझसे शादी करना चाहेंगे। पर मैं इनकार में अपना सर झटकर कहूँगी नही।

यह सोचते हुए उसने अपने सर को जोर से झटका दिया। इसके करण उसके सरपर रखा दूध का घड़ा जमीन पर गिर गया। उसका सारा दूध जमीन पर फैल कर बर्बाद हो गया। इस तरह अंड़ो मुर्गियों रेशमी साड़ी तथा अच्छे अच्छे लड़को का ग्वालिन का सपना मिट्टी में मिल गया।

शिक्षा - हवा में महल बनाना अच्छा नही!

काजू खाने वाला लड़का - Best Moral Stories in Hindi for class 2

एक लड़का था। उसे काजू बहुत पसंद थे। इसलिए उसकी माँ उसे थोड़े थोड़े काजू खाने के लिए देती थी। लड़का हमेशा माँ से ज्यादा काजू देने का हठ करता पर उसकी माँ उसे हर बार कहती नही बेटे एक साथ ज्यादा काजू नही खाने चाहिए। यदि एक साथ ज्यादा काजू खाओगे। तो तुम्हारे पेट में दर्द होने लगेगा। यह सुनकर लड़का चुप हो जाता पर उसने माँ की बात पर कभी ध्यान नही दिया।

एक दिन उसकी माँ बाहर गई हुई थी। लड़का घर पर अकेला था।

उसने जल्दी जल्दी काजू का डिब्बा उतारा उस दिन घर पर उसे रोकने वाला कोई नही था। उसने भर पेट काजू खाए।

दूसरे दिन लड़का बीमार पड़ गया। उसके पेट में जोरो की पीड़ा होने लगी। उसे इस बात का बड़ा पछतावा हुआ कि उसने माँ का कहना नही माना।

शिक्षा - माता पिता तुम्हारे शुभचिंतक है। उनका कहना मानो।

गधा और मूर्तिकार - Best Moral Stories in Hindi for class 2

एक गाँव मे एक मूर्तिकार रहता था। वह देवी देवी देवताओ की सुन्दर मूर्तिया गढ़ा करता था। एक बार उसने भगवान की एक बहुत सुंदर मूर्ति गढ़ी। वह मूर्ति उसे ग्राहक के पास पहुचानी थी। इसलिए उसने कुम्हार से गधा किराए पर लिया। फिर उसने मूर्ति गधे पर लादी और चल पड़ा रास्ते मे जो उस मूर्ति को जो देखता पल भर रूककर मूर्ति की तारीफ जरूर करता। कुछ लोग उस मूर्ति को देखते ही झुककर प्रणाम करते।

यह देख कर उस मूर्ख गधे ने सोचा कि लोग उसी की प्रशंसा कर रहे हैं। और उसी को झुककर प्रणाम कर रहे है वह अकड़कर सड़क के बीच खड़ा हो गया। और जोर जोर से रेंकने लगा। मूतिकार ने गधे को पुचकार कर चुप करने की।

बहुत कोशिश की। पर गधा रेकंता ही रहा। अंत मे उस मूर्तिकार ने डंडे से उसकी खूब पिटाई की। मार खाने के बाद गधे का सारा घंमड उतर गया। उसका होश ठिकाने आया। और वह फिर चुपचाप चलने लगा।

शिक्षा - समझदार के लिए इशारा और मूर्खो के लिए डंडा

बैल और मक्खी (Hindi Stories For Class 2)

एक खेत से लगे चारागाह में एक बैल मजे से हरी-हरी घास चर रहा था। अचानक एक मक्खी उड़ती हुई आई और उसकी पूँछ पर बैठ गई। कुछ देर में वह वहाँ से उड़कर कभी उसके सींगों पर तो कभी पीठ पर या फिर वापस पूँछ पर बैठती।

बैल आराम से घास चरता रहा तो मक्खी को लगा कि बैल ने उसकी ओर ध्यान नहीं दिया है। इसलिए वह बैल से बोली, “मित्र! ैं तुम्हें परेशान तो नहीं कर रही हूँ न? यदि मेरा भार तुम्हें सहन नहीं हो रहा तो कह दो।

मैं कहीं और जाकर बैठ जाऊंगी।” बैल बोला,”मेरे इतने बड़े शरीर पर तुम्हारे बैठने से कोई असर पड़ने वाला नहीं है। मुझे तो पता भी नहीं चला कि तुम कब आईं। तुम हो ही इतनी छोटी कि तुम्हारे होने या न होने का फर्क पता ही नहीं चलता।”

शिक्षा : हमें बड़े बोल नहीं बोलने चाहिए।

उपकार का बदला

एक बार एक चींटी पानी पीते समय नदी में गिर गई। वह चिल्लाने लगी, “बचाओ, बचाओ।” नदी तट पर एक पेड़ पर बैठे कबूतर को उस पर दया आ गई और उसने एक पत्ता तोड़कर पानी में चींटी के पास फेंक दिया।

चींटी झट से पत्ते पर बैठकर बाहर निकल आई। बाहर आकर उसने कबूतर को धन्यवाद दिया और वादा किया कि एक दिन वह इस भलाई का बदला जरूर चुकाएगी।

कुछ दिनों बाद चींटी ने देखा कि शिकारी द्वारा फैलाए गए जाल में कबूतर फँस गया है। उसने तुरंत शिकारी के पैर में डंक मारा। शिकारी दर्द से कराहने लगा। शिकारी के हाथ से जाल छूट गया और मौका पाकर कबूतर जाल से निकलकर फुर्र से उड़ गया।

शिक्षा : हमें दूसरों द्वारा किए गए उपकार को कभी नहीं भूलना चाहिए।

कोयल और बाज ( Hindi Stories For Class 2 )

बरगद के पेड़ की ऊँची शाखा पर बैठकर कोयल मस्ती में गा रही थी कि तभी ऊपर से निकलते बाज की नजर उस पर पड़ी। बाज काफी देर से भखा था और शिकार की तलाश में घूम रहा था।

कोयल को देखकर वह बहुत खुश हुआ और नीचे आकर उसको अपने पंजों में दबाकर उड़ गया। अचानक हुए इस हमले से कोयल को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे।

उसने बाज से कहा, “मैं इतनी छोटी हूँ कि मुझे खाकर तुम्हारा पेट भी नहीं भरेगा। इसलिए किसी बड़े पक्षी का पेड़ जिसे खाकर तुम्हारी भूख मिटे।” बाज बोला, “तुम इतनी छोटी होकर भी मुझे मूर्ख बनाने की कोशिश कर रही हो।

तुम चाहती हो कि मैं तुम्हें छोड़ दूँ। पर मैं बेवकूफ नहीं हूँ कि हाथ आया हुआ शिकार छोड़ दे।” यह कहकर बाज उसे मारकर खा गया।

शिक्षा -हाथ आए अवसर को छोड़ देना मूर्खता है।

चमत्कारी भोजन

एक दिन एक राजा आँधी और तूफान में फँस गया। उसने एक झोंपड़े में शरण ली। उसने देखा, बच्चे जमीन पर बैठे हुए खाना खा रहे हैं। खाने में सिर्फ पतली खिचड़ी ही थी, पर बच्चे काफी स्वस्थ दिख रहे थे। उनके गालों पर हलकी ललाई थी । राजा ने बच्चों की माँ से इसका राज जानना चाहा।

उनकी माँ ने कहा, “यह सब उन तीन बातों की वजह से है जो बतौर घुट्टी मैं इन्हें खाने के साथ देती हूँ। पहली चीज, बच्चे अपने खाने भर का पैदा करने के लिए स्वयं मेहनत करें। दूसरी, मैं कोई चीज उन्हें बाहर की नहीं देती।

तीसरी, मैंने उन्हें अंधाधुंध खाने से दूर रखा है। जितनी भूख हो उतना ही खाना । ” “

शिक्षा : नियम और सादगी स्वास्थ्य की निशानी है।

एक ग्रामीण चूहा (Hindi Short Stories for class 2)

बहुत समय पहले किसी गांव मे एक चूहा रहता था। वह खेत में रहता था लेकिन उसकी मित्रता एक शहरी चूहा से हो गयी थी जो नजदीक के एक शहर में रहता था।

एक दिन ग्रामीण चूहे ने अपने मित्र शहरी चूहे को खाने पर निमंत्रित किया। उसने अपने मित्र को मीठे-मीठे बेर, मूंगफली के दाने तथा कंदमूल खाने को दिए। लेकिन शहरी चूहे को खेतों का यह सादा खाना पसंद नही आया। उसने अपने मित्र चूहे से कहा, भाई! तुम्हारा यह देशी खाना मुझे पसंद नही आया। यह तो बड़ा घटिया किस्म का खाना है। और तो और इसमें कोई स्वाद भी नहीं है। एक बार तुम मेरे घर चलो, तो तुम्हें पता चलेगा कि बढ़िया और स्वादिष्ट खाना कैसा होता है!

बिना कुछ सोचे ग्रामीण चूहे ने भी शहरी चूहे का आमंत्रण स्वीकार कर लिया। जब वह शहर गया तो उसके शहरी मित्र ने उसे अजींर, खजूर, शहद, बिस्कुट, पावरोटी, मुरब्बा जैसे स्वादिष्ट भोजन खाने को दिया।

लेकिन शहर मे वे दोनो चूहे चैन से भोजन नही कर पा रहे थे। वहाँ बार-बार एक बिल्ली आ जाती और चूहों को अपनी जान बचाने के लिये भागना पड़ता था। शहरी चूहे का बिल भी बहुत छोटा और सँकरा था।

खेत मे आजाद रहने वाले चूहे ने कहा, तुम्हारा जीवन कितना है, भाई? मै तो यहाँ नही रह सकता हूँ। मैं अपने गांव जा रहा हूँ, वहाँ कम से कम शांतिपूर्वक खाना तो खा सकता हूँ। जल्द ही ग्रामीण चूहा अपने गांव वापस आ गया। अपने स्थान पर पहुँच कर उसे बड़ी प्रसन्नता हुई।

शिक्षा :शांति और निर्भयता मे ही सच्चा सुख कुछ भी नही है।

लकड़हारा और देवदुत - Hindi Stories with Moral for Class 2

एक लकड़हारा था। एक बार वह नदी के किनारे एक पेड़ से लकड़ी काट रहा था। एकाएक उसके हाथ से कुल्हाड़ी छूटकर नदी मे गिर पड़ी। नदी गहरी थी। उसका प्रवाह भी तेज था। लकड़हारे ने नदी से कुल्हाड़ी निकालने की बहुत कोशिश की पर वह उसे नही मिली इससे लकड़हारा बहुत दुखी हो गया। इतने देवदूत मेवहाँ से गुजरा लकड़हारे को मुँह लटकाए खड़ा देख कर उसे दया आ गई। वह लकड़हारे के पास आया और बोला चिंता मत करो। मैं नदी से तुम्हारी कुल्हाड़ी अभी निकाल देता हूँ। यह कहकर देवदूत नदी मे कूद पड़ा देवदूत पानी से निकला तो उसके हाथ मे सोने की कुल्हाड़ी थी। वह लकड़हारे को सोने की कुल्हाड़ी देने लगा। तो लकड़हारे ने कहा,"नही नही यह कुल्हाड़ी मेरी नही है। मैं इसे नही ले सकता।"

देवदूत ने फिर नदी में डुबकी लगाई इसबार वह चाँदी की कुल्हाड़ी लेकर बाहर आया ईमानदार लकड़हारे ने कहा, "यह कुल्हाड़ी मेरी नही है।

देवदूत ने तीसरी बार पानी मे डुबकी लगाई इस बार वह एक साधारण सी लोहे की कुल्हाड़ी लेकर बाहर आया।

हाँ यह मेरी कुल्हाड़ी है। लकड़हारे ने खुश होकर कहा।

उस गरीब की ईमानदारी देखकर देवदूत बहुत प्रसन्न हुआ। उसने लकड़हारे को उसकी लोहे की कुल्हाड़ी दे दी। साथ ही उसने सोने और चाँदी की कुल्हाडि़याँ भी उसे पुरस्कार के रूप मे दे दीं।

शिक्षा - ईमानदारी से बढ़कर कोई चीज नही।

सब्जी

“यह सब्जी बड़ी बेस्वाद है ! ” शैली ने गुस्से से कटोरी पटकते हुए कहा, “मैं इसे नहीं खा सकती । ” ‘“ठीक है।” माँ ने उसे पुचकारा, “शाम को मैं ठीक से बनाने की कोशिश करूँगी । ”

दोपहर में दोनों बगीचे में गईं। माँ ने आलू खोद-खोदकर निकालने शुरू किए और शैली उन आलुओं को उठा उठाकर झाबे में रखने लगी। यही करते-करते शाम हो गई ।

शैली और माँ दोनों घर लौटे | शैली दिन भर काम में माँ का हाथ बँटाती रही थी, अतः बुरी तरह थक गई थी । भूख भी उसे बड़ी जोरों की लगी थी । माँ ने जैसे ही खाना परोसा, शैली खाने पर टूट पड़ी। फिर उसने माँ से कहा, “सुबहवाली सब्जी की अपेक्षा यह सब्जी बहुत स्वादिष्ट बनी है। “

शैली का खाना समाप्त हो गया तो माँ ने कहा, “मुझे बड़ी खुशी हुई है कि तुम्हें सब्जी इतनी पसंद आई; पर बेटी, मैं तुम्हें यह सच्चाई बताना चाहती हूँ कि यह सब्जी वही सुबहवाली है।

पर इस वक्त तुम्हें इसलिए अच्छी लग रही है क्योंकि तुम खूब थकी हुई हो और तुम्हें कसकर भूख लगी है। मेहनत के बाद खाना अच्छा लगता है।’’

शिक्षा : हर चीज की कीमत सही वक्त पर होती है।

बैल और मेढक (Hindi Short Stories for class 2)

एक बार की बात है किसी तालाब के किनारे छोटे-छोटे मेढक खेल रहे थे। तभी वहाँ एक प्यासा बैल पानी पीने के लिए आया। उसने पानी पीकर जोर से डकारा। बैल के डकारने की अवाज सुनकर सभी छोटे छोटे मेढक डर गए। वे तेजी से भागते हुए अपनी दादी माँ के पास पहुँचे।

दादी माँ ने अपने पोते से पूछा, अरे क्या हुआ? तुम लोग इतना घबराए हुए क्यों हो?

सबसे छोटे मेढक ने कहा, दादी जी, अभी कुछ देर पहले एक बहुत बड़ा जानवर तालाब में पानी पीने के लिए आया था। उसकी आवाज बहुत ही तेज और डरावना थी।

दादी माँ ने पूछा, कितना बड़ा था वह जानवर? नन्हे मेढक ने जवाब दिया, अरे, वह तो बहुत बड़ा था। दादी माँ ने अपने चारो पैर फैलाकर और गाल फुलाकर कहा, वह इतना बड़ा था, क्या? छोटे मेढक ने फिर कहा, अरे नही दादी वह इससे भी बहुत बड़ा था। दादी माँ दादी ने फिर गाल पेट फुलाकर और चारो पैर फैलाकर कहा इससे बड़ा तो नही होगा। है न!

नन्हे मेढक नें फिर वही जवाब दिया, नही दादी वह इससे भी बहुत बहुत बड़ा था। दादी माँ ने अपने पेट को और फुलाया। फिर क्या था उसका पेट फट गया और वह मर गई।

शिक्षा - थोथा अभिमान विनाश का कारण होता है।

भाग्य की महिमा

एक यात्री रेगिस्तान में रास्ता भूल गया । कई दिनों तक वह बिना भोजन और पानी के लिए भटकता रहा। बस मरने-मरने को हो रहा था। तभी उसे एक खजूर का पेड़ दिखाई दिया।

वह उसकी ठंडी छाया में बैठ गया। पेड़ पर खजूर तो नहीं थे, पर सामने रेत पर एक थैला जरूर पड़ा था। यात्री ने सोचा, अवश्य इसमें कुछ खाने का सामान होगा—और वह मरने से बच जाएगा। बड़ी उत्सुकता से उसने थैला खोला। पर तुरंत उसका चेहरा फक पड़ गया।

“ओह! इसमें तो हीरे भरे हैं। ” वह बुदबुदाया। यात्री भूख से मर रहा था और उसकी बगल में कीमती हीरों का थैला पड़ा था। वह ईश्वर से प्रार्थना करने लगा। तभी उसने देखा कि एक ऊँट उसकी तरफ चला आ रहा है। जैसे ही ऊँट निकट आया, उसने देखा कि ऊँट की पीठ पर एक व्यापारी बैठा है।

यह व्यापारी कुछ समय पूर्व उसी रास्ते से गुजरते हुए खजूर के पेड़ के नीचे आराम करने के लिए बैठा था और अपना हीरों का थैला भूल गया था। उसी थैले की खोज में वह उस जगह वापस लौटा था।

थैला वापस पाकर व्यापारी बेहद खुश हुआ। उसने यात्री को ढेर सारी खाने की सामग्री दी और उसे अपने ऊँट की पीठ पर बैठाकर साथ ले गया।

शिक्षा : कभी ढेर सारे हीरों से कीमती एक रोटी होती है।

पानी

करनाल के मैदान में मुहम्मद शाह की सेना को हराकर जब विजयी नादिरशाह दिल्ली पहुँचा तो दोनों बादशाह साथ ही तख्त पर बैठे। नादिरशाह को प्यास लगी।

उसने मुहम्मद शाह को पानी मँगाने का संकेत किया। वह पानी आने का इंतजार कर रहा था कि उसे नगाड़े बजने की आवाज सुनाई पड़ी। लगा, जैसे कोई उत्सव होने जा रहा है।

वह अभी पूछने ही वाला था कि उसके सामने दस बारह नौकर हाजिर हुए। किसीके हाथ में रूमाल था तो किसीके हाथ में पानदान। तभी दो-तीन नौकर आगे बढ़े। उनके हाथ में चाँदी का एक थाल था। उसमें बड़े तरतीब से जल भरे हुए गिलास सजे थे। वह थाल बेशकीमती कपड़े से ढका हुआ था ।

नादिरशाह को जब पता चला कि यह सारा आडंबर उन्हें पानी पिलाने के लिए है तो वह बोला, “हम ऐसा पानी नहीं पीते। ” इसके बाद उसने जोर से आवाज देकर अपने भिश्ती को बुलाया।

भिश्ती चमड़े की मशक में पानी लिये तुरंत दौड़ा आया । नादिरशाह ने सिर से अपना लोहे का टोप उतारा और उसमें पानी भरकर तुरंत पी गया। फिर उसने मुहम्मद शाह की ओर देखकर कहा, “अगर हम भी तुम्हारी तरह पानी पीते तो ईरान से हिंदुस्तान तक न आ पाते।”

शिक्षा : आदमी जितना महान् होगा उतना ही नम्र होगा।

मछुआरा और छोटी मछली (Hindi Stories For Class 2)

एक दिन मंगू मछुआरा सुबह से शाम तक समुद्र में जाल डालकर बैठा रहा, पर कोई मछली हाथ नहीं आई। आखिर में निराश होकर उसने जैसे ही अपना जाल समेटना चाहा,

एक नन्ही-सी मछली जाल में फँस गई। मछली को मछुआरे ने जैसे ही हाथ में लिया, वह बोली, “मैं इतनी नन्ही-सी मछली हूँ। मुझे ले जाकर क्या करोगे?

तुम मुझे अभी समुद्र में ही डाल दो और जब मैं बड़ी हो जाऊंगी तब मुझे निकालकर ले जाना। उस वक्त मुझे बेचने पर तुम्हें ज्यादा पैसे मिलेंगे।” मछुआरे ने उत्तर दिया,

“मैं तुम्हें हरगिज नहीं छोड़ सकता। सुबह से एक भी मछली मेरे जाल में नहीं फँसी है और तुम कहती हो कि मैं तुम्हें छोड़ दूं और जब तुम बड़ी हो जाओ,

तब तुम्हें पकड़ें। मैं इतना मूर्ख नहीं हूँ, जो तुम्हारी बातों में आ जाऊँ।” यह कहकर मछुआरे ने मछली को अपनी टोकरी में रख लिया।

शिक्षा : बुद्धिमान व्यक्ति मौके को हाथ से नहीं जाने देते।

बकरी की सलाह

एक आदमी के पास एक बकरी और एक गधा था। गधा दिनभर मेहनत करता था और बड़ा जानवर था, इसलिए वह उसे ज्यादा चारा देता और बकरी को कम। बकरी को यह बात अच्छी नहीं लगती थी।

वह चाहती थी कि मालिक गधे को घर से निकाल दे। फिर वह उसी की देखभाल करेगा। इसके लिए उसने एक योजना बनाई। वह गधे के पास जाकर बोली,

“मित्र! तुम कितना बोझा ढोते हो और दिनभर मीलों चलते हो पर मालिक तुम्हें एक दिन की भी छुट्टी नहीं देता।” गधा बोला, “तुम ठीक कहती हो, पर मैं क्या कर सकता हूँ।”

बकरी ने सुझाव दिया,”कल तुम मालिक से कहना कि तुम बीमार हो, फिर वह अपने आप तुम्हें छुट्टी दे देगा।” गधे ने बकरी का सुझाव मानकर मालिक से कहा,

“मैं काम पर नहीं जा सकता क्योंकि मेरी तबीयत ठीक नहीं है।” मालिक वैद्य को बुला लाया। वैद्य ने मालिक से कहा, “इस गधे की बीमारी दूर करने के लिए मुझे बकरी का फेफड़ा चाहिए।”

मालिक ने बकरी को मारकर उसका फेफड़ा निकालकर वैद्य को दे दिया। इस तरह बकरी की गलत सलाह ही उसकी मौत का कारण बनी।

शिक्षा -बुरे काम का नतीजा बुरा ही होता है।

लोमड़ी का फूला पेट ( Hindi Stories For Class 2 )

एक बार एक लोमड़ी भूख से बेहाल होकर भोजन की खोज में भटक रही थी। जब वह एक पेड़ के पास से निकली तो उसे मांस की गंध आई। उसने ऊपर नीचे नजर घुमाई तो उसे पेड़ के एक कोटर में रोटी और मांस रखा दिखाई दिया।

वह तुरंत कोटर में घुसकर मांस और रोटी खाने लगी। मांस चूँकि बहुत स्वाष्दि था, इसलिए उसने लालच में इतना ज्यादा खा लिया कि उसका पेट फूल गया और वह उस कोटर में फँस गई।

उसने बाहर निकलने का बहुत कोशिश की, पर निकल न सकी। तभी वहाँ से एक दूसरी लोमड़ी निकली तो उसने कोटर में फँसे-फँसे अपना सारी कहानी सुनाकर उससे मदद मांगी।

दूसरी लोमड़ी हँसकर बोली, “कुछ दिन यहीं पर रहो। बिना खाए-पिए जब तुम्हारा पेट पतला हो जाएगा तो बाहर आ जाना।” यह कहकर वह चली गई।

टिड्डा और चिंटी (Short Stories in Hindi for Class 2)

मई का महिना था, बहुत तेज गर्मी पड़ रही थी। खेतों मे अनाज भी भरपूर था। सुबह सवेरे एक टिड्डा भरपेट खाना खाकर गीत गाने में मस्त था। उसने देखा, कुछ चींटियाँ खाने की सामग्री ले जा रही हैं।

शायद वे इन खाने की सामग्री को भविष्य के लिए संग्रह कर रही थीं। चींटियों को देखकर वह हँसने लगा और उनमे से एक चींटी से कहा, "तुम सभी कितनी लालची हो! इस खुशी के मौके पर भी इतनी मेहनत कर रही हो!" चींटी ने जवाब दिया, "अरे टिड्डा भाई, हम लोग बरसात के मौसम मे खाने के लिए सामग्री एकत्र कर रहे हैं।"

गर्मी का मौसम समाप्त हुआ और बरसात शुरू हुई। आकाश में काले काले बादल छाने लगे और खुली धूप जाती रही! खेतों मे अनाज न होने के कारण टिड्डे के लिए भोजन जुटाना बहुत मुश्किल हो गया। भूखा मरने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नही बचा था। तभी उसे गर्मी के दिनों मे खाने की सामग्री एकत्र करने वाले चिंटी की याद आयी। वह तुरंत ही चिंटी के पास गया

एक दिन टिड्डे चींटी के घर गया और उसका दरवाजा खटखटाया। उसने कहा, "चींटी बहन कृपा कर मुझे कुछ खाने के लिए दो। मैं बहुत भूखा हूँ।" चींटी ने जवाब दिया, "गर्मी के दिनों में तो तुम गीत में मगन होकर इधर-उधर घूमते रहे, अब बरसात के मौसम में कही जाकर नाचो। तुम जैसे आलसी को मैं एक भी दाना नहीं दे सकती।" और उसने झट से दरवाजा बंद कर दिया।

शिक्षा - आज की बचत ही कल काम आती है।

मुर्ख और ठग - Moral Stories in Hindi for class 2

एक गाँव में एक मूर्ख आदमी रहता था गाँव के छोटे छोटे बच्चे उसका मजाक उड़ाते थे। वह लाख चतुर बनने की कोशश करता पर कोई न कोई उसे मूर्ख बनाता रहता।

एक दिन वह अपने घोड़े और बकरी बेचने बजार जा रहा था वह घोड़े पर सवार था उसने बकरी के गले मे घंटी बाँध रखी थी रस्सी का एक हिस्सा बकरी के गले मे दूसरा हिस्सा घोड़े की पूँछ से बाँध रखा था। मूर्ख को जानने वाले कुछ ठग उसका पीछा कर रहे थे उनमे से एक ठग ने बकरी के गले से घंटी खोलकर घोड़े की पूँछ में बाँध दी इसके बाद बकरी को लेकर रफूचक्कर हो गया, घोडे़ की पूँछ पर बँधी घंटी बजती रही और मूर्ख यही समझता रहा कि बकरी उसके पीछे पीछे आ रही है थोड़ी देर बाद दूसरा ठग आया उसने मूर्ख को रोककर पूँछा, "भाई साहब आपने अपने घोड़े की पूँछ में यह घंटी क्यों बाँध रखी है।" उस मूर्ख ने पीछे मुड़कर देखा तो बकरी नदारद थी उसे बड़ा ताज्जुब हुआ।

तभी तीसरा ठग आ पहुँचा उसने मूर्ख से कहा, "मैंने अभी देखा है कि एक आदमी तुम्हारी बकरी को लिए भागा जा रहा है अगर तुम मुझे अपना घोड़ा दे दो तो मैं उसका पीछा करके तुम्हारी चुराई गई बकरी वापस ला सकता हूँ!"मूर्ख तुरंत घोड़े पर से उतर पड़ा और उसने घोड़ा तीसरे ठग के हवाले कर दिया। वह मूर्ख को चिढ़ाता हुआ घोड़े को लेकर सरपट भाग गया बेचारा मूर्ख बहुत देर तक अपने पशुओ को पाने का इंतजार करता रहा पर जब वह राह देखते देखते थक गया और ठग लौट कर नही आया तो वह खाली हाथ ही घर वापस लौट आया।

दूर कहीं घंटी बजती रही और तीनो ठग गाते रहे,

घंटी घंटी बजती रहो,

रातोदिन गाती रहो,

जीवन एक खेल है सुनहरा।

शिक्षा : मूर्ख की तकदीर कभी लंबे समय तक उसका साथ नही देती

स्वार्थी दोस्त - Moral Stories in Hindi for class 2

श्याम और राम अच्छे मित्र थे। एक दिन वे जंगल से होकर जा रहे थे। रास्ते में उन्हे एक रीछ दिखाई दिया, वह उनकी तरफ आ रहा था। श्याम तुरंत भाग कर पास के पेड़ पर चढ़ गया। राम को पेड़ पर चढ़ना नही आता था। पर उसने सुना था। कि जानवर मरे हुए लोगो को कुछ नही करते। इस लिये वह स्थिर होकर जमीन पर लेट गया। उसने अपनी आँखे मूँद ली। और साँस रोक ली रीछ राम के पास आया। उसने चेहरे को सूघाँ।

उसे लगा कि वह मर चुका है। और रीछ आगे बढ गया। जब रीछ कुछ दूर चला गया। तो श्याम पेड़ से उतरा उसने राम से पूँछा, "रीछ तुम्हारे कान मे क्या कह रहा था?" राम ने जवाब दिया, "उसने कहा कि स्वार्थी लोगो से दूर रहो।"

शिक्षा - समय पर काम मे आने वाला मित्र ही सच्चा मित्र है

टोपी वाला और बंदर - Best Hindi Stories with Moral for Class 2

दो छोटे छोटे गाँव थे। दोनो गाँवो के बीच एक जंगल था। इस जंगल में बहुत सारे बंदर रहते थे। एक दिन एक टोपी वाला टोपियाँ बेचने के लिए इस जंगल से होकर जा रहा था। वह चलते चलते थक गया था। उसने अपना टोपियों से भरा संदूक एक पेड़ के नीचे रखा। और वहाँ बैठकर आराम करने लगा। थोड़ी देर बाद उसे नींद आ गई। जब टोपी वाले की नींद खुली तो वह चौंक कर उठा। उसका संदूक खुला था और सारी टोपियाँ गायब थी।

इतने में उसे बंदरो की आवाज सुनाई दी। उसने ऊपर देखा उस पेड़ पर बहुत सारे बंदर थे। सभी बंदरो ने सर पर टोपिया पहनी हुई थी। टोपीवाले को बहुत गुस्सा आया। उसने पत्थर उठा उठा कर बंदरो को मारना शुरू किया। उसकी नकल करते हुए बंदरो ने भी पेड़ से फल तोड़कर टोपीवाले की ओर फेकने शुरू किया। अब टोपीवाले को समझ में आ गया कि बंदरो से टोपियाँ कैसे वापस ले सकता है। टोपीवाले ने अपने सर से टोपी उतारी और उसे जमीन पर फेंक दी।

नकलची बंदरो ने यह देखा तो उन्होने भी अपने सर की टोपियों को उतारकर फेंकना शुरू कर दिया। टोपीवाले ने जल्दी जल्दी टोपियाँ इकट्रठी की संदूक में रखी और खुशी खुशी दूसरे गाँव की ओर चल पड़ा।

शिक्षा - सूझबूझ से ही हम कठिनाइयों से पार पा सकते है

बुढ़िया और उसका नौकर - Moral Stories in Hindi for class 2

एक बुढि़या थी। उसके यहाँ दो नौकर थे। बुढि़या रोज सुबह मुर्गे के बाॅग देते ही उठ जाती थी। फिर वह अपने नौकरौ को जगाती और उन्हे काम पर लगा देती।

नौकरो को सुबह इतनी जल्दी उठना पसंद नही था। वे दोनो हमेशा यही सोचा करते ऐसा कोई उपाय करना चाहिये। ताकि हम आराम से सो सके।

एक दिन एक नौकर ने कहा, 'क्यो न हम सभी मुर्गो को मार डाले। न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी यदि मालकिन सुबह मुर्गे की बाॅग नही सुनेगी तो जल्दी उठेगी कैसे। यदि वह सुबह जल्दी जाँगेगी नही तो हमें नींद से कौन उठाएगा। फिर हम चैन की नीद सो सकेगे।" दूसरे नौकर को यह बात पसंद आ गई। दूसरे दिन दोनो नौकरो ने मिलकर मुर्गे को मार डाला। जब मुर्गा ही नही रहा तो बड़े सबेरे बाँग कौन देता? अब बुढि़या को सुबह उठने का समय नही पता चलता था। इसलिए वह पहले की अपेक्षा और जल्दी उठ जाती थी।

एक बार वह जग जाती तो नौकरो को भी सोने न देती। मुर्गा तो मर गया पर नौकरो की परेशानी पहले से ज्यादा बढ़ गई।

अब उन्हे और भी जल्दी उठना पडता था।

शिक्षा - बिना बिचारे जो करे सो पीछे पछताए।

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