Short Stories in Hindi for Class 4 - आज की इस पोस्ट में हम आपके साथ Short Stories in Hindi for Class 4 शेयर करने जा रहे है। इन stories आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।आप इन Short Stories in Hindi for Class 4 को पूरा पढ़े। आपको यह Stories बहुत पसंद आएगी।

Short Stories in Hindi for Class 4th

Stories in Hindi for Class 4th List

नकलची गधा

खरगोश और कछुआ

एक राजा की पेंटिंग

राजा और मकाओ तोते

परीक्षा

बीमार मुर्गी और बिल्ली

खरगोश और शेर

चतुर मछुआरा

दीवार के दूसरी ओर की कहानी

बुरी आदतें की कहानी

राजा ब्रूस और मकड़ी

हिरण और उसके सींग

सबक

नहले पर दहला

अपने शब्दों को बुद्धिमानी से चुनें

आपकी क्रियाओं का प्रतिबिंब

सूरज और हवा

गुलाम और शेर

वफादार कुत्ता

एक अमीर आदमी और उसका बेटा

किसान और साँप

एक आदमी लैंप के साथ

मछलियाँ और साँप

स्वर्ग का रास्ता

कुत्ता – घर का और गाँव का

नारद का दुःख

किसान और कुत्ते

सूरज

भेड़िया और बकरी

खरगोश और मेंढक

चालाक लोमड़ी और कौआ

भेड़िया और मेमना

बीमार मुर्गी और बिल्ली

नकलची गधा

एक जंगल में एक गधा रहता था। एक दिन वह घास चर रहा था कि उसने घास में रहने वाले टिड्डे को मीठे सुर में गुनगुनाते सुना। गधा घास चरना छोड़कर तुरंत टिड्डे के पास जाकर बोला,

“मित्र! तुम तो बहुत मीठा गाते हो। तुमने इतनी मीठी आवाज कहाँ से पाई है? तुम क्या खाते हो, जिससे तुम्हारी आवाज इतनी मीठी है। क्या मुझे अपनी मीठी आवाज का राज बताओगे?” टिड्डा बोला, “तुमने मुझे मित्र कहा है।

इसलिए मैं तुम्हें अपनी मीठी आवाज का राज जरूर बताऊंगा। मैं सिर्फ ओस की बूंदें खाता हूँ, इसीलिए मेरी आवाज मीठी है।” “ठीक है, आज से मैं भी वही खाऊंगा।” गधे ने कहा।

उस दिन से गधे ने घास खाना छोड़ दिया और बस ओस की बूंदें खाने लगा। इससे उसकी आवाज तो नहीं बदली, पर वह बहुत ही पतला और कमजोर हो गया। उसने टिड्डे से कहा,

“मैं मूर्ख हूँ, जो तुम्हारी नकल कर रहा था। भगवान। ने हर प्राणी को अलग-अलग विशेषता दी है। इसलिए हमें एक-दूसरे की नकल नहीं करनी चाहिए।”

शिक्षा: हमें कभी भी आँख मूँदकर दूसरों की नकल नहीं करनी चाहिए।

खरगोश और कछुआ

एक बार की बात है एक जंगल में एक खरगोश और एक कछुआ रहता था, खरगोश को अपनी गति पर बहुत गर्व था। उसने धीमी गति के लिए कछुए का मजाक उड़ाता था।

एक दिन कछुए ने चुनौती दी कि उसके साथ एक दौड़ प्रतियोगिता हो, खरगोश ने चुनौती स्वीकार कर ली। फिर दौड़ शुरू हुई, प्रतियोगिता में एक कौआ रैफरी था।

खरगोश बहुत तेज दौड़ा, कछुआ बहुत पीछे रह गया था। एक पेड़ के नीचे नीचे विश्राम करने के लिए खरगोश रुक गया, वह सो गया। कछुआ ने उसे पास किया और विजेता पद पर पहुंच गया।

फिर खरगोश जाग गया, वह जितना तेज दौड़ सकता था उतनी तेज दौड़ी। उन्होंने देखा कछुआ पहले से विजेता पद पर था, कछुआ दौड़ जीत लिया था।

शिक्षा: घमंड का सर हमेशा नीचा ही होता है, और जो कोशिश करता है वही सफल होता है।

एक राजा की पेंटिंग

एक बार, एक राज्य था। उस राज्य का राजा के पास केवल एक पैर और एक आंख थी। लेकिन वह राजा बहुत बुद्धिमान और दयालु था। उस राज्य के सभी प्रजा खुश और स्वस्थ जीवन जीते थे।

एक दिन राजा महल के दालान से गुजर रहा था और उसने अपने पूर्वजों के चित्र देखे। उसने सोचा कि एक दिन उसके बच्चे उसी दालान में चलेंगे और इन चिंत्रो के माध्यम से सभी पूर्वजों को याद करेंगे।

लेकिन राजा ने अपने खुद के चित्र को चित्रित नहीं किया। अपनी शारीरिक अक्षमताओं के कारण, उन्हें यकीन नहीं था कि उनकी पेंटिंग कैसे बनेगी। इसलिए उन्होंने अपने राज्य समित और अन्य राज्यों के कई प्रसिद्ध चित्रकारों को दरबार में आमंत्रित किया।

राजा ने तब घोषणा की कि वह चाहता है कि महल में उसका एक सुंदर चित्र बनाया जाए। जो भी चित्रकार इसे अंजाम दे सकता है, उसे आगे आना चाहिए। उसे इस आधार पर पुरस्कृत किया जाएगा।

सभी चित्रकार यह सोचने लगे कि राजा के पास केवल एक पैर और एक आंख है। उनकी तस्वीर को बहुत सुंदर कैसे बनाया जा सकता है? यह संभव नहीं है और यदि चित्र सुंदर दिखने के लिए नहीं निकला तो राजा क्रोधित हो जाएगा और उन्हें दंड देगा। इसलिए एक-एक करके सभी ने बहाना बनाना शुरू कर दिया और राजा की पेंटिंग बनाने के लिए विनम्रता से मना कर दिया।

लेकिन अचानक एक चित्रकार ने अपना हाथ उठाया और कहा कि मैं तुम्हारा एक बहुत सुंदर चित्र बनाऊंगा, जो तुम्हें अवश्य पसंद आएगा। यह सुनकर राजा खुश हो गया और अन्य चित्रकारों को उत्सुकता हुई। राजा ने उसे अनुमति दे दी और चित्रकार ने चित्र बनाना शुरू कर दिया। उसने फिर चित्र को रंग से भर दिया। अंत में, एक लंबे समय लेने के बाद, उन्होंने कहा कि चित्र तैयार था।

सभी दरबारियों, अन्य चित्रकारों में उत्सुकता और घबराहट दिखने थी, चित्रकार राजा के चित्र को सुंदर कैसे बना सकता है क्योंकि राजा शारीरिक रूप से अक्षम है। क्या होगा अगर राजा पेंटिंग पसंद नहीं करता है, यह सभी सोचने लगे। तब चित्रकार ने चित्र प्रस्तुत किया, तो राजा सहित दरबार में मौजूद सभी लोग दंग ही रह गए।

चित्रकार ने एक चित्र बनाया, जिसमें राजा एक घोड़े पर, एक पैर पर, अपना धनुष पकड़े हुए और अपनी एक आँख बंद करके तीर को निशाना बना रहा था। राजा यह देखकर बहुत प्रसन्न हुआ कि चित्रकार ने राजा की अक्षमताओं को छिपाकर एक सुंदर चित्र बनाया है। राजा ने उसे एक बड़ा इनाम दिया।

शिक्षा: हमें हमेशा दूसरों के प्रति सकारात्मक सोचना चाहिए और उनकी कमियों को नजरअंदाज करना चाहिए। हमें कमजोरियों को छिपाने की कोशिश करने के बजाय अच्छी चीजों पर ध्यान देना सीखना चाहिए। यदि हम नकारात्मक स्थिति में भी सकारात्मक रूप से सोचते हैं और दृष्टिकोण करते हैं, तो हम अपनी समस्याओं को अधिक कुशलता से हल करने में सक्षम होंगे।

राजा और मकाओ तोते

एक बार, एक राज्य का राजा पडोसी राज्य के दौरे करने गया था। तब एक अंतिम राज्य के राजाने उसे एक सुंदर मकाओ तोते की जोड़ी दी। फिर राजा उन दिनों सुंदर तोते को लेकर अपने राज्य आ गया। और एक पक्षी को प्रशक्षित करने वाले को बुलाया।

राजा ने तोते के लिए महल के बगीचे में एक जगह की व्यवस्था की। वह अक्सर उन्हें अपने महल की खिड़की से देखता था। समय बीतने के साथ, एक दिन ट्रेनर महल में आया और उसने राजा को सूचित किया कि यद्यपि एक तोता आसमान में बड़ी ऊँची उड़ान भर रहा है, और दूसरा वह उस दिन से अपनी शाखा से नहीं बढ़ रहा था जिस दिन वह आया था।

यह सुनकर राजाने अपने राज्य के साथ पड़ोस के कई राज्य के पक्षी प्रशक्षित करने वालों को बुलाया। सबने उस एक तोते को उड़ाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह तोता उड़ने में असफल रहा। तब राजने अपने दरबारियों से कहकर उसके राज्य के एक किसान को बुलाया।

अगली सुबह वह दूसरा तोता राजा महल के ऊपर उड़ते देख राजा बहुत खुश हुआ और उस किसान को पास बुलकर पूछा, “तुमने तोता को कैसे उडाया?” सम्मान के साथ हाथ जोड़कर किसान ने राजा से कहा, “यह बहुत आसान है, मैंने बस उस शाखा को काट दिया जहाँ तोता बैठता था। ”

शिक्षा: हमें नए अवसरों का पता लगाने और अपनी क्षमता से परे सफलता पाने के लिए खुद को अपने आराम क्षेत्र से मुक्त करने की आवश्यकता है।

परीक्षा

मनु महाराज की पुत्री का नाम देवहूति था। वह बड़ी सौम्य और ज्ञानी थी। बड़ी हुई तो मनु महाराज को उसके ब्याह की चिंता हुई। तभी एक दिन नारदजी ने सुझाव दिया, “कर्दम ऋषि से बढ़कर योग्य वर तुम्हें अपनी कन्या के लिए दूजा नहीं मिलेगा।

मनु महाराज को भी बात जँच गई। वे पत्नी शतरूपा तथा कन्या देवहूति के साथ कर्दम ऋषि के आश्रम पहुँचे। कर्दम ऋषि तीक्ष्ण बुद्धिवाले ऋषि थे। उनके आगमन का अभिप्राय समझ गए।

परखना था उन्हें देवहूति को। अतः उन्होंने मेहमानों के लिए तीन आसन बिछाए और बैठने के लिए कहा। मनु महाराज बैठ गए और शतरूपा भी बैठ गईं।

किंतु देवहूति के मन में विचार आया – पिता और माता के समक्ष भावी पति खड़ा है तब वह कैसे बैठे ? फिर कर्दम ऋषि ने अपने बैठने के लिए तो आसन छिया ही नहीं है। साथ ही उन्होंने तीनों को आसन ग्रहण करने का अनुरोध किया है। उसे टालना भी अनुचित है।

उसने एक उपाय सोचा। अपना एक हाथ आसन पर रख वह जमीन पर बैठ गई। देवहूति के इस चातुर्य पर कर्दम ऋषि रीझ गए और उन्होंने उसे पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया।

शिक्षा: हर मुश्किल का एक हल होता है।

बीमार मुर्गी और बिल्ली

एक दिन जब मुर्गी सोकर उठी तो उसकी तबियत कुछ ठीक नहीं थी। वह बोली, “आज मैं स्वस्थ नहीं हूँ। इसलिए पूरे दिन आराम करेंगे।” मुर्गी की बात पास से गुजर रही बिल्ली ने सुन ली।

हमेशा शिकार की खोज में रहने वाली बिल्ली ने मन ही मन कहा, यह बड़ा अच्छा मौका है। मैं हाल-चाल पूछने के बहाने मुर्गी से दोस्ती कर लेती हूँ। फिर उसे एक दिन विश्वास में लेकर मौका मिलते ही चट कर जाऊंगी।’ यह सोचकर बिल्ली तुरंत मुर्गी के पास गई और बड़े ही मीठे स्वर में बोली, “बहन ! मैंने सुना है कि तुम्हारी तबियत खराब है। यदि ऐसी बात थी तो तुम्हें मेरे पास आना चाहिए था।

मैं तुम्हें मजेदार चुटकुले सुनाती और तुम खुश हो जाती। इससे तुम्हारी सारी बीमारी चली जाती।” मुर्गी बिल्ली की चालाकी भाँप गई थी।

वह बोली, “तुम्हारी हमदर्दी के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद ! तुम बस मुझे अकेला छोड़ दो, मुझे लगेगा कि मैं ठीक हो गई हूँ।”

शिक्षा: हमें दूसरों की चिकनी-चुपड़ी बातों में नहीं आना चाहिए।

खरगोश और शेर

एक बार की बात है, एक जंगल में एक शेर रहता था, वह जानवरों का राजा था। उसने कई जानवरों को मार डाला, सभी जानवर भयभीत थे।

एक दिन शेर एक बैठक की, सभी जानवर शेर के साथ बैठक में शामिल थी। एक बूढ़ा खरगोश खड़ा हो गया, वह बुद्धिमान था, वह एक योजना के बारे में बताया।

जानवरों ने रोज एक एक करके जानवर भेजेंगे शेर के पास, भोजन करने के लिए। शेर को और शिकार करने का जरूरत ही नहीं होगा, शेर योजना मान गया।

एक दिन खरगोश की बारी थी, वह देर से शेर के पास पहुंचा। शेर गुस्से में था, उन्होंने खरगोश से पूछा कि उन्हें देर क्यों हुई? खरगोश ने कहा कि एक अन्य शेर ने उसे रास्ते में पकड़ लिया था।

फिर शेर ने उसे दूसरे शेर को दिखाने के लिए कहा, खरगोश ने उसे एक गहरे कुएं के पास लेकर गया। शेर कुएं में झांक कर देखा और पानी में अपनी ही छाया देखी।

शेर ने उसे दूसरे और एक शेर समझकर उसे मारने के लिए कुएं में कूद गया। कुए से बाहर आने का कोई रास्ता नहीं था धीरे धीरे शेर कुएं में मर गया, सभी जानवरों ने उसके बाद खुशी से रहते थे।

शिक्षा: बुद्धि ताकत से अधिक मजबूत है।

चतुर मछुआरा

एक बार एक राज्य का राजा एक भोज का आयोजन किया। वह मछली बहुत पसंद करता था, मछली उपलब्ध नहीं थी। फिर एक मछुआरा एक मछली लेकर आया राजा को देने के लिए।

लेकिन दरबान उसे राजा के पास जाने से रोक दिया। दरबान ने कहा, यदि आप मुझे राजा से जो कुछ भी मिलेगा उसका आधा हिस्सा दोगी तो मैं आपको जाने दूंगी।

मछुआरा राजी हो गया। फिर वह राजा के पास मछली लेकर गई, मछली पाकर राजा बहुत खुश हुआ। राजा मछुआरा से मछली की कीमत पूछी?

मछुआरा ने उत्तर दिया, मेरी नंगी पीठ पर एक्सो बार चाबुक मारिए। राजा मछुआरा की बात सुनकर हैरान हो गया, लेकिन उसने सैनिकों से आदेश दिया मछुआरा मारने के लिए।

जब मछुआरा को पचास चाबुक मिली, तो उसने रोते हुए कहा रुको। अब बाकी के पचास चाबुक मेरे हिस्सेदार की पीठ पर लगाओ। फिर राजा हिस्सेदार की बारे में पूछा? मछुआरा जवाब दे दरबान है मेरा हिस्सेदार।

राजा को पूरी कहानी समझ में आ गई। दरबन को उसकी नंगे पीठ पर पचास चाबुक मारी, उसे बर्खास्त कर दिया गया। फिर राजा मछुआरा को अच्छा इनाम दिया।

शिक्षा: लालच एक अभिशाप है।

दीवार के दूसरी ओर की कहानी

एक बार, एक युवा महिला को एक सुंदर बगीचा अपने दादी से विरासत में मिला था। उस महिला का बागवानी बहुत पसंद थी। इसलिए वह अपने बगीचे की देखभाल अच्छी तरह करती थी। और उसे अपने बग़ीचे पर बहुत गर्व था।

एक दिन उसने कैटलॉग में एक सुंदर पौधा देखा। जिसे वह अपने बगीचे में लगाना चाहती थी। इसलिए उसने पौधे को खोज निकला और अपने बगीचे के पीछे एक दीवार की सहायता से लगाया।

उस महिला ने पौधे की अच्छी तरह देखभाल की और कुछ ही दिनों में पौधा बड़ा होने लगा। उस पौधे को सुंदर हरे पत्ते आने लगे थे। लेकिन समय बीतता गया फिर भी उस पेड़ पर एक भी फूल नहीं आया।

एक दिन वह महिला निराश और हताश हुई और उस पेड़ को काटने वाली थी। तब उसे अपने पडोसी की आवाज़ आई, “यह सुंदर फूलों के लिए आपका धन्यवाद ! आपको पता नहीं मैंने आपके द्वारा लगाए गए इस सुंदर फूलों का कितना आनंद उठाया है।”

यह सुनकर वह महिला पडोसी की दिवार की तरफ भागती है और उस पौधे के सुंदर फूलों को देखकर प्रसन्न होती है। उस पेड़ की लताएं दूसरी तरफ निकली थी और सुंदर फूल दिवार के दूसरी ओर खिल रहे थे।

शिक्षा: सिर्फ इसलिए कि आप अपने कठिन प्रयासों के अच्छे परिणाम नहीं देख सकते इसका मतलब यह नहीं है कि आपके लिए यह कोई फल नहीं है।

बुरी आदतें की कहानी

एक बार, एक आमिर व्यापारी अपने बेटे की बुरी आदत से बहुत परेशान था। वह कुछ भी करके उसके बेटे की यह बुरी आदत छोड़ना चाहता था। उस आदमी ने अपने बेटे को बहुत समझाया लेकिन उसके बेटे की बुरी आदत छूटने का नाम नहीं ले रही थी।

एक दिन उस आदमी ने एक बुद्धिमान बूढ़े व्यक्ति की सलाह मांगी। वह बूढ़ा व्यक्ति उस आमिर व्यापारी के बेटे से मिला और उसे टहलने के लिए ले गया। वे दोनों टहलते टहलते जंगल के रस्ते निकल गए।

तब बूढ़े व्यक्ति ने लड़के को एक छोटासा पौधा दिखाया और उसे बाहर खींचने के लिए कहा। उस लड़के ने बड़ी सहजता से वह काम को किया और दोनों आगे बढ़ गए। थोड़ी देर बाद बूढ़े व्यक्ति ने थोड़े बड़े पौधे को खींचने के लिए कहा। उस लड़के ने तोड़े परिश्रम के बाद उस पौधे को भी खींच कर बाहर निकला।

वे फिर आगे बढ़ गए। थोड़े समय बाद उस व्यक्ति ने लड़के को गुड़हल के पेड़ को खींचने को कहा। फिर लड़का अपनी पूरी ताकत लगाकर उस पेड़ को खींचने लगा। बहुत प्रयास करने के बाद भी वह पेड़ नहीं निकला। लड़का अब थक गया और उस व्यक्ति को बोला यह मेरे बस के बाहर है।

फिर बूढ़ा व्यक्ति ने उसे प्यार से समझाते हुए कहा, “बेटा कुछ ऐसे ही बुरी आदतों के साथ भी होता है, जब बे नयी होती है तो उन्हें छोड़ना आसान होता है। लेकिन जब आदत पुरानी हो जाती है तो उस आदत से निजात पाना असंभव होता है।”

शिक्षा: बुरी आदतों से छुटकारा पाना मुश्किल है क्योंकि वे हमारे दैनदिन प्रणाली में बस गए है। उन पर जल्दी से छुटकारा पाने के लिए उन्हें शुरुवात में काबू करना सबसे अच्छा है।

राजा ब्रूस और मकड़ी

एक समय की बात है, एक बार स्कॉटलैंड में एक राजा था, उनका नाम रॉबर्ट ब्रूस था। उसने कई लड़ाइयां लड़ी, एक बार वह हार गया था, वह युद्ध के मैदान से भाग गया। वह एक गुफा में छिप गया।

उस गुफा में एक मकड़ी था, वह गुफा की छत तक पहुंचने की कोशिश कर रहा था, वह बार बार विफल हुआ। हर बार गिरने के बाद मकड़ी ने फिर से कोशिश की, वह हिम्मत नहीं हारी। मकड़ी सातवें प्रयास में अपनी गंतव्य पर पहुंची।

मकड़ी ने राजा ब्रूस को एक महान सबक सिखाया, इसने राजा को नई आशा और साहस से भर दिया। फिर राजा गुफा से बाहर आया और अपनी सेनाओं को इकट्ठा किया, इस बार वह बहादुरी से लड़े। वह अपने देश को आजाद कराने में सफल रहा।

शिक्षा: कोशिश करते रहो, जब तक आप सफल नहीं हो जाते।

हिरण और उसके सींग

एक बार की बात है,एक जंगल में हिरण रहती थी. उसी जंगल के किनारे एक नदी थी। एक दिन हिरण नदी में पानी पी रहा था, उसने पानी में उसके सींग का प्रतिबिंब देखा, उसे गर्व महसूस हुआ।

जब उन्होंने पानी में अपने पैरों का प्रतिबिंब देखा, तो उन्हें शर्म महसूस हुई। तभी उसने एक शेर की आवाज सुनी, वह जितनी तेज भाग सकता था भाग गया।

हिरण की पतले पैरों ने उसे भागने में मदद की, उन्होंने महसूस किया कि उनके बदसूरत दिखने वाली पैर उनकी असली साधन है।

फिर जल्द ही उनके खूबसूरत सींग उनके लिए दुश्मन बन गई, वह एक झाड़ी में उजला गया। हिरण वहां से बाहर निकालने की पूरी कोशिश की लेकिन वह सफल नहीं हुआ। फिर कुछ मिनटों बाद शेर वहां पहुंच गया, वह हिरण को अपना भजन बनाया।

शिक्षा: सभी चमकती चीज सोना नहीं होती।

सबक

किसी गाँव में एक महिला सराय की मालिक थी। एक दिन उसकी एक सहेली उससे मिलने आई। उसने पूछा, “कैसा चल रहा है तुम्हारा धंधा ?”

“एकदम मंदा। आजकल सारे-के-सारे ग्राहक उस सामनेवाली सराय में जाते हैं। हालाँकि चाय मेरे यहाँ ज्यादा अच्छी बनती है। ” वह बोली।

सहेली ने कहा, “मैं तुम्हें इसका कारण बताती हूँ, अगर तुम बुरा न मानो तो।” “हरगिज नहीं।’ “तो सुनो।” सहेली ने कहा, “इसमें शक नहीं कि उस सराय की चाय की बनिस्बत तुम्हारे यहाँ की चाय अधिक अच्छी होती है; पर तुम्हारे यहाँ सफाई नहीं है।

कप और प्लेट बेहद गंदे होते हैं। इसमें चाय पीते हुए ग्राहकों को मतली आने लगती है। ऊपर से नौकर तुम्हारे यहाँ टेबल और कुरसियाँ तथा फर्श तक ठीक से साफ नहीं करते।

अगर तुम अपने यहाँ साफ-सफाई का खयाल रखो तो कुछ ही दिनों के भीतर तुम पाओगी कि तुम्हारे पुराने ग्राहक फिर से तुम्हारे यहाँ चाय पीने आने लगे हैं। “

उसने अपनी सहेली की सलाह मानकर सारा सामान साफ रखना शुरू कर दिया। यहाँ तक कि खिड़की, दरवाजे तक लकदक लकदक करने लगे। धीरे-धीरे शहर में उस सराय की स्वच्छता की चर्चा होने लगी और लोगों ने फिर से वहाँ बैठकर चाय पीना शुरू कर दिया |

शिक्षा: स्वच्छता हमेशा समृद्धि लाती है, जबकि गंदगी दरिद्रता का द्वार खोलती है।

नहले पर दहला

कल्लूमल को परेशान देखकर उसके दोस्त ने बड़ी सहानुभूति से पूछा, “क्यों दोस्त, क्या बात है, बड़े परेशान नजर आ रहे हो ?”

कल्लूमल का गला भर्रा उठा। बोला, “क्या बताऊँ, दोस्त, मेरे घर के सामनेवाला जो दर्जी है न, वह कमबख्त भाग गया। साथ ही टेरालीन की तीन पतलूनें और दो कमीजों का मेरा कपड़ा भी लेता गया। ” “

दोस्त सुनकर मायूस हो उठा। उसकी संजीदगी देखकर कल्लूमल ने पूछा, “मगर तुम इतने क्यों उदास हो गए ? “

“उदास इसलिए हो रहा हूँ कि वह कमबख्त तेरी तो तीन पतलून और दो कमीजों का कपड़ा ही लेकर भागा है, पर मेरी तो ऐसी-तैसी कर दी उसने चार कुरते, चार पायजामों का नाप लेकर रफूचक्कर हो गया!”

शिक्षा: बेवकूफ हमेशा उलटी बातें करते हैं।

अपने शब्दों को बुद्धिमानी से चुनें

एक बार, एक बूढ़े आदमी ने एक अफवाह फैला दी कि उसका पड़ोसी एक चोर है। परिणामस्वरूप, युवक को गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ दिनों बाद युवक निर्दोष साबित हुआ। रिहा होने के बाद उस युवक घर जाते वक्त बहुत अपमानित महसूस हुआ और उसने उस बूढ़े आदमी पर गलत तरीके से आरोप लगाने के लिए मुकदमा दायर किया।

अदालत में, उस बूढ़े आदमी ने न्यायाधीश से कहा, “वे सिर्फ टिप्पणी कर रहे थे, किसी को नुकसान नहीं पहुँचाया।” उस बूढ़े आदमी के जवाब पर न्यायाधीश ने सजा सुनाने से पहले कहा, “उन सभी चीजों के बारे में एक कागज पर लिखें जो आपने युवक बारे में कही थी।” और उस कागज काट लें और घर के रास्ते पर, कागज के टुकड़ों को बाहर फेंक दें। उसके बाद ही मै आगे की कारवाई करूँगा।

अगले दिन, न्यायाधीश ने बूढ़े व्यक्ति से कहा, “कारवाई करने से पहले, आपको बाहर जाना होगा और कागज के सभी टुकड़ों को इकट्ठा करना होगा जिसे आपने कल बाहर फेंक दिया था”। बूढ़े ने कहा, “मैं ऐसा नहीं कर सकता! हवा उन्हें फैल गई होगी और मुझे नहीं पता कि उन्हें कहां खोजना है।”

जज ने तब जवाब दिया, “उसी तरह, सरल टिप्पणियां किसी व्यक्ति के सम्मान को इस हद तक नष्ट कर सकती हैं कि कोई इसे ठीक करने में सक्षम नहीं है। बूढ़े व्यक्ति को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने क्षमा मांगी।”

शिक्षा: किसी तथ्य या सच्चाई को जाने बिना किसी पर दोष या दोषारोपण न करें। आपके शब्द उनकी किसी गलती के बिना किसी की प्रतिष्ठा को बर्बाद कर सकते हैं।

आपकी क्रियाओं का प्रतिबिंब

एक बार, एक आदमी और उसका जंगल की पहाड़ियों से गुजर रहा था। फिर अचानक वह लड़का गिर गया और जोर से चिल्लाने लगा। “आह!” हैरानी की बात है, उसने पहाड़ से एक ही आवाज़ सुनी, “आह!”

उत्सुकता से, लड़का चिल्लाया, “यह कौन है?” लेकिन आवाज ने जवाब दिया, “यह कौन है?” वह क्रोधित हो गया, और फिर चिल्लाया, “तुम मूर्ख हो!” और फिर से आवाज ने जवाब दिया, “तुम मूर्ख हो!”

इससे निराश होकर, लड़के ने अपने पिता से पूछा, “पिताजी, यह क्या चल रहा है? यह कौन है?” पिता ने जवाब दिया, “बेटा, ध्यान दो”। पिता चिल्लाया, “तुम बहुत अच्छे हो”। और आवाज ने जवाब दिया, “आप बहुत अच्छे हैं!” पिता फिर चिल्लाया, “धन्यवाद”। और आवाज ने फिर से वही जवाब दिया, “धन्यवाद!” बेटा बहुत आश्चर्यचकित था लेकिन वह अभी भी समझ नहीं पा रहा था कि क्या हो रहा है।

पिता ने समझाया, “बेटा, लोग इसे प्रतिध्वनि कहते हैं, लेकिन यह जीवन की सच्चाई है। जीवन आपके कार्यों का प्रतिबिंब है। आप दूसरों को क्या देंगे, बदले में आपको वही मिलेगा।”

शिक्षा: हम दूसरों को क्या देते हैं, बदले में जीवन हमें वही देता है। आपका जीवन कोई दुर्घटना या संयोग नहीं है, बल्कि यह आपके कार्यों का एक प्रतिबिंब है।

सूरज और हवा

एक बार की बात है वह पतझड़ का दिन था, एक दिन हवा और सूरज एक बात को लेकर बहस कर रही थी। हवा ने दावा किया मैं तुमसे ज्यादा ताकतवर हूं। सूरज उसकी बात नहीं मानी उसने कहा नहीं तुम ज्यादा ताकतवर नहीं हो।

तभी, उन्होंने देखा एक यात्री कंबल में लिपटा हुआ वहां से गुजर रहा था। हवा ने कहा, हम दोनों में से जो भी कंबल को यात्री से अलग कर पाएगा वह ज्यादा शक्तिशाली है। सूरत से पूछा क्या आप सहमत है?

सूरज ने जवाब दिया, ठीक है पहले आप कोशिश करो। हवा जोर से बहने लगी, यात्री ने अपने कंबल को उसकी चारों ओर लपेट दिया। फिर हवा और जोर से बहने लगी, यात्री ने अपनी कंबल ओढ़ लिया।

हवा बहुत जोर जोर से बह रही थी लेकिन यात्री ने अपनी कंबल नहीं छोड़ी, उसने कंबल में लिपटा रहा, हवा विफल रही। अब सूरज की बारी थी, सूरज यात्री पर धीरे से मुस्कुराया।

यात्री ने कंबल पर अपनी पकड़ ढीली कर दी, सूरज और गर्म होकर मुस्कुराया। यात्री ने बहुत ही ज्यादा गर्व महसूस की और जल्द ही कंबल उतार दिया, फिर सूरज को हवा से ज्यादा ताकतवर घोषित किया गया।

शिक्षा: जहां नम्रता से बात मनवाई जा सकती है, वहां ताकत दिखाने का कोई जरूरत नहीं है।

गुलाम और शेर

एक बार एक राज्यों में एक गुलाम था, उसका राजा बहुत क्रूर था। वह भागकर एक जंगल में चला गया, वहां रहने के लिए एक गुफा में गया। गुलाम गुफा में सोया हुआ था, शेर की दहाड़ सुनकर अचानक वह जाग गया, उसने वहां एक शेर को देखा।

शेर लंगड़ा कर चल रहा था,गुलाम शेर की पंजे में एक कांटा देखा। उसने शेर की पंजे से कांटा बाहर निकाला, शेर को राहत महसूस हुई, फिर दोनों दोस्त बन गए।

एक दिन गुलाम को उसकी राजा के लोग ने पकड़ लिया। और फिर राजा के सामने लेकर गया। राजा ने उसे एक भूखे शेर के सामने फेंकने का आदेश दिया। जब गुलाम को शेर के सामने फेंका गया, तो शेर ने उसे नहीं मारा।

क्योंकि यह वही शेर था, शेर ने उसकी पैर चाटी, इस अजीब नजरे को देखकर सभी हैरान थे। फिर गुलाम को आजाद कर दिया गया, शेर को पुरस्कार के रूप में दिया गया था।

शिक्षा: हमेशा संकट में किसी का मदद करना चाहिए।

वफादार कुत्ता

एक बार एक गांव में एक महिला रहती थी, जिसके पास एक वफादार कुत्ता था। यह कुत्ता इतना वफादार था कि महिला अपने बच्चे को इसके पास छोड़कर अन्य काम के लिए जा सकती थी।

एक दिन कुछ दुखद हुआ, महिला हमेशा की तरह इस वफादार कुत्ते के पास बच्चों को छोड़कर कुछ सामान खरीदने के लिए निकल गई। जब वह वापस लौटी,तो उसने एक बुरा दृश्य देख लिया, कुछ गड़बड़ थी।

बच्चे की बिस्तर उखड़ गई, उसकी कपड़े फटा हुआ था और पूरे बिस्तर खून से भरे हुए थे। जहां उसने बच्चे और कुत्ता को छोड़ कर गई थी। चौककर, महिला ने बच्चे की तलाश शुरू कर दी।

वर्तमान में, वफादार कुत्ते को बिस्तर के नीचे से निकालने देखा। कुत्ता उसके मुंह को चाट रहा था, जैसे कि उसने अभी स्वादिष्ट भोजन किया हो। महिला डर गई, और यह मान लिया कि कुत्ते ने उसके बच्चे को खा लिया है।

महिला ने बिना ज्यादा सोचे समझे कुत्ते को मौत के घाट उतार दिया। लेकिन जब उसने अपने बच्चे की खोज जारी रखी, तो उसने एक और दृश्य को देखा।

बिस्तर के करीब उनका बच्चा था, जो नंगे तल पर पड़ा हुआ था, सुरक्षित था। और बिस्तर के नीचे एक सांप का कुछ टुकड़ा पड़ा हुआ था, सांप और उन कुत्ते के बीच युद्ध हुआ होगा,जो अब मर चुका था।

फिर हकीकत ने महिला को मारा, जो अब समझने लगी थी कि उनकी अनुपस्थिति में क्या हुआ। कुत्ते ने बच्चे को सांप से बचाने के लिए लड़ाई लड़ी, अब उसे ठीक करने में बहुत देर हो गई।

क्योंकि गुस्से में उसने वफादार कुत्ते को मार डाला था।

शिक्षा: थोड़ा सा धैर्य गलती से गलतियों को बचा सकता है।

एक अमीर आदमी और उसका बेटा

एक अमीर आदमी का बेटा एक कॉलेज से अपनी पढाई पूरी कर रहा था। पढाई करते वक्त पिछले कुछ महीनों से बेटा अपने पिता से एक नई कार के लिए पूछ रहा था, यह जानकर कि उसके पिता के पास पर्याप्त पैसा है।

जब उस आदमी के बेटे का कॉलेज की पढाई का आखिरी दिन आया, तब उसने अपने बेटे को पास बुलाया और उसे एक लपेटा उपहार दिया और उसे स्नातक होने और उनकी उपलब्धि के बारे में बधाई दी।

निराश होकर उस लड़के ने उस उपहार खोला और उस उपहार में एक सुंदर, चमड़े का जर्नल था। और उस जर्नल पर उस युवक का नाम सुंदर तरीके से छापा हुआ था। फिर उस युवक ने गुस्से में आवाज उठाई, जर्नल को फेंक दिया और बाहर निकल गया।

युवक ने स्नातक दिवस के बाद से अपने पिता को कभी नहीं देखा था। वह एक सुंदर घर और परिवार के साथ, अपने पिता की तरह सफल और धनवान बन गया। उसे एहसास हुआ कि उसके पिता उम्रदराज थे और उनके पीछे अतीत को रखने का समय आ सकता है।

तभी, उन्हें एक संदेश मिला कि उनके पिता गुजर चुके हैं, और उन्हें संपत्ति की देखभाल करने के लिए घर लौटना पड़ा। जैसे ही शोकाकुल पुत्र अफसोस के साथ घर लौटा, उसने अपने पिता के महत्वपूर्ण पत्रों के माध्यम से खोज शुरू की और देखा कि अभी भी वह नई जर्नल जिसे उसने उसे छोड़ा था।

फिर उसने उस जर्नल को खोला और तोह पन्नों के पीछे एक कर की चाबी निचे गिर जाती है। उस कार की चाबी को देखकर वह युवक बहुत रोता है और अपने पिता को दिए हुए दुःख के बारेमें सोचकर बहुत पछताता है।

शिक्षा: कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप क्या उम्मीद करते हैं, जो आपको दिया जाता है उसके लिए आभारी रहें। यह आपके विचार से अधिक आशीर्वाद हो सकता है।

किसान और साँप

एक बार, एक किसान सुबह-सुबह सर्द के मौसम में अपने खेत से गुजर रहा था। फिर उसने एक साप को देखा जो कड़ी ठंड के कारण जमा हुआ था और मरने के कगार पर था। तब उस किसान को उस साप पर दया आ गयी।

किसान जानता था कि साँप कितना घातक हो सकता है, और फिर भी उसने उसे उठाया और उसे जीवन में वापस लाने के लिए उसे अपनी छाती में गर्मी देने के लिए डाल लिया। जब सांप को पुनर्जीवित हो गया तब उसने उस मदद करने वाले ही किसान को काट लिया।

किसान को पता था के अब वह मरने वाला है। जैसा कि उसने अपनी आखिरी सांस ली, तब उसने आसपास खड़े लोगों से कहा, “मेरी किस्मत से सीखो कि एक बदमाश पर दया न करें”।

शिक्षा: कुछ ऐसे होते हैं जो अपने स्वभाव को कभी नहीं बदलते हैं, फिर चाहे हम उनके साथ कितना भी अच्छा व्यवहार करें। हमेशा सतर्क रहें और उन लोगों से दूरी बनाए रखें जो केवल अपने फायदे के बारे में सोचते हैं।

एक आदमी लैंप के साथ

एक बार की बात है, एक छोटा शहर था और वह एक व्यक्ति रहता था। वह व्यक्ति दृष्टिहीन यानि वह कुछ नहीं देख सकता था। फिर भी, जब भी वह रात को बाहर जाता, वह अपने साथ एक दीया जलाता था।

एक रात वह बाहर से घर लौट रहा था तब कुछ यात्रियों के समूह की नजर उस व्यक्ति पर गयी। और सभी लोग उस व्यक्ति के ऊपर हसने लगे। उस समूह में से एक ने उस अंधे व्यक्ति से पूछा, “अरे यार! आप अंधे हैं और कुछ भी नहीं देख पाएंगे! तुम दीपक को क्यों ढोते हो?”

अंधे आदमी ने जवाब दिया, “हां, दुर्भाग्य से, मैं अंधा हूं और मुझे कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा है लेकिन एक रोशनी वाला दीपक जो मैं ले जा रहा हूं वह आप जैसे लोगों के लिए है जो देख सकते हैं। हो सकता है आप उस अंधे आदमी को आते हुए न देखें और मुझे धक्का दे दें। यही कारण है कि मैं एक रोशन दीपक ले जाता हूं ”।

यात्रियों के समूह ने शर्म महसूस की और अपने व्यवहार के लिए माफी मांगी।

शिक्षा: हमे दुसरो के ऊपर टिपण्णी करने से पहले सोचना चाहिए। हमेशा विनम्र रहें और दूसरों की बातों को देखना सीखें।

मछलियाँ और साँप

बुद्धूराम बड़ा नासमझ लड़का था। एक दिन वह नजदीक केएक तालाब में मछलियाँ चुराने गया |

किनारे पर औंधे लेटकर उसने एक बाँह पानी के भीतर डाल दी और मछलियों के हाथ में आने का इंतजार करता रहा।

तभी उसे महसूस हुआ कि हाथ में कोई मछली फँसी है। वह प्रसन्न हो गया। चट उसने अपना हाथ पानी के बाहर निकाला। पर जैसे ही दृष्टि हाथों की तरफ गई, वह सन्न रह गया।

पानीवाला साँप उसके हाथों से लिपटा था। चीखकर उसने साँप को वापस पानी में झटक दिया और सिर पर पैर रखकर भागा।

रास्ते में मछुआरे ने उसे रोका और डाँटने लगा, “अगर यह साँप जहरीला होता तो आज तुम्हारी खैर नहीं थी।”

शिक्षा: हर काम तरीके से करना चाहिए।

स्वर्ग का रास्ता

गयासुर नाम का एक राक्षस था। उसने इतनी लंबी तपस्या की कि ब्रह्माजी उसके तप से प्रसन्न हो उठे। उन्होंने गयासुर से कहा, “तुमको जो भी माँगना हो, माँगो।”

गयासुर घमंड से बोला, “अरे छोड़ो ! तुम कौन होते हो देनेवाले! माँगना है तो तुम मुझसे माँगो। “

गयासुर की घोर तपस्या से देवता भयभीत थे। तिसपर उसने माँगने के लिए कहा तो ब्रह्माजी ने सुरक्षा के लिए माँगा, “अपनी देह दे दो। आपकी देह तप से पवित्र हुई है, हम उसपर यज्ञ करेंगे। “

गयासुर ने स्वीकार कर लिया। राक्षस की देह पर यज्ञ शुरू हुआ। देवताओं ने वर्षों तक यज्ञ किया, फिर भी राक्षस नहीं मरा।

इतने में एक और गड़बड़ हुई। राक्षस की देह उड़ने लगी। ब्रह्माजी अत्यधिक चिंतित हो उठे। उन्होंने फौरन नारायण की स्तुति शुरू कर दी।

नारायण प्रकट हुए, “क्या बात है, वत्स?” ब्रह्माजी बोले, “गयासुर की देह हवा में उड़ रही है। वह मरेगा नहीं तो देवताओं का नाश हो जाएगा।”

गयासुर की उठती हुई देह को नारायण ने दो लात मारीं। फिर भी वह न मरा। नारायण ने कहा, “अरे, अब तो जीवन का मोह छोड़ो। ” गयासुर ने कहा, “ठीक है। पर मैं राक्षस हूँ। मैंने कठोर तप किया है। वह व्यर्थ तो नहीं जाएगा।”

भगवान् नारायण को उसकी बात ठीक लगी। वह राक्षस होकर भी दे सकता है और ये देवता होकर सिर्फ ले रहे हैं। देवों के देव नारायण ने गयासुर को वरदान दिया, “जाओ, तुम्हारे अवसान से यह जगह पवित्र हो जाएगी। लोग यहाँ आकर अपने पिता का श्राद्ध करेंगे तथा पितरों को पिंडदान करेंगे।”

‘गया’ उसी राक्षस की भूमि है। भगवान् के आशीर्वाद से पवित्र हो गई। आज भी लोग श्राद्ध करने गया जाते हैं।

शिक्षा: तप से पापी भी पवित्र हो जाते हैं।

कुत्ता – घर का और गाँव का

एक बार घर का कुत्ता और गाँव का कुत्ता रास्ते में टकरा गए। गाँव के कुत्ते ने देखा कि उसका मित्र काफी तंदुरुस्त और हट्टा-कट्टा है। जबकि उसकी अपनी हालत बड़ी नाजुक थी।

पूरे पूरे दिन उसे खाने को नहीं मिलता था। तभी घर के कुत्ते ने सहानुभूति से भरकर उसे बताया, ‘अगर तुम चाहो तो तुम्हें भी पेट भरकर खाना मिल सकता है।”

गाँव के कुत्ते ने पूछा, “वह कैसे?’’ घर के कुत्ते ने जवाब दिया, “तुम्हें हमारे मालिक के घर की चौकीदारी करनी होगी।” “मैं तैयार हूँ।” गाँव का कुत्ता बोला, “पर तुम्हारे गले में यह क्या है?”

“पट्टा!” घर के कुत्ते ने बताया, “रात में मैं पहरेदारी करता हूँ। दिन में हमारा मालिक मुझे बाँधकर एक कोने में बिठा देता है। ” यह सुनकर गाँव का कुत्ता चलता बना।

शिक्षा: यशस्वी होने का सबसे छोटा रास्ता अंतरात्मा के अनुसार चलना है।

नारद का दुःख

एक दिन नारद मुनि अत्यंत उदास मुद्रा में बैठे थे। सनकादिक ने उनसे उनकी व्यथा जाननी चाही। पूछा, “हमेशा हँसते रहनेवाले आप आज उदास कैसे हैं?” नारद बोले, “मुझे अपने देश की चिंता सता रही है।

जरा भारत भूमि की ओर देखो। धर्म का विनाश हो रहा है। अधर्म पनप रहा है। लोग भूखे मर रहे हैं और व्यापारी धन बटोरकर तिजोरियाँ भर रहे हैं। भाई-भाई को लूटने की युक्ति कर रहा है।

उफ ! भ्रष्टाचार से तो तौबा !” सनकादिक को नारदजी की बात सही लगी। देश का दुःख किसी भी दुःख से बड़ा होता है।

शिक्षा: जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।

किसान और कुत्ते

अकाल का मारा एक किसान भूखों मरने लगा। घर में खाने को कुछ था नहीं। अचानक उसे एक उपाय सूझा, क्यों न मैं अपनी भेड़ों को अपना भोजन बनाऊँ ?

दूसरे दिन से उसने भेड़ मारकर खानी शुरू कर दीं। कुछ दिनों में वह सारी भेड़ें मारकर खा गया। तब उसकी नजर अपनी बकरियों पर गई।

महीने भर में सारी बकरियाँ भी खत्म हो गईं। तब उसने अपनी गाय को भी कत्ल कर डालने का फैसला किया। तभी उसके दो कुत्ते चौंक उठे। वे समझ गए कि अब उनकी भी खैर नहीं।

गाय के बाद उनका ही नंबर है। जब तक जान में जान है, यहाँ से भाग निकलो – और वे उस किसान के घर से भाग खड़े हुए।

शिक्षा: दूसरों के घरों को जलता देखकर अपने घर की फिक्र करनी चाहिए।

सूरज

एक औरत बेहद मेहनती थी। एक शाम अँधेरा होते ही वह अपने दोनों बच्चों के साथ घर लौटी तो उसने पाया कि मेज पर रखा हुआ दीया जल रहा है।

बड़ा लड़का सत्तार आश्चर्य से चिल्लाया, “घर में तो कोई नहीं था, फिर यह दीया किसने जलाया?”

“कौन जलाएगा? जरूर तुम्हारे पिताजी शहर से लौट आए होंगे।” औरत बोली।

दोनों बच्चे उछाह से कूदते हुए घर के भीतर घुसे तो अगले कमरे में पिताजी को सचमुच बैठा पाया।

दूसरे दिन सुबह दोनों बच्चे माँ-बाप के साथ खेत पर गए। उस दिन सूरज अधिक चमकीला था बच्चे धूप देख बहुत खुश हुए। तब पिता ने बच्चों से कहा, “बच्चो,

घर में रोशनी की उजास देखकर तुमने तुरंत अनुमान लगा लिया था कि दीया मैंने ही जलाया होगा। क्या तुम इस सुहानी धूप के बारे में बता सकते हो कि इसको चमकानेवाला कौन है?”

“क्यों नहीं!” सकीना ने उत्तर दिया, “खुदा चमकाता है। अगर एक छोटा सा दीया अपने आप नहीं जल सकता तो सूरज को भी कोई-न-कोई चमकाता ही होगा।” बच्चों के पिता बेटी का उत्तर सुन बेहद प्रसन्न हुए।

शिक्षा: हमारे आसपास फैली हुई ईश्वर की दुनिया शानदार है, मगर हमारे अंदर रहनेवाली ईश्वर की दुनिया उससे भी ज्यादा शानदार है।

भेड़िया और बकरी

एक दिन भेड़िये ने देखा कि एक हृष्ट-पुष्ट बकरी ऊँची पहाड़ी पर घास चर रही है। उसे देखकर भेडिए के मुँह में पानी आ गया। वह सोचने लगा. ‘मैं तो इतनी ऊँचाई पर जा नहीं सकता, किसी तरह इसी को नीचे बुलाना होगा।’

भेड़िया अपनी आवाज में मिठास भरकर बोला,”नन्ही बकरी! तुम इतनी ऊँची पहाड़ी पर क्यों चढ़ गई हो? यदि पाँव फिसल गया तो तुम्हें चोट लगेगी।”

बकरी ने भेड़िये की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और घास चरती रही। भेड़िये ने दोबारा कोशिश की, “देखो, इस पहाड़ी पर भी काफी अच्छी घास है,

फिर जोखिम उठाने से क्या लाभ? नीचे आ जाओ और यह नर्म और मीठी घास खाओ।” भेड़िया बोले जा रहा था, पर बकरी थी कि उसकी बात पर ध्यान ही नहीं दे रही थी।

उसने आखिरी कोशिश की और बोला, “मुझे तुम्हारी चिंता है, इसीलिए तुम्हें बार-बार नीचे अपने पास बुला रहा हूँ। यदि तुम ज्यादा देर ऊपर रही तो तुम्हें सर्दी लग जाएगी।”

अब बकरी चुप नहीं रह सकी। उसने कहा, “मैं जानती हूँ कि तुम्हें मेरी नहीं, बल्कि अपने भोजन की चिंता है।” सुनकर भेड़िया खिसिया गया।

शिक्षा: शत्रु की बात पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।।

खरगोश और मेंढक

एक दिन जंगल के सभी खरगोशों की एक सभा बुलाई गई। खरगोशों के नेता ने सबको संबोधित करते हुए कहा, “मुझे यह कहते हुए बहुत दु:ख होता है कि हमारा इस जंगल में कोई मित्र नहीं है।

मनुष्य और जानवर सभी हमें तुच्छ समझते है और आए दिन किसी न किसी बहाने हमें मार डालना चाहते हैं। ऐसी अपमानजनक जिंदगी से क्या फायदा? इ

सलिए मैंने सोचा है कि हम सब लोग तालाब में कूद कर अपनी जान दे दें।” अपने नेता की बात मानकर सभी खरगोश तालाब की ओर चल पड़े। वे सब जाकर तालाब के किनारे खड़े हो गए। वे पानी में कूदने जा ही रहे थे कि तालाब से छोटे-छोटे मेंढक डर कर बाहर कूद आए।

यह दृश्य देखकर खरगोशों के नेता का विचार बदल गया। उसने अपने साथियों से कहा, “रुको ! तुमने देखा नहीं कि तुम्हारे तालाब में कूदने की बात सुनकर ही नन्हे-नन्हे मेंढक डरकर कैसे बाहर भागे हैं।

इसका मतलब यह हुआ कि हम निरीह प्राणी नहीं हैं और हमारा भी कुछ महत्त्व है। फिर हम अपना अनमोल जीवन क्यों खत्म करें?”

शिक्षा: कभी भी अपने को दूसरों से कमतर नहीं आँकना चाहिए।

चालाक लोमड़ी और कौआ

एक बार की बात है, जंगल में एक लोमड़ी रहती थी वह दो दिन से भूखा था, उसे खाने के लिए कुछ भी नहीं मिला। लोमड़ी भोजन की तलाश में जंगल से जा रहा था फिर उसने देखा एक कौआ एक पेड़ की शाखा पर बैठा है, उसकी मुंह में एक रोटी का एक टुकड़ा था।

रोटी का टुकड़ा देखकर लोमड़ी की मुंह में पानी आ गया। और उसने वह रोटी कौआ की मुंह से छीन ना चाहा। फिर लोमड़ी एक जोजोना की बारे में सोच कर पेड़ के पास गई और कौआ की आवाज की बहुत तारीफ की।

फिर लोमड़ी कौआ से एक गीत गाने की प्रार्थना की। कौआ अपनी झूठी तारीफ सुनकर इतना तल्लीन हो गया कि वह भूल ही गया उसकी मुंह में एक रोटी का टुकड़ा है, कौआ गर्व महसूस करने लगा।

से ही कौआ ने गीत गाने के लिए अपना मुंह खोला, रोटी का टुकड़ा नीचे गिर गया। लोमड़ी जल्दी से रोटी का टुकड़ा लिया और वहां से भाग गया थोड़ी दूर जाकर लोमड़ी खुशी से अपना भोजन किया। और कौआ दुखी होकर वहां रोने लगा।

शिक्षा: कभी भी अगर कोई तुम्हारी जरूरत से ज्यादा तारीफ करेगा तो उनकी बातों पर भरोसा करने से पहले एक बार जरूर सोचना।

भेड़िया और मेमना

एक बार एक जंगल में एक शरारती मेमना रहती थी, उसकी मां अपने बच्चों से इतना प्यार करती थी, कि वह हमेशा बच्चे की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती थी। उसकी मां हमेशा उन्हें चेतावनी देती थी, बच्चों आपको जंगल में नहीं जाना चाहिए।

जंगली जानवर वहां रहते हैं, वह तुम्हें मारकर खा सकता है लेकिन शरारती मेमना ने अपनी मां की बात कभी नहीं सुना। एक दिन, वह हमेशा की तरह जंगल में घूमने गई थी। वहां उसने एक झरना दिखा, उसे बहुत ज्यादा प्यास लगी थी इसलिए वह पानी पीने के लिए वहां गया।

जब मेमना झरना की पानी पी रहा था, तब एक भेड़िया एक पेड़ की पीछे से उसे देख रहा था। वह दोनों के अलावा वहां और कोई नहीं था, आप जानते नहीं हो यह जंगल सिर्फ मेरे जैसा जंगली जानवर के लिए है। तुम यहां की पानी नहीं खा सकते हो। भेड़िया ने कहा.

मेमना को पता था की भेड़िया खतरनाक जानवर है, उसकी मां ने भेड़िया की बारे में चेतावनी दी थी। उसे पता था भेड़िया उसे खाने वाला है , फिर वह भेड़िया को कहा तुम भी पानी को गंदा कर रहे हो। अब मैं इस दूषित पानी को कैसे पियूंगा?

इस तरह मेमना कुछ और मिंटू तक भेड़िया से बात करता रहा। फिर वहां से एक लकड़हारा जा रहा था, लकड़हारा मेमना को बचाने के लिए वहां आया। उसने मेमना और भेड़िया दोनों को देखा, लकड़हारा उसे बचाने के लिए भेड़िया को पकड़कर पीटा।

मेमना अब सुरक्षित थी, वह वापस अपनी मां के पास गया। उसने अपनी मां को बताया कि जंगल में भेड़िया और लकड़हारा के साथ क्या हुआ था। और फिर उन्होंने अपनी मां से वादा किया वह फिर कभी जंगल में अकेला नहीं जाएगा।

शिक्षा: ताकत ही सब कुछ नहीं होता, कभी कभी कमजोर लोग होशियारी से ताकतवर लोगों पर काबू पा सकते हैं।

बीमार मुर्गी और बिल्ली

एक दिन जब मुर्गी नींद से जागी, तो वह ठीक नहीं थी। उसने कहा, “आज मैं ठीक नहीं हूं। इसलिए हम पूरे दिन आराम करेंगे।” यह बात पास से गुजर रही बिल्ली ने सुन ली और उसके मन में के लालच आयी।

बिल्ली, जो हमेशा शिकार की तलाश में रहती है, उसने अपने मन में कहा, यह एक महान अवसर है। मैं हाल-चाल पूछने के बहाने मुर्गी से दोस्ती करती हूँ। फिर एक दिन, विश्वास के साथ, मौका मिलते ही मैं मुर्गी को खा जाउंगी।

यह सोचकर बिल्ली तुरंत मुर्गी के पास गई और बहुत मीठी आवाज में बोली, “बहन!” मैंने सुना है कि आप ठीक महसूस नहीं कर रहे हैं। अगर ऐसा था तो आपको मेरे पास आना चाहिए।

“मैं आपको मजेदार चुटकुले सुनाती हूं और आप खुश होंगे। इससे तुम्हारी सारी बीमारी चली जाएगी।” मुर्गी बिल्ली चालाकी भांप ली। उसने कहा, “आपकी सहानुभूति के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद!” तुम मुझे अकेला छोड़ दो, मुझे लगता है कि मैं ठीक हूँ।”

शिक्षा: हमें दूसरों की चिकनी-चुपड़ी बातों में नहीं आना चाहिए। क्योंकि उससे हमारा ही नुकसान हो सकता है।

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