Short Stories in Hindi for Class 5 - आज की इस पोस्ट में हम आपके साथ Short Stories in Hindi for Class 5 शेयर करने जा रहे है। इन stories आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।आप इन Short Stories in Hindi for Class 5 को पूरा पढ़े। आपको यह Stories बहुत पसंद आएगी।

Short Stories in Hindi for Class 5th

Short Stories in Hindi for Class 5th List

बिल्ली और बुलबुल

ईमानदार लकड़हारा

नासमझी का नतीजा

तैरने की चाहत

सोने के सिक्के

बगीचे में अजनबी

सोने का अंडा

लोमड़ी और बकरी

ऊंट और उसका बच्चा की कहानी

कुत्ता और कुआं की कहानी

बहेलिया और साँप

ऊँट व मनुष्य

किसान और उसकी आलसी बेटे

खरगोश और उसके कई दोस्त

राजा और मकाओ तोते

सुनहरा स्पर्श की कहानी

बिल्ली व बुलबुल

ग्रामीण चूहा और शहरी चूहा

हाथी और दर्जी

सेब का पेड़ और किसान

मरता क्या न करता

झूठ की सजा

मूर्ख लोमड़ी और ऊंट

बंदर और मगरमच्छ

शेर और लोमड़ी

तोता और चने की दाल

बिल्ली और बुलबुल

एक बार, एक छोटे गांव में एक बेकर (केक बनाने वाला) रहता था उसके पास एक पालतू बिल्ली थी। वह बेकर उस बिल्ली को बहुत प्यार करता था। वह बिल्ली को रोजाना अच्छा खाना खिलाता था।

लेकिन जब भी बिल्ली म्याऊँ-म्याऊँ की आवाज करती थी तो वह उसे मारकर दरवाजे से बाहर निकाल देता था। इसलिए बिल्ली कभी उस आदमी के सामने आवाज नही निकालती थी।

एक दिन उस आदमीने एक बुलबुल खरीदी। वह उस बुलबुल को अपने घर लेकर आया। वह बुलबुल पुरे घर में गाना गाती हुई घूमती थी। फिर बिल्ली ने उस बुलबुल से पूछा “तुम कहाँ से आई हो?” फिर बुलबुल ने उत्तर दिया, “गांव के मेले से।”

बुलबुल का उत्तर सुनकर बिल्ली चिल्लाकर बोली, “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई शोर मचाने की? मैंने इसी घर में जन्म लेने के बावजूद मालिक ने मुझे कभी गाने नहीं दिया। अगर मैं गाती हूँ तो वे मुझे सजा देते हैं।”

बिल्ली के सवाल पर बुलबुल ने व्यंग्यात्मक तरीके से कहा, “एक बिल्ली और एक बुलबुल के बीच कोई मुकाबला नहीं है। मेरी आवाज मधुर है और आपकी आवाज दूसरों को परेशान करने वाली है।”

इसलिए तुम मुझसे मत लड़ना। बुलबुल का उत्तर सुनकर बिल्ली ने अपनी पूंछ हिला दी और चली गई।

शिक्षा: दूसरों को कभी नीचा नहीं दिखाना चाहिए।

ईमानदार लकड़हारा

रामू एक ईमानदार लकड़हारा था। एक दिन पेड़ की एक शाखा काटते काटते उसकी कुल्हाड़ी अचानक नदी में गिर गई। नदी के किनारे खड़ा होकर वह फूट-फूटकर रोने लगा।

जल्दी ही एक देवी नदी में से प्रकट हुईं और उन्होंने पहले उसे सोने की कुल्हाड़ी और उसके बाद चांदी की कुल्हाड़ी देने को कहा। रामू ने दोनों कुल्हाड़ियाँ लेने से इंकार कर दिया।

अब उसे देवी ने असली कुल्हाड़ी दी और रामू ने वह कुल्हाड़ी खुशी-खुशी ले ली। उसकी ईमानदारी से खुश होकर उस देवी ने उसकी कुल्हाड़ी के साथ बाकी दोनों कुल्हाड़ियाँ भी दे दी।

उसने यह सारी घटना अपने पड़ोसियों को बताई। उनमें से एक के मन में लालच आ गया। वह भी नदी के पास गया तथा उसने अपनी कुल्हाड़ी नदी में फेंक दी और रोने का नाटक करने लगा।

तब देवी ने प्रकट होकर उसे जब सोने की कुल्हाड़ी दो तो उसने लपककर वह कुल्हाड़ी लेने की कोशिश की। देवी को गुस्सा आ गया और वह गायब हो गईं। इस प्रकार वह अपनी असली कुल्हाड़ी भा। गँवा बैठा।  

शिक्षा: भगवान हमेशा ईमानदार लोगों को ही पसन्द करते हैं तथा उनकी ही मदद करते हैं।

नासमझी का नतीजा

एक बार एक जंगल में कुछ शिकारी शिकार करने के लिए आए। वे दिन भर एक हिरण का पीछा करते रहे पर हिरण उनके हाथ नहीं आया। भागते-भागते जब वह कहीं ओझल हो गया तो शिकारी थक-हार कर एक पेड़ के नीचे बैठ गए।

हिरण भी उस पेड़ से थोड़ी-सी दूर घनी झाड़ियों में छिपा हुआ था। सुबह से भागते-भागते उसे भूख लग आई थी, इसलिए जब उसने झाड़ियों के नर्म मुलायम पत्तों को देखा तो उन्हें ही खाने लगा।

शिकारियों ने झाड़ियों में हलचल होती सुनी वे सावधान होकर उधर देखने लगे। उन्हें यह समझते देर नहीं लगी कि हिरण झाड़ियों के पीछे छिपा हुआ है। एक शिकारी ने तुरंत धनुष उठाया और हिरण को निशाना बनाकर बाण छोड़ा।

तीर से हिरण बुरी तरह घायल होकर गिर गया और सोचने लगा,”अपनी मौत के लिए मैं स्वयं जिम्मेदार हूँ। मैं लालच में आकर उन्हीं झाड़ियों को खाने लगा था, जिन्होंने मुझे छिपाकर मेरी जान बचाई थी।

शिक्षा: हमें हर काम सोच-समझकर करना चाहिए।

तैरने की चाहत

बसंत का सुहाना मौसम था। सर्दी की ऋतु बीत चुकी थी और गर्मियाँ अभी शुरू नहीं हुई थीं। एक बच्चा नदी किनारे टहल रहा था कि अचानक उसका तैरने का मन हुआ। उसने कपड़े उतारकर किनारे पर रखे और नदी में कूद गया।

पानी में उतरते ही उसे महसूस हुआ कि पानी बहुत ठंडा है। यदि इसमें कुछ देर और रहा तो ठंड लग जाएगी। इसलिए उसने जल्दी से बाहर निकलना चाहा,

लेकिन नदी उस समय अपने उफान पर थी और उसे अपने साथ बहाए लिये जा रही थी। लड़के ने बाहर निकलने की बहुत कोशिश की पर निकल नहीं पा रहा था। वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा,”बचाओ, बचाओ !

मैं डूब रहा हूँ।” नदी के पास से एक व्यक्ति गुजर रहा था। वह बोला, “मूर्ख बालक! तुम्हें समझ होनी चाहिए कि यह तैराकी का मौसम नहीं है।

यदि तुम्हारे माता-पिता तुम्हें ऐसे तैरता हुआ देखते तो कितना नाराज होते, इसका तुम्हें अंदाजा भी नहीं है।” बच्चा बोला,”अंकल! पहले मुझे बाहर निकालो, फिर ऐसी गलती नहीं करुंगा।”  

शिक्षा: हर काम का एक सही समय होता है।

सोने के सिक्के

शाम एक लालची और स्वार्थी आदमी था, वह हमेशा बहुत पैसे चाहते थे पैसा कमाने के लिए दूसरे को हमेशा धोखा देते थे, इसके अलावा उसने अपने नौकरों को बहुत कम मजदूरी देते थे।

हालांकि एक दिन उसने एक ऐसा सबक सीखा जिसने उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी, एक दिन शाम की एक छोटा थली गायब हो गई जिसमें 50 सोने के सिक्के थे।

शाम थली को बहुत ढूंढा लेकिन वह नहीं मिला, शाम की दोस्त और पड़ोसी भी खोज में शामिल हो गए, लेकिन उनके सभी प्रयास व्यर्थ हो गए।

कुछ दिन बाद शाम के लिए काम करने वाले एक आदमी की 10 साल की बेटी को वह थली मिली, उसने अपने पिता को थली के बारे में बताया, वह तुरंत अपने मालिक के पास ले जाने का फैसला किया।

फिर उसने अपने मालिक को थली वापस दे दिया, शाम को थली के साथ सोने का सिक्का मिल गया था, लेकिन उसने एक चाल चलने का फैसला किया।

उसने कहा, इस स्थली में 75 सोने का सिक्के थे लेकिन आपने मुझे केवल 50 दिया बाकी के सिक्के कहां है? आपने बाकी 25 सिक्के चुरा लिया है, फिर शाम इस बात को लेकर अदालत में गया।

जज ने दोनों की बात सुना फिर अपना फैसला सुनाया, चूंकि शाम ने 75 सोने के सिक्कों का एक थली खो दिया था और लड़की के पास मिले थली में केवल 50 सिक्के थे, तो जहीर है जो थली मिला वह शाम का नहीं है।

इसे किसी और ने खो दिया था, चूंकि 50 सिक्के की खोने के बारे में कोई शिकायत नहीं है, इसीलिए मैं लड़की और उसके पिता को 50 सिक्कों को लेने का आदेश देता हूं जो उनकी ईमानदारी के लिए है।

शिक्षा: ईमानदारी हमेशा पुरस्कृत किया जाएगा,और लालच को दंडित किया जाएगा।

बगीचे में अजनबी

एक बार की बात है, एक आदमी था जिसके पास एक बड़ा बगीचा था, उन्होंने कई फलों के पेड़ लगाए थे और उसकी देखभाल करते थे।

वह फल बेच के अपनी परिवार के लिए पैसा बनाना चाहता था, फिर एक दिन अपने बेटे के साथ फल लेने के दौरान बगीचे में गया।

उसने एक अजनबी आदमी को पेड़ की शाखा पर बैठकर फल खाते हुए देखा, उसने बहुत गुस्सा हो गया और चिल्लाया “अरे तुम मेरी पेड़ में क्या कर रहे हो”

सखा पर बैठे अजनबी ने माली को देखा, लेकिन उसने कोई उत्तर नहीं दिया और फल खाता रहा,माली बहुत गुस्से में था और फिर से चिल्लाया।

“पूरे साल मैंने इन पेड़ों को देखभाल की है, आपको मेरी अनुमति के बिना फल लेने का कोई अधिकार नहीं है, इसीलिए एक बार में नीचे आ जाओ!”

पेड़ पर अजनबी ने आवाज दिया, यह भगवान का बगीचा है और मैं भगवान का सेवक हूं। आपको भगवान और उसके सेवक के काम में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

माली इस जवाब पर बहुत हैरान हुआ, और एक योजना के बारे में सोचा। उसने अजनबी को पेड़ से बांध दिया और उसकी पिटाई करने लगा,अजनबी चीखने लगा।

फिर अजनबी हिचकिचाया और कहा “रुको, मुझे मत मारो, मुझे फल लेने से पहले तुम्हारी अनुमति लेना चाहिए था, इसलिए माफ कर दो और मुझे आजाद कर द।” तब माली ने उसे आजाद कर दिया।

शिक्षा: भगवान के नाम देखकर कुछ गलत काम नहीं करना चाहिए।

सोने का अंडा

एक बार की बात है, गांव में एक किसान रहता था, वह बहुत ही गरीब था, उसकी आय बहुत कम थी उन्होंने बहुत कठिनाई से दिन गुजरता था।

एक दिन उसे एक मुर्गी मिली, किसान उसे मारकर खाना चाहता था लेकिन जब वह मुर्गी को मारने के लिए गया तो मुर्गी ने कहा, तुम मुझे मत मारो मैं तुम्हें रोज सोने का अंडा दूंगी।

फिर मुर्गी हर दिन एक सुनहरा अंडा दिया, किसान हर दिन अंडा बाजार में बेचा, जल्द ही वह एक अमीर आदमी बन गए। गांव में सभी लोग उनका सम्मान करने लगी,

किसान बहुत लालची हो गया, उसने सोचा कि मुर्गी के अंदर जरूर सुनहरे अंडे का भंडार होना चाहिए। उसे सारा अंडा एक दिन में चाहिए था, वह बहुत अमीर बनना चाहता था।

फिर उसने चाकु लिया और मुर्गी का पेट काट दिया, उसे एक भी अंडा नहीं मिला। उसने केवल सोने का अंडे ही नहीं बल्कि मुर्गी भी खो दिए। फिर वह अमीर से धीरे-धीरे पहले जैसा गरीब बन गए।

शिक्षा: लालच एक अभिशाप है।

लोमड़ी और बकरी

एक बार की बात है, एक लोमड़ी अंधेरे में घूम रही थी दुर्भाग्य से, वह एक कुएं में गिर गया, उसने ऊपर आने के लिए पूरी कोशिश की लेकिन सभी विफल हो गया।

इसलिए, उनके पास अगली सुबह तक वहां रहने का अलावा और कोई विकल्प नहीं था। अगले दिन एक बकरी उसी रास्ते से जा रहा था, उसने कुएं में झांका और वहां लोमड़ी को देखा।

बकरी ने पूछा, आप वहां क्या कर रहे हो लोमडी भाया? चतुर लोमड़ी ने जवाब दिया, मैं यहां पानी पीने के लिए आया हूं, यहां की पानी बहुत स्वादिष्ट है।

ऐसी मीठा पानी हमने कभी भी नहीं पिया, आओ तुम खुद ही देख लो। फिर बकरी ने लोमड़ी की बात सुनकर बिना सोचे समझे कुएं में छलांग लगा दी।

अपनी प्यास बुझाई, और बाहर निकालने का रास्ता खोजने लगी। लेकिन लोमड़ी की तरह उसने भी खुद को बाहर लेकर आने मैं असहाय पाया।

तब लोमड़ी ने कहा मेरे पास एक विचार है, आप अपने हिंद पैरों पर खड़े हो जाओ, मैं आपके सिर के ऊपर चढ़कर बाहर निकल जाऊंगी, फिर मैं आपको बाहर आने में मदद करूंगी।

बकरी इतनी मासूम थी, कि लोमड़ी की चालाकी को समझ नहीं पाया, और जैसा लोमड़ी ने कहा ऐसा करके उसे कुएं में से बाहर निकालने में मदद की।

दूर जाने के दौरान, लोमड़ी ने कहा आप बहुत बुद्धिमान है, आप कभी नहीं देख पाएगी कि कैसे बाहर निकालना है। फिर लोमड़ी वहां से चला गया, और बकरी कुए में अपनी मौत का इंतजार किया।

शिक्षा: बिना सोचे समझे किसी की बात पर यकीन करके अंधेरा मैं नहीं जाना चाहिए।

ऊंट और उसका बच्चा की कहानी

एक बार, एक ऊंटनी और उसका बच्चा आपस में बात कर रहे थे। बच्चे ने माँ से पूछा, “माँ, कूबड़ क्यों होते है?” तब माँ ने जवाब दिया, “हमारे कूबड़ पानी भरने के लिए है ताकि हम रेगिस्तान में बहुत कम पानी में जीवित रह सकें।”

बच्चे ने माँ से फिर पूछा, “हमारे पैर का पंजा गोल क्यों होता है?” माँ ने उत्तर दिया, “यह हमें रेगिस्तान में आराम से चलने के लिए मदद कर सकता है। यह पैर हमें गरम रेत में घूमने में मदद करते है।”

बच्चे ने माँ से एक और सवाल पूछा, “लेकिन हमारी पलके इतनी लंबी क्यों होती है?” माँ ने उत्तर दिया, “हमारी आँखों को रेगिस्तान में धूल और रेत से सुरक्षित रखने के लिए यह हमारे सुरक्षा कवच होते है।”

तब बच्चे ने कुछ देर सोचा और माँ से फिर पूछा, “तो हमारे पास रेगिस्तान में यात्रा करने के लिए और कम पानी में जीवित रहने के लिए कूबड़ है, रेगिस्तान में आराम से घूमने के लिए पैर के पंजे गोल है और रेगिस्तान की तेज हवा, धूल, मिटटी से बचने के लिए लंबी पलके है। फिर भी हम चिड़ियाघर ने क्यों है।”

अपने बच्चे की बात सुनकर माँ चुप हो गई और उसके पास कोई जवाब नहीं था।

शिक्षा: आपकी ताकत, कौशल और ज्ञान पूरी तरह बेकार है। अगर आप सही जगह पर नहीं है।

कुत्ता और कुआं की कहानी

एक बार, एक कुत्ता और उसके बच्चे खेत में रहते थे। उसी खेत में एक कुआं भी था। माँ कुत्ता ने उसके पिल्ले से कहा, कोही उस कुए के पास नहीं जाएगा और उसके चारों और नहीं खेलेगा। और वहां से चली गयी।

लेकिन एक बच्चे ने सोचा, उन्हें कुएं पर क्यों नहीं जाना चाहिए और इसका पता लगाने का फैसला किया। वह कुए के पास चला आया और कुए की दिवार पर चढ़कर अंदर झाँकने लगा।

वहाँ उस कुत्ते के बच्चे ने अपने ही प्रतिबिंब को देखा और सोचने लगा कुए में एक और कुत्ता है। कुए में मौजूद वह कुत्ता (उसका प्रतिबिंब) वही सब कर रहा था, जो कुत्ते का बच्चा कर रहा था। और उसकी नक़ल कर रहा था इसलिए कुत्ते का बच्चा क्रोधित हो गया।

उसने कुए में मौजूद कुत्ते के साथ लड़ने का फैसला किया और कुए में कूद गया। कुएं में कूदने के बाद उसे कोही अन्य कुत्ता नजर नहीं आया। वह उसे कुत्ता नहीं मिला और उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। कुए से निकलने के लिए वह भौकता रहा और तब तक भौकता रहा जबतक किसान उसे कुए से निकाल ना ले।

शिक्षा: हमेशा वही सुनें जो बुजुर्ग कहते हैं। उनसे सवाल करें, लेकिन उन्हें टालें नहीं।

बहेलिया और साँप

एक बार एक बहेलिया जाल लेकर जंगल में गया। उसे पेड़ के सबसे ऊपर की शाखाओं से पक्षियों के चहचहाने की आवाज़ सुनाई दी।

उसने तुरंत सभी शाखाओं पर गोंद लगा दी ताकि पक्षियों के पाँव उन पर चिपक जाएँ और वह उन्हें आसानी से पकड़ सके। शिकारी का पूरा ध्यान ऊपर था।

जब वह पक्षियों के फँसने का इंतजार कर रहा था तब अनजाने में उसका पॉव एक सोए साँप पर पड़ गया। साँप ने गुस्से में आकर उसके पाँव पर डस लिया। बहेलिया दर्द से चिल्लाने लगा।

वह जान गया कि उसके पाँव का ज़ख्म उसे मृत्यु की ओर ले जा रहा है। उसने स्वयं से कहा, “कितना बदकिस्मत हूँ में कि शिकार करने आया था लेकिन अपनी लापरवाही के कारण स्वयं ही शिकार हो गया।”  

शिक्षा: किसी भी काम में लापरवाही के कारण लेने के देने पड़ जाते हैं।

ऊँट व मनुष्य

इस धरती और जीव जन्तुओं के रचयिता स्वयं ईश्वर हैं। जब मनुष्यों ने रेगिस्तान में पहली बार ऊँट देखा तो वे उसके बड़े आकार को देखकर डर गए और भाग गए। धीरे-धीरे उन्होंने उसे हरे-भरे स्थानों में भी देखा।

उन्होंने पाया कि वह काफी शांत जानवर है। उन्होंने धीरे-धीरे उसे घास डालना शुरू किया और साफ पानी पीने को दिया। अब वह मनुष्यों की मदद करने लगा। वह बोझा ढोने लगा था गाड़ियाँ खींचने लगा।

अब वह मनुष्यों के लिए पालतू पशु बन गया है। उसकी पीठ पर बच्चे तथा बड़े भी सवार होकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने लगे हैं। सीधे शब्दों में कहा जाए तो मनुष्य अब उसका मालिक बन गया है।  

शिक्षाः बुद्धिमान लोग डरावनी चीजों का भी प्रयोग कर लेते हैं।

किसान और उसकी आलसी बेटे

एक बार एक गांव में एक बूढ़ा किसान रहता था, उसके तीन बेटे थे। वह हमेशा एक दूसरे से झगड़ते रहते थे, किसान ने उनके बीच एकता लाने के लिए बहुत कोशिश की।

लेकिन तीनो बेटे ने उसकी सलाह कभी नहीं सुनी, किसान अपने तीनो बेटे की भविष्य को लेकर बहुत चिंतित थे। एक दिन बूढ़ा किसान बीमार हो गया,

उसने फैसला किया, अपने तीनो बेटे के बीच एकता लानी चाहिए। उसने अपनी तीनो बेटे को बुलाया और उन्हें कुछ लकड़ियां लाने के लिए कहा।

वह लकड़ियां लेकर आए, किसान ने लकड़ियां को एक बंडल में बांधने के लिए कहा। फिर उन्होंने लकड़ियां को तोड़ने के लिए अपनी ताकत आजमाने के लिए कहा।

प्रत्येक बेटे ने बंडल को तोड़ने की कोशिश की लेकिन असफल रहा। फिर किसान ने बंडल को खोल दिया, और प्रत्यय को एक-एक छड़ी दे और इसे तोड़ने के लिए कहा।

सभी बेटे ने आसानी से वह छड़ी तोड़ दी, किसान ने कहा अब आप समझ गए हैं। यदि आप एक साथ रहे तो किसी ने भी आप को नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा,

लेकिन यदि आप आपस में झगड़ते रहे, तो कोई भी आपको इन छड़ी की तरह आसानी से तोड़ देगा। फिर उनकी तीनो बेटे को अपनी गलती का एहसास हुआ, उन्होंने पिता से एक साथ रहने का वादा किया।

शिक्षा: एकता में ही ताकत है।

खरगोश और उसके कई दोस्त

एक बार की बात है, एक जंगल में एक खरगोश रहता था, उसके कई दोस्त थे। उसे विश्वास था कि खतरे में दोस्तों ने उसकी मदद करेगी।

एक दिन एक कुत्ता खरगोश का पीछा किया, वह अपनी जान बचाने के लिए बहुत तेज से भागा। रास्ते में वह अपनी पुराने दोस्त बिल्ली से मिला।

खरगोश बिल्ली दोस्त को कुत्ते से अपनी जान बचाने के लिए कहा, लेकिन बिल्ली ने कहा मित्र में अभी बहुत व्यस्त हूं, मुझे अपनी पत्नी से मिलना होगा जो नदी के किनारे मेरा इंतजार कर रही है।

इस जंगल में आपके और भी मित्र है, उनमें से कोई आपकी मदद करेगा मुझे पूरा यकीन है। इतना कहकर बिल्ली वहां से चला गया।

फिर खरगोश जब और एक दोस्त घोड़े से मुलाकात की, वह उसे कुत्ता से बचाने के लिए कहा, तो घोड़े ने कहा दोस्त मैं अभी व्यस्त हूं,

जंगल में अभी मेरी खोए हुए बच्चे की तलाश कर रही हूं, इसलिए मैं अभी जा रहा हूं, मुझे पूरा यकीन है कोई दूसरा दोस्त जरूर तुम्हारी मदद करेगा।

घोड़े भी बहाने देकर चला गया, फिर खरगोश कुछ और दोस्त से अनुरोध किया, लेकिन हर एक दोस्त ने किसी ना किसी बहाने देखकर अनुरोध ठुकरा दिया।

फिर खरगोश अपनी जान बचाने के लिए एक छेद में प्रवेश किया, कुत्ता खरगोश को बहुत ढूंढा लेकिन नहीं देख पाया, फिर वह वापस चला गया।

शिक्षा: एक सच्चा दोस्त सारे झूठे दोस्तों से बेहतर है।

राजा और मकाओ तोते

एक बार, एक राज्य का राजा पडोसी राज्य के दौरे करने गया था। तब एक अंतिम राज्य के राजाने उसे एक सुंदर मकाओ तोते की जोड़ी दी। फिर राजा उन दिनों सुंदर तोते को लेकर अपने राज्य आ गया। और एक पक्षी को प्रशक्षित करने वाले को बुलाया।

राजा ने तोते के लिए महल के बगीचे में एक जगह की व्यवस्था की। वह अक्सर उन्हें अपने महल की खिड़की से देखता था। समय बीतने के साथ, एक दिन ट्रेनर महल में आया और उसने राजा को सूचित किया कि यद्यपि एक तोता आसमान में बड़ी ऊँची उड़ान भर रहा है, और दूसरा वह उस दिन से अपनी शाखा से नहीं बढ़ रहा था जिस दिन वह आया था।

यह सुनकर राजाने अपने राज्य के साथ पड़ोस के कई राज्य के पक्षी प्रशक्षित करने वालों को बुलाया। सबने उस एक तोते को उड़ाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह तोता उड़ने में असफल रहा। तब राजने अपने दरबारियों से कहकर उसके राज्य के एक किसान को बुलाया।

अगली सुबह वह दूसरा तोता राजा महल के ऊपर उड़ते देख राजा बहुत खुश हुआ और उस किसान को पास बुलकर पूछा, “तुमने तोता को कैसे उडाया?” सम्मान के साथ हाथ जोड़कर किसान ने राजा से कहा, “यह बहुत आसान है, मैंने बस उस शाखा को काट दिया जहाँ तोता बैठता था। ”

शिक्षा: हमें नए अवसरों का पता लगाने और अपनी क्षमता से परे सफलता पाने के लिए खुद को अपने आराम क्षेत्र से मुक्त करने की आवश्यकता है।

सुनहरा स्पर्श की कहानी

एक बार, एक आदमी अपनी बेटी और पत्नी के साथ एक छोटे शहर में रहता था। वह आदमी बहुत अमीर था, और सोने की चीज़ों को बहुत पसंत करता था। लेकिन वह अपनी बेटी को सोने से ज्यादा प्यार करता था। अपने जीवन में,आदमी केवल दो चीजों से प्यार करता था, एक सोना और दूसरा उसकी बेटी।

एक दिन आदमी अपना सोना बढ़ाने के लिए जाप करता है। तब भगवान उससे प्रसन्न हुए और उसने भगवान से एक वरदान माँगा। उसने भगवान से कहा, “हे भगवान मुझे ऐसी शक्ति दो, मैं जो कुछ भी छूऊं वह सोना बन जाए।” तब भगवान ने उसे शक्ति दी और वहां से चले गए।

तब वह लालची आदमी बहुत खुश हुआ। वह जिन चीजों को छूता था, वे सोना बन जाती थीं। जैसे वह किसी पत्थर या कंकर को छूता वह सोने का बन जाता था। इस तरह वह आदमी अमीर होने लगा।

एक दिन वह घर आया, तो उसकी बेटी उससे मिलने के लिए दौड़ी। जैसे ही आदमी उसे गले से लागता है, लड़की तुरंत सोने की मूर्ति में बदल जाती है। उसे इस हालत में देखकर, आदमी बहुत रोता है और उसे अपने किए पर बहुत पछतावा होता है।

शिक्षा: लालच हमेशा पतन की ओर ले जाता है।

बिल्ली व बुलबुल

एक छोटे से गाँव में एक बेकर (केक बनाने वाला) रहता था उसके पास एक पालतू बिल्ली थी। वह उस बिल्ली को बहुत प्यार करता था।

लेकिन जब वह म्याऊँ-म्याऊँ की आवाज करती थी तो वह उसे मारकर दरवाजे से बाहर निकाल देता था। एक बार उसने एक बुलबुल खरीदी। वह बड़ी आजादी से पूरे घर में गाना गाती हुई घूम रही थी।

तभी बिल्ली ने उससे पूछा, “तुम कहाँ से आई हो?’ बुलबुल ने उत्तर दिया, “गांव के मेले से।” बिल्ली चिल्लाकर बोली, “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई शोर मचाने की? इसी घर में जन्म लेने के बावजूद मालिक ने मुझे कभी गाने नहीं दिया।

मैं अगर गाती हूँ तो वे मुझे सजा देते हैं।” बुलबुल ने व्यंग्यपूर्ण स्वर में कहा, “एक बिल्ली और एक बुलबुल में कोई मुकाबला नहीं है।

मेरी आवाज़ मधुर है और तुम्हारी आवाज दूसरों को परेशान करने वाली है। इसलिए तुम मेरे साथ मत लड़ो।” बिल्ली ने खिसियाकर अपनी पूँछ हिलाई और चली गई।  

शिक्षाः दूसरों को कभी नीचा नहीं दिखाना चाहिए।

ग्रामीण चूहा और शहरी चूहा

एक बार की बात है। एक गाँव में रहने वाले चूहे की दोस्ती शहर के एक चूहे से हो गई। एक दिन ग्रामीण चूहे ने शहरी चूहे को खाने पर बुलाया। उसने उसे जौ और मकई के दाने परोसे जो वह खेतों से लाया था।

जब वे दोनों शहर आए तो शहरी चूहे ने अपने दोस्त के सामने शहद, फल, पनीर और बिस्किट रखे। जैसे ही उन्होंने खाना शुरू किया वैसे ही एक आदमी ने दरवाजा खोला और दोनों चूहे डर के मारे अपने बिल में भागकर छुप गए।

बहुत इंतजार के बाद जब उन्होंने दोबारा खाना शुरू किया तो अचानक एक औरत ने प्रवेश किया और कुछ ढूँढना शुरू कर दिया। दोनों चूहे फिर से भागे और छिप गए। ग्रामीण चूहा परेशान होकर बोला,

“मैं अपने गाँव का सीधा-साधा खाना खाकर ही खुश हूँ। कम से कम वहाँ तुम्हारी तरह हर पल एक खतरा नहीं उठाना पड़ता। मैं जौ और मकई खाकर भी सन्तुष्ट हूँ।

लेकिन तुम इतना अच्छा खाना खाकर भी संतुष्ट नहीं हो क्योंकि इस खाने के लिए तुम हर रोज़ डर और खतरों का सामना करते हो।”

शिक्षाः आजादी और भयहीनता खुशी की अनिवार्य शर्ते हैं।

हाथी और दर्जी

एक बार एक गांव में एक दर्जी रहता था, उसी गांव में एक हाथी रहता था। हाथी प्रतिदिन दर्जी के दुकान पर जाता था, दर्जी ने उसे प्रतिदिन कुछ ना कुछ खिलाता था।

वह दोनों अच्छे दोस्त की तरह रहते थे। एक दिन दर्जी बहुत खराब मूड में था, जब हाथी दुकान में आया दर्जी सुई उसके मुंह में फेंक कर मारा।

हाथी को बहुत गुस्सा आया, वह नदी में गया और उसकी सूंड में मिट्टी और गंदगी भर लिया। फिर हाथी दर्जी की दुकान की तरफ दौड़ता हुआ आया,

उसने दर्जी और उसकी दुकान पर अपनी सूंड से मिट्टी और गंदगी से भर दी। दर्जी हाथी को देख कर चौक गया, उसे अपनी गलती का एहसास हुआ,

फिर दर्जी हाथी से माफी मांगी, और उसे ताजे फल और सब्जियां खिलाई। फिर दोबारा वह दोनों अच्छे दोस्त बन गए।

शिक्षा: गूंगे जीव जंतुओं को हमें कभी भी कष्ट नहीं देना चाहिए।

सेब का पेड़ और किसान

एक बार गांव में एक किसान रहता था, उसके पास एक बड़ा बगीचा था, जिसमें एक पुराना सेब का पेड़ था जब किसान छोटा था अपना अधिकांश समय पेड़ के साथ खेलने में बिताया था।

हालांकि, जैसे जैसे समय बीतता गया सेब का पेड़ पुराना हो गया, और उसने फल देना बंद कर दिया। जब किसान को पेड़ से कुछ नहीं मिल रहा था, तो उन्होंने पेड़ को काटने का फैसला किया।

वह भूल गया कि उसने अपना पूरा बचपन पेड़ पर चढ़ने और उसकी सेब खाने में बिताया था, और सेब का पेड़ कई छोटे जानवरों का घर था,जब किसान कुल्हाड़ी लेकर पेड़ को कटने के लिए आई।

पेड़ की सभी जानवर इकट्ठा होकर कहा, कृपया पेड़ को मत काटो यह हमारा घर है, हमारे पास रहने के लिए कोई और घर नहीं है। जब आप छोटे थे हम आपके साथ इस पेड़ में खेलते थे।

किसान अपने बचपन और अपने पशु मित्रों को भूल गया, उसने पेड़ को काटना शुरू किया, अचानक उसने कुछ चमक देखा उन्होंने महसूस किया यह मधुमक्खी का छत्ता है, जो शहद से भरा है।

किसान थोड़ा सा अपनी मुंह में लिया, फिर शहद का साथ उसमें छोटे लड़के को जगा दिया। अचानक उसकी बचपन की याद वापस लौट आई, उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा यह साथ अद्भुत है।

उन्होंने कुल्हाड़ी फेंक दिया और कहां मैं दावा करता हूं इस पेड़ को कभी नहीं काटूंगा,मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ है, और आप सभी शांति से इस पेड़ में रह सकते हैं।

सभी जानवर ने मधुमक्खी को धन्यवाद दिया,अगर किसान को मधुमक्खी नहीं मिली होती तो वह सब अब तक बेघर हो चुके होते, फिर सभी जानवरों ने पुराने सेब की पेड़ में सुखी से रहने लगे।

शिक्षा: प्रकृति में प्रत्येक जीवित वस्तु कुछ ना कुछ काम की है, हमें किसी भी वस्तु को नष्ट नहीं करना चाहिए।

मरता क्या न करता

तेज़ बारिश में मछली पकड़ना खतरनाक होने के बावजूद पॉल मछली पकड़ने के लिए घर से निकल पड़ा क्योंकि वह अपने परिवार को भूख से तड़पता नहीं देख सकता था।

वह नदी पर गया और एक किनारे से दूसरे किनारे तक जाल फैला दिया। पानी का बहाव बहुत तेज था। उसने जाल की रस्सी का एक सिरा पत्थर से बांध दिया ताकि जाल हिला-हिला कर वह मछली पकड़ सके।

जाल में फंसी मछली जब डर से आतंकित होकर बार-बार उछलकर जाल से से छुटकारा पाने की कोशिश कर रही थी तो उसके कारण किनारे पर जाल में लगी मिट्टी पानी में मिल रही थी।

तभी पास से गुज़रता हुआ एक व्यक्ति बोला, “तुम इस नदी को क्यों गंदा कर रहे हो? ऐसा करने से हमारे पीने का पानी भी गंदा हो रहा है।” पॉल ने कहा, “यदि मैं ऐसा नहीं करूँगा तो मेरा परिवार भूख से तड़प-तड़प कर मृत्यु का ग्रास बन जाएगा।”  

शिक्षा: अपने जीवन का मार्ग खुद बनाना पड़ता है।

झूठ की सजा

एक बार एक आदमी अपने पालतू बंदर के साथ समुद्री जहाज़ में यात्रा कर रहा था। अचानक तूफान आ जाने के कारण जहाज़ पलटने लगा। सभी लोगों के साथ-साथ वह बंदर भी पानी में कूद गया।

एक डॉलफिन ने उस बंदर को मनुष्य समझकर बचा लिया। डॉलफिन उसे अपनी पीठ पर बैठाकर किनारे की ओर लेकर जा रही थी। ग्रीस देश की सीमा पार करते ही डॉलफिन ने बंदर से पूछा, “क्या तुम एथेंस के रहने वाले हो?”

बंदर ने झूठ बोल दिया, “हाँ।” डॉलफिन ने पूछा, “क्या तुम्हें पिराकस पता है?” बंदर बोला, “हाँ, वह मेरा अच्छा मित्र है।” बंदर ने सोचा कि वह एक व्यक्ति का नाम है जबकि पिराकस एक बंदरगाह है।

डॉलफिन यह सुन समझ गई कि बंदर झूठ बाल रहा है। उसने पानी में डूबकी लगाई और बंदर पानी में डूबकर मर गया।  

शिक्षाः झूठ से केवल क्षणिक लाभ हो सकता है; उससे प्राय: भारी नुकसान होता है।

मूर्ख लोमड़ी और ऊंट

एक बार की बात है, एक नदी के पास जंगल में एक ऊंट और एक लोमड़ी रहते थे। वह दोनों अच्छे दोस्त थे, एक दिन लोमड़ी को पता चला नदी के उस पार पके हुए खरबूजे का खेती है।

लोमड़ी खरबूजे बहुत पसंद करते करते थे, लेकिन वह नदी पार नहीं कर सकता। वह ऊंट के पास गया और उसे खरबूजे के बारे में बताया, ऊंट भी खरबूजे खाना चाहती थी।

उसने लोमड़ी को अपनी पीठ पर लादकर नदी पार किया, दोनों खेत में पहुंची, फिर उन्होंने खरबूजे खाने लगी। लोमड़ी की पेट भरते ही लोमड़ी चिल्लाने लगी।

खेत की मालिक दौड़ता हुआ आया और ऊंट को पीटा, जब मालिक चला गया तो ऊंट ने लोमड़ी से पूछा तुम क्यों चिल्लाई? लोमड़ी जवाब दिया, भारी भजन के बाद चिल्लाना मेरी आदत है।

फिर वह दोनों नदी पार करने के लिए आया, ऊंट की पीठ पर लोमड़ी चढ़ गया। जब वह दोनों नदी के बीच में थे, तब ऊंट मर्जी से पानी में डूबने लगा।

लोमड़ी ने पूछा, तुम पानी में क्यों डूब रहे हो? ऊंट ने जवाब दिया भारी भजन के बाद पानी में डूबना मेरी आदत है। फिर लोमड़ी को अपनी गलती का एहसास हुआ, फिर वह ऊंट से माफी मांगा।

शिक्षा: हमें सब के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि हम जैसा करेंगे लोग भी हमारे साथ ऐसा ही करेंगे।

बंदर और मगरमच्छ

एक बार की बात है, एक बड़ा सा पेड़ था जिस पर कई बंदर रहते थे, उस पेड़ के नीचे तालाब में दो मगरमच्छ रहता था। एक दिन उनमें से एक मगरमच्छ बीमार पड़ गई।

डॉक्टर ने कहा कि केवल एक बंदर का दिल मगरमच्छ का इलाज कर सकता है। मगरमच्छ ने प्रत्येक बंदर को तलाब में उसके साथ जाने के लिए पेशकश की।

लेकिन उनमें से कोई भी बंदर मगरमच्छ के साथ पानी में जाने के लिए राजी नहीं था। अंत में एक बूढ़ा बंदर राजी हुआ बंदर ने पानी का आनंद लिया।

जब वह दोनों गहरे पानी में थे मगरमच्छ ने उन्हें अपना उद्देश्य बताया। उसने कहा की उसे एक बंदर का दिल चाहिए। बंदर ने कहा, कृपया मुझे वापस पेड़ में ले चलो।

क्योंकि मैंने अपना दिल पेड़ के ऊपर छोड़ दिया है, मैं इसे आपको वहां दे सकता हूं। मगरमच्छ बंदर को उस पेड़ के पास लेकर गया।

फिर बंदर दिल लेने के लिए पेड़ पर चढ़ गया। और मगरमच्छ की नजरों से गायब हो गया। मगरमच्छ वहां पेड़ की नीचे बंदर का इंतजार करता रहा।

शिक्षा: मुश्किल वक्त ने घबराना नहीं चाहिए, हमें बंदर की तरह समझदारी से काम लेना चाहिए।

शेर और लोमड़ी

एक बार एक जंगल में एक लोमड़ी नाइ आयी थी। प्रारंभ में लोमड़ी ने शेर के बारेमें बहुत कुछ सुना था। जंगल के अन्य जानवर शेर के बारेमें लोमड़ी को बहुत कुछ बताते थे। सभी जानवर लोमड़ी के मन में शेर के बारेमें डर पैदा करते थे।

घोडा ने लोमड़ी को बताया, “शेर बहुत शक्तिशाली और बड़ा जानवर होता है।” जेबरा ने लोमड़ी से कहा, “शेर हम जैसे जानवरों को मारकर खा जाता हैं।” जीराफ ने भी लोमड़ी से कहा, शेर का पंजा बहुत ताकतवार होता है और हम उसे देखकर सूखे पत्तों की तरह काँपने लग जाते हैं।”

सभी जानवरों की बातें सुनकर लोमड़ी डर गई और शेर के प्रति उसके मन में बहुत डर बैठ गया। एक दिन लोमड़ी के रास्ते में शेर आ गया। शेर को देखकर वह बहुत डर गई और काँपने लगी।

शेर उसके पास आया और उसे सूंघा और हल्का सा गरजा, फिर वह चुपचाप चला गया। लोमड़ी ने तब कहीं जाकर राहत की साँस ली। दूसरे दिन लोमड़ी नदी किनारे बैठी थी तब शेर पानी पिने नदी के दूसरे किनारे आया। उसे देखते ही लोमड़ी फिर से डर गई लेकिन इस बार उसका डर पहले से कम था।

तीसरे दिन लोमड़ी अपने दोस्तों के साथ खेलते समय शेर से टकरा गई । उसने थोड़ी हिम्मत जुटाई और कहा, “मुझे माफ कर दो,श्रीमान।” शेर मुस्कुराया और कहा, “कोई बात नहीं।” जल्द ही लोमड़ी का डर गायब हो गया और अब वह बिना किसी डर के उससे बात करने लगी।

शिक्षा: किसी भी चीज को स्वयं परखे बिना स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

तोता और चने की दाल

एक बार, एक तोता गांव में घूम रहा था। घूमते वक्त उसकी नजर अचानक एक चने पर गयी जो एक जगह खुटे पर था। चने को देखकर तोता बहुत खुश हुआ और उसे तुरन्त फोड़ने लगा। तोता ने चने को फोड़कर उसके अंदर एक दाल को खा लिए लेकिन एक दाल वह खुटे में घुस गयी।

अपनी फसी हुई दाल को निकालने के लिए तोता बढ़ई के पास गया और उससे कहने लगा, “आप कहते चीरकर अंदर फसी दाल को निकाल दो।” फिर बढ़ई बोला, “क्या मै तुम्हारा नोकर हूँ, की दाल निकाल दू।”

नाराज तोता राजा के पास गया और कहने लगा, “आप बढ़ई को मारे और उसे चना निकालने के लिए कहे।” तोता की इस बात पर राजा बोला, “क्या मै तुम्हारा नोकर हूँ, की बढ़ई को मारु।”

राजा की बात सुनकर नाराज तोता रानी के पास गया और कहने लगा, “रानी तुम राजा को छोड़ दो तो राजा बढ़ई से दाल निकालने के लिए कहे।” तोता की बात रानी ने कहा, “तू भाग यहाँ से।” और रानी ने तोता को भगा दिया।

फिर तोता साप के पास गया और कहने लगा, “तुम रानी को डसो।” इस बात साप ने भी तोता को भगा दिया। फिर तोता लाठी के पास पहुंचा और कहने लगा, “तुम साँप को मारो, फिर वह रानी को डसे, रानी राजा को छोड़ दे तो राजा बढ़ई को मारे तो बढई दाल निकाले।”

तोता की बात को सुनकर लाठी ने भी उसे भगा दिया। तब तोता आग के पास गया और उससे कहा, “लाठी जलाओ।” आग ने उसे भी भगा दिया। तब तोता पानी के पास गया और बोला, “तुम आग बुझा दो।” पानी ने तोते को भी दूर कर दिया। तब तोता हाथी के पास गया और बोला, “पानी सोख लो।” हाथी ने कहा, मुझसे नहीं होगा और उसे भगा दिया।

निराश तोता आखिर में एक छोटे चींटी के पास गया और उसे कहने लगा की चींटी हाती को काटे। तोता की बात सुनकर चींटी हाती को काटने चली तब हाती बोला, “बहन तुम मुझे मत काटो मै पानी को सोखता हूँ।”

तब पानी ने कहा, “भैया हाती, मुझे मत सोखो, मैं आग बुझाने जाता हूं।” तब आग बोली “पानी तुम मुझे मत बुझाओ, मैं लाठी जलाने जाती हूँ।” फिर लाठी ने कहाँ, “मुझे मत जलाओ मैं साप को मरती हूँ।”

सांप ने कहा, “तुम मुझे मत मारो, मैं रानी को डसने जाता हूं।” रानी ने कहा, “आप मुझे न डसें, मैं राजा को छोड़ दूंगी।” राजा ने कहा, “रानी, मुझे मत छोड़ो, मैं बढ़ई को बताने जा रहा हूं।”

राजा ने बढ़ई से कहा, “जाओ खूंटे को चीर कर दाल निकाल दो।” बढ़ई ने मोटा कट बनाया और दाल निकाल दी। तोता दाल अपने घर चला गया।

शिक्षा: कभी-कभी एक छोटी सी चीज़ भी आपको सफल बनाने के लिए काफी होती है। और कभी भी जिंदगी में हार नहीं माननी चाहिए।

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