Short Stories in Hindi for Class 8 - आज की इस पोस्ट में हम आपके साथ Short Stories in Hindi for Class 8 शेयर करने जा रहे है। इन stories आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।आप इन Short Stories in Hindi for Class 8 को पूरा पढ़े। आपको यह Stories बहुत पसंद आएगी।

Stories in Hindi for Class 8

Stories in Hindi for Class 8 List

मन की शांति

कर्ण की उदारता

बंदर की आपत्ति

मूर्ख बंदर

आलसी गधा

शेर का पीछा करता गधा

अच्छे काम के इनाम

कठिनाई का सामना

चालाक दूधवाला

वादे

अभिमानी घोड़ा

जीवन के संघर्ष

भगवान का काम

अहंकारी शेरनी

सभी माध्यमों का उपयोग

लालची शेर

धूर्त मेंढक

दो मित्र और भालू

रेत और पत्थर

लोमड़ी की चालाकी

शेर का इलाज

शेर की दावत में बैल

लोमड़ी की मुक्ति

चींटी और टिड्डा

कुछ अलग करो

मन की शांति

एक बार शाम सड़क पर किसी चीज की तलाश कर रहा था, उनका एक पड़ोसी जब शाम को कुछ ढूंढते हुए देखा वह उससे पूछा, क्या हुआ? शाम जवाब दिया “मैंने अपनी चाबी खो दी”

वह उनके साथ चाबी खोजने लगी, जल्द ही दो और पड़ोसी उनके साथ हो गए, लेकिन किसी को चाबी नहीं मिली। आखिरकार एक पड़ोसी ने पूछा, “तुमने इसे कहां खोया?”

शाम ने उत्तर दिया, “मैं यहां अपनी चाबी नहीं कोई, मैंने इसे अपने घर में खो दिया।” सभी लोग निराश थे, उन्होंने शाम से पूछा, “यदि आपने इसे वहां खो दिया, तो इसे यहां क्यों ढूंढ रहे हैं?”

शाम ने जवाब दिया, इसीलिए क्योंकि मेरा घर मैं रोशनी थोड़ा कम है, लेकिन यहां सड़क पर बहुत तेज है। उसकी बात सुनकर पड़ोसी चाबी ढूंढना बंद किया, और हंसने लगा।

तभी शाम ने मुस्कुराते हुए कहा, “दोस्तों यह स्पष्ट है कि आप सभी बुद्धिमान है, फिर आप अपने मन की शांति क्यों खो देते हैं, सिर्फ एक असफल रिश्ते या नौकरी के कारण?”

शाम ने पड़ोसियों की छाती की ओर इशारा करते हुए कहा, “तुम लोग उदास क्यों हो? आप अपना आनंद वहां या यहां खो देते हैं।

आप अपने अंदर देखने से बचते हैं, क्योंकि प्रकाश हल्का हो जाता है। इसीलिए अधिक सुविधाजनक है!” पड़ोसियों ने समझा कि शाम उन्हें क्या सिखाना चाहता था।

शिक्षा: जो हमारे पास नहीं है उसके लिए दुखी मत हो, जो कुछ है हमारे पास उससे खुश रहना सीखो।

कर्ण की उदारता

एक बार जब श्रीकृष्ण और अर्जुन टहलने के लिए निकले थे, तो अर्जुन ने कहा, “मुझे समझ नहीं आया की कर्ण को सबसे उदार व्यक्ति क्यों माना जाता है,” कृष्ण मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

“मैं अभी आप को नहीं बताएंगे आप खुद देख सकते हैं,” तभी श्री कृष्ण ने दो नजदीकी पहाड़ियों को सोने में बदल दिया। फिर अर्जुन को निर्देश दिया, गांव के लोगों में यह सोना वितरित करें।

जैसा निर्देश दिया गया था, अर्जुन तुरंत गांव वालों को बुलाया, जब गांव वाले आए तो उन्हें एक लाइन में खड़ा होने के लिए कहा। और फिर एक-एक करके उन्हें सोना देना शुरू किया।

गांव वालों ने उसकी प्रशंसा करने लगे, सभी की प्रशंसा सुनकर अर्जुन को गर्व महसूस हुआ। लगातार दो दिन और रातों तक अर्जुन सोना गांव वाले के बीच वितरण करता रहा।

अर्जुन बहुत थका हुआ था, और पहाड़ी से सोने का एक टुकड़ा भी कम नहीं हुआ। अर्जुन इतना थक गया वह श्री कृष्णा के पास गया और कहा, “मैं थक गया हूं अब और नहीं कर सकता।”

फिर श्री कृष्ण ने कर्ण को बुलाया, और उसे सोना वितरण करने के लिए कहा। कर्ण सभी गांव वाले को बुलाया और घोषणा की, “यह सोना आपके लिए है, आप अपनी आवश्यकता के अनुसार ले सकते हैं।”

यह करने के बाद कर्ण चला गया, अर्जुन हैरान था. कृष्ण ने अर्जुन से कहा, जब आपको सोना वितरण करने के लिए कहा गया, तो आप प्रत्येक ग्रामीण की सोना की आवश्यकता के बारे में निर्णय ले रहे थे।

जहां कर्ण ने सारा सोना छोड़ दिया और चला गया, उसने लोगों की प्रशंसा सुनने के लिए भी इंतजार नहीं किया। उसे इस बात में कोई दिलचस्पी नहीं थी, कि लोग उसके बारे में क्या कहेगी।

यह एक ऐसे व्यक्ति का संकेत है जो प्रबुद्ध हो गया है। अर्जुन के सवाल का जवाब उन्होंने सुंदर तरीके से दिया।

शिक्षा: अगर हम कुछ मदद या दान कर रहे हैं, तो हमें किसी भी चीज की उम्मीद के बिना इसे करना चाहिए।

बंदर की आपत्ति

एक दिन जंगल में एक नदी के पास काफी सारे जानवरों का हुजूम राजा के चुनाव के लिए इकट्ठा हुआ था। छोटे-बड़े सभी जानवर बहुत उत्साहित थे। तभी उनमें से एक हाथी बोला,

“मेरा आकार बहुत बड़ा है तथा मैं बहुत बलशाली हूँ। इसलिए राजा के पद के लिए मैं ही उपयुक्त हूँ।” ऊँट ने उसकी बात काटते हुए कहा, “नहीं, राजा बनने के लिए तो मैं ही उचित हूँ।

मैं बलिष्ठ और सुडौल हूँ और काफी दिनों तक बिना खाए-पिए भी रह सकता हूँ।” तभी एक बंदर उनकी बात काटते हुए बोला, “नहीं,

तुम दोनों इस पद के लिए अनुचित हो। ऊँट को कभी गुस्सा नहीं आता तो फिर वह दोषी को दंड कैसे देगा? हाथी भाग नहीं सकता तो फिर वह दुश्मनों से हमें कैसे बचाएगा?”

शिक्षाः कभी-कभी छोटी चीजें भी हमारी तरक्की के रास्ते में रुकावट बन जाती हैं।

मूर्ख बंदर

कुछ मछुआरे नदी किनारे रोजमर्रा के अपने कार्य कर रहे थे। वे नदी में अपने जाल डाल रहे थे और मछलियों के फँसने का इंतजार कर रहे थे।

कुछ देर बाद उन्होंने तय किया कि थोड़े समय के लिए कार्य से अवकाश लिया जाए। किनारे पर अपने जाल छोड़कर दोपहर का भोजन करने के लिए वे किनारे से थोड़ी दूर चले गए।

वहाँ एक पेड़ था जिसकी एक शाखा पर बैठा बंदर मछुआरों की इन सारी गतिविधियों को चकित भाव से देख रहा था। वह उन गतिविधियों की नकल करने के लिए बहुत उत्सुक था।

मछुआरों के हटने पर बंदर को मौका मिल गया। वह पेड़ से नीचे उतरा और उसने मछुआरों द्वारा किए गए कार्यों को करने की कोशिश की। लेकिन उसने जैसे ही जाल को छुआ वैसे ही वह उसमें उलझ गया।

उसका जीवन खतरे में पड़ गया। वह डूबने लगा। जान बचाने की कोशिश करते हुए वह चिल्लाने लगा, “मैं जिसका भागी था वही मुझे मिला। पहले से सीखे बगैर मुझे मछली पकड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए थी।”

शिक्षाः अल्प ज्ञान खतरनाक होता है।

आलसी गधा

एक व्यापारी के पास एक गधा था। वह गधे पर बाजार से माल ढोकर लाता था। एक दिन व्यापारी ने नमक के बड़े-बड़े बोरे गधे की पीठ पर लादे। इतने भारी बोझ से गधे का दम निकला जा रहा था।

अचानक रास्ते में नदी के किनारे उसका पैर फिसला और वह नदी में जा गिरा। किसी तरह संभलकर वह उठा तो हैरान था, क्योंकि उसकी पीठ पर लदा भार अचानक हल्का हो गया था। दरअसल, नमक पानी में घुल गया था।

अगले दिन फिर व्यापारी ने गधे की पीठ पर नमक के भारी बोरे लादे। गधा जब नदी पर पहुँचा तो जान-बूझकर फिसलकर पानी में जा गिरा। उसकी पीठ का भार फिर कम हो गया।

गधे के मालिक ने देख लिया था कि आज गधा जान बूझकर फिसला है, इसलिए उसने गधे को सबक सिखाने की सोची। अगले दिन उसने गधे की पीठ पर रूई के बोरे लादे।

नदी पर आकर गधा जैसे ही फिसलकर नदी में गया तो रूई ने पानी सोख लिया और भारी हो गई। गधे को अब अपने ऊपर पछतावा हो रहा था।

शिक्षा: हमें परिश्रम से जी नहीं चुराना चाहिए।

शेर का पीछा करता गधा

एक सुबह एक गधा और एक मुर्गा मिलकर भोजन कर रहे थे। अचानक एक शेर आया और उसने गधे की तरफ आक्रामक होकर जैसे ही पंजा बढ़ाया वैसे ही मुर्गे ने जोर-जोर से बांग देना आरंभ कर दिया।

शेर इस आवाज़ से डर गया और भाग खड़ा हुआ। गधे ने सोचा कि क्यों न शेर को सबक सिखाया जाए और उसने शेर का पीछा करना शुरू कर दिया।

शेर मुर्गे की आवाज से डर कर भाग रहा था लेकिन थोड़ी दूर के बाद आवाज़ सुनाई देना बंद हो गई। गधा उस शेर का पीछा करते-करते यह भूल चुका था कि भागते-भागते वह मुर्गे की आवाज़ की सीमा से बाहर आ चुका था।

जैसे ही आवाज़ बंद हुई वैसे ही शेर पलटा और उसने गधे पर आक्रमण कर दिया। इस प्रकार अपनी बेवकूफी के कारण गधा मारा गया।

शिक्षाः अपनी सामर्थ्य को जाने बगैर कोई भी काम करना क्षति को निमंत्रण देने के समान है।

अच्छे काम के इनाम

एक बार कृष्ण और अर्जुन टहलने के लिए निकले, रास्ते में उन्होंने एक गरीब पुजारी को भीख मांगते देखा। अर्जुन को उस पर दया आया, और उसने उसे सोने के सिक्कों से भरा बैग दिया।

पुजारी ने अर्जुन को धन्यवाद दिया, और अपने घर की तरफ चलना शुरू किया। रास्ते में पुजारी को एक चोर ने लूट लिया फिर पुजारी खाली हाथ घर पहुंचा।

पुजारी निर्वाचित हो गया और फिर से भीख मांगने चला गया, अगले दिन जब अर्जुन पुजारी को फिर से भीख मांगते देखा तो उन्होंने उससे कारण पूछा, पुजारी ने उन्हें पूरी घटना के बारे में बताया।

और अर्जुन इस बार उसे हीरे की अंगूठी दी, पुजारी खुशी से अपने घर गया। घर पहुंचने पर वह अंगूठी एक खाली बर्तन में रख दिया और सोने चला गया।

बाद में उसकी पत्नी नदी से पानी लाने के लिए उसके साथ बर्तन ले गए। जैसे ही उसने पानी भरने के लिए नदी में बर्तन रखे, हीरे की अंगूठी पानी के प्रभाव के साथ चली गई।

पुजारी की किस्मत बहुत खराब थी, उसने फिर से भीख मांगना शुरू किया। फिर से उस भिखारी को भीख मांगते हुए देखकर अर्जुन आश्चर्यचकित रह गया, अर्जुन उससे पूछताछ करने लगा।

तभी श्रीकृष्ण मुस्कुराया, और उस पुजारी को एक तांबे का सिक्का दिया। अर्जुन ने कहां, “भगवान मैंने उसे सोना और हीरे दिए, इसने उसकी मदद नहीं की

सिर्फ एक तांबे का सिक्का उस गरीब पुजारी को क्या मदद करेगा?” श्री कृष्ण मुस्कुराया और अर्जुन से कहा, प्रतीक्षा करें और देखें। फिर पुजारी घर जाते वक्त एक मछुआरे को देखा।

पुजारी मछुआरे को सिक्का देकर एक मछली खरीदी, वह उस मछली को ले गया और एक बर्तन में रख दिया, जब मछली छोटे से बर्तन में संघर्ष कर रही थी।

तो उसने बर्तन में एक हीरे देखा, वह खुशी के साथ चिल्लाया “मुझे मिल गया, मुझे मिल गया” उसी समय जिस चोर ने पुजारी का बैग लूट लिया था, वह वहां से गुजर रहा था।

उसने सोचा पुजारी ने उसे पहचान लिया और उसे सजा मिल सकती है, वह घबरा गया और पुजारी से माफी मांगी। और सोने के सिक्कों से भरा बैग पुजारी को लौटा दिया।

पुजारी विश्वास नहीं कर सकता अभी क्या हुआ, अर्जुन यह सब देखा और कहां, “अब मैं आपका खेल समझा हूं!”

शिक्षा: जब आपके पास दूसरों की मदद करने के लिए पर्याप्त है, तो उस अवसर को जाने मत दो।

कठिनाई का सामना

एक बार की बात है, एक व्यक्ति रहता था जिसे ईश्वर पर भरोसा था। एक दिन वह गहरी नींद में सो रहा था, अचानक एक विशाल ध्वनि ने उसे जगा दिया।

उसने देखा कि उसका कमरा रोशनी से भरा है, तभी भगवान उसके सामने प्रकट हुए। उसे अपने घर की बाहर एक बड़ी चट्टान दिखाई दी, भगवान उससे कहा कि वह उस चट्टान को धकेल दे।

अगली सुबह जब नींद से उठा, तो उसे याद आया उसने कल रात क्या देखा था। वह बाहर निकल गया, और अपने पूरी शक्ति के साथ इसे धक्का दिया, लेकिन इसे स्थानांतरित करने में सक्षम नहीं था।

कई सालों से आदमी ने उस चट्टान को हटाने की कोशिश क्या, लेकिन चट्टान कहीं नहीं गया था। आदमी निराश हो गया था, लेकिन उसने भगवान को अपने परेशानी के बारे में बताने का फैसला किया।

उन्होंने प्रार्थना की, “मैंने आपकी सेवा में लंबी और कड़ी मेहनत की है, जो आपने मुझे करने के लिए कहा है। लेकिन मैंने उस चट्टान को नहीं हिला पाया, मैं क्यों असफल हो रहा हूं?”

तभी भगवान प्रकट हुए और कहां, “मेरे बच्चे मैंने तुम्हें इस चट्टान को धकेलने के लिए कहा था, और तुमने इसे स्वीकार कर लिया, लेकिन मैंने इसे स्थानांतरित करने के लिए कभी नहीं कहां।

आपका काम सिर्फ धक्का देना था, और इन सभी के बाद आपको लगता है कि असफल हो गए हैं, क्या वास्तव में ऐसा है? आप खुद को देखो, आपकी बाहें और मसल कितनी मजबूत हो गया है।

आपने चट्टान को नहीं हिलाया, लेकिन आपका प्रयास आज्ञाकारी होना और धक्का देना और अपने विश्वास पर दबाव डालना और उसका अभ्यास करना, यह तुमने किया है।”

शिक्षा: जीवन में कई बार जब हम कठिनाई का सामना करते हैं, तो हमें सिर्फ भगवान पर भरोसा करना चाहिए।

चालाक दूधवाला

एक नगर था जिसका नाम था कृष्ण नगर। उसमें एक दूधवाला रहता था। उसकी सारी पीढ़ी दूध बेचने का काम करती थी और वह भी दूध बेचता था।

उसके पास बहुत सारी भैसे थी। वह उस गांव का सबसे बड़ा दूध वाला था। वह काफी धनवान भी था। और साथ ही वह बहुत बुद्धिमान भी था।

वह हरदिन बहुत सारा दूध लोगों को बेचता था। ना सिर्फ लोगों को बेचता था। बल्कि वह उस गांव के राजा को भी अपनी भैसों का दूध बेचता था।

जब उसके पिता का अवसान हुआ तब उसके पास सिर्फ पांच भैसे थी। पर अब उसके पास उसकी मेहनत और बुद्धिमानी के कारण 50 भैसे है।

वह हरसाल एक या दो भैसे रामलाल नाम के एक व्यापारी से खरीदता था। इस साल भी वह रामलाल के पास गया।

दूधवाले ने रामलाल की भैसो में से एक अच्छी सी भैंस को पसंद किया। उसने उसका मूल्य दिया और भैंस को लेकर चला गया।

बीच में एक जंगल का रास्ता था। वह उस जंगल में अपनी भैस को लेकर जा रहा था।

तब वहां अचानक से एक आदमी आया। जिसके हाथ में एक बहुत बड़ा सा डंडा था। उसने उसे डंडे को दिखाकर धमकी दी कि, “मुझे तुम्हारी भैंस देकर चले जाओ।”

दूधवाले ने कहा कि, “मैंने इसे धन देकर खरीदा है मैं तुम्हें यह बेस भैंस क्यों दूं?”

तब उस दूधवाले को मारने की धमकी दी। दूधवाला यह देखकर कुछ उपाय सोचने लगा। उसे एक युक्ति सूजी।

उससे कहा कि, “क्यों नही? मैं आपको यह भैंस दे सकता हूं।”

बहुत ही अच्छे से उसने उसे अपनी भैंस दे दी।

यह देखकर वह आदमी खुश हो गया।

दूधवाले ने उस आदमी से कहा कि, “मैं तो भैंस लेने गया था। अगर मैं गांव में खाली हाथ जाऊंगा तो मेरी बहुत बदनामी होगी। इसीलिए मुझे उसके बदले कुछ दे सकते हो?।”

उस आदमी ने कहा कि, “मैं तुम्हें क्या दे सकता हूँ?”

तब दूधवाले ने कहा कि, “तुम मुझे तुम्हारा यह डंडा दे दो।

तब वह आदमी ने सोचा कि, “भैस तो मेरे पास आ गई है अब इस डंडे का क्या लाभ? ऐसा सोचकर उसने डंडा दे दिया।”

दूधवाले ने डंडा लेते ही उसे धमकी दी कि, “उसकी भैंस वापस कर दे वरना उसे डंडे से मार देगा।”

उसने उसकी भैस वापस दे दी। भैस वापस देने के बाद उसने उसका डंडा वापस मांगा।

तब दूधवाले ने कहा कि, “मैं तुम्हें बेवकूफ दिखता हूँ। यहाँ जिसके पास डंडा है उसी की भैंस होती है।” ऐसा सुनकर वह आदमी भाग गया।”

शिक्षा -हमें हमेशा कोई भी ऐसी समस्या में शांति और बुद्धिमानी से काम करना चाहिए।

हमें कोई चीज के वजह से अगर कोई चीज मिली हो तो उसका महत्व उस मिलने वाली चीज के मुकाबले ज्यादा हो जाता है ये बात को ध्यान में रखना चाहिए।

वादे

एक गांव था। जिसमें एक वैध रहता था। जो बहुत अच्छा इंसान था। वह गांव में हर किसी को मदद करता था। गांव में हर कोई भी उनका सम्मान करता था।

एक दिन की बात है। रात का समय था। बहुत ही बारिश हो रही थी। तब वैध के घर के दरवाजे पर एक इंसान आया।

उन्होंने वैध को बुलाया। वैध ने दरवाजा खोला तो देखा कि एक इंसान बहुत भीगी हालत में दरवाजे के बाहर खड़ा था। उसकी तबीयत ठीक नहीं लग रही थीं। वह इंसान इतनी बारिश में ठंड के मारे काप रहा था।

उसने इतनी बारिश में एक दिन उनके घर में रहने देने की प्रार्थना की। वैध ने उस इंसान को अपने घर में रुकने दिया। वैधने उनको रहने दिया और कुछ दवाइयां दी।

जब वह सुबह उठा तो उसकी तबीयत ठीक हो गई थी। उसने अपना परिचय दिया कि वह एक सुनार हे। वह यहां से दो गांव दूर विलास नगर में रहता है।

वहां उसकी एक सुनार की दुकान है। जब भी जरूरत हो तब मैं आपकी मदद करूंगा ऐसा उसने वादा किया। और वह ऐसा कह कर चला गया।

एक दिन वैध जंगल में औषधि बनाने के लिए वनस्पति लेने गया। तब उसने देखा कि एक पेड़ गिरा हुआ है। जिसमें एक शेर और एक सांप फस गए हैं। बाघ और सांप ने उसे मदद मांगी।

वैध ने सोचा की यह मदद करने के बाद मार डालेगे तो।

बाघ कहा कि, “मैं आपको कोई भी नुकसान नहीं पहुँचाउगा। कृपया मेरी मदद कीजिए।”

सांप ने भी यही कहा।

वैधने बाघ की बात मान ली और बाघ को निकाला।

बाघ ने उसे वादा किया की, “जब भी तुम मुझे बुलाओगे तब मैं तुम्हारी मदद करने के लिए आ जाऊंगा।”

फिर उसने साँप को निकाला। साँप ने उसे भी वादा किया की, “तुम को जब मेरी जरूर पड़ेगी में तुम्हारी मदद करुँगा ।”

बहुत दिनों के बाद वैध फिरसे जंगल में औषधि लेने के लिए गया।

उसके सामने अचानक से तेंदुआ आ गया।

उसको बाघ का वादा याद आया। उसने बाघ को बुलाया और बाघ से मदद मांगी। बाघ ने उसकी मदद की उसने तेंदुए को डरा कर भगा दिया।

बाघ मदद करके खुश हुआ बाघ ने उसे गुफा में चलकर कुछ खाने के लिए कहा। वह उसके साथ गुफा में गया।

उसने वैध को सोना दिया। उसने कहां की यह सोना मुझे एक जंगल में मिला था। जिसे मैं इस गुफा में लाया हूँ। उससे उसे बाघ ने कुछ व्यापार करने को कहा।

तब वह सोने को लेकर दो गांव दूर सुनार के पास गया। वैधने उसको सारी बात बताई और बाघ के ध्वारा दिए गए सोने को दिया।

उसने कहा कि, “मुझे इससे कितना धन मिल सकता है।”

सुनार उस सोने को देखकर पता चल गया कि यह सोना तो राजकुमार का है।

राजकुमार जंगल में मर गए थे। और यह सोना राजकुमार का ही है।

राजा ने ऐलान भी किया है की, “जो कोई राजा के राजकुमार या उसका सोना लेकर आएगा उसको पुरस्कृत किया जाएगा।”

वह सोने को परख ना पड़ेगा इसलिए उसे थोड़ा समय रुक ने को कहकर वह घरके पीछे के दरवाजे से भाग गया।

वह राजा के पास गया यह राजकुमार का सोना है और यह वैध के पास मिला है। वैध ने ही राजकुमार को मारा होगा ऐसा मेरा शक है इसलिए उस वैध को सजा देने की बात उसने राजा से कही।

उस वैध को सिपाहीओने राजा के कहने पर पकड़ के जेल में डाल दिया। वैध ने कहा कि उसने कुछ नहीं किया यह सोना तो मुझे बाघने दिया है। पर किसी ने उसकी एक न सुनी।

वह बहुत उदास हो गया। तब उसको सांप के वादे की याद आई। उसने सांप को बुलाया।

सांप को उसने सब बात बताई।

तब सांप ने कहा कि, “वह रानी को काटेगा और तब तुम रानी का इलाज करने की बात राजा से करना। तुम्हें मै मेरे जहर का तोड़ दूंगा और जिससे तुम रानी को बचा लोगे। ओर इसके बदले तुम राजा से जेल में से छूटने की बात करना।”

सांप और वैध ने ठीक ऐसा ही किया सांप ने रानी को काटा और वैध ने राजा को कहा कि, “वह रानी को ठीक कर सकता है।”

वैध ने रानी को ठीक कर दिया।

राजा यह देख कर बहुत खुश हो गया। वैध ने इसके बदले जेल में से छोड़ने को कहा और राजा ने उसे छोड़ दिया।

उसके उपरांत भी राजा ने उसे कुछ ओर मांगने को कहा।

तब वैध ने कहा कि, “महाराज! यह सोना मुझे एक बाघ ने दिया था। जो एक जंगल में उसे मिला था। पर उस दुष्ट सुनार ने पुरस्कार के लिए आपसे झूठ बोला और मुझे फसा दिया तो कृपया उसे उसकी सजा दे।”

यह सुनकर राजा को सब समझ आ गया और सुनार को पकड़ कर उसे जेल में डाल दिया।

शिक्षाः इस कहानी के वैध की तरह हमें हर किसी पर और हर किसी के वादे पर भरोसा नहीं करना चाहिए। क्योकि कोई उस दुष्ट सुनार की तरह आप के भरोसे का गलत फायदा उठा सकता है।

अभिमानी घोड़ा

एक जंगल था। जहां बहुत सारे जानवर खुशी से मिलजुल कर रहते थे। उस जंगल में तूफान नामका एक घोड़ा रहता था।

उसके नाम के अनुसार वह तूफान की तरह दौड़ता था। वह उस जंगल का सबसे तेज घोड़ा था। उससे तेज घोडा पूरे जंगल में न था।

परंतु उसे इस बात का बहुत अभिमान था। वह हमेशा अपने तेज दौड़ने के बारे में बताता रहता। वह जब भी कोई जानवर से मिलता तो वह उसे अपने साथ दौड़ने को कहता।

वह है भली भांति जानता था कि कोई भी जानवर उससे तेज नहीं दौड़ सकता है। फिर भी वह उसे अपने साथ दौड़ने को कहता, अगर जानवर मना करता तो वह उसका खूब मजाक उड़ाता।

उसका एक बहुत अच्छा दोस्त था। वह एक कुत्ता था। उसका नाम किमु था। वह बहुत चालाक और समझदार था। वह अपने मित्र तूफान के अभिमानी स्वभाव के बारे में जानता था ।

वह उसे हमेशा समझाता रहता कि, “तुम किसी चीज में सबसे अच्छे हो, यह बात सही है। पर उस चीज का अभिमान करना और दूसरों को अपने से नीचा दिखाना, यह बात ठीक नहीं है। यह बहुत बुरी बात है। इसीलिए यह अहंकारी स्वभाव को त्यागो और दूसरों को अपने से नीचा मत समझो।”

वह हमेशा इतना सब कहता फिर भी अभिमानी घोड़ा कुछ समझने को तैयार नहीं था।

उसे कहता कि,”मैं दौड़ने में सबसे तेज हूं। यह बात सच है। तो सच को बताने में क्या बुरा है। तुम दौड़ने में तेज नहीं हो यह तुम्हारी गलती है। इसमें मैं क्या करूं? मैं तो सिर्फ सच ही तो बता रहा हूं। वह अपने मित्र किमु की बात मानने को तैयार ही नहीं था।”

एक दिन की बात है। बिल्ली निया का जन्मदिन था। उसने उसके जन्मदिन पर जंगल के सभी जानवरों को बुलाया।

सभी जानवर यानी हाथी, शेर, घोड़ा, कुत्ता और सभी जानवर। उसमें घोड़ा तूफान और कुत्ता किमु भी हाजर था।

बिल्ली का जन्मदिन पर बहुत सारे पकवान बने थे। सब ने अच्छे से पकवान खाए। फिर बिल्ली निया ने‌ सब से पूछा की जन्मदिन पर क्या नया किया जाए?

तो उसमें से चालक कुत्ते किमुने पिकनिक पर कहीं बाहर जाने का सुझाव दिया।

निया को यह सुझाव पसंद आया। उसने एक जगह पसंद की। सब यह जगह जाने के लिए उत्साह के साथ तैयार हुए।

तभी इस बीच तूफान घोड़ा बोला कि आप सब को तो जगह पहुंचने में 4 या 5 घंटे लगेंगे। पर मैं तो सिर्फ 1 घंटे में ही पहुंच जाऊंगा। और यह कह कर वह जोर-जोर से हंसने लगा। वह यह कर उस जगह सबसे पहले पहुंचने के लिए निकल पड़ा।

सभी प्राणी उस घोड़े का यह व्यवहार देखकर बहुत नाराज हुए। तब वहां उपस्थित चालक किमुने अपने मित्र को सबक सिखाने का तय किया।

उसने एक योजना सोची। उसने सभी प्राणियों को यह योजना बताई। सब यह योजना के लिए तैयार हो गए।

दरअसल जिस जगह जाने का था। उस जगह के रास्ते में एक नदी बीच में से पसार होती थी। जिसे पूरा घूम कर जाना पड़ता था।

उस नदी के पूरे घुमके जाने में काफी समय लगता था। किमुने हाथी की मदद से एक पेड़ को गिराया।

वह पेड़ बहुत बड़ा था। उसे नदी के दोनों हिस्सों पर रखवाया। किमुने इस तरह एक पुल का निर्माण किया।

जिसे वह सारे जानवर पुल की मदद से नदी के उस पार पहुंच गए। और इस तरह वह सब जानवर घोड़े से पहले ही उस जगह पर पहुंच गए।

जब वह घोड़ा उस जगह पर पहुंचा तब वह सारे जानवर बैठकर बातें कर रहे थे। वह घोड़ा यह देखकर कि सब जानवर मुझसे पहले ही पहुंच गए हैं आश्चर्य के कारण कुछ भी बोलने की स्थिति में न था।

तब भी हिम्मत जुटाकर उसने अपने मित्र से पूछा कि, “यह सब कैसे हुआ? तुम लोग मुझसे पहले कैसे पहुंच गए? यह हो ही नहीं सकता!”

तो किमु बोला कि, “तुमने तुम्हारी दौड़ने की खुबी का प्रयोग किया। हमने हमारी खूबियों को प्रयोग किया है‌।”

यह सुनकर घोड़े ने अपना मुंह शरम के मारे नीचे झुकाया।

कुत्ता बोला की, “हमे कभी भी अपनी खूबियों का अहंकार नहीं करना चाहिए। हमें हमेशा यह ध्यान में रखना चाहिए कि तुम्हारे पास जो खूबी है उसी तरह दूसरे के पास भी कोई ना कोई खूबी जरूर होती है।”

उसके बाद तूफान ने कभी भी शक्ति का अहंकार नहीं किया। वह दूसरे जानवरों के साथ खुशी से रहने लगा।

शिक्षाः हमें कभी भी अपनी शक्तिओ का अभिमान नहीं करना चाहिए। क्योकि हर इंसान के पास कोई न कोई शक्ति या कला होती है। तो हमें कभी भी अपनी शक्ति का घमंड कर दुसरो को निचा नहीं दिखाना चाहिए।

जीवन के संघर्ष

एक बार एक गांव में मनोरंजन उसकी बेटी के साथ रहते थे, वह गांव में खेती का काम करता था, कुछ साल पहले एक दुर्घटना में उसकी पत्नी मर गई, तब से मनोरंजन अपनी बेटी का देखभाल करता था।

लेकिन अब कुछ दिनों से उसकी बेटी उदास रहती थी, एक दिन मनोरंजन उसकी बेटी को पूछा, “क्या हुआ बेटी कुछ दिनों से तुम्हें देख रहा हूं, तुम हमेशा उदास क्यों रहती हो?

मुझे बताओ तुम्हें क्या हुआ है,” उसकी बेटी ने कहा, “पिताजी मैं कुछ दिनों से दुखी हूं पता नहीं कैसे सब ठीक होगा, जीवन में बहुत समस्याएं है अगर एक समस्या की समाधान करती हूं तो दूसरी आ जाती है।

मैं तंग आ चुकी हूं समस्याओं से लड़ते लड़ते,” बेटी की बात सुनकर मनोरंजन ने हाशी और उसे रसोई में बुलाया, मनोरंजन ने रसोई से 3 बर्तन लिया और उसमें पानी डालकर आग में बिठाया।

दो मिनट बाद जब पानी गर्म होने लगी मनोरंजन ने एक बर्तन में आलू, दूसरी बर्तन में अंडा और तीसरी बर्तन में कॉफी डाला। 30 मिनट तक उन तीनों बर्तन को आग में रखा।

उसकी बेटी ने कुछ कहे बिना अपेक्षा कर रही थी, पिताजी ने आखिर कर क्या कर रहा है। 30 मिनट होने के बाद, मनोरंजन ने आलू और अंडे को बर्तन से निकालकर एक कटोरा में रखा।

और कॉफी को एक कप में डाला, मनोरंजन उसकी बेटी को कहा “इन तीनों को देखो,” उसकी बेटी आलू को अपने हाथों से दबाया और कहां, “पिताजी आलू तो बहुत नरम हो गई है।”

मनोरंजन ने कहा, “अच्छा ठीक है तुम जाओ अंडे को तोड़ो” बेटी ने अंडे का खोल खींचने के बाद अंडा हाथ में लेकर कहां, यह कठिन हो गया है। और अंत में बेटी को कहा, यह लो तुम यह कॉफी पी लो।

बेटी ने पूछा, “पिताजी इसका क्या मतलब है,” मनोरंजन उत्तर दिया, “हम आलू अंडे और काफी को तीनों बर्तन में पानी डालकर 30 मिनट तक उन्हें आग में रखा, लेकिन तीनों का प्रतिपुष्टि अलग अलग है।

आलू जो पहले कठिन थी, गर्म पानी में डालने के बाद आलू नरम और कमजोर हो गया है। अंडे का अंदर की चीज जो पहले नजूक था वह अब कठिन बन गया है।

और कॉफी को पानी में डालने के बाद कॉफी पानी का रंग और टेस्ट दोनों ही बदल डाला, कुछ नया बन गया। तो तुम इसमें से कौन सी हो बेटी?”

मनोरंजन ने कहा, “जब प्रतिकूल ता आप के दरबार में दस्तक देती है तो आप कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, क्या आप एक आलू एक अंडे या कॉफी जैसा है।”

शिक्षा: जीवन में चीजें हमारे आसपास होते हैं, चीजें हमारे साथ होते हैं, लेकिन एक चीज वास्तव में मायने रखती है, वह है आप इस पर प्रतिक्रिया कैसे करते हैं, और इसे क्या बनाते हैं।

भगवान का काम

एक बार राम एक शहर से दूसरे शहर जा रहा था, लेकिन वह सुबह की ट्रेन से चूक गया। इसलिए वह नाश्ता करने की सोचा, राम स्टेशन से बाहर आकर होटल की तरफ चलने लगा।

रास्ते में उसने दो बच्चे को फुटपाथ पर बैठे देखा, और उनके चेहरे को देखकर वह अनुमान लगा सकता था कि वह बहुत भूखे थे। उसने उनके लिए बुरा महसूस किया और उन्हें ₹10 दिया।

इसके बाद जब वह होटल की ओर जा रहा था, उसने अपने आप सोचा “मैं कितना मूर्ख हूं, मैंने उन्हें सिर्फ ₹10 दिया। जब मैं ₹10 से एक कप चाय भी नहीं पा सकता।”

उसने खुद को शर्मिंदा महसूस किया, और उन बच्चों के पास वापस गया। उनसे पूछा क्या वह उसके साथ होटल में खाना पसंद करेगी? तो उन्होंने उस का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।

जब बच्चे उनके साथ होटल के अंदर जा रहा था, तो उन्हें रोका, क्योंकि उनके कपड़े बहुत गंदे और फटे हुए थे। यह देखकर राम उन बच्चों को अंदर जाने की अनुमति देने के लिए कहा।

वह अंदर घुस गया और आराम से बैठ गया, जैसे ही खाना आया, राम बच्चों की चेहरे पर मुस्कान देखी और खुश महसूस किया। जब बच्चे खाने लगी तो उनकी चेहरे की खुशी कुछ अलग थी।

भोजन करने के बाद वह वापस लौट गया, जाने से पहले राम उन्हें कुछ पैसा दिया और कुछ कपड़े खरीदने के लिए कहा। लेकिन कई दिनों के बाद भी वह उन लड़कों के बारे में सोचना रहा।

एक दिन मंदिर जाते समय उसने कहा, “भगवान आप कहां है? जब आपके बच्चे भूख से पीड़ित है तो आप कैसे शांत बैठ सकते हैं।” बस अगले ही पल उसके दिमाग में एक विचार आया।

“मैं उन लड़कों के लिए क्या किया, क्या मैं अपनी सोच के साथ ऐसा कर सकता था?” उस पल उन्होंने महसूस किया और समझा की हम जो करते हैं वह भगवान की योजना का हिस्सा है।

जब किसी व्यक्ति की मदद की जरूरत हो, तो भगवान हमें उस व्यक्ति की मदद के लिए भेजते हैं।

शिक्षा: किसी की मदद करने से इनकार करना, भगवान के काम को मना करने जैसा है।

अहंकारी शेरनी

एक जंगल था। जिसमें एक शेर और शेरनी रहती थी। वह जंगल का राजा और शेरनी उस जंगल की रानी थी। दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। उन दोनों के दो बच्चे भी थे। परंतु दोनों का स्वभाव भिन्न था।

शेर एकदम विनम्र था। जंगल में हरकोई शेर का बहुत सम्मान करता था। अगर जंगल में कोई भी लड़ाई हो जाए तो शेर उनका समाधान निकालता।

दूसरी तरफ शेरनी ऐसी नहीं थी। उसको अपनी ताकत बहुत अभिमान था। वह उस जंगल में हर किसी को अपने से छोटा मानती थी।

वह अपने बच्चों को भी जंगल के किसी प्राणी या जानवर के साथ खेलने नहीं देती थी।

वह जंगल में जाती तो किसी से सीधी बात नहीं करती थी बल्की मुंह दूसरी तरफ करके उसे नीचा बता कर निकल जाती थी।

जब उनके बच्चे किसी जानवर के साथ खेलते तो अपने बच्चों को डांटती और कहती की, “बच्चों मैंने मना किया है ना कि जंगल में किसी जानवर के साथ मत खेलो, उनकी तुम्हारे साथ खेलने की औकात नहीं है। यह तुम्हारे स्तर के नहीं है।”

यह सुनकर बच्चे और वह जानवर दुःखी हो जाते।

एक दिन की बात है मां और बच्चे दोनों खाना खा रहे थे। तब अचानक पीछे से एक जहरीला सांप बच्चों को मारने के इरादे से आया और धीरे-धीरे बच्चों की तरफ बढ़ने लगा।

मां को इस बारे में कुछ भी पता नहीं चला। पर गिद्धने उसे देख लिया। उसने उस सांप को मार डाला। उसने बच्चों की इस तरह जान बचाई।

पर शेरनी उसको शुक्रिया करने के बदले अपने बच्चों को लेकर वहां से चली गई। इस बात से गिद्ध को बहुत बुरा लगा।

एक बार मां और बच्चे नदी किनारे खेल रहे थे। शेरनी को नींद आ गई और वह सो गई। बच्चे मां को बिना बताए अकेले ही वहां से चले गए।

जब शेरनी की नींद खुली तब उसने देखा तो बच्चे वहां नहीं थे। वह बहुत डर गई और घबरा गई क्योंकि शेर भी किसी जंगल के काम से बाहर गया था। वह जंगल में अपने बच्चों को ढूंढने लगी।

उसने बंदर को देखा और पूछा कि “तुमने मेरे बच्चों को देखा?”

बंदर यह सोच में पड गया की शेरनी मुझसे बात कर रही है।

उसने कहा कि, “रानी जी आप मुझसे बात कर रही है क्योंकि मैं जब भी आपसे प्रणाम करता था तब आप अपना मुंह दूसरी ओर कर चली जाती थी। इसीलिए मैं यह बात पूछ रहा हूं।”

यह सुनकर शेरनी को बहुत बुरा लगा। अपने व्यवहार पर उसे काफी शर्मिंदगी महसूस हुई। वह वहां से चली गई।

वहां रास्ते पर एक हाथी मिला। उसने हाथी से अपने बच्चों के बारे में पूछा।

हाथी ने कहा कि, “में तो एक पागल हाथी हूं ना! आप तो मुझे हमेशा यही कहती थी। तो मुझे कैसे पता?”

शेरनी यह सुनकर कुछ भी बोले बिना वहां से चली गई।

ऐसा कर सब शेरनी को कुछ ना कुछ बोलने लगे जो शेरनी इन्हे हमेशा अहंकार में आकर कहती थी।

यहां तक कि एक चूहेने भी मदद करने से मना कर दिया।

उसने कहा कि, “मैं तो एक नासमझ और बहुत छोटा जीव हूँ ना! तुम मुझे यह ही कहती थी। तो मुझे कैसे मालूम?

यह सब देख कर शेरनी को अपनी भूल समझ में आई और उसने अपने अहंकार के लिए सब से माफी मांगी। और फिर वह रोने लगी।

सब जानवर ने उन्हें माफ किया और उनके बच्चों को ढूंढने लगे।

हाथी ने उनके बच्चे को एक पहाड़ पर खेलते हुए ढूंढ लिया। शेरनी बच्चों को देखकर बहुत खुश हुई और वह सब के साथ अच्छे से जंगल पर रहने लगी।

शिक्षाः हमें कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। हमें हमेशा सब के साथ अच्छे से रहना चाहिए। हमें नहीं पता की जिस का हम अहंकार में आकर अपमान करते है कल उसकी की इस कहानी तरह जरूर पड़ जाये।

सभी माध्यमों का उपयोग

एक बार एक पिता और पुत्र बगीचे में काम कर रहे थे, बच्चा अपने पिता से प्रशंसा प्राप्त करना चाहता था। इसलिए वह अपने पिता की निर्देशों के अनुसार छोटे छोटे काम करके पिता की मदद कर रहा था।

पिता और उनका बेटा बगीचे के विभिन्न हिस्सों में काम कर रहे थे, पिता ने अपने बेटे की पास एक पत्थर देखा। पिता ने कहा, “बेटा पत्थर को उस जगह से हटा दो, हम वहां एक सुंदर पेड़ लगाएंगे।”

पिता के निर्देशों के अनुसार, बच्चे ने उस पत्थर को हटाने की कोशिश की लेकिन वह सक्षम नहीं हुआ। बच्चे ने अपने पिता से कहा, “पिताजी मैं इस पत्थर को हटाने में सक्षम नहीं हूं।”

पिता उत्तर दिया, “फिर से कोशिश करो उस जगह से पत्थर को हटाने के लिए अपने सभी साधनों का उपयोग करो।” बच्चे ने फिर से अपनी पूरी ताकत इस्तेमाल किया,

लेकिन वह फिर से पत्थर को उस जगह से नहीं हटा पाया, बच्चा थक गया और रोना शुरू कर दिया, क्योंकि वह अपनी सभी प्रयासों का उपयोग करने के बाद भी सक्षम नहीं था।

अपने पुत्र को रोता हुआ देखकर पिता उसके पास बैठा और कहां, “तुम क्यों रो रहे हो?” बच्चे ने जवाब दिया “पिताजी मैंने उस पत्थर को निकालने की पूरी कोशिश की फिर भी मैं नहीं कर पाया।”

“लेकिन तुम मेरे बारे में भूल गए, मेरे प्रिय। अगर आपको मदद की जरूरत है तो आपने मुझे शामिल क्यों नहीं किया?” पिता ने कहा। यह सुनकर बालक मुस्कुराया,

और फिर से अपने पिता के साथ काम करने लगा। अब अपने पिता की मदद से वह उस स्थान से पत्थर को आसानी से हटा दिया, फिर उनके पिता उस जगह पर एक नया पेड़ लगाया।

शिक्षा: जब हम काम में असफल होते हैं, तो हमें ईश्वर से सहायता लेनी चाहिए और उसके प्रति विश्वास रखना चाहिए।

लालची शेर

एक बार जंगल में रहता था एक शक्तिशाली शेर, वह जंगल के राजा थे। शेर राजा रोज जानवरों का शिकार करते थे अपनी भजन के लिए, सभी जानवर शेर से बचने के लिए जंगल में छुपा रहते थे।

कारण शेर को शिकार करना बहुत मुश्किल हो गई थी, इसीलिए शेर एक लोमड़ी को काम पर रखा। लोमड़ी जंगल में जाकर जानवर की पता करती थी, और फिर शेर जाकर उसे भजन करते थे।

एक दिन शेर लोमड़ी को कहा, तुम जंगल में जाकर पता करो सभी जानवर मेरे बारे में क्या सोचते हैं। लोमड़ी तुरंत जंगल में जाकर सभी जानवर से पता किया, फिर शेर को आकर कहा।

“महाराज आप सभी जानवर को आसानी से पकड़ सकते है, इसलिए जंगल के सभी जानवर आप से डरते है, जंगल में आपसे ज्यादा तेज और कोई भी नहीं है।

महाराज आप इस जंगल के शक्तिशाली राजा हो, लेकिन मैं अगर चुपके से आपको जनवर का पता नहीं देता तो आप भूखा ही रहते। अगर मैं एक दिन का भी छुट्टी लूं तो आप उस दिन भूखा रह जाएंगे।”

अगले दिन लोमड़ी ने छुट्टी लिया, शेर सारा दिन लोमड़ी के इंतजार करते करते परेशान होकर खुद शिकार करने निकला, रास्ते में उसने एक खरगोश को देखा। शेर चुपके से खरगोश की ओर जा रही थी,

लेकिन खरगोश अपनी लंबी कानों से शेर के पैरों की आवाज सुन लेती है, और वह वहां से भागती है। लेकिन खरगोश ज्यादा दूर नहीं भाग पाया शेर ने उसे पकड़ लिए थे।

फिर उसे खाने वाले थे, उसी समय शेर ने एक हिरण को देखा, हिरण उधर घास खा रही थी। शेर ने सोचा, “यह खरगोश तो बहुत छोटा है, इससे मेरी पेट नहीं भरेगी मुझे तो उस हिरण को पकड़ना चाहिए।”

यह सोचकर शेर खरगोश को छोड़ दिया, और हिरण को पकड़ने के लिए उसके पीछे भागा, हिरण भागते भागते जंगल में झाड़ियों के पीछे छुप गया। शेर हिरण को इधर उधर बहुत ढूंढा लेकिन उसे हिरन नहीं मिली।

फिर शेर निराश होकर जहां खरगोश को पकड़ा था वहां लौट आया, उसने देखा वहां खरगोश नहीं थी खरगोश भी भाग गई। भूखा शेर ने सोचा अगर हमें हिरण के लालच नहीं होती,

तो कम से कम खरगोश मिलती भजन के लिए, शेर बहुत ही दुखी होकर वहां बैठी थी, एक पेड़ की पीछे से लोमड़ी ने यह सब कुछ देख कर मजा ले रही थी।

“हा हा हा शेर घमंडी ही नहीं लालची भी है, इसीलिए उसकी हाथों में कोई नहीं आया। जो थे वह भी भाग गई, हा हा हा।”

शिक्षा: हाथों में एक पक्षी ज्यादा मूल्यवान छड़ियों में हजारों से।

धूर्त मेंढक

एक बार एक मेंढक ने बुरी नीयत से एक चूहे से दोस्ती कर ली। वह उसका विश्वास जीतकर उसे मारकर खा जाना चाहता था। एक दिन खेल खेल में मेंढक ने चूहे का एक पंजा अपने साथ बांध लिया।

पहले उन दोनों ने जौ खाए और फिर पानी पीने के लिए तालाब पर गए। जैसे ही चूहे ने पानी पीना शुरू किया वैसे ही मेंढक ने उसे पानी के अन्दर खींच लिया। वह उसे गहराई में ले गया।

वहाँ पर चूहे ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। थोड़ी देर बाद उसका शव पानी की सतह पर तैरने लगा। तभी एक चील उस पर झपटी और उसने अपने तेज़ तथा पैने नखों वाले पंजों से उसे जकड़ लिया। मेंढक का पाव चूहे के साथ बंधे होने के कारण वह भी चील का भोजन बन गया।

शिक्षाः केवल अपना स्वार्थ देखने वाले को अंतत: भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

दो मित्र और भालू

दो दोस्त एक घने जंगल से गुजर रहे थे। जब उन्होंने देखा कि एक भालू उनकी तरफ आ रहा है तो उनमें से एक शीघ्र ही ऊँचे वृक्ष पर चढ़ गया और छुप गया। परन्तु दूसरा दोस्त कुछ समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे।

वह असहाय सा खड़ा रह गया। तब उसे अपनी पाठशाला का एक सबक याद आया कि भालू मरे हुए आदमी का शिकार नहीं करते। वह बिल्कुल एक मृत व्यक्ति की भाँति धरती पर साँस रोककर सीधा लेट गया।

भालू उसके पास आया और उसे सूंघकर चला गया। थोड़ी देर बाद उसका मित्र पेड़ से उतरकर आया और उससे पूछने लगा,

“मित्र, भालू ने तुम्हारे कान में क्या बुदबुदाया?” उसने उत्तर दिया, “भालू ने कहा कि संकट की घड़ी में जो भाग जाए वह सच्चा मित्र नहीं होता।”

शिक्षा: एक सच्चा मित्र ही संकट की घड़ी में साथ देता है।

रेत और पत्थर

एक गांव था। जिसका नाम रामपुर था। उस गांव में दो दोस्त रहते थे। जिसमें एक दोस्त का नाम मिलन और दूसरे दोस्त का नाम ऋषभ था।

उन दोनों दोस्त के आगे पीछे कोई नहीं था। वह दोनों दोस्त अकेले थे। वो दोनों एक ही घर में रहते थे। वह दोनों कुछ ना कुछ काम करके पैसा लाकर अपना गुजारा करते थे।

तब वह एक दिन उन्होंने सोचा कि हम काम तो कर ही रहे हैं। पर अब हमें यह देश और दुनिया कैसी है। यह देखनी चाहिए।

इसीलिए वह दोनों के पास जितना पैसा था। वह लेकर उन्होंने दुनिया घूमने का निर्णय लिया।

ऋषभ ने कहा कि, “हम पैसे भी घूमते-घूमते उस जगह से कमा लेंगे। जिसे पैसे की कमी की कोई भी बात नहीं होगी। उसे हम बहुत ही अच्छे से घूम सकेंगे और इस तरह दुनिया भी घूम लेंगे।”

वह एक दिन घूमते-घूमते रण में पहुंचे। उनमे से ऋषभ पानी की बोटल से पानी पीने लगा।

मिलन पानी की बोटल में से ऋषभ को पीने से रोकने लगा।

उसने ऋषभ को कहा कि, “सावधानी से पानी पीना और बहुत ज्यादा पानी मत पीना।”

यह सुनने के बावजूद भी ऋषभ ने पानी की बोटल को खाली कर दिया।

यह देखकर मिलन को बहुत गुस्सा आया। उसने गुस्से में आकर ऋषभ को चांटा लगा दिया।

उसने कहा कि, “हम यहां रण में है। हमें यहाँ पानी की कभी भी जरूरत पड़ सकती है। तुम्हें पता नहीं है कि पानी यहाँ रण में मिलना कितना मुश्किल होगा। इसीलिए तो मैं तुम्हें मना कर रहा था।”

तब मिलन ने रेत में लिखा की, “मुझे मिलन ने चांटा लगाया।”

ऐसा लिखने के बाद दोनों दोस्त आगे बढ़ने लगे। वहां उन्होंने दूर एक पानी का तालाब देखा। दोनों यह देख कर बहुत खुश हो गए।

उन्होंने पहले अपनी बोटल भरी। बोटल भरने के बाद दोनों तालाब में नहाने लगे।

वही ऋषभ तालाब में अचानक से डूबने लगा।

तब मिलन ने उसकी जान बचाई। उसकी जान बचाने के लिए ऋषभ ने मिलन को धन्यवाद दिया। मिलन ने भी उसको चांटा लगाने के लिए ऋषभ से माफ़ी मांगी।

वह दोनों फिर से अच्छे से बात करने लगे। उन्होंने एक पेड़ के नीचे कुछ समय आराम करने का सोचा।

वहा कुछ समय आराम करने के बाद जब मिलन ने जाने को कहा तब ऋषभ ने वहा एक पत्थर पर लिखा कि “मिलन ने मेरी जान बचाई।”

यह देख मिलन ने आश्चर्य से पूछा कि यह तुम क्या कर रहे हो?

पहले तुमने रेत पे लिखा और फिर पत्थर पे लिखा।

उसने कहा कि जब तुमने मुझे चांटा मारा। वह याद रखने जैसी कोई चीज नहीं थी। क्योकि दोस्तों के बीच ऐसा चलता है। इसलिए मैंने उसे रेत पर लिखा जिसे वह पवन आने पर मिट जाये।

तुमने मेरी जान बचाई। यह हमेशा याद रखने की चीज है। इसीलिए मैंने इसे पत्थर पर लिख दिया है कि, “तुमने मेरी जान बचाई।” जिसे कोई भी मिटा ना सके।

शिक्षाः एक सच्चा मित्र हमेशा अपने मित्र के साथ बिताई हुई अच्छी चीजों को याद रखता है बजाय बुरी चीजों के।

लोमड़ी की चालाकी

एक दिन एक लोमड़ी अचानक एक कुएँ में गिर गई। कुएँ में गिरकर वह चिल्लाने लगी,”बचाओ-बचाओ, कोई मुझे बचाओ।” उधर से गुजर रही एक बकरी कुएँ से पानी पीने के लिए रुकी।

कुएँ के पास आकर जब उसने झाँककर देखा तो कुएँ के अंदर लोमड़ी को देखकर पूछा, “बहन! तुम यहाँ क्या कर रही हो?” लोमड़ी चालाक थी।बड़े मीठे स्वर में बोली, इस कुएँ का पानी बहुत मीठा है।

मैं हमेशा यही पानी पीती हूँ। मैं आज इसमें इसलिए आई हूँ, कि ज्यादा पानी पी सकूँ। तुम भी अंदर आ जाओ और जी भर कर पानी पियो। यह सुनते ही बकरी कुएँ में कूद पड़ी।

उसकी पीठ पर चढ़कर लोमड़ी कुएँ से बाहर आ गई। बाहर आकर उसने हँसते हुए बकरी से कहा, “कुछ भी करने से पहले उसका परिणाम जरूर जान लो।”

शिक्षा: बिना सोचे-समझे काम करने से बाद में पछताना पड़ता है।

शेर का इलाज

एक बार जंगल का राजा शेर काफी बीमार पड़ गया। जंगल के सभी जानवर उसे देखने उसकी गुफा में आए। सिर्फ एक लोमड़ी नहीं आ पाई। भेड़िये ने इस बात का फायदा उठाया और शेर को लोमड़ी के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया।

लड़की को जब आसपास के जानवरों से यह बात पता लगी तो वह अगले दिन शेर के पास गई और गैरहाज़री का कारण बताते हुए बोली, “महाराज,

मैं आपकी बीमारी की औषधि ढूँढने के लिए बहुत दूर चली गई थी और मैं उसमें सफल हो गई हूँ।” उसने बात जारी रखते हुए कहा, “आपको एक जीवित भेड़िये को जलाकर उसकी खाल से अपने पूरे शरीर को ढकना होगा।

वह आपको गरमाहट देगी और उससे आप एकदम पहले की तरह स्वस्थ हो जाएंगे।” जंगल में जिंदा भेड़िये को जलाने का आदेश जारी कर दिया गया और इस प्रकार वह भेड़िया मृत्यु को प्राप्त हो गया।

शिक्षाः जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदते हैं वे उसमें स्वयं ही गिर जाते हैं।Related:-

शेर की दावत में बैल

एक बार जंगल के राजा शेर ने रात्रि को भोजन में बैल का मांस खाने की इच्छा से एक योजना बनाई। वह बैल से आग्रह करते हुए बोला,

“दोस्त, तुम्हारे लिए मैंने एक भेड़ का शिकार किया है और आज रात तुम मेरे महल में शाही भोज के लिए आमंत्रित हो।” बैल ने उसका आमंत्रण स्वीकार कर लिया।

रात होने पर जब बैल वहाँ पहुँचा तो उसने देखा कि वहाँ बड़ी-बड़ी सींके लगी है और घड़ों में पानी उबल रहा है। लेकिन वहाँ कोई मृत भेड़ नहीं थी।

एक भी शब्द कहे बिना वह वापस जाने लगा तो शेर खीजकर बोला, “मैंने तो तुम्हें बिना कोई नुकसान पहुँचाए भोजन के लिए बुलाया लेकिन तुम बिना कोई कारण बताए ही जा रहे हो।

नाशुक्र बैल!” तब बैल ने उत्तर दिया, “मैंने यहाँ कोई मृत भेड़ नहीं देखी। इसका मतलब है कि तुमने भेड़ के बदले आज बैल का मांस खाने की पूरी तैयारी कर रखी थी।”

शिक्षा: किसी की मीठी-मीठी बातों में कभी भी नहीं आना चाहिए।

लोमड़ी की मुक्ति

एक बार एक कौए ने कहीं से मांस का एक टुकड़ा चुराया और उसे चोंच में दबाकर वह एक वृक्ष की शाखा पर जा बैठा। एक लोमड़ी बहुत देर से यह सब देख रही थी। मांस के टुकड़े को देखकर उसके मुँह में भी पानी आ रहा था।

तभी उसके दिमाग में एक युक्ति आई। वह पेड़ के नीचे खड़ी हो गई और कौए से बोली, “मित्र कौए, तुम इस दुनिया के सबसे सुन्दर पक्षी हो। तुम्हारा व्यक्तित्व बहुत ही प्रभावशाली और उज्जवल है।

तुम्हारी सुन्दरता का तो कोई मुकाबला ही नहीं है। अगर तुम्हारे पास मीठी आवाज भी…” इससे पहले कि लोमड़ी अपनी बात पूरी करती कौए ने गाना गाने के लिए मुँह खोल दिया। मुँह खुलते ही मांस का टुकड़ा उसकी चोंच से नीचे गिर पड़ा। लोमड़ी ने तुरंत उसे लपक लिया और भाग गई।

शिक्षाः झूठी प्रशंसा से सावधान रहना चाहिए।

चींटी और टिड्डा

एक बार की बात है, एक चींटी थी वह एक खेत में रहती थी, उसी खेत की एक बिल में एक टिड्डा रहती थी। वह दोनों मित्र थे, टिड्डा बहुत आलसी था।

गर्मियों के महीनों में टिड्डा गाया, और पूरा महीनों इधर उधर घूम कर बिताया। वह सर्दियों के मौसम के लिए भोजन का इंतजाम नहीं किया।

टिड्डा बहुत लापरवाही थी, लेकिन चींटी अलसी नहीं थी। वह गर्मी में दिन रात काम किया, उसने सर्दियों के मौसम के लिए बहुत सारा खाना इकट्ठा किया।

सर्दियों में खेत बर्फ से ढक गया, टिड्डा के पास सर्दियों में खाने के लिए कुछ नहीं था। लेकिन चींटी के पास बहुत सारा खाना थी, उसने इकट्ठा करके रखी थी, ताकि सर्दियों में उसे बाहर ना निकल ना पड़े।

एक दिन टिड्डा कुछ खाना उधार लेने के लिए चींटी के पास गया, चींटी ने उससे पूछा गर्मी के दिनों में तुम क्या कर रहे थे? टिड्डा ने जवाब दिया उसने गर्मियों के दौरान गाया और बजाया।

टिड्डा की बात सुन के चींटी ने उत्तर दिया, आप गर्मियों के दिन गाना बजा कर बिताया, तो आपको सर्दियों में नित्य करना चाहिए, टिड्डा वहां ठंड में खड़ा होकर रोते रहे, उसे अपनी गलती का एहसास हुआ।

शिक्षा: अगर आप मेहनत नहीं करोगे तो आपको सफलता भी नहीं मिलेगी।

कुछ अलग करो

एक बार की बात है, रोहित प्रतिदिन समुद्र तट पर घूमने जाते थे, एक दिन उसने वहां एक आदमी को देख जो कुछ लेने के लिए नीचे झुक रहा था और फिर उसे पानी में फेंक दिया।

जब रोहित उस आदमी के पास गया तो उसने देखा कि, वह पानी से स्टारफ़िश उठा रहा था और उन्हें वापस पानी में फेंक रहा था। रोहित उलझन में पड़ गए और उस आदमी को कहा।

शुभ प्रभात, “मैं सोच रहा था कि तुम क्या कर रहे हो?” उस आदमी ने मुस्कुराया और जवाब दिया, “मैं वापस स्टारफ़िश फेंक रहा हूं जो किनारे पर था।

अगर मैं उन्हें वापस समुद्र में नहीं फेकूँगा, तो स्टारफ़िश ऑक्सीजन की कमी के कारण यहां मर जाएगा।” रोहित ने उत्तर दिया, “मैं समझाता हूं”

फिर थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा, “लेकिन इस समुद्र तट पर हजारों स्टारफ़िश होती है, आप उन सभी को प्राप्त नहीं कर सकते हैं। इन स्टारफ़िश को वापस समुद्र में फेंकने से कोई फर्क पड़ सकता है?”

आदमी ने मुस्कुराया, वह नीचे झुककर और एक स्टारफ़िश उठाया, फिर उसे भी वापस समुद्र मैं फेंक दिया। फिर उस मछली की ओर इशारा करते हुए उसने कहा, “इससे उस पर जरूर फर्क पड़ेगा।”

शिक्षा: हम पूरी दुनिया को बदलने में सक्षम नहीं हो सकते हैं, लेकिन कम से कम आप किसी के लिए एक छोटा हिस्सा बदल सकते हैं।

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