हेलो, आज की इस पोस्ट में हम आपके साथ मजेदार बिल्ली चूहे की कहानियाँ शेयर करने जा रहे है। दोस्तों बिल्ली चूहे की कहानियाँ बहुत ज्यादा मजेदार होती है और यह सभी को पसंद भी आती है। दोस्तों आप इन कहानियाँ को पूरा पढ़े। आपको यह कहानियाँ बहुत पसंद आएगी। 

मजेदार बिल्ली चूहे की कहानियाँ

Billi Chuhe ki Kahaniyan List

चूहा और बिल्ली की कहानी

सिंह, चूहा और बिल्ली

दो चूहे

बिल्ली के गले में घंटी

शेर और चूहा

चूहे बिल्ली की कहानी

बिल्ली के गले में घंटी

नटखट चूहा

चूहा और बिल्ली की कहानी

एक बिल्ली और एक चूहा था वह लोग एक पुराने घर में रहते थे। लेकिन यह चूहा बिल्ली एक दूसरे के दुश्मन बिल्कुल भी नहीं थे यह लोग एक-दूसरे को बहुत अच्छा मानते थे और एक दूसरे के बहुत बढ़िया दोस्त थे।

चूहा और बिल्ली वही पुराने मकान में बहुत दिनों से रह रहे थे इसलिए उन दोनों में बहुत गहरी दोस्ती हो चुकी थी वह लोग खाना पीना भी साथ में खाते और जब कभी भी बाहर घूमना होता वह लोग साथ में ही घूमते।

वह लोग एक दूसरे की बातों को बहुत अच्छे से समझ जाते। 1 दिन ऐसा हुआ कि चूहा और बिल्ली दोनों को बहुत जोर की भूख लग गई लेकिन जिस पुराने मकान में वह लोग रह रहे थे वहां पर उनको खाने के लिए कुछ भी नहीं मिलता था।

इसलिए चूहा और बिल्ली रोज उस पुराने मकान से बाहर निकलकर खाने की तलाश में दूसरों के घर में घुसते थे और मिल-जुलकर जो कुछ भी मिलता उसको खाकर फिर अपने पुराने घर में लौट जाते थे

इस तरीके से चूहा और बिल्ली अपना दिन गुजार रहे थे लेकिन एक दिन चूहा और बिल्ली को बहुत जोर से भूख लगी उन्होंने सोचा चलो किसी दूसरे के घर में जाते हैं और देखते हैं वहां पर हम को खाने के लिए क्या मिल सकता है।

इसके बाद चूहा और बिल्ली गांव में किसी दूसरे के घर में घुस गए और घुसते ही उन्होंने देखा कि एक गिलास में दूध रखा हुआ है। लेकिन चूहे ने कहा कि मैं गिलास में से दूध नहीं पी सकता हूं मैं उतना ऊपर तक कैसे जाऊं क्लास तक मैं वहां तक पहुंच नहीं सकता हूं।

तभी बिल्ली ने कहा कि तुम मेरे दोस्त हो तुमको परेशान और तकलीफ लेने की कोई जरूरत नहीं है मैं अभी कोई तरकीब ढूंढती हूं और इस गिलास का दूध हम दोनों पिएंगे। चूहा यह बात सुनकर बहुत ज्यादा खुश हो गया।

उसके बाद बिल्ली ने अपने पंजों से दूध के गिलास को गिरा दिया जिसकी वजह से दूध जमीन पर गिर गया उसके बाद बिल्ली और चूहे दोनों ने खूब जमकर दूध पिया।

जैसे ही दूध का गिलास नीचे गिरा तो घर के मालिक को ग्लास गिरने की आवाज आ गई वह तुरंत ही रूम में आ गया चूहा वहां से किसी कोने में जाकर छुप गया।

मकान मालिक ने तुरंत ही एक जाल बिल्ली के ऊपर फेंक दिया और फिर बिल्ली उस में फस गई। उसके बाद मकान का मालिक कुछ देर के लिए रूम से बाहर चला गया।

बिल्ली वहां पर म्याऊं म्याऊं करती रही और चिल्लाती रही तभी कोने से चूहा बाहर निकलता है और बिल्ली से कहता है कि तुम भी मेरे दोस्त हो तुम ने मुझ को दूध पिलाने में मदद करी है तब मैं भी तुम्हारा जरूर साथ दूंगा।

चूहा तुरंत ही जाल को अपने नुकीले दांतों से काटना शुरु कर दिया और कुछ ही देर में बिल्ली के बाहर निकलने तक का उसने जाल को काट दिया था।

उसके बाद बिल्ली ने चूहे का बहुत शुक्रिया अदा किया और फिर वह दोनों तुरंत वहां से भाग निकले।

उसके बाद वह लोग उस मकान में कभी भी नहीं घुसे उसके बाद उनकी दोस्ती और भी ज्यादा पक्की और गहरी हो गई।

बिल्ली ने चूहे से कहा कि अगर आज तुम नहीं होते तब वह मकान मालिक न जाने मेरे साथ क्या करता मुझको कहां जाल में बंद कर कर फेंक देता।

मैं तुम्हारे इस दिन का एहसान कभी नहीं भूलूंगी, मैंने कहा कि हम दोनों दोस्त हैं हम दोनों को एक दूसरे की मदद करना चाहिए चलो कोई बात नहीं अब आराम से सो जाते हैं।

कुछ दिन बीते ऐसे ही बिल्ली और चूहे की दोस्ती बरकरार थी लेकिन एक दिन अचानक से बिल्ली की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई और उस दिन वह खाना लेने के लिए बाहर नहीं जा सकती थी लेकिन चूहे ने कहा कि तुम घबराओ मत मैं तुम्हारे लिए रोटी का बंदोबस्त कर दूंगा।

इसलिए चूहा खाना लेने के लिए बाहर चला गया उनके पुराने घर के बगल में एक मकान था चूहा उस मकान में घुस गया।

मकान में बहुत ज्यादा अंधेरा था और कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। लेकिन आप लोगों को तो पता ही होगा कि चूहे की सुनने की शक्ति बहुत ज्यादा होती है इसलिए मकान में पता चल गया कि कहां पर उसको रोटी मिलेगी वह उस स्थान पर जाने लगा लेकिन अचानक से क्या हुआ घर के मकान मालिक ने चूहे पकड़ने का पिंजरा लगा रखा था जैसे ही चूहा रोटी को अपने दांत से पकड़ा तुरंत ही पिंजरे का दरवाजा बंद हो गया और चूहा कैद हो गया।

बिल्ली चूहे का इंतजार बहुत देर तक करती रही लेकिन चूहे का आने का कोई पता ही नहीं था दिल्ली को पता था कि हम सबसे ज्यादा हमारे पड़ोस के मकान में खाना खाने के लिए जाते हैं तो शायद हो सकता है कि वहां पर चूहा कहीं प्रॉब्लम में तो नहीं है।

बिल्ली ने जैसे-तैसे उस मकान में चली गई और उसने देखा कि चूहा वहां पर चूचू कर रहा था। बिल्ली ने अपने मित्र चूहे की आवाज को पहचान लिया अब उसने यह सोचा कि मैं अपने मित्र चूहे को इस पिंजरे से बाहर कैसे निकाल सकती हूं।

उसी समय मकान मालिक का छोटा बच्चा उस कमरे में घुस गया तभी बिल्ली ने सोचा कि इस बच्चे को तो कुछ भी पता नहीं है उसने सोचा कि क्यों ना बच्चे को पिंजरे के पास लेकर आए ताकि कोई रास्ता निकल जाए जिस तरीके से चूहा बाहर आ सकता है उसके दिमाग में एक तरकीब सोची।

बिल्ली बच्चे के पास चली गई बच्चा 5 या 6 साल का था, बिल्ली बहुत ज्यादा अच्छी दिखती थी और बहुत ज्यादा क्यूट थी और छोटे बच्चों को बिल्ली के साथ खेलना पसंद होता है इसलिए वह बिल्ली को पकड़ने के लिए चला गया।

लेकिन बिल्ली बच्चे के हाथ में नहीं आ रही थी और वह जानबूझकर पिंजरे के गोल गोल घूम रही थी। बच्चा भी बिल्ली को हाथ में पकड़ने के लिए बहुत ज्यादा बेताब था और वह बिल्ली के पीछे दौड़ रहा था।

दौड़ते-दौड़ते बच्चे का पैर अचानक से पिंजरे के दरवाजा खोलने वाले स्थान पर पड़ गया जिसकी वजह से पिंजरे का दरवाजा खुल गया और चूहा वहां से तुरंत ही बाहर निकल गया उसके बाद बिल्ली और चूहा एक दूसरे के साथ फिर से अपने पुराने घर में लौट गए।

चूहे ने बिल्ली को उसकी जान बचाने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया कहा लेकिन बिल्ली ने चूहे से कहा कि 1 दिन तुमने मुझे मुसीबत से बचाया था इसलिए मेरा कर्तव्य बनता था कि मैं भी अपने मित्र की मदद करूं और इसी वजह से आज मैंने तुम्हारी मदद करी।

उस दिन के बाद से बिल्ली और चूहा एक दूसरे का हमेशा साथ देते थे और प्रेम मोहब्बत से रहा करते थे।

सीख - हमें मुसीबत के समय पर‌ अपने मित्रों का साथ देना चाहिएं।

सिंह, चूहा और बिल्ली

बहुत समय पहले की बात है. दुर्दांत नाम का एक बलिष्ट सिंह अर्बुदशिखर नामक पर्वत की गुफ़ा में निवास करता था. प्रतिदिन वह शिकार हेतु वन में जाता और वापस गुफ़ा में आकर विश्राम किया करता था. एक दिन कहीं से एक चूहा उस गुफा में आ गया धमका और बिल बनाकर रहने लगा.

जब भी सिंह विश्राम कर रहा होता, चूहा बिल से निकलता और सिंह के केशों को कुतर जाता. जागने के उपरांत सिंह की जब अपने कुतरे हुए केशों पर दृष्टि जाती, तो वह क्रोध से आग-बबूला हो जाता. बलशाली होने के बावजूद भी उसका चूहे जैसे छोटे से जीव पर बस नहीं था. जब भी वह उसे पकड़ने के प्रयास करता, वह चपलता से अपने बिल में घुस जाता और सिंह क्रोधवश दांत पीसता रह जाता.

एक दिन सिंह ने सोचा कि इस छोटे से जीव पर अपनी ऊर्जा व्यर्थ करने का कोई औचित्य नहीं है. इसके विनाश के लिए इसका ही कोई परम शत्रु लाना चाहिए और वह गाँव जाकर बहला-फ़ुसलाकर एक बिल्ली ले आया.

प्रतिदिन सिंह बिल्ली के लिए ताज़ा मांस लाया करता और प्रेम से उसे खिलाता. बदले में सिंह के विश्राम के समय चौकसी करती. बिल्ली की उपस्थिति में चूहा डर के मारे बिल में घुसा रहता. सिंह अब निश्चिंत होकर सोने लगा. बिल्ली रोज़ ताज़ा मांस प्राप्त कर हृष्ट-पुष्ट होने लगी.

इधर चूहा (Mouse) बिला में घुसा-घुसा कमज़ोर हो चला था. सिंह के केश उसका आहार थे. आखिर, कब तक वह भूखे-प्यासे बिल में पड़ा रहता? एक दिन व्याकुल होकर वह अपने बिल से निकल ही गया.

सिंह उस समय विश्राम कर रहा था और बिल्ली पास ही बैठकर मांस का भक्षण कर रही थी. चूहा बिल्ली को चकमा देकर सिंह के पास जाने का प्रयास करने लगा, किंतु बिल्ली चपल थी. उसने चपलता से चूहे को अपने पंजे में दबोच लिया और मारकर खा गई.

बिल्ली प्रसन्न थी कि उसने अपने स्वामी की चिंता का सदा के लिए अंत कर दिया. उसे विश्वास था कि प्रसन्न होकर सिंह अवश्य उसे और स्वादिष्ट मांस लाकर देगा.

सिंह के जागने पर बिल्ली ने उसे चूहे को मार डालने की बात बता दी. सिंह की परेशानी का कारण समाप्त हो चुका था. वह बड़ा प्रसन्न हुआ. किंतु अब बिल्ली उसके किसी प्रयोजन की नहीं रही रही थी. उसने उसे भोजन देना बंद कर दिया. बिना भोजन के बिल्ली कमज़ोर होने लगी. उसे समझ में आ गया कि चूहे को मारकर उसने अपनी उपयोगिता समाप्त कर दी है. इसलिए सिंह उसकी उपेक्षा करने लगा लगा है. अंततः वह गुफ़ा छोड़कर चली गई.

सीख - प्रयोजन सिद्ध हो जाने के उपरांत पूछ-परख समाप्त हो जाती है. इसलिए अपनी उपयोगिता बनाये रखें.

दो चूहे

शहर में रहने वाले और गाँव में रहने वाले दो चूहों में गहरी मित्रता थी. वे अक्सर एक-दूसरे को संदेश भेजा करते और एक-दूसरे का हाल जाना करते थे. एक बार गाँव में रहने वाले चूहे ने शहरी चूहे को गाँव आने का निमंत्रण भेजा. शहरी चूहे ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया.

सप्ताहांत का समय नियत हुआ और गाँव का चूहा अपने शहरी मित्र के आने की प्रतीक्षा करने लगा. वह उससे ढेर सारी बातें करना चाहता था, उसे गाँव के खेत-खालिहानों की सैर करवाना चाहता था. वह अपने मित्र की आव-भगत में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता था. इसलिए वह उसके लिए ढेर सरे फ़ल और आनाज इकट्ठा करने में लगा हुआ था.

आखिर वह दिन भी आया, जब शहरी चूहा गाँव पहुँचा. दोनों मित्र एक-दूसरे से मिलकर बहुत ख़ुश हुए. बहुत देर तक वे बातें करते रहे और एक-दूसरे को अपना हाल बताते रहे. फिर दोनों भोजन के लिए बैठे. भोजन में गाँव के चूहे ने अनाज और फ़ल परोसे, जिसे खाकर दोनों ने आराम किया.  

शाम को गाँव का चूहा अपने शहरी मित्र को गाँव दिखाने ले गया. शहरी चूहा वहाँ के खेत-खलिहान देखकर आनंद से भर उठा. वहाँ की शुद्ध हवा में श्वास लेकर उसका मन प्रफुल्लित हो गया. गाँव का चूहा बोला, “गाँव का वातावरण और वायु शुद्ध है, जो तुम्हें शहर में शायद ही नसीब होती होगी मित्र.”

शहरी चूहा शहर की समस्याएं जानता था. वह वर्षों से वहाँ रहा रहा था, लेकिन गाँव के चूहे मित्र की ये बात उसे बुरी लग गई. हालांकि वह कुछ बोला नहीं.

गाँव का चूहा गाँव की प्रशंसा में लगा हुआ था, वह उसे जंगलों में ले गया और बोला, “मित्र, ऐसे प्राकृतिक और मनोरम दृश्य तुम्हें शहर में देखने को नहीं मिलेंगे. इसलिए आज इस दृश्यों का आनंद ले लो.”

शहरी चूहे को यह बात भी चुभी, लेकिन वह कुछ नहीं बोला. वह सोचने लगा कि अब अपने इस ग्रामीण मित्र को शहरी चका-चौंध का जीवन दिखाना पड़ेगा. तब इसे समझ आएगा कि शहर कितना शानदार होता है.

रात होने पर दोनों चूहे घर वापस आ गए. भोजन का समय आया, तो गाँव के चूहे ने फिर से शहरी चूहे को फ़ल और अनाज परोसा. शहरी भोजन के आदी चूहे को यह भोजन गले नहीं उतर रहा था, वह बोला, “मित्र, क्या तुम हर समय फल और अनाज खाते हो. शहर आओ, मैं तुम्हें एक से बढ़कर एक पकवान खिलाऊंगा. साथ ही वहाँ का शानदार जीवन भी दिखाऊंगा. कल ही तुम मेरे साथ चलो.”

गाँव के चूहे में शहर देखने की लालसा जाग गई. वह फ़ौरन तैयार हो गया. रात नरम घास पर सोने के बाद अगली सुबह उठकर दोनों शहर के लिए निकल गए. शहरी चूहा अपने ग्रामीण मित्र को उस घर में ले गया, जहाँ वह रहा करता था. वह किसी अमीर आदमी का घर था, उसमें ही शहरी चूहे का बिल था. उतना बड़ा और सजा-धजा घर देखकर गाँव के चूहे की आँखें चौंधिया गई.

खाने की मेज़ देखी, तो उसका मुँह खुला रह गया. एक से बढ़कर एक पकवान उस पर सजे हुए थे. शहरी चूहे ने उसे भोजन प्रारंभ करने को कहा. ख़ुशी-ख़ुशी गाँव का चूहा भोजन करने लगा. सबसे पहले उसके प्लेट में से पनीर का टुकड़ा उठाया. उसने अभी पनीर कुतरा ही था, कि शहरी चूहा चिल्लाया, “भागो मित्र, बिल्ली आ रही है. जल्दी से अलमारी में छुप जाओ. नहीं तो जान से हाथ धोना पड़ेगा.”

पनीर छोड़ गाँव का चूहा शहरी चूहे के साथ अलमारी की ओर भागा. कुछ देर तक दोनों अलमारी में छुपे रहे. बिल्ली के जाने के बाद दोनों वहाँ से निकले. शहरी चूहा फिर से अपने मित्र गाँव के चूहे को भोजन के लिए ले गया. लेकिन डर के मारे उसकी भूख मर गई थी.  

शहरी चूहा उसकी हालत देख बोला, “मित्र डरने की कोई बात नहीं है. बिल्ली चली गई है. वैसे यह शहरी जीवन का हिस्सा है. यहाँ यूं ही जीवन जीते हैं. लो केक खाकर देखो.”

गाँव के चूहे ने केक का टुकड़ा ले लिया. लेकिन इसके पहले वह उसे मुँह में डाल पाता, शहरी चूहा चिल्लाया, “भागो मित्र! कुत्ता आ गया है.”

दोनों फिर से भागकर अलमारी में जा छुपे. शहरी चूहे ने बताया कि उस घर के मालिक ने एक कुत्ता पाला हुआ है, जो बड़ा भयानक है. उससे बचकर रहना पड़ता है.”

गाँव का चूहा बहुत ज्यादा डर गया था. अलमारी से बाहर आने के बाद वह एक क्षण भी वहाँ नहीं रुका. वह बोला, “मित्र, मुझे जाने दो. ये शहरी जीवन मुझे तो रास नहीं आता. यहाँ तो हर समय सिर पर ख़तरा मंडराता रहता है. इससे तो गाँव ही भला.”

फिर वह गाँव की ओर चल पड़ा और गाँव पहुँचकर ही दम लिया. वहाँ पहुँचकर वह सोचने लगा, “जगह वही अच्छी है, जहाँ जीवन सुरक्षित है.”

शिक्षा - अमन-चैन का साधारण जीवन ऐसे ऐशो-आराम के जीवन से बेहतर है, जो ख़तरों से भरा हुआ है.

बिल्ली के गले में घंटी | Billi Aur Chuha Ki Kahani

एक शहर में एक बहुत बड़ा मकान था। उस मकान में चूहों ने डेरा जमा रखा था। जब भी मौका मिलता वे अपने-अपने बिलों से निकलते और कभी खाने की चीज़ों पर अपना हाथ साफ़ करते, तो कभी घर की अन्य चीज़ें कुतर देते। उनका जीवन बड़े मज़े से बीत रहा था।

इधर मकान मालिक चूहों से तंग आ चुका था। इसलिए वह एक बड़ी सी बिल्ली ले आया। अब वह बिल्ली उसी घर में रहने लगी। बिल्ली के आने से चूहों का जीना हराम हो गया। जो भी चूहा बिल से निकलता, वह उसे चट कर जाती।

चूहों का बिलों से निकलना मुहाल हो गया। वे दहशत के माहौल में जीने लगे। बिल्ली उनके लिए एक बहुत बड़ी समस्या बन गई थी। समस्या से निज़ात पाने का उपाय निकालने के लिए एक दिन चूहों की सभा बुलाई गई।

सभा में सभी चूहे उपस्थित हुए। सभा की अध्यक्षता कर रहे चूहे ने सबको संबोधित करते हुए कहा, “साथियों, आप सब जानते ही हैं कि हम लोग बिल्ली रुपी बहुत बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं। वह रोज़ हमारे किसी न किसी साथी को मारकर खा जाती है। बिलों से निकलना मुश्किल हो गया है। लेकिन इस तरह हम कब तक बिल में छुपकर रहेंगे। भोजन की व्यवस्था के लिए तो हमें बिल से बाहर निकलना ही होगा। यह सभा इसलिए आयोजित की गई है, ताकि इस समस्या का समाधान निकाला जा सके। आपके सुझाव आमंत्रित हैं। आप एक-एक कर अपने सुझाव दे सकते हैं।”

एक-एक कर सभी चूहों से इस समस्या पर अपनी-अपनी सोच के हिसाब से सुझाए दिए। लेकिन किसी भी उपाय पर सब एकमत नहीं हुए।

तब अंत में एक चूहा उठा और चहकते हुए बोला, “मेरी दिमाग में अभी-अभी एक बहुत ही बढ़िया उपाय आया है। क्यों न हम बिल्ली के गले में एक घंटी बांध दें? इस तरह बिल्ली जब भी आस-पास होगी, उस घंटी की आवाज़ से हमें पता चल जायेगा और हम वहाँ से भाग जायेंगे। कहो कैसा लगा उपाय?”  

सारे चूहों को ये उपाय बहुत पसंद आया। वे ख़ुशी में नाचने और झूमने लगे, मानो उनकी समस्या का अंत हो गया हो।

तभी एक बूढ़ा और अनुभवी चूहा खड़ा हुआ और बोला, “मूर्खों, नाचना-गाना बंद करो और ज़रा ये तो बताओ कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा?”

ये सुनना था कि चूहों का नाचना-गाना बंद हो गया। बिल्ली के गले में घंटी बांधना अपनी जान से हाथ धोना था। कोई इसके लिए तैयार नहीं हुआ। सभा में शांति छा गई थी। तभी इस शांति को चीरते हुए बिल्ली के कदमों की आहट सबके कानों में पड़ी और फिर क्या था? सब सिर पर पैर रखकर अपने-अपने बिलों की ओर भाग खड़े हुए।

सीख - योजना बनाने का कोई औचित्य नहीं, यदि उसे लागू न किया जा सके।

शेर और चूहा | Sher Aur Chuha Ki Kahani

जंगल का राजा शेर खा-पीकर आराम से एक पेड़ की छाँव में सो रहा था. तभी कहीं से एक नटखट चूहा वहाँ आ पहुँचा और खेलने लगा. खेलते-खेलते वह शेर के ऊपर चढ़ गया.

कभी वह शेर की पीठ पर दौड़ता, तो कभी सिर पर चढ़ जाता. कभी वह उसके कान पर झूलता, तो कभी पूंछ से खेलता. उसे बड़ा मज़ा आ रहा है और उसकी उछल-कूद बढ़ती जा रही थी.

नटखट चूहे की धमा-चौकड़ी से शेर की नींद टूट गई. आँख खोलकर उसने देखा कि एक छोटा सा चूहा उसके ऊपर खेल रहा है. उसे बहुत गुस्सा आया और उसने चूहे को अपने पंजे में दबोच लिया.

शेर के पंजे में आते ही चूहे डर गया और थर-थर कांपने लगा. शेर बोला, “बदमाश चूहे, तेरी इतनी हिम्मत की तू जंगल के राजा शेर की नींद में खलल डाले. अब तेरी खैर नहीं. मरने के लिए तैयार हो जा. अब मैं तुझे मारकर खा जाऊंगा.”

मौत सामने देख चूहा गिड़गिड़ाने लगा, “वनराज, मुझे क्षमा कर दें. मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई. मुझ जैसे छोटे से प्राणी को खाकर आपको क्या मिलेगा? आपका पेट तो भर नहीं पायेगा. कृपा कर मुझे छोड़ दीजिये. अवसर आने पर मैं अवश्य आपके काम आऊंगा.”

चूहे की बात सुनकर शेर हँसने लगा और बोला, “मैं जंगल का राजा हूँ. मुझसे बलशाली इस पूरे जंगल में कोई नहीं. तू छोटा सा चूहा मेरे क्या काम आएगा? लेकिन फिर भी मैं दया करके तुझे प्राणदान देता हूँ. मेरी नज़रों से दूर हो जा और आइंदा कभी मेरी नींद में खलल मत डालना.”

चूहा धन्यवाद कहकर वहाँ से चला गया.  

कुछ दिन बीते. एक दिन शेर जंगल में शिकार के लिए घूम रहा था कि वह शिकारी द्वारा बिछाए जाल में फंस गया. उसने बहुत प्रयत्न किया, किंतु जाल से बाहर नहीं आ पाया. वह मदद के लिए दहाड़ने लगा.

शेर की दहाड़ वहाँ से गुज़र रहे एक चूहे के कानों में पड़ी. यह वही चूहा था, जिसे शेर ने दया कर प्राणदान दिया था. चूहे दहाड़ की दिशा में गया, तो शेर को जाल में फंसा हुआ पाया. उसने फ़ौरन अपने नुकीले दांतों से जाल काट दिया. शेर आज़ाद हो गया.

उसने चूहे को धन्यवाद दिया, तो चूहा बोला, “वनराज, आप शायद मुझे भूल गए हैं. मैं वही चूहा हूँ, जिसे अपने प्राणदान दिया था. मैंने आपको कहा था कि किसी दिन मैं अवश्य आपके काम आऊंगा. देखिये आज मैं आपके काम आ ही गया.”

शेर को वह दिन याद आ गया और उस दिन की अपनी सोच पर बहुत पछतावा हुआ कि जिस चूहे को उसने तुच्छ समझा था, उसी की सहायता से वह शिकारी से बच पाया है.

सीख 

१. बाहरी स्वरुप देखकर किसी की योग्यता का आंकलन नहीं करना चाहिए.

२. उपकार कभी व्यर्थ नहीं जाता. किसी न किसी रूप में उसका फ़ल अवश्य प्राप्त होता है.

चूहे बिल्ली की कहानी

रामपुर के सेक्टर सिक्स मकान नंबर 8 में अभी-अभी एक फैमिली शिफ्ट हुई उस फैमिली ने प्यारी सी सफेद रंग की बिल्ली पाल रखी थी, जिसका नाम उन्होंने मिनी रखा था। वे मिनी का बहुत ख्याल रखते थे, इसलिए वह हट्टी कट्टी तंदुरुस्त और सुंदर लगती थी।

मकान नंबर 8 के पास ही एक पेड़ के नीचे मुन्ना चूहा अपनी फैमिली के साथ रहता था। मुन्ना बहुत ही बुद्धिमान था। मुन्ना अपने फैमिली मेंबर्स की सुरक्षा के लिए कड़ा इंतजाम किया होता है। मुन्ना की फैमिली बहुत बड़ी थी। इसलिए उसकी फैमिली के कुछ चूहे घर के बाहर पहरा देते और कुछ जो है, खाना लेने जाते थे।

जब मुन्ना चूहा और उसके फैमिली मेंबर्स ने अपने बील के पास वाले मकान में एक बिल्ली को देखा तो वे सब बहुत डर गए।मुन्ना के परिवार वालों ने मुन्ना को वह जगह छोड़ने की सलाह देते हैं, और मुन्ना से कहते हैं, कि चलो हम कहीं और जाकर अपना घर बनाएंगे। यहां पर हम सभी सेफ नहीं है। यह बिल्ली कभी भी हमें मार कर खा सकती है।

मुन्ना इस बात से सहमत नहीं होता है। और वह अपने घर वालों को समझाता है, कि हमें इससे अच्छा घर नहीं मिल सकता है। हमारे घर के पास ही हमें खाना पानी आसानी से मिल जाता है। कुछ चूहे फिर से मुन्ना से कहते हैं, कि हम इस बिल्ली को नहीं मार सकते वह बहुत ही खूंखार और डरावनी है। उसे देख कर तो लगता है, कि वह 10-10 चूहे का शिकार यूं ही आसानी से कर लेती होगी।

अरे आप सभी चिंता मत कीजिए। मैं हूं ना।

मेरे पास एक अच्छा प्लान है। मेरे इस प्लान के जरिए हम उस बिल्ली को यहां से भगा देंगे या फिर ऐसा सबक सिखाएंगे, कि दोबारा यह बिल्ली हमें तो क्या किसी और चूहे को परेशान नहीं करेगी।

दूसरे दिन मुन्ना और उसके 2 साथी खाना लेने के लिए अपने घर से बाहर आते हैं। वे अभी थोड़ी ही दूर गए थे, कि मिनी ने मुन्ना और उसके दोनों साथियों का पीछा करना शुरू कर दिया। मुन्ना और उसके दोनों साथियों ने अपनी जान बचाने के लिए बहुत तेजी से भागना शुरू करते हैं। वे तीनों बहुत मुश्किल से अपनी जान बचाते हैं।

जब वे तीनों चूहे मिनी के हाथ नहीं आते हैं, तो मिनी पंजे से अपने नाखून बाहर निकालते हुए गुस्से से दीवार को खरोचती है। और चिल्लाते हुए कहती है, एक दिन मैं तुम सबको खा जाऊंगी।

मुन्ना के घर पर सभी चूहे बहुत डर जाते हैं। कुछ चुहिए तो रोने भी लगती है। मुन्ना सभी को चुप कराता है और सभी से कहता है, कि अगर हम सभी मिल जाए तो यह बिल्ली हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। हम सभी मिलकर इस बिल्ली को यहां से खदेड़ सकते हैं, और मजे से अपनी जिंदगी बिता सकते हैं।

उस हादसे के बाद मुन्ना सभी को ट्रेनिंग देना शुरू करता है। सभी चूहे अपना अपना काम खत्म करने के बाद मुन्ना से अपने बचाव के लिए ट्रेनिंग लेते हैं। सभी चूहे एकजुट होकर ट्रेनिंग लेते हैं। इतनी एहतियात के बावजूद भी सभी चूहों को बिल्ली का डर बना रहता था, कि पता नहीं कब मिनी बिल्ली उन पर झपट्टा मारे और उन्हें चट कर जाए।

अगले दिन सुबह वे सभी चूहे मुन्ना चूहे के साथ मिलकर घर से बाहर जाने के लिए प्लान बनाते हैं। प्लान के अनुसार दूसरे दिन सुबह मुन्ना चूहा और उसके 2 साथी चूहे फिर से खाना लेने के लिए अपने घर से बाहर निकलते हैं। कुछ देर चलने के बाद इस बार भी मिनी बिल्ली उनके पीछे लग जाती है।

थोड़ी देर के बाद एक चूहा दाएं हाथ की तरफ मुड़ जाता है, दूसरा चूहा बाएं हाथ की तरफ मुड़ जाता है और मुन्ना आगे जाकर सीधे खड़े हो जाता है।

अब वे तीनों चूहे एक-एक करके मिनी बिल्ली को आवाज देते वे कहते हैं। ए मोटी बिल्ली इधर आ देख मैं दाएं साइड खड़ा हूं आ मुझे पकड़।

जैसी ही मिनी दाएं तरफ चूहे को पकड़ने के लिए दौड़ती है, वैसे ही बाए गली में गया हुआ चूहा मिनी को आवाज लगाता है और कहता है खा खा के मोटी हो गई है मुझे पकड़ कर दिखा अगर तुझ में दम है तो।

मिनी राइट साइड जाना छोड़कर अब लेफ्ट साइड में खड़े चूहे की तरफ भागती है। अभी मीनिंग भागना शुरू हुई की होती है कि मुन्ना चूहा जोर से आवाज लगाते हुए कहता है, ए मिनी अगर तुझ में थोड़ा भी दम है तो आप और आकर मुझसे लड़ाई कर।

वे तीनों एक एक करके मिनी बिल्ली को बार-बार आवाज लगा रहे थे। उनको पकड़ने के चक्कर में मिनी बहुत थक जाती है। मिनी बिल्ली के हाथ में एक भी चूहा नहीं आता। बेचारी मिनी बिल्ली बहुत उदास हो जाती है।

थकने के वजह से मिनी बिल्ली को नींद आ जाती है और उसे सपने में मुन्ना चूहा और उसके परिवार वाले नजर आते हैं। मिनी बिल्ली सपने में देख रही थी, कि मुन्ना चूहा और उसके परिवार वालों को खा रही है। मिनी बिल्ली के मुंह में पानी आ जाता है। और वह फिर से उठ खड़ी होती है। मिनी बिल्ली अपने आप से कहते हुए आगे बढ़ती है, आज तो पहले में जी भर कर अपनी पेट पूजा करूंगी और उसके बाद ही आराम करूंगी। आज मुन्ना चूहा और उसके साथियों को नहीं छोडूंगी उन्होंने मुझे बहुत परेशान किया है। यह कहते हुए मिनी बिल्ली मुन्ना चूहा के घर के पास आ जाती है।

इधर मुन्ना चूहा अपने साथियों के साथ मिलकर मिनी बिल्ली को परेशान करने वाली स्टोरी बताता रहता है। इतने में मिनी बिल्ली मुन्ना के पीछे आकर खड़ी हो जाती है, और कहती है मुझे तुम लोगों ने बहुत परेशान किया है, अब आज मैं किसी को नहीं छोडूंगी। मुन्ना बिना डरे हुए सीटी बजाता है और जोर से चिल्ला कर कहता है, प्लान नंबर दो।

जैसे ही सभी चूहे मुन्ना की आवाज सुनते हैं, तो वह सभी मिनी को चारों तरफ से घेर कर खड़े हो जाते हैं। सभी एक-एक कर बिल्ली से कहते हैं, बताओ आज तुम किसे खाना पसंद करोगी मुझे खा लो ?

दूसरा वाला नहीं नहीं मुझे खा लो। एक एक कर सभी मिनी बिल्ली को लालच देते रहते हैं। इधर मिनी बिल्ली मन ही मन बहुत खुश हो रही थी, उसकी आंखों में खुशी साफ नजर आ रही थी। मुन्ना और उसके कुछ साथी चुपके से अपने घर के अंदर जाकर बड़ी सी रस्सी लेकर आते हैं और धीरे-धीरे मिनी बिल्ली के चारों पैरों को रस्सी से बांध देते हैं।

जैसे ही मिनी बिल्ली का पैर रस्सी से बनता है, वह धड़ाम से नीचे गिर जाती है। उस रस्सी का एक और टुकड़ा निकालकर मिनी बिल्ली का मुंह भी बांध देते हैं। अब तो बेचारी मिनी बिल्ली बेबस हो कर एक कोने में पड़ी रहती है। ना तो वह कुछ बोल सकती थी और ना ही अपने घर जा सकती थी।

मुन्ना चूहा मिनी से कहता है, हां तो मिनी बिल्ली बताओ क्या आज के बाद तुम हमें मारोगी ?

देख लिया ना तुमने हमें सताने का अंजाम क्या होता है ?

अब तुम अपने मुंह से बोलो कि आज के बाद तुम हमें कभी भी परेशान नहीं करोगी।

तुम्हें तुम्हारे मालिक जो भी देंगे उसे तुम चुपचाप खाओगे और हमें हमारे घर के लिए खाना इकट्ठा करने के समय पर तंग नहीं करोगी। बिल्ली का तो मुंह बंद रहता है, इसलिए वह बोल नहीं पाती है। बस अपना सीर हां में हिलाती है।

मुन्ना चूहा साहस करके बिल्ली के पास जाता है और उसके मुंह में बंधी हुई रस्सी को हटाता है।

मुन्ना चूहा मिनी बिल्ली को समझाते हुए कहता है, कि तुम्हारी मालकिन तुम्हें रोज लजीज खाना खाने को देती है तुम्हारा मनपसंद मछली भी देती है और साथ ही साथ तुम्हें खूब सारा दूध भी देती है। उसके बावजूद भी तुम हम चूहों को खाना चाहती हो। अगर तुम्हें इस बंधन से आजाद होना है, तो तुम्हें हम सभी से वादा करना होगा, कि तुम आज के बाद मेरे परिवार वालों को नुकसान नहीं पहुंचओगी। इन्हें नहीं खाओगी ना ही इन्हें तंग करोगी। अगर तुम्हें मेरी सारी शर्तें मंजूर है, तो ही मैं तो तुम्हें इस बंधन से आजाद करूंगा । नहीं तो पड़ी रहो यहीं पे सड़ते हुए।

मिनी बिल्ली रोते हुए कहती है, आज के बाद मै तुम लोगों को कभी भी नहीं सताऊंगी ना ही तुम्हें खाऊंगी। मुझे माफ कर दो और मुझे जल्दी से खोलो ताकि मैं अपने घर वापस जा सकूं।

मिनी बिल्ली जैसे ही बंधन से आजाद होती है, वैसे ही वह दुम दबाकर अपने घर की ओर भाग जाती है। अब मुन्ना और उसके दोस्त आराम से अपने घर से बाहर निकलते हैं और मजे से गाना गाते हुए खाना ढूंढते हैं।

सीख - एकता में बहुत शक्ति होती है। जो काम हम अकेले नहीं कर सकते, वह काम हम सभी आसानी से मिलकर पूरा कर सकते हैं।

बिल्ली के गले में घंटी

एक शहर में एक बहुत बड़ा मकान था. उस मकान में चूहों ने डेरा जमा रखा था. जब भी मौका मिलता वे अपने-अपने बिलों से निकलते और कभी खाने की चीज़ों पर अपना हाथ साफ़ करते, तो कभी घर की अन्य चीज़ें कुतर देते. उनका जीवन बड़े मज़े से बीत रहा था.

इधर मकान मालिक चूहों से तंग आ चुका था. इसलिए वह एक बड़ी सी बिल्ली ले आया. अब वह बिल्ली उसी घर में रहने लगी. बिल्ली के आने से चूहों का जीना हराम हो गया. जो भी चूहा बिल से निकलता, वह उसे चट कर जाती.

चूहों का बिलों से निकलना मुहाल हो गया. वे दहशत के माहौल में जीने लगे. बिल्ली उनके लिए एक बहुत बड़ी समस्या बन गई थी. समस्या से निज़ात पाने का उपाय निकालने के लिए एक दिन चूहों की सभा बुलाई गई.

सभा में सभी चूहे उपस्थित हुए. सभा की अध्यक्षता कर रहे चूहे ने सबको संबोधित करते हुए कहा, “साथियों, आप सब जानते ही हैं कि हम लोग बिल्ली रुपी बहुत बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं. वह रोज़ हमारे किसी न किसी साथी को मारकर खा जाती है. बिलों से निकलना मुश्किल हो गया है. लेकिन इस तरह हम कब तक बिल में छुपकर रहेंगे. भोजन की व्यवस्था के लिए तो हमें बिल से बाहर निकलना ही होगा. यह सभा इसलिए आयोजित की गई है, ताकि इस समस्या का समाधान निकाला जा सके. आपके सुझाव आमंत्रित हैं. आप एक-एक कर अपने सुझाव दे सकते हैं.”

एक-एक कर सभी चूहों से इस समस्या पर अपनी-अपनी सोच के हिसाब से सुझाए दिए. लेकिन किसी भी उपाय पर सब एकमत नहीं हुए.

तब अंत में एक चूहा उठा और चहकते हुए बोला, “मेरी दिमाग में अभी-अभी एक बहुत ही बढ़िया उपाय आया है. क्यों न हम बिल्ली के गले में एक घंटी बांध दें? इस तरह बिल्ली जब भी आस-पास होगी, उस घंटी की आवाज़ से हमें पता चल जायेगा और हम वहाँ से भाग जायेंगे. कहो कैसा लगा उपाय?”  

सारे चूहों को ये उपाय बहुत पसंद आया. वे ख़ुशी में नाचने और झूमने लगे, मानो उनकी समस्या का अंत हो गया हो.

तभी एक बूढ़ा और अनुभवी चूहा खड़ा हुआ और बोला, “मूर्खों, नाचना-गाना बंद करो और ज़रा ये तो बताओ कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा?”

ये सुनना था कि चूहों का नाचना-गाना बंद हो गया. बिल्ली के गले में घंटी बांधना अपनी जान से हाथ धोना था. कोई इसके लिए तैयार नहीं हुआ. सभा में शांति छा गई थी. तभी इस शांति को चीरते हुए बिल्ली के कदमों की आहट सबके कानों में पड़ी और फिर क्या था? सब सिर पर पैर रखकर अपने-अपने बिलों की ओर भाग खड़े हुए.

सीख - योजना बनाने का कोई औचित्य नहीं, यदि उसे लागू न किया जा सके.

नटखट चूहा

एक छोटे से बिल में रहने वाला नटखट चूहा (Natkhat Chuha)  हर समय कुछ न कुछ शरारतें करने मचलता रहता था. लेकिन बहुत दिनों से बारिश होने के कारण वह अपने बिल से बाहर नहीं निकल पा रहा था.

जिस दिन बारिश रुकी, उसने सोचा, “इतने दिन बिल में घुसे-घुसे मेरा मन उकता गया है. आज तो मैं शहर जाऊंगा और खूब घूमूंगा.”

वह झटपट तैयार हुआ और शहर की ओर निकल पड़ा. मस्ती में डूबा चूहा शहर में घूम रहा था. घूमते-घूमते वह शहर के बाज़ार में पहुँच गया. वहाँ उसे कपड़े की एक बड़ी सी दुकान दिखाई पड़ी. वह दुकान में घुस गया.

जब दुकानदार ने चूहे को देखा, तो बोला, “अरे चूहे, तू कैसे मेरी दुकान में घुस गया? चल भाग यहाँ से.”

चूहा बोला, “मुझे एक टोपी सिलवानी है. उसके लिए मैं कपड़ा ख़रीदने आया हूँ.”

उसकी बात सुनकर दुकानदार हँसते हुए बोला, “तेरा दिमाग तो ठिकाने पर है. तू चूहा होकर टोपी पहनेगा..हा…हा…हा…ध्यान से सुन, मैं चूहों को कुछ नहीं बेचता. मेरा समय बर्बाद मत कर और भाग यहाँ से.”

चूहे को गुस्सा आ गया. वह चिल्लाकर बोला, “तुम मुझे कपड़ा बेच रहे हो या नहीं?”

“नहीं” दुकानदार ने उत्तर दिया.

“रातों रात मैं आऊँगा.

अपनी सेना लाऊँगा.

तेरे कपड़े कुतरूँगा.” चूहा गाते हुए दुकानदार से बोला.

चूहे गाने के अर्थ समझकर दुकानदार डर गया और उसे रेशमी कपड़ा देकर बोला, “चूहे भाई, मेरे दुकान के कपड़े मत कुतरना. मेरा धंधा बर्बाद हो जायेगा.”

चूहे ने रेशमी कपड़ा लिया और नाचते-गाते दुकान से बाहर निकल गया. थोड़ी ही दूर पर दर्जी की दुकान थी. वह वहाँ पहुँचा और दर्जी से बोला, “दर्जी भाई, इस कपड़े से एक अच्छी सी टोपी सिल दो.”

चूहे हो देखकर दर्जी बोला, “देखता नहीं मेरे पास बहुत काम है. तेरी टोपी मैं कब सिलूं? इतना समय नहीं है मेरे पास. चल भाग जा…मेरा समय बर्बाद कर.”

चूहे को गुस्सा आ गया. वह चिल्लाकर बोला, “तुम मेरी टोपी सिलते हो या नहीं.”

“नहीं सिलता.” दर्जी भी चिल्लाकर बोला.

“रातों रात मैं आऊँगा.

अपनी सेना लाऊँगा.

तेरे कपड़े कुतरूँगा.” चूहा गाने लगा.

चूहे का गाना सुनकर दर्जी डर गया और उससे कपड़ा लेकर वह टोपी सिलने लगा. थोड़ी ही देर में एक सुंदर टोपी तैयार थी. चूहे ने टोपी पहनी और आईने में ख़ुद को देखा. टोपी सुंदर लग रही थी, लेकिन सादी थी. चूहे ने सोचा कि इसमें चमकीले सितारे लगवाऊँगा, तो यह और ज्यादा सुंदर लगने लगेगी.

वह दर्जी की दुकान से निकला और सितारों की दुकान खोजने लगा. थोड़ी ही दूर पर एक छोटी सी सितारों की दुकान थी. नटखट चूहा उसमें घुस गया. दुकान के अंदर जाकर वह बोला, “भैया, मुझे इस टोपी में चमकीले सितारे लगवाने है. अपनी दुकान के सबसे सुंदर और चमकीले सितारे दिखाओ.”

टोपी पहने हुए चूहे को देखकर दुकानदार जोर से हँसा और बोला, “तेरे लिए ऐसी ही टोपी ठीक है. मैं तुझे सितारे नहीं दूंगा. भाग यहाँ से.”

“तुम मुझे सितारे देते हो या नहीं.” चूहा गुस्से में बोला.

“नहीं” दुकानदार बोला.

“रातों रात मैं आऊँगा

अपनी सेना लाऊँगा

सारे सितारे बिखेरूँगा.” चूहे ने गाना गया.

सितारे बिखेरने की बात सुनकर दुकानदार डर गया और बोला, “अरे चूहे भाई, क्यों नाराज़ होते हैं? मैं तुम्हें अभी सितारे दिखाता हूँ. जो सितारे तुम्हें पसंद हो, उसे तुम्हारी टोपी में टांक भी देता हूँ.”

कुछ ही देर में चूहे की टोपी पर चमकीले सितारे लग गए. जब उसने टोपी पहनकर ख़ुद को आईने में देखा, तो ख़ुशी से झूमने लगा. वह ख़ुद को राजा से कम नहीं समझ रहा था.

सितारों की दुकान से बाहर निकलने के बाद वह सोचने लगा, “मैं इस सुंदर टोपी में राजा लग रहा हूँ. ऐसा करता हूँ कि राजा के पास जाता हूँ और उन्हें अपनी टोपी दिखता हूँ.”

वह कूदते-फांदते राजमहल को ओर जाने लगा. राजमहल पहुँचकर वह चमकीली टोपी के साथ तनकर राजा के सामने खड़ा हो गया.

राजा उसे देखकर हैरत में पूछा, “तुम यहाँ क्या कर रहे हो?”

चूहा बोला, “महाराज! आज ही मैंने ये टोपी सिलवाई है. आपको दिखाने आया हूँ. आप बताइये कि इस टोपी में मैं कैसा लग रहा हूँ?”

“तुम तो इसमें बहुत जंच रहे हो. एकदम राजकुमार लग रहे हो.” राजा ने उत्तर दिया.

चूहा ख़ुश हो गया और बोला, “ऐसी बात है, तो राजसिंहासन से उतरो. मैं उस पर बैठूंगा.”

चूहे की बात पर राजा जोर-जोर से हँसने लगा. फिर बोला, “अरे चूहे, मैं इस राज्य का राजा हूँ. इस राजसिंहासन पर मैं ही बैठूंगा, कोई चूहा नहीं.”

चूहा तैश में आकर बोला, “तुम इस सिंहासन से उतरते हो या नहीं.”

सैनिक चूहे को पकड़ने के लिए जैसे ही आगे बढ़े, चूहा फुदककर दूसरी ओर भाग गया. सैनिकों नटखट चूहे को पकड़ने के लिए उसके पीछे बहुत भागे, लेकिन वो उनकी पकड़ में नहीं आया. जब वे थक-हार गए, तो चूहा राजा के सामने तनकर खड़ा हो गया और बोला –

“रातों रात को मैं आऊँगा

अपनी सेना लाऊँगा

तेरे कान कुतरूँगा.”

चूहे की बात सुनकर राजा डर गया. वह सोचने लगा, “चूहे की सेना तो पूरे राजमहल को तहस-नहस कर देगी.”

चूहा चिल्लाया, “सिंहासन से उतरते हो या नहीं.”

राजा डर के मारे तुरंत सिंहासन से उतर गया और बोला, “मैं तो सिंहासन से उतर गया, अब तुम जितनी देर चाहो इस पर बैठो.”

राजा के उतरते ही चूहा मज़े से सिंहासन पर बैठ गया. रात भर वह सिंहासन पर बैठकर आराम करता रहा. फिर उठकर ख़ुशी में नाचता-गाता अपने दोस्तों के पास चला गया. दोस्तों के बीच पहुँचकर उसने अपनी सुंदर चमकीली टोपी दिखाई और दिन भर का किस्सा उन्हें सुनाया.

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