हेलो, आज की इस पोस्ट में हम आपके साथ कब्रिस्तान की कुछ डरावनी कहानियाँ यर करने जा रहे है। यह कहानियाँ बहुत डरावनी है। अगर आपको भी डरावनी कहानियाँ पसंद है। तो आपको यह कब्रिस्तान की कहानियाँ पसंद आएगी।

कब्रिस्तान की डरावनी कहानियाँ

Cemetery Horror Stories in Hindi List

कब्रिस्तान में घाटित एक सच्ची घटना

कब्रिस्तान की भटकती रूह

कब्रिस्तान से आया पिज़्ज़ा का आर्डर

भूतिया रास्ता

कब्रिस्तान में मिला दोस्त

कब्रिस्तान में घाटित एक सच्ची घटना

डेहरा कब्रिस्तान हिंदुस्तान के सबसे हॉन्टेड जगह में से एक हैं कहते हैं कोई भी रात के 11 बजे के बाद उस कब्रिस्तान के आगे से नहीं जा सकता। उसके अंदर से जाना तो दूर की बात हैं कोई उस कब्रिस्तान के आगे से भी नहीं जा सकता।

इस कब्रिस्तान की दीवारे लगभग 1 किलोमीटर तक फैली हुई हैं और कोई भी रात के 11बजे के बाद वहाँ से जाता हैं तो वो जिन्दा नहीं बचता। कहते हैं वहाँ जितनी भी बुरी शक्तियां हैं उनकी वो दीवारे एक सीमा हैं। मतलब कोई भी बुरी शक्ति उस कब्रिस्तान की दीवारों से आगे नहीं जा सकती। अगर कोई भी रात के 11 बजे के बाद वहाँ से जाता हैं तो उस बुरी शक्ति उसे बस उस कब्रिस्तान की सीमा तक ही मर सकती हैं ना तो उसे पहले ना तो उसके बाद।

आज की जो यह कहानी हैं वो डेहरा कब्रिस्तान के पास के ही गाँव में रहने वाले मुकेश जी के साथ घाटित घटना हैं। अब यह कहानी में उन्ही के शब्दों में जारी रखूँगा।

मेरा नाम मुकेश हैं मैं टांगा चलाने वाला हूँ (टांगा एक प्रकार की गाड़ी जिसमें एक घोड़ा जोड़ा जाता है।) वो रविवार का दिन था शाम के 7बजे थे और मैं अपने घर पर था तभी वहाँ राजू आया। राजू हमारे गाँव का तो नहीं था पर उसे कुछ खेत हमारे ही गाँव में थे जिसके करण वो यहाँ आते रहता था। राजू ने मेरे पास आकर कह की उसकी घाँस उसके खेत में कटी रखी हैं और उसकी घाँस को उसके घर तक झोड़ना था। उसका गाँव हमारे गाँव से लगभग 5 या 6 किलोमीटर की दुरी पर ही होगा। मैंने भी हाँ बोल दिया और यह सोचा की रात के 11 बजे से तो पहले ही आ जाऊंगा।

मैं आ भी जाता पर घाँस लोड करने में काफ़ी समय लग गया था। इसलिए मुझे राजू के गाँव पूंछने में ही 10 बज गए थे और घाँस टांगे से नीचे रखने में भी काफ़ी समय लग गया था। और इसलिए ही वजह से राजू मुझे बार बार अपने ही घर में रुकने को बोल रहा था क्यूंकि उसके गाँव से हमारे गाँव को बस एक रास्ता था जो उस ही डेहरा कब्रिस्तान के आगे से होकर जाता था। एक बार को तो मेरा दिल भी राजू की बात मान जाने को कर रहा था। पर मैं घर नहीं गया तो मेरे घर वाले परेशान हो जाते ना मेरे पास कोई फ़ोन था और ना ही मेरे घर वालो के पास। मेरे घर में मेरे दो छोटे छोटे बच्चे मेरी बीवी और मेरे माता पिता थे मुझे उन सबकी चिंता ने आने पर मजबूर कर दिया था।

और अब मैं उस ही कब्रिस्तान के पास आ गया हूँ मैंने अपनी घाटी में समय देखा रात के 11 बज चुके थे। पहले तो मैंने लौट जाने को सोचा। फिर मैंने किसी तरह हिम्मत करी और आगे बढ़ा। मैं अभी कुछ ही आगे गया था। तभी मुझे ऐसा लगा कोई मेरे टांगे पर आकर बैठ गया हो। मैंने एकदम से पिछे मूड कर देखा पर वहाँ कोई नहीं था। पर मुझे अभी भी यह लग रहा था की कोई मेरे पिछे बैठा हो। फिर जब मैं थोड़ा और आगे बढ़ा तो मेरे टांगे में जैसे वजन बढ़ गया हो। मैं जैसे जैसे आगे बढ़ रहा था टांगे में भी वजन बढ़ते जा रहा था। अब पिछे इतना वजन हो गया था की मेरा टांगा आगे से थोड़ा थोड़ा उठने लगा था और मेरा घोड़ा भी अब लगड़ा लगड़ा कर चल रहा था। मैं अब समझ गया था। की वो इसमें आ गई हैं और अब सायद मैं ना बच पाउँगा। फिर मुझे अपनी मम्मी की बात याद आई उन्होने मुझे बताया था की यह भूत और आत्मा आग से थोड़ा डरते हैं।

तभी मैंने अपने जैब में रखी बीड़ी निकाली और मैं बीड़ी पिने लगा। जैसे ही मेरी एक बीड़ी गत्म होती मैं दूसरी जला लेता ऐसा करते करते मेरे पूरी बीड़ी गत्म हो गई। टांगे मैं इतना वजन हो गया था की टांगा बहुत धिरे धिरे चल रहा था। इसलिए मैं अभी कब्रिस्तान को आधा भी पार नहीं कर पाया था। सर्दी का समय था इसलिए मैंने काफ़ी कपडे पहने थे। जैसे ही मेरी बीड़ी गत्म हुई तो मैंने जो कंबल उठा हुआ था उसे उतार कर मैंने उसमे आग लगा दी और कंबल की आग गत्म होने ही वाली थी तभी मैंने अपना स्वेटर निकाल कर जला दिया और स्वेटर की आग गत्म होती उसे पहले मैंने अपनी कमीज निकाल कर जला दी। जान बचाने के लिए कुछ तो करना ही था। इसलिए मैं अपने शरीर में पहने सभी कपड़ो को जला रहा था। ऊपर के सभी कपडे गत्म होने पर मैंने अपने पैजामा को उतर कर उसमे भी आग लगा दी।

अब बस मेरा एक कच्चा ही बचा था। उसे पहले मेरे पैजामे की आग गत्म होती उसे पहले ही अब कब्रिस्तान की दीवारे गत्म होने वाली थी जैसे ही मैंने कब्रिस्तान पार करा तो देखा एक बड़ी ही भयानक सी औरत मेरे टांगे से नीचे उत्तरी और उनसे कहा - आज तो बच गया तू पर आगली बार आया तो नहीं बचेगा - इतना बोलकर वो वही खड़ी रही और मैं अपने घर की ओर चला आया उस दिन से मैं कभी उस रास्ते से रात में नहीं जाता 

कब्रिस्तान की भटकती रूह

मेरा नाम भावेश लुहारी है और मैं खालवा जाती हूं। मेरा जन्म तो बक्करवाला गांव में हुआ था, पर अब मैं विचारों में रहता हूं। करीब 6 महीने पहले की बात है। मेरी नौकरी छूट गई थी और मेरे पास खाने पीने के पैसे भी नहीं बचे थे। हालत इतनी बुरी थी कि

कई जगह से उधार लेकर खाने पीने का खर्चा चलाना पड़ रहा था। उन दिनों कुछ भी करके मैं पैसे कमाने के लिए तैयार था। पैसों की तंगी की वजह से मैं इतना डिप्रेस था कि सही गलत का फर्क भी मिट चुका था। अपनी उस कंगाली के दौर में एक बार मौत के मुंह में मैं जा पहुंचा था।

दोस्तों करीब छह महीने पहले की बात है। मेरा पड़ोसी मनसुख मेरे घर आया। उसने मुझसे कहा कि यार पैसे कमाने का एक आइडिया है। मैंने कुछ भी पूछे बिना मनसुख को हां बोल दिया। मैंने उससे कहा कि काम कुछ भी हो पैसे मिलने चाहिए। अच्छाई बुराई। भाड़ में जाए।

पेट में आग लगती है तो रोटी से ही आग बुझती है। आदर्शों से नहीं। उस समय शायद मेरा दिमाग खराब था। मनसुख ने कहा कि आज रात 12 बजे तैयार रहना। तीन घंटे का काम है और चार हजार रुपये मिलेंगे। आधे तेरे और आधे मेरे। मैंने डील Done कर दी।

उस रात मनसुख रिक्सा लेकर ठीक साढ़े 11 को मेरे घर पर पहुंच गया। मैं भी कुछ भी सोचे बिना उसकी रिक्सा में सवार हो गया। मैंने देखा कि रिक्सा में फावड़ा, कुल्हाड़ी और अन्य खुदाई के औजार थे। मैंने हंसते हुए मनसुख को बोला कि भाई किसी का खून तो नहीं करने जाना है।

उस पर मनसुख ने जवाब दिया कि नहीं रे चिंता मत कर मैं हूं ना कोई लफड़ा नहीं होने वाला है। आपने वो तो केवल पैसे से मतलब हैं। मैंने भी सोचा कि काम कुछ भी हो मुझे तो पैसे की बहुत ही ज्यादा जरूरत हैं । इसलिए मुझे पैसे के लिए कुछ भी करना पड़े तो मैं करने को तैयार हूं।

थोड़ी ही देर में मनसुख ने रिक्शा एक कब्रिस्तान के पास रोक दिया। फिर मुझसे कहा कि चलो फावड़ा और कुल्हाड़ी ले लो हमें अंदर जाना है। अब मेरे को समझ में नहीं आ रहा था। मैंने सोचा कि आखिरकार कब्रिस्तान के अंदर फावड़ा कुल्हाड़ी ले करके हम क्या करेंगे।

लेकिन उसके बावजूद भी हम दोनों दीवार कूदकर के अंदर चले गए। मुझे अब काफी डर लग रहा था। मगर एक एक ताजी दफन की हुई कब्र पर पहुंच जाता है और वहां जाकर रुक जाता है। रुकने के बाद वो मुझे ऐसी नजरों से देखता है कि जैसे मैंने कोई अपराध कर दिया हो।

मैंने बोला भाई मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो तो उसने कहा कि इसे खोदना है। उसकी बात सुनकर मेरे तो होश उड़ गए। मैं वहां से भागा और कब्रिस्तान से बाहर आ गया। रिक्शे के पास खड़े होकर मनसुख ने मुझे समझाया। सीधे कमाई का कोई एक दिन में चार हजार नहीं देता है।

अगर तुझे यह काम नहीं करना है तो यहां से निकल जा। मैं किसी और को ढूंढ लेता हूं नहीं तो अकेले ही जुटा रहूंगा। कुछ देर मैंने सोचा फिर मुझे खयाल आया कि वैसे भी जो मर चुका है वो तो मर ही चुका है। उसकी लाश का कौन क्या करेगा।

उससे अब किसी को क्या फर्क पड़ेगा। वैसे भी अगर कुछ कर के पैसे नहीं कमाए तो मेरी लाश भी किसी गटर के पास ही पड़ी होगी। थोड़ी देर में हिम्मत करके मैं उस घिनौने और गलत काम के लिए राजी हो गया। कुछ ही देर में हमने उस कब्र को खोद कर लाश बाहर निकाल ली।

वह एक अधेड़ उम्र की एक औरत की ताजी लाश थी जिसे शायद उसी दिन दफनाया गया होगा। उस लाश की बदबू सिर फाड़ देने वाली थी। हमने जैसे तैसे करके उसे रिक्शे में डाला और खाली कब्र मिट्टी से ढक डाली। उसके बाद जल्दी शाम दोनों भाग कर रिक्शा की ओर आए।

रिक्शा के अंदर देखा तो हमारी जान ही निकल गई। वहां रिक्शा से लाश गायब थी। यह अजीब घटना देखकर मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए। मैंने मनसुख को बोला कि यार बात चलते हैं। मनसुख भी बोला हां यार ये तो कुछ भूतप्रेत का मामला लगता है।

हम दोनों फौरन उस जगह से भागने लगे। मनसुख ने फौरन रिक्शा चालू करना शुरू किया पर उसका रिक्शा चालू हो तब तो हम वहां से भागे। अचानक हमारी नजर कब्रिस्तान की ओर गई। हमने देखा कि वह मुर्दा औरत अपने कब्र पर बैठी थी और हमारी ओर देखे जा रही थी।

अंधेरे में साफ तो नहीं दिख रहा था पर पक्का अंदाजा था कि वहां पर वही मिट्टी से लाल कपड़ों वाली औरत थी जिसे हमने खोद कर निकाला था। एक लाश को इस तरह अपनी कब्र पर बैठा देख। हमारी तो सिट्टी पिट्टी गुम हो चुकी थी। हमारी तो हालत खराब हो गई थी।

हम दोनों ने रिक्सा छोड़ा और वहां से भाग निकले और सुबह उजाला होते ही जब हम वहां पहुंचे तो हमें सब सामान्य दिखा और हम रिक्शा वहां से खीचकर वापस ले आए। उस दिन मैंने कसम खा ली कि मर जाऊंगा लेकिन पैसों के लिए ऐसा खतरनाक और घिनौना काम नहीं करूंगा।

दोस्तो सच्ची घटना है इसलिए इसमें आगे कुछ नहीं हुआ। अगर ये फिल्मी घटना होती तो इसमें दुनिया भर के तामझाम होते, दोस्तों पैसे के लिए या लालच में आकर कभी कोई गलत काम न करें, तब तक के लिए स्वस्थ रहें।

कब्रिस्तान से आया पिज़्ज़ा का आर्डर

ऋषि रात के 10 बजे अपनी बाइक पर बैठ कर अपनी डिवटी ख़तम होने का इंतजार कर रहा था। ऋषि एक फ़ूड डिलीवरी बॉय था । जिसकी डिवटी 11 बजे ख़तम होती थी। ऋषि इंतजार ही कर रहा था। तभी उसके फ़ोन में एक आर्डर आया। आर्डर किसी विनोद कुमार नाम से एक पिज़्ज़ा का आर्डर था और उसके पास के ही रेस्टोरेंट से था। ऋषि जल्दी से रेस्टोरेंट में जाता हैं। और आर्डर लेकर डिलीवरी करने जाने लगता हैं । आर्डर की डिलीवरी रेस्टोरेंट की लोकेशन से पाँच किलोमीटर की दुरी पर थी।

ऋषि 80 की स्पीड से जल्दी से आर्डर की लोकेशन पर पहुंच जाता हैं। लोकेशन एक कब्रिस्तान की थी। लोकेशन पर पहुंच कर ऋषि अपने आप से कहता हैं। - यार गलत लोकेशन ये लोग आर्डर तो कर लेते हैं पर लोकेशन गलत डाल देते हैं - यही सब बोलते हुए ऋषि आर्डर के नीचे दिए नम्बर पर कॉल करने लगता हैं। एक दो ही रिंग में कॉल रिसीव हो जाता हैं कॉल रिसीव होते ही ऋषि बोलता हैं। - हेलो सर मैं ऋषि आपका पिज़्ज़ा का आर्डर लेकर आया हूँ सर आप मुझे अपना सही एड्रेस बता दीजिये वो सर ये GPS मुझे लागत लोकेशन पर ले आया हैं। - ऋषि की बात सुनकर दूसरी ओर वाला आदमी बोलता हैं - आप अभी कहाँ हैं - ऋषि उस आदमी की बात का जवाब देता हैं - मैं अभी कब्रिस्तान के गेट के आगे हूँ GPS मुझे यहाँ लेआया हैं - ऋषि की बात सुन कर वो आदमी बोलता हैं - तुम बिलकुल सही जगह पर हो। तुम कब्रिस्तान का गेट खोलकर अंदर आ जाओ मैं अभी अंदर ही हूँ।

यह सुनकर ऋषि को बड़ा अजीब लगाता हैं। पर वो सोचता हैं - क्या पता ये आदमी कब्रिस्तान का चौकीदार हो। इसलिए तो इतनी रात को भी कब्रिस्तान के अंदर हैं।

ऋषि ठीक हैं सर बोलकर फ़ोन रख देता हैं

ऋषि यही सोच रहा था की वो अंदर जाए या नहीं ऋषि अपने आप से बोलता हैं - नहीं यार मैं आर्डर केंसिल नहीं कर सकता आर्डर केंसिल करा तो फालतू की पैनल्टी लग जाएगी जितना आज काम करा हैं सब देना पड़ जाएगा। ऋषि ना चाहते हुए भी कब्रिस्तान के अंदर जाने लगता हैं। ऋषि कब्रिस्तान के अंदर आ तो गया था पर उसे ना जाने क्यों थोड़ा डर लग रहा था। कब्रिस्तान के अंदर आकर देखता तो उसे वहाँ कोई नहीं दिखता। ऋषि को जब अंदर कोई नहीं दिखता तो वो बोलता हैं। - अरे यार यह चौकीदार का कमरा कहाँ हैं - ऋषि यह पूछने के लिए उस आदमी को फ़ोन करने लगता हैं।

ऋषि जब उस आदमी को फ़ोन करता हैं तो दूसरी ओर से आवाज आती हैं। - आपके द्वारा देईल किया गया नम्बर अमान्य हैं। - ऋषि हैरानी के साथ बोलता हैं - ये कैसे हो सकता हैं अभी तक तो इस ही नम्बर से बात हो रही थी और अब नम्बर गलत बता रहा हैं गैर छोड़ो मुझे क्या कंपनी में बोल देता हो सर कस्टमर का नम्बर नहीं लग रहा और आर्डर केंसिल हो जायेगा और फ्री का पिज़्ज़ा मिल जायेगा। ऋषि जैसे ही अपना फ़ोन कंपनी में लगाने जा रहा था तभी उसका पैर किसी चीज से टकरा जाता हैं और वो नीचे गिर जाता हैं। ऋषि उड़ते हुए अपने फ़ोन की टोर्च जला कर देखने की कोशिश करता हैं की वो किस चीज से टकरा कर गिरा था।

ऋषि जब अपने फ़ोन की टोर्च जलाता हैं तो वो देखता हैं की वो एक क़ब्र से टकरा कर नीचे गिर गया था। और उस क़ब्र पर लिखा था लेट विनोद कुमार जैसे ही ऋषि यह पढ़ता हैं तो उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती हैं। ऋषि डर से कप ही रहा था तभी। उसके पीछे से एक आवाज आती हैं। - हाँ भैया मेरा ही आर्डर हैं मैं ही विनोद कुमार हूँ - ऋषि आवाज सुनकर जैसे ही अपने पीछे मोड़ता हैं। वो देखता हैं उसके पीछे एक 25-26 साल का लड़का खड़ा था। ऋषि उसको देखकर डरे ही जा रहा था। तभी विनोद ऋषि से बोलता हैं - अरे क्या हो गया भाई तुम इतना डर क्यों रहे हो - ऋषि पहले तो कुछ नहीं बोलता फिर डरते डरते बोलता हैं। - वो-वो क़ब्र पर आपका ही नाम लिखा हैं - ऋषि की बात सुनकर वो आदमी बोलता हैं।- अबे भाई क्या एक नाम के और लोग नहीं हो सकते - ऋषि को उसकी बात सही लगती हैं

और वो उसको उसका आर्डर देता हैं और शक करते हुए बोलता हैं। -आप इतनी रात को कब्रिस्तान में क्या कर रहे हैं फिर - ऋषि की बात सुनकर वो आदमी बोलता हैं - मैं यही रहता हूँ - यही बोलकर वो आदमी कब्रिस्तान के ओर अंदर जाने लगता हैं । उस आदमी का ऐसा वैवार देख कर ऋषि को बड़ा अजीब लगता हैं। ऋषि उस आदमी को जाते देख ही रहा था तभी उसके पीछे से एक आवाज आती हैं। - अरे कौन हैं मैं कहता हूँ कौन हैं वहाँ - ऋषि आवाज सुनकर पीछे मूड कर देखता हैं।

वहाँ एक 60-65 साल का आदमी खड़ा था उसके कपडे देख कर लग रहा था वो वहाँ का चौकीदार था। अरे कौन हो बेटा तुम और इतनी रात को इस कब्रिस्तान में क्या कर रहे हो - ऋषि उस आदमी की बात का जवाब देते हुए बोलता हैं। अंकल मैं एक डिलीवरी बॉय हूँ और मैं यहाँ पिज़्ज़ा डिलीवरी करने ही आया था। - ऋषि की बात सुनकर वो चौकीदार बड़ी हैरानी के साथ बोलता हैं - पिज़्ज़ा डिलीवरी करने पर किसको - ऋषि जवाब देता हैं। - यहाँ जो दूसरे चौकीदार हैं ना उनको - चौकीदार ऋषि की बात सुनकर अपनी आँखे बड़ी करते हुए बोलता हैं - दूसरा चौकीदार अरे बेटा ये कब्रिस्तान हैं कोई बैंक नहीं जो दो तीन चौकीदार हो यहाँ बस एक ही चौकीदार हैं वो भी बस दिन के टाइम के लिए वैसे उसने अपना नाम क्या बताया था -

ऋषि झट से बोलता - विनोद कुमार - विनोद कुमार का नाम सुनकर वो आदमी बोलता हैं - वो सामने देख रहे हो वो उसकी ही क़ब्र हैं और अब तुम यहाँ से जल्दी चले जाओ नहीं तो यहाँ कुछ भी हो सकता हैं। ऋषि उस आदमी की बात सुनकर बोलता हैं - कुछ भी अब आप कुछ भी बोलोगे क्या अंकल आज मैं ही मिला क्या आपको डराने के लिए।

चौकीदार अपनी गंभीर आवाज में बोलता हैं - क्या तुमने ये नहीं सोचा की वो आदमी इतनी रात को कब्रिस्तान में क्या कर रहा हैं और वो अब कहाँ गया। - ऋषि चौकीदार को अपने हाथ से इशारा करते हुए बोलता हैं - वो उस ओर गया था पता नहीं अब कहाँ चला गया - यही बोल कर जैसे ही ऋषि चौकीदार की ओर देखता हैं तो चौकीदार वहाँ नहीं था। ऋषि डरते हुए बोलता हैं - अरे ये अंकल कहाँ चले गए अभी तो यही थे। ऋषि सब समझते देर नहीं करता और कब्रिस्तान के बाहर की ओर भागने लगता हैं ऋषि जैसे ही के कब्रिस्तान गेट के पास पूछता हैं तो देखता हैं कब्रिस्तान के गेट में बाहर से ताला लगा था। ऋषि डरा हुआ तो पहले से ही था तभी उसको और डराने के लिए उसके पीछे से एक आवाज आती हैं। - अरे बेटा तुम अभी तक यहाँ से गए नहीं क्या - ऋषि आवाज सुन कर जैसे पीछे मुड़ता हैं तो वो देखता हैं यही चौकीदार उसके सामने खड़ा था पर इस बार वो कुछ अलग लग रहा था। इस बार उसका चेहरा सूखा और सफ़ेद था

वो चौकीदार ऋषि के पास आते हुए बोलता हैं - तुम अभी तक गए नहीं मैंने कहा था ना चले जाओ पर तुम नहीं गए लगता हैं तुम्हे यह कब्रिस्तान पसंद आ गया हैं - यही बोलते हुए वो चौकीदार ऋषि के पास आते जा रहा था। ऋषि का उस चौकीदार को पास आते देखकर ऋषि की सांसे रुकने सी लगी थी। वो चौकीदार जितना पास आते जा रहा था वो उतना ही भयानक होते जा रहा था। चौकीदार ऋषि के पास आ कर बोलता हैं - मैंने कहा था ना तुम यहाँ से चले जाओ पर तुम नहीं गए ना। चलो कोई नहीं अब मैं तो तुम्हे कुछ नहीं करूंगा पर वो तुझे नहीं छोड़ेगी - ऋषि डरते हुए पूछता हैं कौन नहीं छोड़ेगी। -

चौकीदार ऋषि को उसके पीछे देखने का इशारा करता हैं। जैसे ही ऋषि अपने पीछे देखता हैं तो ऋषि को ऐसा लग रहा था जैसे उसका दिल अभी छाती फाड़ कर बाहर आ जायेगा क्यूंकि ऋषि के सामने कोमल खड़ी थी। कोमल को सामने देखकर ऋषि को सब समझ आ गया था उसके साथ यह सब क्यों हो रहा। कोमल ऋषि की गर्लफ्रेंड थी जिसे ऋषि ने 1 साल पहले पिज़्ज़ा में जहर देकर मार दिया था। और अब कोमल के हाथ में भी एक पिज़्ज़ा का बॉक्स था।

कोमल वो पिज़्ज़ा का बॉक्स ऋषि के पास लाती हैं और बड़े प्यार से बोलती हैं - ये लो ऋषि मैं ये पिज़्ज़ा मैं खाश तुम्हारे ही लिए लई हूँ। - ऋषि जैसे ही उस पिज़्ज़ा के बॉक्स की तरफ देखता हैं तो उसको दिखता हैं उसमे एक हाथ कटा हुआ रखा था। ऋषि जैसे ही उस हाथ को देखता हैं तो उसको ऐसा लगने लगा था जैसे उसका एक हाथ कट गया हो। जैसे ही ऋषि अपने हाथ की ओर देखता हैं तो वो देखता हैं जो उस बॉक्स में हाथ था वो और किसी का नहीं बल्कि उसी का हाथ था। ऋषि अपना हाथ देखकर दर्द से तड़पने लगा था तभी कोमल अपनी ड्रावनी मुस्कान के साथ बोलती हैं - इसे खाओ ऋषि - ऋषि रोते हुए बोलता हैं - मुझे माफ कर दो कोमल मुझसे गलती हो गई - कोमल अपनी गंभीर आवाज में बोलती हैं - मैंने कहा इसे खाओ ऋषि मतलब इसे खाओ । - जैसे ही उस बॉक्स को पकड़ने के लिए ऋषि अपना हाथ आगे करता हैं वो देखता हैं उसका दूसरा हाथ भी कटा हुआ था। ऋषि दर्द और डर से तड़पे जा रहा था और कोमल मुस्कते हुए ऋषि का दिल देखते ही देखते चहती से निकल लेती हैं।

ऋषि ने अपने हाथो से कोमल को जहर दिया था तो उसने सबसे पहले ऋषि के हाथ कटे और फिर उसने कोमल के दिल के साथ खेला था इस लिए कोमल ने उसका दिल ही निकल लिया था।

भूतिया रास्ता

रात के 11 बजे सुनसान सड़क पर एक बाइक रात के सन्नाटे को चिरती चले जा रही थी। दो दोस्त रोहन और मुकेश अपने दोस्त मोहित के घर जा रहे थे। रोहन और मुकेश आज पुरे दो साल बाद अपने दोस्त मोहित से मिलने जा रहे थे ।तभी रोहन मुकेश से बोलता हैं - यार अपने शहर में तो कुछ भी नहीं बदला- फिर मुकेश ने कहा - हाँ यार तुने सही कहा - यही सब बात करते दोनों चले जा रहे थे।

तभी मुकेश ने कहा - यार रोहन रात हो गई हैं मैं तो कहता हूँ वो कब्रिस्तान वाली रोड से मत चलियों यार - फिर रोहन ने कहा - क्यों भाई तुझे डर लगता हैं क्या अरे डर मत मैं हूँ ना तेरे साथ - फिर रोहन की बात सुन कर मुकेश बोलता हैं - ना यार डर की बात नहीं हैं तुझे तो पाता ही हैं वो कब्रिस्तान कितना श्रापित हैं - रोहन निडर लड़का था इसलिए मुकेश की बात सुन कर रोहन बोलता हैं - अरे भाई तू कैसी बात कर रहा हैं मैं तो उसी रास्ते से ही जाऊंगा उस रास्ते से टाइम कम लगेगा - मुकेश जनता था रोहन बहुत जिद्दी हैं वो नहीं मानेगा इसलिए मुकेश कुछ नहीं बोलता और फिर उसके बाद रोहन उस ही रास्ते से अपनी बाइक ले जाने लगता हैं।

ये दोनों कुछ ही आगे गये थे तभी इनकी बाइक झटके देने लगती हैं तभी मुकेश कहता हैं- अरे क्या कर रहा हैं सही से चला भाई- फिर रोहन बोलता हैं - अरे भाई मैं तो सही से ही चला रहा हूँ पर पता नहीं इस बाइक में क्या हो गया हैं - रोहन ने इतना ही कहा था की इनकी बाइक झटके देते-देते थोड़ा आगे जा कर बंद हो जाती हैं। बाइक बंद होते ही रोहन बोलता हैं - अरे ये बाइक कैसे बंद हो गई - फिर मुकेश कहता हैं - अरे यार बंद हो गई तो क्या फिर से स्टार्ट कर - मुकेश के इतना बोलते ही रोहन बाइक फिर से स्टार्ट करने की कोशिश करने लगता हैं।

पर बाइक स्टार्ट नहीं होती तभी मुकेश ने एक ऐसी चीज देख लेता हैं। जिसे देख कर मुकेश बस उसे ही देखे जा रहा था मुकेश को देख कर साफ़ पता चल रहा था की मुकेश ने जो चीज देखी हैं उसे देख कर मुकेश बहुत डर चूका हैं। तभी रोहन की नजर मुकेश पर पड़ी तो उसे ऐसे डरे हुए देख कर रोहन बोलता हैं - अरे अब तुझे क्या हो गया - पर मुकेश कुछ नहीं बोलता बस अपनी ऊँगली से इशारा करते हुए दिखता हैं।

जिस तरफ मुकेश की ऊँगली थी उस ही दिशा में रोहन जैसे ही देखता हैं तो उसे दिखता हैं की उनकी बाइक और कही नहीं बल्कि उस ही कब्रिस्तान के गेट के आगे ख़राब हुई थी।

पर रोहन एक निडर लड़का था इसलिए वो मुकेश से बोलता हैं - अरे भाई तू डर क्यों रहा हैं बाइक इतने समय से घर में ही खड़ी थी इसलिए बाइक बंद हो गई और यार तू अब बाइक से नीचे उतर पहले कोई मकैनिक देखते हैं - रोहन ने इतना ही कहा था तभी मुकेश बोलता हैं - यार वो देख मकैनिक की दुकान - रोहन जैसे ही उस तरफ देखता तो उसे दिखता हैं एक छोटी सी झोपडी बनी थी जिसमे एक पीला वाला बल्प टंगा था और उसमे 45-50 साल का आदमी बैठा था।

फिर उसके बाद वो दोनों अपनी बाइक उस मकैनिक के पास ले जाते हैं और रोहन बोलता हैं - अरे काका देखना तो हमारी बाइक अचानक बंद हो गई देखना तो इसमें क्या हो गया हैं - रोहन की बात सुनकर वो मकैनिक उनकी तरफ देखा हैं और बोलता हैं - अच्छा बेटा तुम कुछ देर यही बैठो मैं अभी देखता हूँ इसमें क्या हुआ हैं - इतना बोलकर वो आदमी बाइक ठीक करने लगता हैं। और रोहन और मोकेश अभी वहाँ बैठे ही थे तभी रोहन बोलता हैं - यार तू यही बैठ मैं अभी एक नम्बर करके आया -

इतना बोलकर रोहन थोड़ा ही आगे जाकर टॉयलेट करने लगता हैं और जैसे रोहन एक नम्बर कर के पीछे मोड़ता हैं वो देखता हैं उसकेपीछे एक आदमी खड़ा था और वो उसे ही देखे जा रहा था। रोहन को ये देख कर बड़ा अजिब लगता पर तभी वो आदमी उससे बोलता हैं - वो जो लड़का जो वहाँ बैठा हैं वो तुम्हारा दोस्त हैं ना - फिर रोहन जवाब देते हुए बोलता हैं - हाँ हैं तो - फिर वो आदमी बोलता हैं - पर तुम्हारा वो दोस्त उस फटी हुई और बंद झोपड़ी के पास बैठ कर क्या कर रहा हैं -

रोहन उसकी बात सुनकर बोलता हैं - बंद झोपडी अरे - इनता बोल कर रोहन पिछे मोड़ता हैं चुप हो जाता हैं क्यूंकि वो देखता हैं जो मकैनिक अभी उनकी बाइक ठीक कर रहा था वो अब वहाँ नहीं हैं। और उसकी दुकान भी बंद थी और मुकेश अभी भी वही बैठा था यह देख कर रोहन बोलता हैं - ये मकैनिक इतनी जल्दी कहाँ गया और इसने अपनी दुकान भी इतनी जल्दी कैसे बंद कर दी - इनता बोल कर रोहन जैसे ही पीछे मोड़ता हैं तो वो देखता हैं जो आदमी अभी तक उसके पास खड़ा था वो आदमी भी अब वहाँ नहीं था।

उस आदमी को वहाँ ना देखकर रोहन बड़ी ही हैरानी के साथ बोलता हैं - अरे ये आदमी कहाँ गया अभी तो यही था - रोहन वैसे तो कभी डरता नहीं था पर आज जो कुछ भी उसने अभी देखा तो उसे देखकर अब वो भी डरने लगा था। फिर उसके बाद रोहन बिना टाइम गवाएं मुकेश के जाता हैं और बोलता हैं - भाई उठ जल्दी उठ और अभी यहाँ से चल - फिर मुकेश बोलता हैं - पर क्यों भाई गाड़ी तो अभी ठीक होने ही वाली हैं - मुकेश के इतना बोलने के तुरंत बाद एक आवाज और आती हैं - अरे क्या हुआ बेटा आपकी बाइक बस ठीक होने ही वाली हैं - ये और किसी की आवाज नहीं बल्कि उसी मकैनिक की आवाज थी।

रोहन जैसे ही अपना सर ऊपर करके देखता हैं तो उसे दिखता हैं वो मकैनिक वही खड़ा था और उसकी दुकान भी खुली हुई थी। रोहन यही सोच रहा था की ये कैसे हो सकता हैं अभी तो यहाँ कोई नहीं था यह सब हो किया रहा हैं यही सब रोहन सोच ही रहा था तभी मुकेश बोलता हैं - अरे तुझे हुआ क्या हैं तू बोलगा भी कुछ - पर रोहन यही सोच रहा था मुकेश को कैसे बताऊं की उसके पिछले 10 मिनट में उसके साथ क्या-क्या हुआ।

पर थोड़ा सोचने के बाद रोहन बोलता हैं - मुकेश तू मेरे साथ एक मिनट के लिए तोड़ा इधर तो आ - इतना बोलकर रोहन मुकेश को तोड़ा साइड में ले जाता हैं और बोलता हैं - यार मुकेश ये जो मकैनिक हैं यह मुझे लगता हैं की भूत हैं - मुकेश रोहन की बात सुनकर हँसने लगता हैं और हँसते हुऐ ही कहता हैं - माना मैं भूत से डरता पर इतना भी नहीं की तू जो कुछ भी बोले मैं उसको मान लू चल अब मज़ाक बंद कर और चल अब गाड़ी के पास ही बैठते हैं - फिर रोहन बोलता हैं - रुक भाई - फिर उसके बाद रोहन उसे सारी बात बताता हैं जो उसके साथ पिछले 10 मिनट में हुई थी। फिट मुकेश रोहन की बात सुन कर बोलता हैं - यार तुझे कोई वैहम हुआ होगा - इनता बोलकर वो वापस गाड़ी के पास जाने लगता हैं।

मुकेश ने रोहन की बात को मज़ाज में ले लिया था इसलिए वो दोनों वही अपनी गाड़ी के पास ही आकर बैठ जाते हैं। पर तभी वो मकैनिक अपनी गंभीर आवाज में बोलता हैं - बाबू साहब क्या अपने यह अभी तक ये नहीं सोचा एक सुनसान सड़क हैं और आस पास कोई दुखाना नहीं हैं बस कब्रिस्तान के गेट के सामने एक मकैनिक की दुकान हैं और बगल में जंगल भी हैं और उसने तभी भी रात के 12 बजे तक अपनी दुकान खोल रखी हैं - वो दोनों कुछ नहीं बोलते बस एक दूसरे को देखते हैं और उस मकैनिक की बात सुनते रहते।

फिर वो मकैनिक अपनी बात को जारी रखते हुऐ कहता हैं - मैं आपकी बाइक ठीक तो कर दूंगा पर उसके मैं कोई पैसे नहीं लूंगा - फिर मुकेश ने झिझकते हुए कहा - पर क्यों - फिर वो मकैनिक मुस्कुराते हुए बोला - मैं पैसे नहीं लेता और मुझे पैसे भी नहीं चाहिए मुझे तुम दोनों की जान चाहिए - यह सुन कर दोनों हकेबके रह गए और दोनों अब ना आउ देखते ना तओ दोनों वहाँ से तुरंत उठ के भगने लागते हैं।

दोनों लगातार भागे ही जा रहे थे पर वो कब्रिस्तान की दीवार पार नहीं कर पा रहे थे यानी वो कब्रिस्तान से आगे नहीं जा पा रहे थे। दोनों को अब भागते-भागते लग भग आधा घंटा हो गया था और दोनों की सांस भी फूलने लगी थी। पर तभी दोनों अचानक रुक जाते हैं और वो दोनों देखते हैं आगे उस ही मकैनिक की दुकान थी और वही कब्रिस्तान का गेट था यानी वो दोनों भागते-भागते वही वापस आ गए थे। फिर तभी वो दोनों देखते हैं की वो मकैनिक अभी भी उने ही देखकर मुस्कुरा रहा था मानो वो यह कह रहा हो की तुम अब कही नहीं जा सकते। दोनों सोच ही रहे थे वो क्या करें तभी रोहन मुकेश को जंगल की ओर भागने को बोलता हैं।

फिर उसके बाद दोनों जंगल की ओर भागने लागते हैं। और दोनों भागते भागते अब जंगल के काफ़ी अंदर आ गए थे तभी दोनों को किसी औरत के रोने की आवाज सुनाई आती हैं। आवाज सुनकर दोनों पहले एक ही जगह पर रुक जाते हैं फिर दोनों जिस ओर से रोने की आवाज आ रही थी उस ही ओर जाने लगते हैं पर थोड़ा ही आगे जाकर वो दोनक देखते हैं। एक औरत उनसे तोड़ी ही दूर पर बैठी अपने सर को नीचे की ओर करे रो रही थी। पर रोहन को पता नहीं क्या होता हैं वो उस ही औरत के पास जाने लगता हैं मुकेश उसे रोकना तो चाहता था पर वो कुछ नहीं बोलता और वो भी उसके साथ ही वही जाने लगता हैं।

फिर उसके बाद रोहन उस औरत के पास जाता हैं और बोलता हैं - अरे सुनिए कौन हैं आप और इतनी रात को यहाँ क्या कर रही हैं - पर वो औरत रोहन की बात का कुछ जवाब नहीं देती जैसे उसने रोहन की बात सुनी ही ना हो। फिर रोहन अपने हाथ से उस औरत को टच करते हुए एक बार फिर से बोलता हैं - अरे कौन हैं आप और आप रो क्यों रही हैं - इसबार वो उनकी बात सुन लेती हैं और वो अचानक से अपना रोना रोककर बोलती हैं - उसने मेरे पति को मार दिया - बस इतना बोल कर वो औरत फिर से रोने लगती हैं। फिर मुकेश डरते-डरते बोलता हैं - किसने तुम्हारे पति को मार दिया -

फिर वो औरत अपनी गंभीर आवाज में बोलती हैं - उसने मेरे पति से अपनी गाड़ी ठीक कराई और जब मेरे पति ने उससे पैसे मांगे तो उसने मेरे पति को मार दिया और अब हम सबकी गाड़ी ठीक तो करते हैं पर पैसे नहीं लेते - इतना बोल कर वो औरत चुप हो जाती हैं पर यह सुनकर उन दोनों के होश उठ जाते हैं। और तभी वो औरत अचानक से अपना सर ऊपर करती हैं और उन दोनों की तरफ जैसे देखती हैं और जैसे ही वो दोनों उस औरत का चेहरा देखते तो उनका दिल अपनी दुगनी रफ़्तार से धडकने लगता हैं। क्यूंकि उस औरत का चेहरा पूरा सफ़ेद पड़ा हुआ था जैसे उसके शरीर में खून की एक बून्द भी ना हो।

फिर वो औरत इन दोनों की तरफ देखती और बोलती हैं - अब तुम ने हमसे अपनी बाइक ठीक कराई हैं अब तुम्हे मरना होगा क्यूंकि तुम भी पैसे नहीं देते और मेरे पति को मार देते - दोनों जैसे यह सुनते हैं तो उनके अंदर डर की एक लेहर सी चलने लगती हैं इसलिए तुरंत अपना हाथ जोड़ते हैं और विनती के सूर में बोलते हैं - हमें जाने दो हम तो पैसे देने ही वाले थे हमें जाने दो - तभी उनके पीछे से एक आवाज आती हैं - बाइक ठीक हो गई बाबू साहिब - आवाज़ सुनकर दोनों जैसे ही अपने पीछे देखते हैं तो वो मकैनिक उनके पीछे ही खड़ा था। और वो मकैनिक फिर बोलता हैं - आपकी बाइक ठीक हो गई - उसके इतना बोलने के बाद रोहन और मुकेश रोते हुए बोलते हैं - हमें जाने दो हमने कुछ नहीं करा हमें जाने दो -

पर उनकी बात सुनकर वो मकैनिक बोलता हैं - कुछ करने के लिए तुम बचोगे कब - इतना बोलकर वो उनके पास आने लगता हैं और वो जितना पास जा रहा था वो मकैनिक उतना ही भयंकर होते जा रहा था यानी उसका चेहरा सफ़ेद हो गया था और उसकी एक आँख से खून आने लगा था। और तभी उस औरत के रोने की आवाज भी बढ़ने लगी हैं उसकी आवाज इतनी तेज हो रही थी की अब रोहन और मुकेश के कान में चुब रही थी और देखते ही देखते रोहन और मुकेश के कान से खून आने लगा था। फिर उसके बाद मकैनिक भी उनके एकदम पास आ जाता हैं पर वो दोना कुछ नहीं कर पा रहे थे उन दोनों को ऐसा लग रहा था जैसे उनके ऊपर लाखो चीटिया छोड़ दी हो और वो सब चीटिया एक साथ उन्हें काट रही हो।

वो दोनों कुछ कर पाते उससे पहले ही उस मकैनिक ने रोहन की दोनों आँखे निकल ली थी। रोहन ने दर्द से तड़प तड़प कर वही मुकेश के सामने ही अपना दम तोड़ दिया हैं पर मुकेश कुछ नहीं कर पा रहा था और तभी वो मकैनिक उसकी ही तरफ देखने लगा हैं । और देखते ही देखते मकैनिक ने मुकेश की भी दोनों आँखे निकल दी और मुकेश ने भी यही तड़प-तड़प कर अपना दम तोड़ देता हैं।

कहते हैं आज भी उस कब्रिस्तान के गेट के आगे वही मकैनिक रात को अपनी दुकान खोलता हैं। और वो अभी भी गाड़ी ठीक करने के पैसे भी नहीं लेता क्या आपको भी अपनी गाड़ी फ्री में ठीक करानी हैं।

कब्रिस्तान में मिला दोस्त

संदीप, अभिषेक और काली (काली का असली नाम विक्की हैं पर सब उसे काली बोलते हैं) रात के 11 बजे अभिषेक के मामा के लड़के की शादी से अपने घर आ रहे थे। तभी संदीप उन दोनों से बोलता हैं - यार चलो उस कब्रिस्तान वाले रास्ते से ही चलते हैं वो रास्ता शॉर्टकट भी हैं नहीं तो मेन रोड से जाएंगे तो बहुत टाइम लग जाएगा। - कब्रिस्तान वाला रास्ता शॉर्टकट था इस रास्ते से इनका गाँव लगभग 3 या 4 किलोमीटर की दुरी पर होगा। और मेन रोड से इनके गाँव की दुरी लगभग 10 या 12 किलोमीटर की थी।

और यह तीनो दिन के समय में इसी कब्रिस्तान वाले रास्ते से आई थे। संदीप की बात सुनकर अभिषेक बोलता हैं - हाँ संदीप सही बोल रहा हैं तू उस ही रास्ते से चलते वैसे भी हम तीनो पैदल हैं अगर मेन रोड से गए तो सुबह ही तक गाँव पाउचेएंगे - अभिषेक की बात आधे में ही काट कर काली एकदम से बोलता हैं - अबे तुम दोनों कही पागल तो नहीं हो गए हो इतनी रात को कब्रिस्तान वाली रोड से ना बाबा ना मेन रोड से चलेंगे - काली की बात सुनकर वो दोनों काली पर हसने लागते हैं और हस्ते हस्ते ही संदीप बोलता हैं - क्यों काली तुझे डर लगता हैं क्या अगर तुझे डर लग रहा हैं तो तू अकेले ही मेन रोड से चला जा - काली समझ गया था की ये दोनों मेरा मज़ाक बना रहे हैं और अगर मैंने एक बार फिर यहाँ से जाने को मना करा तो यह दोनों पुरे गाँव में सबको बता देंगे और फिर पूरा गाँव काली का मज़ाक बनाएगा।

इसलिए काली इस बार हीरो बनते हुए बोलता हैं - तो चलो अब इसी कब्रिस्तान वाले रास्ते से ही चलेंगे मैं बस पहले इसलिए बोल रहा था की कही तुम दोनों ना डर जाओ - काली के मान जाने से तीनो उसी कब्रिस्तान वाले रास्ते से जाने लागते हैं। यह तीनो अभी कुछ ही आगे गए होंगे तभी संदीप बोलता हैं - यार थोड़ा रुको मेरा प्रेशर बन रहा हैं मैं एक मिनट में आया - अभिषेक,संदीप की बात सुनकर बोलता हैं - प्रेशर मतलब - संदीप,अभिषेक की बात का जवाब देते हुए बोलता हैं - प्रेशर मतलब यार मुझे 2 नम्बर जाना है - अभिषेक, संदीप को समझाते है बोलता हैं - भाई यहाँ मत कर यहाँ सही नहीं हैं अभी थोड़ा आगे चलते हैं तब कर लियो - अभिषेक की बात ख़त्म होते ही काली बोलता हैं - अच्छा बेटा इसलिए आना था तुझे कब्रिस्तान वाले रास्ते से शादी में तो हपशियों की तरह लगातार खाए जा रहा था और अब प्रेशर बन रहा हैं भाई का - काली की बात सुनकर संदीप चिढ़ते हुए बोलता हैं - अपनी बकवास बंद कर और जल्दी जल्दी चल मुझे अब रहा नहीं जा रहा - इतना बोलकर तीनो थोड़ा आगे ही गए होंगे तभी संदीप, अभिषेक के हाथो से पानी की बोतल छीन कर बोलता हैं - यार मुझसे अब रहा नहीं जा रहा तुम दोनों पाँच मिनट रुको में अभी आया - इतना बोलकर संदीप दो नम्बर करने के लिए कब्रिस्तान के दूसरे गेट के सामने जो सीढिया बनी हुई थी

उनमे जाकर दो नंबर करने के लिए बैठ गया। और अभिषेक और काली उधरी थोड़ी दूर जाकर टैहलने लागते हैं। संदीप को गए पहले 10 मिनट फिर 15 मिनट और 20 मिनट हो जाते हैं पर संदीप वापस नहीं आता। इतनी देर संदीप को ना आते देख अभिषेक, काली से बोलता हैं - अरे यार ये संदीप कहाँ रह गया चल देख के आते हैं - इतना बोलकर अभिषेक और काली संदीप को देखने चले जाते हैं। यह दोनों जैसे ही कब्रिस्तान के दूसरे गेट के सामने जाते हैं जहाँ संदीप बैठा था तो वो देखते हैं की संदीप जो बोतल अभिषेक से छीन कर लाया था। वो बोतल तो वही पर पड़ी थी पर संदीप वहाँ नहीं था। संदीप को वहाँ नहीं देखकर अभिषेक और काली उसे आवाज लगाने लगते हैं। - संदीप संदीप संदीप - पर संदीप का कुछ जवाब नहीं आता तभी अभिषेक काली से बोलता हैं - यार हम तो उस तरफ थे पर वहाँ तो संदीप आया नहीं कही ये कब्रिस्तान के अंदर तो नहीं गया - अभिषेक की बात सुनकर काली बोलता हैं - हाँ हो सकता हैं क्या पता - अभिषेक फिर अपनी बात जारी रखते हुए बोलता हैं - तो चल उसे कब्रिस्तान के अंदर देखकर आते हैं -

अभिषेक की बात सुनकर काली फिर बोलता हैं - अबे पागल हो गया हैं क्या तू अकेले ही जा के देख कर आजा मैं बाहर ही खड़ा हूँ - काली की बात सुनकर अभिषेक गुस्सा करते हुए बोलता हैं - अबे तू पागल हैं क्या। संदीप अपना दोस्त हैं मैं अंदर जा रहा हूँ और तू भी मेरे साथ चल रहा हैं - इस बार काली अभिषेक की बात समझ जाता हैं और दोनों कब्रिस्तान की दीवार नाग कर अंदर चले जाते हैं। क्यूंकि कब्रिस्तान का गेट इस समय बंद था और कब्रिस्तान की दीवारे छोटी थी। दोनों अंदर जाकर अपने अपने फ़ोन की लाइट जला कर संदीप को आवाज लगाने लगते हैं पर इस बार भी संदीप का कुछ जवाब नहीं आता। और वो दोनों संदीप को ढूंढ़ते हुए कब्रिस्तान के ओर अंदर चले जाते हैं। दोनों अभी थोड़ा ही आगे गए होने तभी अभिषेक बोलता हैं - वो देख वहाँ बैठा हैं संदीप और उसके साथ शैजान भी बैठा हैं - इतना बोलकर अभिषेक उनके पास भग कर जाने लगता हैं काली अभिषेक को पिछे से रुकने को बोलता हैं पर अभिषेक को उसकी बात सुनाई नहीं देती ।और अभिषेक भग कर जा ही रहा था तभी उसका पैर किसी चीज से टकरा जाता हैं

और अभिषेक बड़ी जोर से नीचे गिर जाता हैं पर अभिषेक तुरंत उठ कर खड़ा हो जाता हैं। उसके खड़े होते ही काली बड़ी जोर से बोलता हैं - अभिषेक वहाँ मत जइयो क्यूंकि शैजान एक हफ्ते पहले ही मर चूका हैं - पर काली की आवाज अभिषेक के नहीं सुनी और उसके पास जाकर बोलता हैं संदीप तू यहाँ बैठा हैं और हम कबसे तुझे ढूंढ रहे हैं। - अभिषेक की आवाज सुनकर संदीप पिछे मुड़ता हैं और कहता हैं - अरे तू भी यहाँ आ गया चल आ जा बैठ - और यह तीनो एक क़ब्र पर ही बैठ जाते हैं काली पिछे से अभिषेक और संदीप को आवाज लाए जा रहा था पर उन तीनो को पता नहीं क्यों उसकी आवाज सुनाई नहीं दे रही थी। काली की बात कोई नहीं सुन रहा था इसलिए काली भी उनके पास भागते हुए उनके पास जाने लगता हैं।

काली भग ही रहा था तभी उसका भी पर किसी चीज से टकरा जाता हैं और वो भी बड़ी जोर से नीचे गिर जाता हैं। काली भी तुरंत उठ कर खड़ा हो जाता हैं और जैसे ही काली नीचे ये देखने के लिए देखता हैं की किस चीज से टकरा कर गिरा था। और जैसे ही काली ने नीचे देखा तो उसका दिखा वहाँ संदीप, अभिषेक और काली की लहस नीचे पड़ी हुई थी। काली यह देख ही रहा था तभी संदीप उसको देखकर बोलता हैं - अरे काली तू भी आ गया चल आ जा तू भी हमारे साथ बैठ जा। अगले दिन सुबह जब चौकीदार कब्रिस्तान के अंदर आया तो उसे उन तीनो की लहस पड़ी मिली।

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