Horror Stories in Hindi - दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम आपके साथ Horror Stories शेयर करने जा रहे है। यह stories बहुत डरावनी है। दोस्तों आप इन stories को पूरा पढ़े आपको बुहत अच्छी लगेगी।

Horror Stories in Hindi

Horror Stories in Hindi List

औरत और लड़की की आत्मा

राजस्थान का रहस्यमय मंदिर

चुड़ैल से हुआ सामना

राजस्थान के कोटा शहर की ख़ौफ़नाख घटना

सच में भूत आया

चेनल की डिश का भूत

वो स्री कौन थी

चुड़ैल से शादी करने को उतारू

राजस्थान के कोटा की भूतिया हवेली

शिमला के शार्पित पहाड़

औरत और लड़की की आत्मा

यह एक चौका देने वाली घटना है। जो 1950 मे घटी हुई थी। उत्तर प्रदेश के रानी बाजार गांव में एक रामप्रकाश तिवारी नाम का आदमी रहता था।

उसकी 5 साल की लड़की थी। उसे कैंसर की बीमारी थी और उसकी कई जगह से इलाज कराने के बाद भी वह जिंदा ना बच सकी।

रात के 1:00 बजे उसकी मौत हो गई। उसी रात को एक दूसरे गांव में मोहिनी नाम की एक औरत की ट्रक से टकराने की वजह से मौत हो गई।

मृत के परिवार वाले लोगों ने उस औरत का दाह संस्कार कर दिया। दूसरी तरफ जब रानी बाजार में उस मृत लड़की को दफन करने के लिए जंगल में जा रहे थे।

अचानक रास्ते में उसकी शरीर में कुछ हलचल हुई और वह उठ खड़ी हो गई।

लोग यह देखकर डर गए। लेकिन बाद में उस लड़की को जिंदा देखकर उसके परिवार वाले लोग बहुत खुश हो गए। लेकिन लोगों को यह पता नहीं था।

कि उस लड़की के शरीर को किसी और की आत्मा ने जकड़ लिया है। उस 5 साल की लड़की के अंदर मोहिनी की आत्मा घुस चुकी थी।

वह अलग जगह पर आकर बहुत दुखी और परेशान हो गई थी। उसका खाना खाने में भी मन नहीं लगता था।

लेकिन उसकी मां उसे अपने हाथों से खाना खिला देती थी। एक दिन वह लड़की अपनी मां के साथ उसके मामाजी के घर जा रही थी और रास्ते में अचानक वह जगह आई जहां मोहिनी की ट्रक से मौत हो गई थी।

उस बच्ची ने अपनी मां को इशारा करके बताया कि यह रास्ता उसके गांव की तरफ जाता है। उसकी मां ने उसकी बातों को अनसुना कर दिया और अपने मामाजी के घर पहुंच गई।

उसके मामाजी के घर के पास मोहिनी के गांव की एक औरत सिमरन किसी काम से आई हुई थी। मोहिनी की आत्मा ने उसको पहचान कर उसको आवाज देने लगी।

सिमरन को लड़की के मुंह से अपना नाम सुनकर आश्चर्य हुआ।

सिमरन के पूछने पर उस लड़की ने उसको अपनी पूरी घटना बता दी और बोली कि मेरी मौत से पहले ही मेरे घर वालों ने मुझे जला दिया और इस बच्ची की खाली शरीर को देखकर इसमें रहने लगी।

जब सिमरन ने यह बात सुनी तो उसने अपने गांव जाकर सारे गांव वाले लोगों को यह बात बता दी और उसका पूरा परिवार मोहिनी से मिलने आ गया।

उस लड़की ने सब को पहचान लिया और वह अपने पूरे परिवार के साथ अपने गांव चली गई और उसने वापस रानी बाजार आने के लिए मना कर दिया।

लेकिन लोगों के समझाने पर वह मान गई। इस तरह वह दोनों परिवारों के साथ रहने लगी। इस कहानी से पता चलता है।

कि कभी किसी की अधूरी इच्छा पूरी ना हुई हो तो उसकी आत्मा किसी और के शरीर में जा सकती है।

राजस्थान का रहस्यमय मंदिर

मित्रों आज मैं आप सभी लोगों को राजस्थान की एक रहस्यमय जगह के बारे में बताने जा रहा हूं। जिससे लोग आज तक बेखबर हैं।

हम में से कई लोगो ने इसके बारे में सुना ही होगा पर इस मंदिर के बारे में अलग-अलग कहानियां बनाई जाती है। इस मंदिर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि शाम ढलने के बाद इस मंदिर में कोई रुकता नहीं.

और इसके आस-पास घूम भी नहीं सकता। क्योंकि जो भी इसके अंदर या आस-पास शाम ढलने के बाद जाता है। तो वह इंसान पत्थर में बदल जाता है।

इसमें कितना झूठ या कितनी सच्चाई है। यह तो आप लोगों को वहां जाकर ही पता चलेगा।

आप लोगों को मैं इस रहस्यमय जगह के इतिहास के बारे में बताने जा रहा हूं। कि किराडू मंदिर राजस्थान के बाड़मेर जिले के हाथमा गांव में स्थित है।

जिसे 11वीं शताब्दी में बनाया गया था। यह मंदिर इतना सुंदर बना है। कि इस मंदिर को राजस्थान का खजुराहो कहते हैं। लेकिन 900 साल पुराना यह मंदिर की तरफ कई लोगों का ध्यान नहीं गया है।

जिसके कारण यह मंदिर गुमनाम अंधेरों में छिपा हुआ है। यह मंदिर में एक मंदिर शिवजी का है. और दूसरा मंदिर विष्णुजी का है।

इस मंदिर की दीवारों पर कलाकृतियां बनी हुई है। जो आपको इतिहास की याद दिला देगी। इस मंदिर के इतिहास के बाद इस मंदिर के रहस्य के बारे में बताते हैं।

वहां के लोगों के अनुसार आज से करीब 900 साल पहले यह किराडू में परमार वंश का राज्य हुआ करता था।

उस समय में एक दिन एक साधु अपने कुछ शिष्यों के साथ यहां पर रहने को आए थे. और यहां पर कुछ दिन बिताने के बाद उन्होंने सोचा कि थोड़ा और घूमने का निश्चय किया। एक दिन वह शिष्यों को बिना बताए रात को कहीं पर निकल पड़े।

उनके जाने के कुछ दिनों बाद सारे शिष्य बीमार हो गए और उन्होंने गांव वालों से मदद मांगी तो गांव वाले लोगों ने उनकी मदद नहीं की।

केवल एक कुम्हारिन ने निस्वार्थ भाव से उनकी सेवा की। जिससे उनका स्वास्थ्य ठीक हो जाए। साधु घूमने के बाद उसी जगह पर पहुंचे। तो उन्होंने अपने शिष्यों को कमजोर हालत में देखकर बहुत गुस्सा हो गए।

उन्होंने सारे गांव वालों से कहा कि जिस जगह पर इंसान-इंसान की मदद नहीं करता।

तो उनको जीने का क्या हक है. और तभी उन्होंने पूरे गांव को पत्थर बनने का श्राप दे दिया। शिष्यों की सेवा करने वाली कुम्हारिन को इससे अछूते रखा और शाम ढलने से उसे यहां से बिना पीछे मुड़े इस गांव से निकलने को बोला।

लेकिन उस महिला ने गलती से पीछे देख लिया और वह भी पत्थर की मूर्ति बन गई।

नजदीक गांव वालों के पास आज भी उस कुम्हारी की मूर्ति है। इसलिए प्राचीन समय में लोग हमेशा साधु महात्माओं को खुश रखते थे।

इस श्राप के बाद कोई भी शाम ढलने के बाद उस मंदिर में नही जाता।

चुड़ैल से हुआ सामना

मेरा नाम प्रतिक मिश्रा है। मैं वेस्टबैंगोल के एक गाँव में रहता हूं। मैं अभी इंजीनियरिंग का अभ्यास कर रहा हु और साथ में मैं एक सोलो बाइक राइडर भी हु।

मैं अक्शर छुटियों के दिन या फिर वीकएंड पे अपने बाइक ले कर लॉन्ग राइड पे चला जाता हूं।

एक दिन मेरे साथ कुछ ऐसी घटना घटी जिसे आज भी सोचता हूं तो मेरे शरीर की रूह तक कांपने लगती है।

आज से दो साल पहले की बात है। मैं अपने बाइक लेकर कोलकत्ता लॉन्ग राइड पे गया था। रास्ता 3 दिन का था। इस लिए मुजे पहले से ही होटल बुक करनी पड़ती थी।

एक बार रास्ते मे मुजे बहुत भूख लगी थी। इस लिए मैंने अपनी बाइक को साइड में पार्क किया। और पास में नास्ते की दुकान पे जाके 2 वड़ापाव खा लिया। बाद में मैंने अपनी ट्रेवलिंग की शुरुआत कर दी।

कुछ समय बाद, श्याम को, अचानक मेरे पेट बिगड़ ने लगा। मैं होटल पे जा शकु इतना समय भी नही था। इसलिए मैंने पास में सुलभ शौचालय पे एंड यूज़ का उपयोग किया।

वही पे मुजे किसीके पायल की आवाज सुनाई दी। मुजे कुछ अजीब सा लगा कि, पुरुष के शौचालय में एक औरत का क्या काम?

इसी समय वहाँ की लाइट चालू बंध होने लगी। मैं तो को डर के मारे कांपने लगा। मेरे शरीर के रुवटे खड़े हो गए।

मैंने जोर से आवाज लगाई, “कौन है जो यह मजाक कर रहा है, बाहर निकल के तुजे छोडूंगा नही।”

थोड़ी देर बाद वहां सब ठीक गया। मैं जल्दी से बाहर निकल ने की कोशिश कर रहा था लेकिन वॉशरूम का दरवाजा नही खुल पा रहा था। मैंने चोकीदार को आवाज लगाई। तो उसने आके देखा तो दरवाजा बाहर से खुला था। फिर उसने आवाज लगाई, “दरवाजा खुला है, आप थोड़ा धक्का लगा ए।”

मैंने धक्का दिया तो दरवाजा खुल गया। मैं पैसा दे कर बाहर निकल ही रहा था कि फिर से मेरा पेट खराब होने लगा।

मुजे वापस उस खतरनाख वॉशरूम में नही जाना था। लेकिन मेरे पास और कोई चारा भी तो नही था।

इस बार लगभग दो-तीन मिनिट हुई होगी कि वापस से लाइट चालू बंद होने लगी। और साथ में कोई स्त्री की हँसने ने की आवाज भी आ रही थी।

मुजे काफी डर लगने लगा था। मैं जल्द ही अपना काम पताके बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था। लेकिन मैं वही से उठ ही नही पा रहा था।

मुजे ऐसा लग रहा था कि, कोई मुजे पर बैठ गया हो। मैं अपनी पूरी ताकत लगाके खड़ा हो गया। ओर दरवाजा खोल के बाहर निकल गया।

बाहर देख कर मैंने देखा कि, सुलभ शौचालय का मुख्य दरवाजा बंद था और उस पर काफी सारे जीवजन्तु चिपके हुए थे।

यह सारा ख़ौफ़नख दृश्य देख कर मेरे तो प्राण ही निकल गए हो ऐसा महसूस होने लगा। मैं जोर जोर से रो ने लगा। वहाँ पे काफ़ी अंधेरा था और काफी दुर्गन्ध भी आ रही थी।

मुजे लगा कि मैं यँहा से कैसे बाहर निकल पाऊंगा?

उसी वक़्त मेरे सामने एक बड़ी बड़ी लाल आँखे वाली, लंबे बालोंवाली भयानक औरत खड़ी थी।

उसे देख कर मेरे तो होश ही उड़ गए। मैं तुरंत ही दरवाजे की ओर दौड़ा। लेकिन घभराहट की वजह से मेरे पैर फिसल गए और मैं नीचे फर्श पे गिर गया।

पायल का आवाज कर रही वो भयानक औरत मेरी तरफ आ रही थी। उसे देख कर लगा कि आज मेरी जिंदगी का आखरी दिन है, अब मैं बचने वाला नही हु।

थोड़ी ही देर में वो औरत मेरे पास आकर बैठ गई और मुजे जानवर की जैसे सुंघने लगी।

मुजे अपनी मौत साफ साफ दिख रही थी।

फिर मैंने अपनी सारी हिम्मत लगा के एक आखरी कोशिश कर के जोर लगाके खड़ा हो गया।

ओर जोर जोर से दरवाजे को हिलाने लगा। थोड़ी ही देर में दरवाजा टूट गया और मैं बाहर निकल गया।

जब मेरी नजर बाहर खड़े लोगो के सामने पड़ी तो मैंने देखा कि लोग मेरे सामने ऐसे देख रहे थे, जैसे मैं कोई पागलखाने से भाग आया हु।

लोग मुजे यहाँ तक बोलने लगे कि, “पागल है क्या? पीके आया है?

तभी वहाँ पास में खड़ा आदमी ने मेरे पास आके पूछा कि, “भाई, तुम वहाँ अंदर क्या कर रहे थे?”

मैंने कहाँ, “भाई, मैं कोई अंदर घूमने नही गया था, बल्कि टॉयलेट करने के लिए गया था।”

मेरी बात सुनकर उस भाई ने मुझसे कहाँ, “तुम जरा पीछे मुड़कर तो देखो”

मैंने जब उस आदमी की बात सुनकर पीछे मुड़कर देखा तो मेरे तो होस ही उड़ गए। वहीँ कोईभी शौचालय नहीं था। बल्कि एक पुराना टूटा फूटा खंडाल मकान था।

ऊपरवाले की महेरबानी थी कि मैं सही सलामत बच गयो। ओर उस भयानक देखने वाली चुड़ैल की चंगुल से बच निकला।

राजस्थान के कोटा शहर की ख़ौफ़नाख घटना

जिंदगी एक पैये कि तरह है। जो घूमता रहता है। जहाँ से चीजे शरू होती है वहाँ पे वापस आके थंभ जाती है। बिल्कुल उसी राह पर, उसी मोड़ पर हमे फिर छोड़ देती है। क्यंकि जिंदगी का हर पल हमारे कर्म ओर नियति से जुड़ा हुआ होता है।

यह कहानी राजस्थान के कोटा शहर से जुड़ी एक सच्ची घटना से प्रेरित किसी के असफल प्यार और प्रतिषोध की है।

सपना, सलोनी ओर उनके मासूम दोस्तो की दास्ता है। जो समय के दुष्ट चक्र में फस गए ओर उस मोड़ पर आके थंभ गए जहाँ मौत उनका इंतजार कर रही थी।

राणा साहेब, एक बहोत अमीर और आलीशान हवेली का मालिक था। उन्हें अपने से दस साल छोटी उम्र की लड़की से प्यार हो गया था।

लेकिन वो लड़की राणा साहब को अपने प्यार के मायाजाल में फ़सा के उनकी जायदाद को छीन लेना चाहती थी।

एक बार उस लड़की ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर राणा साहब को मार मार कर जिंदा जमीन में गाढ़ दिया।

राणा साहब चीखे च्चिलाये लेकिन उस लड़की ने उनकी एक न सुनी।

बाद में राणा साहेब में मरते मरते शार्प दिया कि “मैं किसीको नहीं छोडूंगा, हर प्रेमी को मार दूंगा, जिस तरह मेरे साथ धोखा हुआ है मैं हर प्रेमी को मिटा दूंगा, मैं सब को मिट्टी में मिला दूंगा”

ओर राणा साहब की मौत हो गई। उन दिन के बाद वो जगह ओर वो हवेली शार्पित हो चुकी थी। वहाँ जो भी जाता था वो कभी भी वापस नही आ पाता था।

आज भी राणा साहब की प्रेतात्मा वहाँ घूमती रहती है।

कुछ दिनों के बाद

उस हवेली पे एक प्रेमी कपल वहां पे घूमने के लिये आये। सपना ओर रजत

उन दोनों की सगाई हो चुकी थी लेकिन शादी करनी बाकी थी। सपना अपने घर में किसीको कुछ बताये बिना रजत के साथ आई थी।

सपना ओर रजत मजाक मस्ती में उस जगह पहोंच गए जंहा पे राणा साहब जो जिंदा दफन कर दिया था।

अचानक रजत उस जगह पे गिर जाता है और उसका पैर जमीन के नीचे घुसने लगता है।

यह देखकर सपना डर जाती है, और मदद के लिए चीखने चिल्लाने लगती है। लेकिन कोई भी उसकी आवाज नही सुन पाता है।

सपना जब उस हवेली में मदद के लिए जाती है तो वहीँ उसे किसीकी के होने का आभास होता है।

उसी वक्त तुरंत सपना गिर जाती है और कोई उसका पैर पकड़ कर उसी जगह पर खीच के ले जाता है जंहा राणा साहब ओर रजत दफन हुए थे।

बाद में सपना भी उसी जगह पर दफन हो जाती है।

कुछ दिन बाद जब सपना अपने घर नहीं पहोंचती है तब उसकी बहन सलोनी अपने पति समीर ओर कुछ मित्रों के साथ उसे ढूढ़ते ढूंढते उस हवेली पे पहोंच जाते है।

समीर एक पेरानॉर्मन एक्टिविटी का एक्सपर्ट है।

जब वो सब उस हवेली पर पहोचे तब समीर को पता चल गया कि यहां पे किसी बुरी आत्मा का वास है। उसने सबको सूचित कर दिया।

उसी रात को उन सभी के साथ कुछ अजीबो गरीब घटनाएं होने लगती है।

जैसे कि नल से पानी टपकना, अपने बेडरूम में मिट्टी का आ जाना, रूम की खिड़की या अपने आप हिलने लगना, किसीके रोने की ओर चिल्लाने की आवाज आना।

यह सब देखकर वो सभी डर जाते है। ओर उनमें से एक भागने की कोशिश करता है।

लेकिन राणा साहब की प्रेतात्मा उसे भी जिंदा दफन कर देता है।

दूसरे दिन,

जब उन लोगो को पता चलता है कि उनका एक साथी गायब है, तब वो लोग ओर भी डर जाते है।

लेकिन समीर बताता है कि, “हमे यहाँ से बाहर निकलना है तो हमे उस आत्मा को बुलाना होगा और उनसे पूछना होगा कि वो आखिर चाहती क्या है?”

डर के मारे सभी लोगोने समीर की बात मान ली और आत्मा को बुलाने के लिए तैयार हो गई।

समीर ने एक रूम में सभी तैयारियां कर ली और बताया कि, “जब तक हम आत्मा से पूरी जानकारी नही जान लेते तब तक कोई इस रूम से बाहर नही जाएगा। और कुछ भी हो जाये कोई किसी का हाथ नही छोड़ेगा।”

समीर ने तन्त्र मंत्र से आत्मा को बुलाना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में तेज पवन ओर बिजली के साथ राणा साहब की आत्मा उस रूम में आ गई।

समीर ने उस आत्मा से बात की, “आखिर तुम चाहते क्या हो? तो लोगो को क्यों मार रहे हो? कौन हो तुम?”

राणा साहब की आत्मा ने कहा, “निकल जाओ यंहा से, मैं किसी को भी नही छोडूंगा, सब मारे जाएंगे, जो भी यहाँ आये गया उन सब को मार दूंगा।

इतना कहकर वो आत्मा चली गई।

वो लोगोने बाद में सपना की आत्मा को बुलाया और पूछा, “आखिर उसके साथ हुआ क्या था?”

सपना की आत्मा ने उन सभी को सारी हकीकत बात दी और बोली, “मुजे राणा साहब ने जमीन के नीचे दफन कर दिया है, प्लीज़ मुजे यहां से निकालो।

सलोनी ने अपने बहन सपना से पूछा, “राणा साहब की आत्मा को कैसे मारा जाए?”

सपना ने बताया कि, “जहाँ राणा साहब ने हम सब को दफनाया है वँहा पास में माताजी का त्रिशूर है। उस त्रिशूर से राणा साहब की आत्मा को मार जा शकता है और इस महल को उनकी चंगुल से बचाया जा शकता है।

इतना कहकर सपना की आत्मा वहाँ से चली गई।

समीर, सलोनी ओर बाकी दोस्तो लोग तुरंत उस जगह पे गए जहाँ राणा साहब को दफनाया गया था।

राणा साहब की आत्मा ने उन सभी को त्रिशूर के पास जाने के लिए रोका।

लेकिन सलोनी किभी तरह उस त्रिशूर के पास पहोंच गई और उसी त्रिशूर से राणा साहब पे वार किया।

कुछ ही देर में राणा साहब ओर उनके साथ वो सभी आत्माओ को मुक्ति मिल गई जिसे राणा साहब ने दफनाया था।

सच में भूत आया

एक दिन एक लड़का जो कि एक कंपनी में काम किया करता था। उसे किसी भी बहुत प्रेत पर कोई विश्वास नहीं था।

वह भूत प्रेत को बस दिमाग का भर्म मानता था। एक दिन उसके कंपनी में कुछ काम बढ़ गया था। जिसके कारण उसे घर वापस आने में देर हो गया। वह अपने ऑफिस से देर रात को निकला।

वह अपने बाइक से था। कुछ दूर चलने के बाद उसका बाइक ख़राब हो गया। अब वह अपनी बाइक को पैदल ही लेकर चल दिया।

कुछ दूर के बाद उसे एक बस स्टॉप दिखा। वह कुछ देर वहाँ रुक गया। उसके पास एक साधु आकर बैठ गया।

साधु अपने पास एक बीड़ी रखा हुआ था। वह अजीब तरीके से उसे पी रहा था। उस लड़के की एक आदत थी कि वह किसी से भी बात करना शुरू कर देता था।

वह इस साधु से भी बात करने लगा। बात ही बात में इस लड़के ने कहा, बाबा! मैं किसी भी भूत प्रेत को नहीं मानता हू। बस सब झूठी बातें है।

साधु ने कहा, तुम भले ही भूत प्रेत को मानों या फिर न मानों लेकिन तुम यह न कहो कि भूत प्रेत नहीं होते है। यह सब कुछ होते है।

इस पर उस लड़के को थोड़ी सी हंसी आ गई। उसने कहा, भूत होते है तो क्यों हमें नहीं दिखते है। क्या आप मुझे अभी कोई भूत दिखा सकते है।

साधू को लग गया कि अब इसे जरूर ही भूत दिखाना होगा। साधू ने लड़के को श्मशान घाट की ओर चलने को कहा। फिर क्या था वह दोनों चल दिए।

रास्ते में उस लड़के को थोड़ा डर लगने लगा। फिर भी वह अपने डर को कम करके आगे बढ़ते जा रहा था।

कुछ देर के बाद वह श्मशान घाट पहुंच गए। श्मशान घाट में अभी कुछ लासे जल रही थी। साधू ने उसको एक ऐसे स्थान पर बैठाया जहा कुछ समय पहले की लास जली थी।

साधु ने जमीन में एक लोहे का कील गाड़ दिया। उसमे एक सफ़ेद धागा बांध दिया। इस धागे का अंतिम छोर उस लड़के को पकड़ने को कहा।

अब उस लड़के को हद से ज्यादा डर लग रहा था। उसकी साँस तेज हो रही थी। इसके साथ ही उसके हाथ-पैर भी काँप रहे थे। फिर भी उसने धागे को पकड़ लिया।

साधु ने कुछ बतासा को चार जगह पर रख दिया। सारे बतासे उस धागे की पास ही एक लाइन में रखे हुए थे। उसके बाद साधु ने लड़के को सावधान किया। अभी कुछ आत्मा इसको खाने को आएगी।

जब तक वह इसको खाकर चले न जा जाए तब तक तुम अपने हाथ के धागे को मत छोड़ना। यदि तुम ऐसा करते हो तो तुम्हे नुकसान हो सकता है। फिर साधु से मंत्र पढ़ना शुरू कर दिया।

कुछ मंत्र पढ़ने के बाद साधु ने उस लड़के को आँख बंद करने को कहा। फिर कुछ देर के बाद ही आँख खोलने को कहा।

जब उस लड़के ने आँख खोला तो वह जो देख रहा था। उसे उसके ऊपर विश्वास ही नहीं हो रहा था। वास्तव में वहाँ चार आत्मा थी. जो कि बतासे को खा रही थी।

लेकिन जब उसने यह देखा कि उसके पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति की आत्मा भी वहा है। जो की कुछ दिन पहले ही मर गए थे। तो उसके हाथ से धागा छूट गया।

अब वहाँ पर वह साधु भी नहीं था। वह लड़का तेजी से श्मशान घाट से अपने घर की ओर भागने लगा। जब वह अपने घर की ओर जा रहा था तो उसे पीछे से कोई उसका नाम लेकर बुला रहा था।

उसको पीछे से कई तरह की आवाज आ रही थी। उस लड़के ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

अपने घर जाने के बाद उसने यह सब कुछ अपने माता-पिता से बताया। फिर वह अपने कमरे में सो गया।

अगले दिन उसकी आँख उसी श्मशान घाट में खुली और उसी स्थान पर जहा पर उसने आत्मा को देखा हुआ था। इसके बाद वह दिमागी तौर पर बीमार रहने लगा।

चेनल की डिश का भूत

यह कहानी मेरे साथ घटी एक सच्ची घटना है।

हारली में कोरोना वाइरस के कारण पूरे भारत भर में लॉकडाउन किया गया था। उसी लॉकडाउन में मेरे साथ यह घटना घटी थी जो अभी मैं आपको बताने जा रहा हु।

मैं श्याम को करीबन 8 बजे अपने घर की छत पर वॉकिंग कर रहा था।

तभी कुछ करीबन 5 मिनिट बाद छत के दूसरे भाग से किसीके खखड़ाने की आवाज आई। मैं उस साइड देखने के लिए गया कि आखिर आवाज किस चीज की थी।

क्योंकि छत पर मेरे अलावा और कोई भी नही था। उसी दौरान मेरी नजर चेंनल की डीश पर पड़ी, जो छत के दूसरे भाग में थी।

मुजे लगा कि शायद कोई चूहा होगा। इस लिए मैं ने ज्यादा ध्यान नही दिया।

कुछ देर बाद फिर से वहीं आवाज आई। मैं तुरंत वहाँ जाके देखा तो, मैं स्तब्ध हो गया।

क्यंकि जो चैनल की डिश पहले जिस जगह पे थी उस जगह से 5 ft दूरी पर चली गई थी।

मेरी समाज में कुछ नही आ रहा था, आखिर यह हुआ तो कैसे हुआ।

बाद में मैं उसी जगह खड़ा रह कर देखने लगा कि क्या अब मेरी नजर के सामने यह हिलती है क्या?

देखते ही देखते अचानक वह डिश अपनी जगह से हवा में करीबन 2ft ऊपर उठकर नीचे गिरी। ओर अपनी जगह पर हिलने लग गईं।

यह देखकर मेरे तो होश ही उड़ गए। मैं ने तुरंत ही उस चैनल की डिश के मालिक को फोन किया। और उन्हें छत पर बुलाके सारि बातें बताई।

पहले तो मेरी बात सुनकर उन्होंने यकीन नही किया, लेकिन जब यह हादसा फिर से उनकी नजर के सामने हुआ तो उनके भी होंश उड़ गए।

कुछ देर बाद आसपास के लोग भी इकठ्ठा हो गई। लोगो को लगा कि शायद कोई भूत प्रेत होगा जो यह सब कर रहा होगा।

फिर हम सब ने उस डिश को रस्सी से बांध दिया और फैसला किया कि कल सुभह ही इस डिश को यँहा से निकल कर फैंक देंगे।

उस रात करीबन पोंने दो बजे,

हम सब सो रहे थे, तभी मुजे छत पर किसी के घूमने की आवाज सुनाई दी, क्योंकि मेरा घर टॉप फ्लोर पे था। इस लिए जब भी छत पर कुछ भी हो तो सबसे पहले हमें सुनाई देता है।

मैंने अपने घर वालो को जगाया ओर बताया कि, छत पर कोई है जो घूम रहा है।

उस रात हम सब हिम्मत करके छत पर गई, यह देखने की लिए की आखित ऊपर कौन है?

हमने ऊपर जाके देखा तो ऊपर कोई भी नही था। लेकिन छत पर किसी के पैरों की निशान थे, वो भी आम पैरों के निशान से कई ज्यादा बड़े थे।

हम डिश को देखने के लिए गए तो, डिश पूरे छत पर कही नही थी। हमे लगा कि कोई किसी के उस डिश को फेंक दिया होगा।

लेकिन पैरों के निशान ने हम सब को काफी डरा दिया था। क्यूंकि आजतक ऐसे निसान हमने पहले कभी नही देखे थे।

रात काफी होने के कारण हम सबने मिलकर डिसाइड किया कि अब जो भी करना है वो हम कल सुभह ही करेंगें।

ओर हम अपने अपने घर चले गए। उस रात को मुजे नींद भी नही आ रही थी। मेरे मन में केवल यही चल रहा था कि कही हमारे छत पर कोई भूत प्रेत का साया तो नही है ना?

दूसरे दीन सुबह

जब हम सभी छत पर देखने के लिए गए तो देखा कि वो डिश जो कल रात छत पर से गायब हो गई थी वह डिश आज उसी जगह पर बापस आ गई थी।

तभी सब ने डिसाइड किया कि उस डिश को तोड़ के उसे नष्ट कर देंगे। ताकि बाद में कोई परेशानी न हो।

जब उस डिश को तोड़ रहे थे तब उसके अंदर से काले काले रंग का कुछ पदार्थ बाहर निकल रहा था जो बहोत ही बुरी बास कर रहा था।

उस डिश को तोड़ कर उसे एक खुली जगह पर ले जाके उसे जला दिया।

तब से लेकर अभी तक अब कई आबाज या किसी के होने का अहसाह नही हो रहा था।

वो स्री कौन थी

सितंबर का महीना था। काली अँधेरी रात थी। धीरे धीरे से हवा की ठंडी लहरें आ रही थी, आकाश में बिजली चमक रही थी। महेन्द्रचाचा अपने घर से दूर अपने खेतमें खाट में सोए हुए थे।

उनका खेत गाँव के तालाब के पास था। बारिश के कारन पूरा तालाब भर गया था और खेत में घास भी ज्यादा हो गई थी। उसके करन अंधेरेमें यह सब ज़्यादा डरावना लग रहा था। उस तालाब के किनारे आम के 6 -7 बड़े बड़े पेड़ थी। आम के पेड़ की डालियो के आवाज भी काफी डरावना लगता था।

अचानक खेतमें बंधी हुई भैंसो ने चिल्लाना शरु कर दिया। महेन्द्रचाचा को पता ही नहीं चल रहा थी की आखिर यह भैंसे ऐसा क्यों कर रही है। उन्हें लगा की शायद ठंडी के कारन यह भैंसे ऐसा कर रही होगी। इसी लिए महेन्द्रचाचा के खेत में चिमनी जलाई।

उस चिमनी के उजाले में महेन्द्रचाचा की नजर उनके खाट पे पड़ी। उन्होंने देखा की एक स्री उनकी खाट पे बैठी है। यह देख कर उनका शरीर दर के मारे कांपने लगा। उसी वक्त आकाश में बिजली का तेज झटका हुआ।

वैसे तो महेन्द्रचाचा बहादुर थे, लेकिन आज उन्हेभी थोड़ा डर लग रहा था। उसी वक्त काका ने आग में शुकी घास डाली और आग को ज्यादा बढ़ाया इसकी वजह से वो औरत ठीक से दिखाई दे रही थी।

महेन्द्रचाचा ने तापने के साथ बैठे बैठे ही बूम लगाईं “कोन है? “पर सामने से कोई प्रतिक्रिया नई मिली। इसीलिए काका अचंबित रह गए। उनकी समज में कुछ नई आया। काका खड़े हो गए।

इसीलिए महेन्द्र काका ने सोचा की अब डरने से कुछ नई होगा , मुझे हिम्मत से काम लेना पड़ेगा , क्यूकी जो डर गया वो समजो मर गया।

चाचा ने एक बड़ी लकड़ी हाथ में लेली और बोले कौन हो तुम? तुम्हे क्या लगता है, की मैं तुमसे डर गया हु? लेकिन सच तो यही था की चाचा अंदर से पूरी तरह से डर के मरे कांपने लगे थे। चाचा का यह गुस्से वाला रूप देखकर वो स्री खड़ी हो गई और जोर से बोली, “क्या तुम मुझसे नहीं डरते…?”

चाचा ने हिम्मत की और बोले, “यहां से चली जाओ वरना यह लाठी से मार मार के तेरा सिर फोड़ दूंगा”। इतना ही बोलता महेन्द्रचाचा ने लाठी उठाई और उसी वक्त उस औरत ने आवाज उठाई। “अब तू मुझे मेरे ही घर से बाहर निकालेगा? यहां पर तो मेरा बचपन गुजरा है। यह मेरा ही घर है मैं यहां सालों से रह रही हूं।

यह सुनकर चाचा का डर और गुस्सा दोनों ही शांत हो गए। उन्हें लग रहा था कि मेरे सामने जो औरत खड़ी है उसे मैं जानता हूं, उसकी आवाज भी जानी पहचानी लग रही थी। चाचा सोचने लगे कि आखिर यह औरत है कौन?

अगर मैं इस औरत को जानता हूं तो आखिर यह इतनी भयानक और विकराल रूप में क्यों है? अचानक, अरे यह तो ज्योति है, मेरी बड़ी बहन। बचपन में मैं और ज्योति साथ में ही खेत में चार काटने का काम करते थे।

अब महेन्द्रचाचा को पूरी बात समझ में आ गई। यह ज्योति के बचपन की बात है। जब ज्योति 14 साल की थी तब इसी खेत में गांव के कुछ बच्चों के साथ खेल रही थी। दूसरे बच्चों की तरह ज्योति भी पेड़ पर चढ़कर एक डाल से दूसरे में डाल पर छलांग लगा रही थी।

अचानक ज्योति जिस डाल पर बैठी थी वह डाल टूट गई और ज्योति मुंह के बल नीचे गिर गई। यह देखकर सारे बच्चे डर के मारे चिल्लाने लगे। बच्चोंके चिल्लाने की आवाज सुनकर बड़े लोग वहाँ पहोंचे ओर ज्योतिको उठाके हस्पताल ले गए लेकिन तबतक काफी देर हो चुकी थी। ज्योति की मौत हो गई थी।

महेन्द्रचाचा को ये सारी बाते याद आ गई, और वह सीधा ज्योति के पास जाके रोने लगे। जब यह बात गाँव वालों को पता चली तो सारे गाँव वाले चोंक उठे थे। वास्तव में वह ज्योति ही थी।

गाँव के एक बड़े बुजुर्ग ने कहा कि, “जब ज्योति मौत हुई थी तब वो एक बच्ची थी। इसी लिए उसे बालक समझ के उसे दफ़नाया गया था। लेकिन वास्तव में उसका अंतिम संस्कर करने की जरूरत थी।”

इसी लिए ज्योति की आत्मा आज तक भटक रही है। महेन्द्रचाचा ने तुरंत ही ज्योति को जहा दफ़नाया गया था वहां से उसे निकाला। किस की भी हिमत नही हो रही थी कि कोई उसके पास भी जा सके।

उसी वक्त ज्योति की आत्मा ने गाँव वालों के सामने आके कहा कि, “हाँ, आपकी बात सही है, मैं मर चुकी हूं, आपलोगो को मुझसे डर ने की जरूरत नही है, मैं अभी भी इसी गाँव की बेटी हु, लेकिन मैं आज दिन तक भटक रही हु, मुजे मुक्ति दीजिये।

बाद में महेन्द्रचाचा ने ज्योति के शब का अग्नि संस्कार किया और उसकी आत्मा को शांति दिलाई।

चुड़ैल से शादी करने को उतारू

यह एक सत्य और आंखों देखी घटना है। हमारा गांव गोंडा जिले में पड़ता है। यह उस समय की बात है। जब गांव में 18-19 साल की उम्र में सब लड़को की शादी हो जाती थी।

उनमें से एक मेरा मित्र रमाकांत भी है। उसकी शादी 3 साल पहले हो चुकी थी. और अब उसका गौना भी आ गया था। उसकी बीवी बहुत निडर थी।

इसको मैं निडर इसलिए बता रहा हूं कि उसकी निडरता एक दिन बहुत भारी पड़ गई थी।

3-4 साल पहले तक गांव की अधिकतर औरतें सुबह – सुबह उठकर लोटा लेकर नित्यक्रीया के लिए कोई खेत में तो कोई खुले मैदान में जाती थी।

वो भी जब गांव के पुरूष लोग सो रहे हो तब जाती थी। कुछ दिन बीत गया।

तो अब रमाकांत को एक सुंदर सी बेटी हुई। बेटी अभी 8 महीने की थी। उस समय उसकी बीवी सुबह-सुबह अकेले उठकर खेत में चली गई.

और अपने सासू मां को या फिर अपनी जेठानी को भी नहीं जगाया। वह अकेले ही चली गई।

क्योंकि वह तो बहुत निडर थी। लेकिन उस समय वह ना तो हाथ में चक्कू और ना ही माचिस लिया। जिस घर को बच्चा पैदा होता है।

उसके एक साल तक उस घर की औरत को बाहर अकेले नहीं भेजा जाता।

वह भी सुबह-सुबह बिना किसी को साथ लिए। क्योंकि उस औरत पे भूत प्रेत इन लोगों का साया जल्दी पड़ता है।

लेकिन वह अकेले गई थी। तभी वहां बेल का पेड़ लगा था। उस पर एक चुड़ैल घूम रही थी। जो इसके साथ नहीं आना चाहती थी।

लेकिन फिर भी वह आ गई। जब रमाकांत की औरत खेत से आई तो लौटा फेंककर पलंग पर बैठकर गाना गाने लगी।

बगल में ही खाट पर लेटी हुई उसकी बच्ची जोर-जोर से रो रही थी। लेकिन वह तो गाने में व्यस्त थी। इसीलिए उसे सुनाई नहीं दिया।

इतना देखकर रमाकांत चिल्लाने लगा। कि बेटी को उठाओ क्या तुम्हें सुनाई नहीं दे रहा है। कि वह रो रही है। फिर भी बीवी ने जवाब नहीं दिया।

तब तक रमाकांत की भाभी आ गई. और वह समझ गई कि यह कौन है? और रमाकांत को इशारा किया कि जाओ दादा जी को बुला लाओ।

इतना सुनते ही रामाकांत समझ गया कि मेरी बीवी के ऊपर कोई चुड़ैल का साया है। तभी भाभी ने दादाजी का नाम लिया।

तब तो रामाकांत पलंग पर बैठ कर दादागिरी झाड़ने लगा और बोला कि तुम कौन हो? यहां पर क्यों आई हो?

क्या तुम मुझसे शादी करना चाहती हो? (तब तक गांव की कुछ औरतें और कुछ पुरुष मजा लेने के लिए इकट्ठा हो गए) चुड़ैल ने कहा कि मुझमें तुम्हें क्यों दिलचस्पी हो रही है।

क्यों मुझसे शादी करने के लिए आतुर हो।

तो रमाकांत झट से बोला कि मैं कुछ काम धंधा तो करता नहीं। लेकिन अगर तुम साथ रहोगी तो धन दौलत लाती रहोगी। चुड़ैल ने हंसकर बोला ऐसा कुछ नहीं होता।

हमारे में भी कोई ना कोई मुखिया जरूर रहता है। जो धन दौलत की रखवाली करता है। तुम चाहो तो हमारी दुनिया में चलो।

तब मैं तुम्हें सब कुछ दूंगी पर अभी नहीं क्योंकि तुम जीवित हो। रमाकांत समझ गया कि अब मेरे हाथ कुछ नहीं आने वाला है।

तो उसने बोला कि ब्राह्मण परिवार में आते हुए तुम्हें डर नही लगा। (और नीचे बैठे हुए सब लोग मजे लेते हंस रहे थे) तब तक दादाजी भी आ गए और बोला कि यहां से सब लोग हट जाओ और अपने-अपने घर जाओ।

इतने में रमाकांत की बीवी भी पलंग से नीचे उतर कर सिर पर पल्लू डाल दिया और चुड़ैल भी चली गई। तब रामाकांत मन ही मन बड़-बडाने लगा।

कि इनको भी अभी आना था। अगर थोड़ी देर बाद आते तो क्या पता मैं भी मालामाल हो जाता। बेचारा रमाकांत बहुत दुखी हो गया।

राजस्थान के कोटा की भूतिया हवेली

यह कहानी राजस्थान के कोटा शहर की एक भूतिया हवेली के बारे में है। यह हवेली राजा महाराजा के समय में बनाई हुई थी। लेकिन पिछले अठारह सालों से इस हवेली में आज तक कोई भी रहने के लिए नहीं आया है। इच्छा होने पर भी इस हवेली में कोई भी नहीं रह पा रहा था, क्यूंकि लोगो का कहना थी की इस हवेली में भूत-प्रेत का साया है।

जब अजीतसिंह को इस हवेली के बारे मे पता चला तो उसने तय किया की वो इस रहस्य को जान कर ही रहे गा, क्यों लोग इस हवेली में नहीं रह पा रहे है। उस ने मजबूत इच्छा शक्ति से हवेली मे रहने की पूरी तैयारी कर ली।

जब उसने हवेली के अंदर जाने के लिए पैर आगे बढ़ाये तो दरवाजे पे किसी अनजान व्यक्ति ने उसे रोक लिया। और नजदीक जाके बोलै, “कौन हो आप, और किधर जा रहे हो?” अजित सिंह ने जवाब देनेके बजाय उसने सामने सवाल किया। “जी, आप कौन?” मेरा नाम अर्जुन सिंह है, और मैं यही पास मे ही रहता हूँ। अजित सिंह ने कहा, “ओह अच्छा, मैंने सुना है की यह एक भूतिया हवेली है। और यंहा कोई नहीं आ पाता है।”

इसलिए मैं इस हवेली में एक दिन रुकने का फैसला किया है। अर्जुन सिंह ने कहा, “जी हाँ। आप ने सही सुना है।” और आप भी अंदर मत जाइये, मेरी माने तो आप भी वापस लौट जाइये। यंहा बहुत खतरा है। यह सुन कर अजीत सिंह खुश हो गया। जैसे उन्हें कोई लॉटरी लग गई हो।

अर्जुन ने उसकी खुशी को देखकर बोला, “आप क्यों खुश हो रहे हो, आप को तो भूत का नाम सुनकर डर लगना चाहिए।“

शायद आप को पता नहीं होगा की, मैं भूत प्रेत मै काफी दिलचस्पी रखता हु।

अगर इस हवेली मे भूत है तो मै अंदर जररु जाऊंगा और सारी सच्चाई का पता भी लगाऊँ ग

इतना कह कर अजीत सिंह उस हवेली में चले गए।

अंदर जाके अजित ने अपनी बैग को साइड में रखा और हवेली के चारो ओर देखने लगा। सरे रूम भी चेक कर लिए।

बाद में ड्रॉइंग रूम में आके सोफे पर बैठ गया। उसने वहां बैठ कर दारु के दो-चार पेग भी पिए।

वंही अचानक उस रूम में लाइट का एक बल्ब चालु-बंध होने लगी। लेकिन अजीत ने उस पर ध्यान नहीं दिया

थोड़ी देर बाद दूसरा बल्ब चालु-बंध होने लगा, फिर तो हवेली की सरे लाइट चालू भंध होने लगी।

यह सब देख कर अजीत अपनी जगह पे खड़ा हो गया और सम्पूर्ण सावचेत हो गया।

अचानक उसके सामने एक छोटा टेबल हवा मे उड़ने लगा। करिबन 6 फुट हवा में ऊपर जाके गोल गोल घूमने लगा।

और बाद में अजीत की और तेजी से आने लगा।

अजित ने तुरंत ही अपने जगह बदल दी और दूसरी ओर चला गया और वो टेबल वंही जाके गिरा जंहा अजित खड़ा था।

अजीत कुछ समझ पाता उतने मैं सोफे की शीट उसकी ओर आने लगी। वो जल्द खड़ा हो गया और छलांग लगा के दूसरी और कूद गया। जिसके कारण सोफा दीवाल को टकराया और अजीत बच गया।

अचानक सब कुछ शांत हो गया।          

अजित ने चारो और सतर्कता से देखा और बड़ी आवाज में बोला, “तुम जोभी हो सामने आकर के बात करो।”

वंही एक बड़ी परछाई उसके सामने आयी।

अजित ने उस परछाई को देख कर बोला, “कौन हो तुम? और क्यों मुझे मारना चाहते हो?”

परछाई : तुम्हारी भूल के कारण

अजित : मेरी भूल? मैंने कोनसी भूल की?

परछाई : इस हवेली में आने की भूल। मै किसी को भी इस हवेली में खुश नहीं देख शकता।

अजित : लेकिन क्यों?

वो पदछाइने जवाब दिया, आज से अठारह साल पहले इस हवेली के मालिक ने मुझे यही पे ही मार डाला था। मेरी कोई गलती भी नहीं थी।

इस कारन की वजह से मेरी आत्मा इस हवेली में भटकती रहती हे। मै किसी को भी इस हवेली में नहीं रहने दूंगा क्यूंकि इस हवेली में मेरा खून हुआ था।

इस हवेली में जो भी रहने के लिए आएगा उसकी मौत होगी।

अजित ने कहा, “मै तुम्हे अपने असली रूप में देखना चाहता हु।”

तुम्हे मार ने से पहले मै तेरी यह इच्छा अवस्य पूरी करूँगा।

और उस पड़छै ने एक भयानक दरम्याना रूप ले लिया। उस का चेहरा इतना भयानक था कि अजीत भी एक क्षण के लिए डर गया था, लईकिन देसरी ही क्षण में उसने अपने आप पर काबू पा लिया।

बाद में इसने अपनी जेब में से सफ़ेद पावडर निकाला और उस भूत के पर फेंक दिया।

भूत के पर पवडर पड़ते ही वो जलने लग गया। बड़ी बड़ी ज्वाला इ उठने लगी।

वो बहुत जोर जोर से चिल्लाने लगा और बाद में पूरी तरह से जल गया।

उसके बाद अजीत ने चैन से सांस लिया और वंही पर सो गया।

दूसरे दिन सुभह जब अजीत को सही सलामत हवेली से बहार आते देख अर्जुन को आशर्य हुआ।

अर्जुन ने अजित से पूछा, “तुम कैसे जिन्दा हो?” जब अजीत ने अर्जुन को कल रात को घटी घटना को परी तरह से बताया और बोला अब यह हवेली भूतिया हवेली नहीं रही।

शिमला के शार्पित पहाड़

यह कहानी उन चार दोस्तो की है जिसके साथ कुछ ऐसी घटना घटी की जिसे उनका पूरा जीवन ही बदल गया। आइये जानते है कि ऐसा क्या हुआ था।

मुंबई शहर की रहने वाली प्रिया शर्मा अपने दोस्तों के साथ रवि, साहिल ओर विजय के साथ शिमला जाने का प्लान बनाया।

वो सब शिमला जाने के लिए बस में बैठ गए। कुछ ही देर में प्रिया सो गई।

अचानक प्रिया की नींद खुल गई तो उसने देखा की, बस में कोई नही था। बस का ड्राइवर भी नही था। बस अपने आप ही चल रही थी। उनके सारे दोस्तों भी बस में नही थे।

यह सब देखकर डर के मारे प्रिया जोर जोर से चिल्लाने लगी। अचानक उसे लगा कि कोई उसके पीछे खड़ा है। जब उसने पीछे मुड़कर देखा तो वहाँ एक स्त्री बैठी हुई थी।

उस स्त्री का चहेरा जला हुआ था, ऐसा लग रहा था कि किसने उसके चेहरे पर एसिड फैंका हो। ऐसा भयंकर चहेरा देखकर प्रिया ने चिल्लाना शुरू कर दिया।

बचाओ…..बचाओ…..बचाओ…..

ओर अचानक प्रिया की नींद उड़ गई। वो एकदम डरी हुई और पसीने से पूरी भीग गई थी।

पास में बैठे हुए विजय ने पानी की बोटल दी और बोला, “शायद तुम्हें कोई सपना देखा होगा”।

थोड़ी ही देर में सब शिमला पहोंच गए और एक होटल पर रात बिताने के लिए गए।

दूसरे दिन वो सब साथ में मिलकर होटल के पास वाले पहाड़ पे घूमने जाने का नक्की किया।

करीबन आधे घंटे में वो सब पहाड़ की सबसे ऊंची शिखर पर पहोच गए। वहीं से नीचे देखने पर घने लीलेछम पेड़ पौधे काफी सुंदर दिख रहे थे।

अचानक साहिल चौक गया और बोला, “नीचे देखो कोई खड़ा है, लगता है कोई स्त्री है।”

विजय और रवि भी देखने लगे लेकिन उन्हें कोई दिख नहीं रहा था।

और बोले तू पागल हो गया है क्या इस घने जंगल में कोई स्त्री कैसे आ सकती है?

तुम्हें शायद कोई भ्रम हुआ होगा उसके बाद वह सब खुली जगह पर चले गए।

रात होने वाली थी इसलिए वह सब ने पहाड़ पर ही रुकने का निर्णय किया।

इसलिए उन सब ने वहां पर ही तंबू लगाया और खाने पीने के लिए सामान बाहर निकाला।

प्रिया की बैग तंबू के बाहर थी इसलिए वह लेने के लिए बाहर गई तो वहां पर उसे किसी की आवाज सुनाई दी।

प्रिया उस आवाज की और अपनी नजर घूम आती है तो उन्हें सामने से कोई तीन आदमी आते हुए दिख रहे थे।

उनके हाथ में धारदार हथियार देखकर प्रिया डर जाती है और दौड़ के तंबू के अंदर आ जाती है।

उसने अपने दोस्तों से भी यह बात की लेकिन कोई उसकी बातों पर विश्वास नहीं कर रहे थे।

प्रिया चिल्लाकर बोली, “आप सब पागल हो गए हो क्या? कोई भी मेरी बातों पर भरोसा नही कर रहा है, चलिए मेरे साथ बाहर, मैं आपको बताती हु”।

वो सभी बाहर आके शिखरकी टोच से नीचे देखने लगते है। उतने में ही उन सभी को लगता है कि कोई तीन लोग उनकी ओर बढ़ रहे है।

यह सब देख कर वो सभी डर जाते है और तुरंत ही अपना अपना सामान समेट ने लगते है। ओर बड़े से पथ्थर के पीछे जाके छुप जाते है।

थोड़ी ही देर में वो सब ऊपर आ जाते है। प्रिया देख रही है कि उनके हाथ, पैर और शिर आम आदमी जैसे बिल्कुल नही थे।

वो सब एक जगह पे बैठ जाते है और कुछ तांत्रिक विद्या शुरू करते है। उन में से एक आदमी अपनी हाथो की उंगली को काट देता है।

लेकिन अंधेरे की वजह से उन्हें कुछ भी ठीक से दिखाई नही देता है।

अचानक उन चारों ने देखा कि एक औरत उन आदमीओ के बीच में आके लेट जाती है। कोई नही जानता कि आखिर वो औरत वहाँ पे पहोंची कैसे?

प्रिया ने कहा, “मुजे कुछ समझ नही आ रहा है आखिर यह सब हो क्या रहा है? मुजे बहोत ही डर लग रहा है।”

एक के बाद एक वो तीनो उस औरत को सूंघने लगे। वहीं पे अचानक उस औरत ने अपनी उंगली उठाई और हमारी तरफ इशारा करने लगी।

हम सब डर गई। वो तीनो उस औरत को छोड़ कर हमारी ओर बढ़ने लगे।

हम सब पहाड़ी से नीचे होटल की ओर दौड़ ने लगे। हमारी आवाज सुनकर वो तीनो हमारी ओर दौड़ने लगे।

प्रिया ओर साहिल सबसे आगे थे और विजय ओर रवि उनके पीछे दौड़ रहे थे।

प्रिया ओर साहिल होटल तक पहोंच गए लेकिन रवि ओर विजय का कोई पता नही चल रहा था।

हमने होटल वालो से उनके बारे में सभी बातें के तो उन लोगोंने कहाँ की, “उस पहाड़ पे कोई नही जाता है, वो पहाड़ शार्पित है, जो भी वहाँ जाता है वो कभी वापिस नही आता है, आप की किस्मत अच्छी थी कि आप अभी जिंदा है।”

लेकिन हमारे दोस्त रवि ओर विजय कभी भी वापिस लौट के नही आये। हमने उन्हें ढूढ़ने का बहोत ही कोशिश की, पुलिस कम्पलेंन भी करवाई लेकिन कोई फरक नही पड़ा।

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