हेलो, आज की इस पोस्ट में हम आपके साथ किसान की कहानियाँ में शेयर करने जा रहे है। आप इन किसान की कहानियाँ को पूरा पढ़े। आपको यह किसान की कहानियाँ बहुत पसंद आएगी। 

किसान की कहानियाँ

Farmer Stories in Hindi List

पत्थर और किसान

चतुर किसान

गरीब किसान की कहानी

किसान और बकरा

भालू और लालची किसान की कहानी

ईमानदार किसान और लालची बेटा

एक किसान की कहानी

ईमानदार गरीब किसान की कहानी

किसान और उसके बेटे

किसान और फूटा मटका

किसान और रानी

एक ईमानदार किसान

किसान और आलसी बेटे

एकता की शक्ति

पत्थर और किसान

एक गांव में एक किसान रहता था उसका नाम मोहन था। वह मेहनती तो था लेकिन उसकी एक समस्या भी थी। वह हर कार्य को अपने विचारों और निर्बलता के बल पर बहुत ही बड़ा बना देता था,

जिससे कि कार्य करने में उसे बड़ी ही परेशानी हुआ करती थी।

जब वह अपने खेत मे जुताई का कार्य करता था तो उसके मार्ग में एक पत्थर आ जाता था। उसकी ठोकर से कभी कभी तो वह नीचे गिर जाता था। वह पत्थर दिखने में बहुत बड़ा लगता था।

तथा ऐसा प्रतीत होता था जैसे कि वह पत्थर जमीन के अंदर तक धंसा हुआ हो। इसलिए मोहन ने कभी भी उस पत्थर को निकालने का प्रयास नहीं किया और उसको यह कार्य बहुत कठिन भी लगता था।

एक के बाद एक फसल तैयार होकर कट जाती थी लेकिन वह पत्थर ज्यो का त्यों वहीं पर बना रहता।

अब एक दिन जब वह हल जोत रहा था तो जब वह पत्थर के पास पहुंचा , उसका हल उस पत्थर से टकरा गया और टूट भी गया।

हल के संतुलन बिगड़ने से मोहन भी नीचे गिर गया।

उस दिन मोहन को बहुत ही गुस्सा आया और उसने सोच लिया कि आज तो वह इस पत्थर को यहां से निकालकर ही दम लेगा। मोहन दूसरे खेतों में काम कर रहे सभी किसानों को अपने पास बुलाया।

सभी किसान अपना कार्य छोड़ कर उसके पास आ गए। मोहन ने अपनी परेशानी उनको बताई।

तब एक व्यक्ति वहां खड़े थे जिनके पास एक बड़ी सी कुदाल थी। उन्होंने जोर की एक कुदाल मारी और वह पत्थर निकलकर बाहर आ गया। वह छोटा ही था।

तब सब मोहन को देखकर हंसने लगे और अपने कार्य मे वापस लौट गए। मोहन को भी बहुत शर्मिंदगी हुई।

सीख: “जब तक आप किसी कार्य को करते नहीं वह कार्य बड़ा और कठिन ही लगता है। इसलिए सर्वप्रथम कार्य करना प्रारंभ करिए।”

चतुर किसान

बहुत समय पहले की बात है। एक बार एक गांव में एक किसान रहता था। उसके पास बहुत सी बकरियां थी। वह बकरियों को पालता था और वहीं उसकी रोजी रोटी का साधन थीं।

एक बार उसको एक शेर का बच्चा मिला,

उसने शेर के बच्चे को पाल लिया। धीरे धीरे सागर बड़ा हुआ। शेर किसान को तो कुछ नहीं करता था, लेकिन वह बकरियों का दुश्मन था।

किसान ने एक दिन सोचा कि वह अपने शेर को एक चिड़ियाघर में छोड़ आएगा जिससे कि उसकी देखभाल भी हो जाएगी और किसी शिकारी के हाथों मरने का डर भी नहीं रहेगा।

साथ ही उसको कुछ पैसों की आवश्यकता थी तो उसे एक बकरी भी बेचनी थी।

अब वह किसान, अपने शेर, और बकरी को लेकर बाजार की ओर जाने लगा। ताकि साथ मे दोनो कार्य हो जाएं। किसान के सामने शेर, बकरी को कोई हानि नहीं पहुंचा सकता था।

किसान ने साथ मे कुछ घास भी रख ली बकरी के लिए।

अब बाजार जाने के लिए तो बीच मे नदी पड़ती थी। और वहां एक ही नाव थी, जिसमे केवल दो ही वस्तुओं अथवा व्यक्तियों को इस पार से उस पार ले जाया जा सकता था।

किसान की समझ मे नहीं आ रहा था कि वह करे तो क्या करे। क्योंकि अगर वह शेर को ले जाता तो बकरी घास खा जाती और अगर वह घास ले जाता तो शेर बकरी को खा जाता।

 बहुत देर सोचने के बाद उसे एक युक्ति सूझी।

वह पहले बकरी को अपने साथ ले गया और उसे उस पार छोड़ आया। फिर वह नदी के इस पार आ गया। इस बार वह शेर को नाव में बैठकर नदी के उस पार ले गया।

लेकिन आते वक्त बकरी को वापस ले आया। फिर वह बकरी को छोड़कर घाँस को शेर के पास ले गया। और अंत मे वापस आकर बकरी को भी उस पार ले गया। इस प्रकार उसने अपनी सूझ बुझ से तीनों को नदी पार कराया और फिर उन्हें बाजार ले गया।

सीख: “थोड़ी सी सूझ बूझ और बुद्धिमानी से हर कार्य को सम्भव बनाया जा सकता है।”

गरीब किसान की कहानी (Garib Kisan ki Kahani)

किसी गांव में एक किसान रहता था। इस संसार में वह बहुत ही गरीब था। उसके पास जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा था जिसपर वह खेती करता था। उसका गुजारा अत्यंत कठिन तरीकों से होता था। एक दिन सूरज की गर्मी चरम सीमा पर थी परंतु किसान हमेशा की तरह खेत में काम कर रहा था।

पसीने से लथपथ किसान बुआई के लिए खेत जोत रहा था। इसी बीच खेत में खुदाई करते समय जमीन से एक बड़ा सा लकड़ी का बक्सा मिला। किसान ने सावधानी से बक्शे को निकाला पहले तो उसके समझ में नहीं आया की बक्शे का क्या करें? आखिर उसने बक्से को खेत के बाहर रख दिया।

उसे साफ करके जो रोटियां वह घर से लाया था वह बक्शे में रख दी और अपने काम में जुट गया। दोपहर को जब वह खाने के लिए रोटीयां निकलने के लिए बक्शे के पास गया तो हैरान रह गया। उसमें रोटीयां ही रोटीयां भरी हुई थी। तब किसान को पता चला की वह जादुई बक्सा था। उसमें जो भी चीज डालो उसका 80 गुना होकर बाहर आता‌।

जैसे एक मूंगफली का दाना डालो तो तुरंत उसमें से 80 दाने निकल पड़ते। किसान ने तृप्त होकर खाना खाया और उसके बाद किसान संतुष्ट होकर बक्से को घर ले आया। बक्सा मिलने के बाद किसान बहुत खुश था उसे लगा की उसके सब दुख अब दूर होंगे।

वह लालची नहीं बल्कि धैर्यवान व्यक्ति था। उसने बक्से का दुरुपयोग नहीं किया। उसे जब भी किसी चीज की जरूरत होती तो बक्से से तुरंत प्राप्त कर लेता।

समय गुजरने के साथ-साथ उसके बक्से के बारे में गांव के जमींदार को पता लगा। जमींदार बेहद लालची था और उसे लगा की ऐसी ही जादुई चीज़ पर तो उसका अधिकार होना चाहिए।

उसके आदेश पर जमींदार के लठ्ठेत किसान को पकड़ कर ले आएं। उसने किसान को धमका कर कहा बक्सा जिस भूमि से मिला से है वह मेरी जमींदारी में आती है। इसलिए बता उस बक्से पर किसका अधिकार बनता है।

किसान बोला ‘यह ठीक है हुजूर की यह भूमि आपकी जमींदारी पर आती है पर बक्सा जिस खेत से निकला है उसपर मैं खेती करता हूं। अत: इस बक्से पर मेरा अधिकार बनता है।

किसान गिड़गिड़ाया, लेकिन जमींदार ने बहुत धमकाया, बक्सा पाकर जमींदार बहुत खुश हुआ। मगर किसान का रो-रो कर बुरा हाल था। जमींदार की अब चांदी हो गई।

वह जो चाहता बक्शे में डालता और उसे कई गुना पाकर खुश हो जाता। कुछ लोगों ने जादुई बक्से की खबर मंत्री जी के पास पहुंचा दी। पहले तो उसे विश्वास नहीं हुआ फिर उसने अपने विश्वस्त सेवक को बक्से की सच्चाई परखने के लिए भेजा।

वहां जो उसने बक्से का जो जादू देखा तो वह मंत्री के पास जाकर सारी सच्चाई बता दी। मंत्री ने जमींदार को बुलाया फिर उसे डराते हुए कहा ‘हमें पता चला है की तुम्हारे पास एक जादुई बक्सा है उसे तुरंत हमारे हवाले कर दो।

इसी जादुई बक्से को हाथ से निकलते हुए देखकर जमींदार की हालात खराब होने लगी। उसने मंत्री जी से बहुत विनंती की पर मंत्री नहीं माना।

बक्सा पाकर मंत्री मतवाला हो गया विरोधियों को यह अच्छा मौका मिल गया‌। उन्होंने बक्से के साथ-साथ मंत्री के निकम्मेपन की खबर भी राजा तक पहुंचा दी। बक्से की बात सुनकर राजा अधीर हो उठा। वह अपने सेनापति के साथ मंत्री के घर जा पहुंचा उसने कहा देश की सारी जमीन राजा की होती है। इसलिए जादुई बक्से पर भी उसी का हक है।

मंत्री ने बिना देरी किए बक्सा राजा को दे दिया। जादुई बक्से को पाकर राजा प्रसन्न हो गया। सबसे पहले राजा ने जादुई बक्से की मदद से अपनी खजाने की वृद्धि की फिर राजा को उस बक्से की सुरक्षा को लेकर चिंता हुई।

राजा हर कीमत पर उस बक्से को अपने साथ रखना चाहता था। राजा ने सोचा की इसका रहस्य ज्ञात करना चाहिए की आखिर इस बक्से में हैं क्या?

यह जानने के लिए राजा उसमें प्रवेश कर बैठा जब बाहर निकला तो उसके पीछे-पीछे 80 राजा बाहर निकलें। असली राजा का कुछ पता नहीं चलता था। वे राजसिंहासन में कब्जा करने के लिए एक-दूसरे से लड़ने लगे।

यह जानकर किसान को बेहद दुख हुआ। वह अपने आपको कोसने लगा कि कितना अच्छा होता की मैं बक्से को जमीन में ही गढ़ा रहने देता।’

किसान और बकरा

एक गांव में एक किसान रहता था। उसके पास एक बकरा और दो बैल थे। बैल से दिन भर किसान अपना हल जोता करता था। फिर शाम होते ही उन्हें गौशाला में बांध देता था।

वहीं बकरा केवल रात को ही बैलों के साथ रहता था औऱ दिन भर वह इधर उधर घूमकर चरता ही रहता था। कुछ ही दिनों में वह खा खाकर बहुत हट्टा कट्टा हो गया था।

बैल अक्सर उसे चरता हुआ देखकर उसको बहुत खुशनुसीब समझा करते थे।

वहीं बकरा भी जब चरता था, तो उसे बैलों का ख्याल आता था। वह सोचता था कि मैं तो दिन भर खाता रहता हूँ।

लेकिन बैल बिचारे दिन भर मेहनत करते थे।

एक दिन बैल किसान के साथ खेत मे काम कर रहे थे। तभी किसान की पत्नी ने वहां बकरे को भी चरने के लिए छोड़ दिया। अब बकरा वहीं पास के खेत मे हरी भरी घाँस चर रहा था।

तब बकरे ने उन्हें चरते हुए देखा। वह मन मे सोच रहा था, मुझे तो हरि भरी घास घर पर ही मिल जाती है और हरी पत्तियां भी किसान मेरे लिए ले आता है। मैं तो कुछ कार्य भी नहीं करता।

काश ये बैल भी बकरे होते! बकरे ने इस बारे में बैलों से बात भी की। लेकिन बैल इस पर मौन रहे।

अगली सुबह जब बैल खेत के लिए निकल रहे थेa तब उन्होंने देखा कि, किसान की पत्नी बकरे और रुपये लेकर एक कसाई से बात कर रही थी। तब बैलों ने सोचा कि बकरे के ठाठ अब कसाई के घर पर होंगे।

सीख: “किसी के भी आलस को उसके ठाठ नहीं समझने चाहिए।”

भालू और लालची किसान की कहानी

बहुत समय पहले की बात है एक गाँव में एक किसान रहता था किसान बहुत लालची था किसान के लालच के कारण गाँव के लोग किसान को भला बुरा कहते रहते थे।

किसान की पत्नी और बच्चों ने किसान को बहुत समझाया की लालच बुरी बला है और आपको लालच नहीं करना चाहिए लेकिन किसान ने अपने पत्नी बच्चों की एक ना सुनी, धीरे धीरे किसान से गाँव के लोगो ने बातचित करना भी बंद कर दिया।

उसके कुछ समय बाद किसान के बेईमानी और लालच से परेशान होकर किसान के पत्नी और बच्चे भी किसान को छोड़कर चले गये, अब किसान खेत में अकेला खेती करता लेकिन किसान से अकेले इतनी मेहनत नहीं होती थी इस कारण फसल कम होती और मुनाफा भी कम होने लग गया।

किसान बहुत लालची था कम मुनाफे के कारण किसान दुखी हो रहा था उसे खेत में काम करने के लिए किसी की आवश्यकता थी लेकिन कोई भी उसके साथ काम करने के लिए तेयार नहीं था।

अंततः किसान ने सोच क्यों ना पास के जंगल से किसी जानवर को लाकर खेत में काम करवा लू, उसको कुछ देना भी नहीं पड़ेगा और खेत में काम भी हो जायेगा।

किसान जंगल में गया उसको एक भालू मिला, किसान ने भालू से कहा की तुम मेरे खेत में काम करो तुम्हे भर पेट खाना दूंगा इस पर भालू ने कहा की, में तुम्हारे खेत में काम करूँगा लेकिन मुझे आधी फसल देनी पड़ेगी।

किसान बहुत बेईमान और लालची था उसने भालू से कहा की ठीक है जो भी फसल होगी उसके ऊपर का हिस्सा तुम ले लेना और जड़े में रख लूँगा, इस पर भालू तेयार हो गया और किसान के खेत में काम करने लगा।

किसान ने खेत में शलजम बो दिए, भालू ने दिन रात मेहनत की, गाँव के सभी लोग भालू की मेहनत को देखकर आश्चर्यचकित थे भालू की मेहनत के कारण इस बार फसल बहुत अच्छी हुई।

अब फसल काटने का समय आ गया था किसान ने भालू से कहा की ऊपर की सारी फसल तुम ले जाओ और किसान ने सारे शलजम ले लिए।

भालू किसान की बेईमानी से बहुत दुखी हुआ उसने किसान को कहा की, तुमने मेरे साथ धोखा किया है में तुम्हारे साथ काम नहीं करूँगा और भालू वापस जंगल जाने लगा।

इस पर बेईमान किसान ने सोचा की अगर भालू चला गया तो खेत में काम कौन करेगा, किसान ने मन ही मन कुछ सोचा और भालू से कहा की, ‘’रुको मित्र नाराज मत हो’’ इस बार तुम सारी जड़े रख लेना और ऊपर का हिस्सा मुझे दे देना, भालू इस बात पर तेयार हो गया।

किसान ने खेत में गेहू बो दिए, भालू ने दिन रात मेहनत की इस बार भी फसल बहुत अच्छी हुई, अब फसल काटने का समय आ गया था किसान ने भालू से कहा की सारी जड़े तुम ले जाओ और किसान ने सारे गेंहू ले लिए।

भालू किसान की बेईमानी से बहुत दुखी हुआ उसने किसान को कहा की तुमने मेरे साथ जानबूझकर दो बार धोखा किया है, में तुम्हारे साथ काम नहीं करूँगा और भालू वापस जंगल चला गया।

गाँव के लोगो ने भालू की मेहनत को देखा था इस कारण गाँव के दुसरे किसानों ने भालू को अपने साथ रख लिया और भालू को उसकी मेहनत का पूरा हिस्सा देते थे अब भालू बहुत खुश था।

किसान फिर से अकेला हो चूका था उससे खेत में अकेले काम नहीं होता था अब उसके खेत में ज्यादा फसल भी नहीं हो रही थी धीरे धीरे उसे नुकसान होने लगा, लेकिन अब उसके साथ कोई भी काम करने को तेयार नहीं था।

किसान को अब समझ आ चूका था की उसके लालच और बेईमानी के कारण उसने अपने पत्नी बच्चे और सारे मित्र खो दिए है, अब किसान बहुत दुखी हो रहा था लेकिन अब समय बीत चूका था।

शिक्षा:- लालच बुरी बला है लालच के कारण सभी सम्बन्ध टूट जाते है और मेहनती लोगो के पास काम की कोई कमी नहीं होती है।

ईमानदार किसान और लालची बेटा (Honest Farmer and Greedy Son)

एक बार रहता था एक गरीब किसान वह बहुत ही परिश्रम था पर इतना मेहनत करने के बावजूद भी उसके खेत में कोई फसल मौजूद नहीं थी।

एक दिन पेड़ के नीचे आराम करते समय उसने एक सांप घर देखकर सोचा शायद ये नाग ही खेत का रक्षक है। अगर मैं इसकी सेवा करूंगा तो मेरी खेत भी उपजाऊ हो जाएगी।

अगले दिन किसान एक दूध की कटोरी ले आया और कहा ‘ओ नाग देवता कृपया मुझे समृद्धि और सफलता का आर्शीवाद दें।

सांप ने सारा दूध पिया और एक सोने का सिक्का उसके लिए छोड़ा। सोने का सिक्का तो यह सच्च है यह नाग देवा मेरे लिए शुभ है। धन्यवाद ओ नाग देवता।

इसी प्रकार कई दिनों तक चलता रहा। एक दिन किसान को काम के लिए शहर जाना पड़ा उसने अपने बेटे को बोला ‘बेटा हर रोज नाग देवता को दूध देना नहीं भूलना‌।

किसान के निकलने के बाद बेटा सांप को दूध देने लगा तो सांप ने रोज की तरह एक सोने का सिक्का दिया। बेटा सोचा हर रोज एक सोने का सिक्का कम हैं।

मुझे सारे एक साथ ही चाहिए कल मैं सांप को मारके सारे सिक्के निकाल लूंगा। अगले दिन दूध पीते समय किसान के बेटे ने सांप को लकड़ी से मारने की कोशिश की सांप तो बच निकला परंतु उसने सांप को डस लिया।

जब किसान वापस आया तो उसे इस घटना का पता चला और वह दुखी हो गया। किसान के बेटे को उसकी लालच की सजा मिल गयी।

एक किसान की कहानी

एक किसान था जिसके दो बेटे थे। वह बहुत ही आलसी और निकम्मे थे, वह अपने पिता को कामकाज में हाथ बठाने के बजाए आलस किया करते थे, इधर-उधर घूमते-फिरते थे।

किसान को अपने बेटों की बहुत फिकर थी, वोह सोचते थे की मेरे मरने के बाद इनका क्या होगा, यह अपना पेट कैसे भरेंगे, अपने परिवार को कैसे संभाल पायेंगे।

एक दिन किसान की हालत बहुत ही गंभीर थी, कहने का मतलब, किसान मरने की हालत में था।

तभी किसान ने अपने दोनों बेटो को बुलाकर उनसे कहां की, हमारे खेत में एक खजाना गढ़ा हुआ है, लेकिन वह किस जगह है उसकी जानकारी मुझे भी नहीं है, लेकिन खोदने बाद तुमे वो खजाना मिल जाएगा।

इतना कहकर किसान भगवान को प्यारे हो गये।

खजाने की खबर सुनकर दोनो बेटों के मन में लालच आ गया और वो दोनों खेत पर चले गये और खेत को खोदने लगे, खजाने के लालच में कुछ ही दिनों में पूरे खेत को खोदने के बाद वह घर जाकर बैठ गए और वह अपने पिता को कोसने लगे, इसी तरह कुछ महीने बित गए और वर्षा ऋतु का आगमन हुआ।

किसान के बेटों के पास पेट भरने के लिए सिर्फ एक ही जरिया था वोह है खेती।

तब बाकी किसानो की तरह किसान के बेटो ने खेत में बिज बोने शुरु कर दिए।

वर्षा का पाणी पाकर वह बिज अंकुशित हुए और देखते ही देखते खेत लहराने लगे।

ऐसा लग रहा था की हवा के झोके से लहरा रहा था।

यह देखकर किसान के बेटे बहुत खुश हो गये, उन को समझ आ गया की परिश्रम ही सच्चा धन होता है और वो उसी तरह से अपने पिता के शब्दो का मोल भी समझ गये और अपने कामकाज में लग गये।

ईमानदार गरीब किसान की कहानी

एक बार की बात है, किसी गाँव मे एक गरीब किसान अपने पत्नी और दो बच्चो के साथ रहता था, वह काफी गरीब था, उसके पास थोड़ी सी जमीन थी, जिसमे बहुत ही कम मात्रा मे फसल हो पाती थी, जिस कारण से उस गरीब किसान का गुजारा किसी तरह से चल पाता था, लेकिन वह किसान गरीब जरूर था, लेकिन वह बहुत ही ईमानदार था, कभी भी उसने गलत तरीके से पैसे कमाने के बारे मे नही सोचता था।

किसान के बच्चे छोटे थे, जिस कारण से किसान को उनके पालन पोषण की भी चिंता हमेसा सताती रहती थी, जिस कारण से गरीब किसान और पत्नी हमेसा चिंतित रहते थे, गरीब किसान अपनी पत्नी के साथ अपने खेत मे खूब मेहनत करता था, लेकिन उसके मन मुताबिक उतना फसल नही हो पाता था, की उसके परिवार का गुजारा हो सके।

कभी कभी ऐसा भी वक्त आता था की उस गरीब किसान के पास खाने के अन्न भी नही होते थे, फिर उसकी पत्नी दूसरों के घरो मे काम करके अनाज लाती थी, जिससे उनको भोजन मिल पाता था,

गरीबी मे ऐसे ही उस गरीब किसान के परिवार का दिन गुजारा हो रहा था, तो एक गरीब किसान की पत्नी बोली, क्यो ना आप शहर चले जाते है, क्यूकी इस छोटे से खेत से हम लोगो का गुजारा तो हो नहीं पा रहा है, तो ऐसे मे आपको शहर मे कोई काम मिल जाएगा, जिससे हम लोगो के दिन अच्छे हो जाएगे।

पत्नी की यह बात सुनकर किसान देर रात तक सोचता रहा, फिर उसने अगले दिन शहर जाने का फैसला किया, फिर अपनी पत्नी से विचार विमर्श करने के बाद वह गरीब किसान शहर जाने के लिए निकाल पड़ा,

काफी दूर चलने के बाद वह गरीब किसान शहर के एक रिहायशी इलाके मे पहुच गया, लेकिन वह गरीब किसान इस शहर मे अंजान था, उसका कोई जानने वाला नही था, वह काफी थक भी गया था, और एक पेड़ के नीचे बैठकर आराम कर रहा था, तभी उसके पास एक बड़ी गाड़ी आकर रुकी,

जिसमे से एक सूटबूट पहना एक व्यक्ति निकला और वह पास के फल के दुकान से कुछ फल खरीदने गया, फिर वह सूटबूट वाला व्यक्ति अपने हाथ मे पर्श और फल का थैला लेकर फिर से गाड़ी मे बैठने गया, की अचानक से उस व्यक्ति का पर्श जमीन पर गिर गया, जिसमे काफी पैसे और ढेर सारे कागजात थे, जो की बहुत कीमती भी थे,

और फिर गिरे पर्श से अंजान वह सूटबूट वाला व्यक्ति अपने गाड़ी मे बैठकर आगे निकल गया, तो पास मे बैठा गरीब किसान इस घटना को देख लिया था, और वह फिर उठकर उस पर्श के पास आया, और पर्श को उठा लिया, जिसमे उस व्यक्ति का घर का पता भी था,

तो वह गरीब किसान भले ही गरीब था, लेकिन वह ईमानदार था, उसने उस पर्श को वापस करने के लिए विचार किया, फिर वह लोगो की मदद से दिये पते पर पहुच गया, जहा उस व्यक्ति का बहुत बड़ा घर था, और गेट के अंदर बहुत बड़ा बगीचा भी था,

तो वह गरीब किसान वहा पर रहने वाले गार्ड को बुलाया और उस व्यक्ति का फोटो दिखाकर उनसे मिलने के लिए बोला, तो गार्ड ने उसको उस सूट बूट वाले व्यक्ति से मिलाने के लिए बंगले के अंदर ले गया,

फिर थोड़ी देर बाद वह सूटबूट वाला व्यक्ति गरीब किसान के सामने आ गया, और आने का कारण पूछा तो उस गरीब किसान ने अपने जेब से पर्श लौटाते हुए गिरे हुए पर्श की सारी घटना उस व्यक्ति से बता दिया।

इससे वह व्यक्ति गरीब किसान के ईमानदारी से काफी प्रसन्न हुआ और फिर उसी पर्श से कुछ पैसे निकालते हुए गरीब किसान को देने लगा,

तो वह गरीब किसान हाथ जोड़ते हुए बोला “साहब हम भले ही गरीब है, लेकिन अपनी ईमानदारी का मोल नही लेते है, अगर देना ही है तो हम इस शहर मे अंजान है, और पहली बार आए है, इस शहर मे हमारा कोई जानने वाला नही है, अगर कुछ देना ही है, तो आप हमे कोई काम ही दिला दे, तो आपका बड़ा अहसान होगा”

गरीब किसान की यह बात सुनकर वह व्यक्ति बहुत ही प्रभावित हुआ और बोला अगर आप काम चाहते है, तो आप एक किसान है, तो आपको पेड़ पौधो की बारे मे अच्छी जानकारी होगी, तो चाहो तो आप हमारे इस बगीचे के लिए माली के रूप मे काम कर सकते है, जहा पर आपको अच्छी पगार के साथ साथ यही रहने के लिये कमरा, और खाना भी मिल जाएगा, अगर आप चाहो तो यहा काम कर सकते है।

गरीब किसान उस व्यक्ति की बात सुनकर वहा काम करने के लिए राजी हो गया, इस तरह ईमानदारी के चलते उस गरीब किसान को अंजान शहर मे भी अच्छा काम मिल गया, और फिर धीरे धीरे उस गरीब किसान के परिवार के दिन भी सुधरने लगे।

शिक्षा - इस गरीब किसान के कहानी से हमे यही शिक्षा मिलती है, की भले ही हम चाहे कितने भी गरीब क्यो ना हो, लेकिन हमे कभी भी अपनी ईमानदारी नही छोडना चाहिए, क्यूकी अगर कुछ चंद पैसो का लालच करके गरीब किसान उस पर्श को अपने पास रख लेता तो उसे समय तो कुछ पैसे तो जरूर मिल जाते, लेकिन उसे काम नही मिलता, फिर उसे अपने लालच के चलते दर बदर ठोकरे खाने को मिलती,

तो हमे भी अपने जीवन मे कभी भी लालच नही करना चाहिए, जो हमारे पास ईमानदारी का गुण है अगर उसके साथ जीवन जीते है, तो हमारे साथ हमेसा अच्छा ही होगा, इसी सोच के साथ अपने जीवन मे आगे बढ़ना चाहिए, तभी एक सुखपूर्वक शांति का जीवन जी सकते है।

किसान और उसके बेटे

एक गांव में एक किसान रहता था। उसके तीन बेटे थे। वे तीनों बहुत ही निकम्मे और कामचोर थे। किसान ने शुरुआत से ही बहुत मेहनत की थी। और उसने अपनी मेहनत से ही अपना घर बनाया था।

इसके विपरीत उसके बेटे कोई कार्य करना नहीं चाहते थे। जैसे जैसे वे बड़े हुए उनका आलस भी बढ़ता गया।

एक बार किसान यूं ही खेत मे कार्य कर रहा था तो उसने मन मे सोचा, अगर मेरे बेटे भी मेरा कार्यों में हाथ बटाते तो आज हम सब बहुत आराम की जिंदगी जी रहे होते।

खैर मुझे अपना कार्य करना चाहिए। यह सोचकर वह अपना कार्य करने लगा।

वह खेत खोद रहा था तो उसके मन मे एक युक्ति आई और वह अपने घर चले गया। अब उसने घर जाकर बीमार होने का नाटक किया। अपने पिता को बीमार देखकर तीनों बच्चों को बहुत चिंता हुई।

उनके बीमार पिता ने अब अपने तीनो बेटों को एक साथ बुलाया और कहा, “तुम तीनो मेरी बात ध्यान से सुनो। मैं बीमार हूँ। और अब मेरी उम्र भी हो चली है। न जाने कब क्या हो जाए।

आज मैं तुम्हें एक बात बताना चाहता हूं। मैं ने हमारे खेत मे बहुत सारा धन गाड़ रखा है। अगर कल मुझे कुछ हो गया तो तुम तीनो अपना गुजारा कर लेना और अच्छे से रहना।”

तीनों भाई पिताजी के लिए चिन्तित थे लेकिन उन्हें खजाने की बात सुनकर बहुत खुशी हुई। तीनों ने सोचा कि हमे बिन मेहनत के ही इतना धन मिल गया है। अब तीनो ने एकमत से खेत को खोदकर धन निकालने का फैसला लिया।

अगले दिन तीनों खेत खोदने के लिए चल दिये। तीन चार दिन हो गए खेत खोदते खोदते लेकिन कोई खजाना उन्हें नहीं मिला। अब उनके पिताजी ने भी बीमारी से ठीक होने का नाटक किया।

जब पिताजी खेत आए तो वे बोले, “बेटा शायद खजाना तो इस वाले खेत मे नहीं है। अब जब मैं ठीक हो ही गया हूँ तो तुम्हें उस खजाने को निकालने की जरूरत नहीं है।

चलो मिलकर इसमें बीज बोते है।”

तीनो ने काफी मेहनत की हुई थी। अतः वे प्रेम और मेहनत से खेत मे बीज बोने लगे।

कुछ ही महीनों में फसल तैयार हो गयी। तीनो भाई बहुत खुश हुए और यह बात अपने पिता को बताने के लिए गए। उनका पिता उनकी खुशी देखकर ही खुश हो गया।

और उनसे कहा, “बेटा यही है वह खजाना जिसकी मैं बात कर रहा था। यदि तुम सब इसी तरह से मेहनत करोगे तो इस तरह का खजाना तुम्हें हर बार प्राप्त होगा।

सीख: “मेहनत और लगन से किये गए कार्य हमेशा सफल होते हैं।”

किसान और फूटा मटका

एक बार की बात है। एक किसान के पास दो मिट्टी के मटके थे। जिसमें वह दूर झरने से पानी भरकर अपने घर लाता था।

एक बार किसी वजह से एक मटका फूट गया। लेकिन किसान ने इस बात का पता होने पर भी वह मटका नहीं फेंका बल्कि वह तो उसमें पानी लाता गया।

अब किसान के घर मे डेढ़ मटका ही पानी आता था।

अपने फूटे होने की बात से फूटा हुआ मटका बहुत परेशान था। उसको लग रहा था कि मेरे फूटे होने की बात शायद मालिक को नहीं पता है ,नहीं तो अभी तक मुझे फेंक दिया होता।

आज मैं खुद मालिक से इस बारे में बात करूंगा।

यह सोच सोच कर वह रोने लगा। शाम को जब किसान खेत से घर वापस आया तो उसने किसी के रोने की आवाज सुनी। तब जब उसने इधर उधर देखा तो फूटा हुआ मटका रो रहा था।

किसान उसके पास गया तो उसके रोने का कारण पूछा। तब वह बोला, “मालिक आप नहीं जानते शायद, लेकिन मैं एक जगह से फूट गया हूँ। कृपया आप मुझे बदलकर एक अच्छा मटका ले आइये।”

तब किसान मुस्कुराते हुए बोला,” कल तुम मेरे साथ चलना और रास्ते को देखना फिर हम बात करेंगे।”

अगले दिन किसान फिर से पानी लाया लेकिन फूटा घड़ा अपने मे से बहता हुआ पानी देखकर और उदास हो गया।

घर आकर किसान ने उससे पूछा, “रास्ते के फूलों को देखा तुमने?”

तब फूटे घड़े ने कोई उत्तर नहीं दिया।

तब किसान बोला, “जब तुम फुट गए थे मुझे तब पता लग गया था। मैं ने उस ही दिन रास्ते मे फूलों के बीज बो दिए थे। अब तुम्हारे हिस्से वाले रास्ते मे बहुत अच्छे अच्छे फूल खिले हैं।

जिसको तुम रोज सींचते हो। उन फूलों को मैं एक माली को दे देता हूँ और वह उन्हें , फूल वालों को बेच देता है जिससे मुझे भी कुछ पैसे मिल जाते हैं। तुम्हारी वजह से ही मेरी कुछ आमदनी भी हो जाती है।

अब तुम उदास न होना कभी।”

फूटा घड़ा खुश हुआ और अगले दिन से खुशी खुशी उन फूलों की सिंचाई करने लगा।

सीख: “हर चीज मूल्यवान होती है। बस उस वस्तु को पहचानना पड़ता है।”

किसान और रानी

एक गांव में एक किसान रहता था। वह खेतों में काम करके बहुत मेहनत किया करता था। वह अपनी पत्नी के साथ एक झोपड़ी में रहता था।

उसकी पत्नी हमेशा उससे परेशान ही रहा करती थी। घर को संभालने की बजाय वह हमेशा अपने पति को कोसते रहती थी। उसका कहना था कि वह अपने घर को अच्छे से चलाने के लिए रुपये नहीं कमाता।

किसान भी हमेशा तनाव में ही रहता था।

एक दिन किसान और उसकी पत्नी घर पर झगड़ा कर रहे थे। तब उस राज्य के राजा और रानी उस गांव का दौरा करने के लिए आए। उनका रथ किसान की झोपड़ी के बाहर से होते हुए निकला।

राजा और रानी ने किसान और उसकी पत्नी का झगड़ा सुनकर वहीं रुक गए और और रानी ने फिर राजा से कहा, “मझराज पत्नी चाहे तो घर बना भी सकती है और बिगाड़ भी सकती है।

एक पत्नी को अच्छे से घर चलाने के लिए बहुत त्याग करने पड़ते हैं। अतः मैं चाहती हूं कि तीन महीनों के लिए मैं इस किसान के घर मे रहूं।

अपनी पत्नी की बात सुनकर राजा मान गया। और किसान और उसकी पत्नी को बाहर बुलाया।

किसान से राजा ने कहा, “हमने तुम्हारी सारी बातें और झगड़ा सुन लिया है। महारानी ने फैसला किया है कि आज से वे तीन महीनों के लिए तुम्हारे घर मे रहेंगी।

हमे भी हमारे राज्य की खुशहाली चाहिए।

तब तक तुम्हारी पत्नी महल में रह सकती है।”

सब राजी हो गए।

रानी ने तीन महीनों में घर की सफाई, घर मे नई चीजें लाकर रखी, किसान को बचत करना सिखाया। उतने समय मे ही किसान की काया कल्प हो गयी। और उसने अपनी बचत से कुछ बैल और गायें भी ले ली।

वहीं दूसरी ओर, राजा के घर मे किसान की पत्नीने बहुत गंदगी फैला दी। राजा इससे परेशान होकर रानी के आने का इंतजार करने लगा।

तीन महीनों बाद जब किसान की पत्नी अपने घर आई तो इसे विश्वास ही नहीं हुआ की वह उसका घर है। तब महारानी ने उसे समझाया कि, घर छोटा हो या बड़ा उसको सँवारना एक पत्नी का उत्तरदायित्व होता है।

महारानी की बात सुनकर किसान की पत्नी बहुत लज्जित हुई। और रानी से अपने घर को अच्छी तरह से संभालने का वचन दिया।

सीख: “अपने पास जितना हो उसमे सन्तुष्ट रहना चाहिए और अपने आप को हमेशा विकसित करने की कोशिश करनी चाहिए।”

एक ईमानदार किसान (Honest Farmer Story in Hindi)

एक गांव में एक गरीब किसान रहता था। वह बहुत ही ईमानदार और मेहनती आदमी था। वह अपने छोटे से खेत में काम करता और बहुत ही खुश रहता था। पूरे गांव में किसान की ईमानदारी के बहुत ही चर्चा थे।

उसका एक दोस्त था। जो उस गांव के राजा के यहाँ सिपाहीं का काम करता था। वह किसान से उसके घर रोज मिलने जाता था। एक बार राजा ने अपने दरबार में एक एलान किया कि उसके बगीचे में काम करने वाला एक अच्छा सा कारीगर चाहिए जो उसके बगीचें के पेड़ पौधों और फूलों का ध्यान रख सके।

राजा का यह ऐलान सुनकर किसान के दोस्त सिपाही ने सोचा कि यही मौका है की किसान से मित्रता निभाने की मैं उसे यहां बगीचें में काम पर लगवा दूँगा, उसका व मेरा साथ भी रहेगा एवं किसान का भला भी हो जाएगा।

यह सोचकर उसने राजा से कहा कि महाराज मैं आपके लिए एक ऐसे आदमी को लेकर आउंँगा जो यह काम अच्छे से कर लेगा। सभी राजा ने उस सिपाही को आदेश दिया कि जाओ कल से ही बगीचे में काम करने के लिए कह दो।

उसी वक्त वह सिपाही अपने दोस्त किसान के पास पहुंच गया और उसने किसान को बगीचें के काम की सारी बात बता दी और किसान ने भी काम करने के लिए खुशी-खुशी हां कर दिया।

अगले ही दिन अपने दोस्त के साथ राजमहल पहुंच गया। सिपाही उसे राजा के सामने लेकर गया और राजा ने उस किसान को बगीचे की पूरी देखभाल का काम सौंप दिया

राजा ने कहा तुम अगर पूरी ईमानदारी के साथ काम करोगे तो तुम्हें 50 सोने की मुद्राएं हर महीने दूँगा। किसान खुशी-खुशी बगीचे में काम करने के लिए हां कर देता है और वह उसी वक्त बगीचे में काम करने लगा।

किसान बगीचे में बहुत दिल लगाकर काम करता था। कुछ दिन बीच गए किसान ने बगीचे को बहुत सुंदर व हरा भरा बना दिया। राजा को उसका काम बहुत पसंद आया।

एक दिन किसान बगीचे में कुछ खुदाई कर रहा था। तो उसने जमीन के नीचे कुछ महसूस किया तो उसने खुदाई की तो देखा वहां नीचे एक बड़ी सी संदूक थी।

किसान ने वह संदूक बाहर निकाला और खोला तो क्या देखा वह सोने और चांदी से भरी हुई थी। यह देखकर किसान बहुत खुश हुआ और अपनी ईमानदारी दिखाते हुए राजा के पास पहुंचा।

राजा किसान की ईमानदारी देखकर बहुत खुश हुआ और उसके साथ वहां गया जहां किसान ने खजाना निकाला था। राजा ने देखा तो कहा यह खजाना तो हमारे पुरखों का है।

हम कई वर्षों से इसे खोज रहें थे‌। खजाना देख राजा बहुत ही खुश हो जाता है। राजा अगले दिन किसान को पूछता है तुम्हें क्या ईनाम चाहिए। किसान बोला मालिक मुझें कुछ नहीं चाहिए मेरे पास जो भी है मैं उसी में खुश हूं।

राजा उसकी इतनी अच्छी बात सुनकर ओर खुश हो गया और उसने किसान को अपना मंत्री बनाने का फैसला किया। किसान ने राजा की बात मान ली और मंत्री बन गया।

किसान और आलसी बेटे (The Farmer and His Lazy Sons)

बहुत समय पहले एक गांव में एक किसान रहता था। उसके पास काफी संपत्ति थी क्योंकि उसने बहुत सालों तक खूब मेहनत किया था। उसके पास बहुत बड़े-बड़े खेत थे पर वह बहुत दुखी था।

क्योंकि उसके बेटे बहुत पसंद आलसी थे। ना तो वह उसकी मदद करते थे। सारे दिन सोते ही रहते थे और अपना समय फालतू के खेलों में बर्बाद किया करते थे।

एक दिन किसान बहुत बिमारी पड़ गया। उसके बेटों ने डॉक्टर को बुलाया जहां डॉक्टर ने कह दिया की आपके पास ज्यादा समय नहीं है आपकी कोई आखिरी ख्वाहिश हो तो पूरा कर लें। वैसे तो आलसी बेटे कुछ काम नहीं करते थे लेकिन वह अपने पिता से बहुत प्यार करते थे।

डॉक्टर के जाने के बाद वह सभी रोने लगे। अपने बेटों को दुखी देखकर किसान का दिल पिघल गया और कहा चिंता मत करों बच्चों मैं स्वर्ग से तुम्हारी रक्षा करूंगा और जिससे की तुम कभी भूखें ना रहो मैंने खेत में सारा धन गांड़ दिया है। जब वह तुम्हें मिले तो तुमलोग बाज़ार जाकर उसे बेच देना वह तुम्हारे जिदंगी भर के लिए काम आएगी।

कुछ ही समय के बाद किसान की मौत हो गई। कुछ दिन तक दुखी बेटे दुख के मारे कोई काम नहीं कर पाएं पर फिर उन्हें लगा भोजन के लिए कुछ तो करना पड़ेगा।

बेटों ने खेतों में खुदाई शुरू कर दी पर वहां उन्हें कुछ ना मिला। उनके पिताजी के दोस्त ने कहा आखिर तुमने खेत जोत ही दिया है। तो क्यों ना बीज भी डाल दो।

बेटे तैयार हो गए। खेत बुआई करके उन्होंने इंतजार किया। उस साल मूसलाधार बारिश हुई। एक दिन जब बेटे सुबह उठे तो उन्होंने हवा में लहराते हुए अपनी फसल देखी।

यह सब देखकर उनकी आंखें फटी की फटी रह गई और उन्होंने कहा की यहीं वह धन था जो पिताजी हमारे लिए छोड़ के चले गए। अगर हम काम करेंगे तो हम कभी भी भूखे नहीं रहेंगे।

एकता की शक्ति

बहुत समय पहले एक गांव में एक किसान रहता था। वह खेती कर अपना घर चलाता था। उसके 4 बेटे थे। चारों बेटे बचपन मे तो बहुत प्रेम से रहते थे।

लेकिन जैसे जैसे वे बड़े हुए वैसे वैसे उनका प्रेम नफरत और घृणा में परिवर्तित हो गया।

किसान को अपने बेटों को आपस मे लड़ते देख बहुत बुरा लगता था। उसे समझ नहीं आता था कि आखिर वह अपने बच्चों में एकता बनाने के लिए क्या करे।

एक दिन वह जंगल गया। उसे आग जलाने के लिए लकड़ियों की जरूरत थी। जब वह लकड़ियों को तोड़ रहा था तो उसने देखा सुखी और कमजोर लकड़ियां काफी जल्दी टूट जा रही हैं। तब उसको एक विचार आया।

 उसने ऐसी लकड़ियों का एक गट्ठा तैयार किया और घर ले गया। उसने अपने चारों बेटों को अपने पास बुलाया।चारों बेटे आ गए।

अब किसान ने उन सबको लकड़ी के गठ्ठे में से एक- एक लकड़ी उठाने को कहा। चारों ने लकड़ियां उठाई। अब किसान बोला, “एक एक करके इन लकड़ियों को तोड़ कर दिखाओ।

बेटों को थोड़ा अजीब लग रहा था। फिर भी उन्होंने अपने पिता की बात मान कर लकड़ियां तोड़ी जो कि आसानी से टूट गयी।

अब किसान ने अपने बच्चों को साथ आठ लकड़ियों का एक बंडल दिया और एक एक करके चारों से उस बंडल को तोड़ने को कहा। लकड़ियों के बंडल को चारों में से कोई भी नहीं तोड़ पाया।

तब किसान बोला, “बच्चों मैं तुम्हें यही बताना चाहता हूं। जब तुम चारो झगड़ा आदि करते हो तो तुम एक कच्ची लकड़ी के समान कमजोर हो जाते हो और कोइ बाहर का व्यक्ति तुम्हारा फायदा उठा सकता है।

और यदि तुम चारों इकट्ठा हो जाओ तो तुम्हारी एकता की शक्ति को कोई भी नहीं तोड़ सकता।”

सीख: “एकता की शक्ति से कुछ भी किया जा सकता है।”

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