हेलो, आज की इस पोस्ट में हम आपके साथ Old Stories in Hindi में शेयर करने जा रहे है। इन stories आपको बहुत कुछ सिखने मिलेगा। यह stories बहुत Interesting है । आप इन Old Stories को पूरा पढ़े। आपको यह Stories बहुत पसंद आएगी। 

Old Stories in Hindi

Old Stories in Hindi List

सेठ के हीरे पुरानी हिंदी कहानी

समय का सही उपयोग करे हिंदी कहानी

एक सच की हिंदी कहानी

दादा जी का पेड़

बेवकूफ दोस्त की कहानी

जीवन में मेहनत जरुरी है हिंदी कहानी

बेवकूफ दोस्त

अच्छाई की अनोखी हिंदी कहानी

लब्ध प्रणांश

सेठ के हीरे पुरानी हिंदी कहानी

यह बहुत समय पहले की बात है. एक गांव था. उसमे एक लड़का रहता था. कहते थे वह बहुत मेहनती और ईमानदार था. मगर एक सेठ की वजह से उसे गांव से बाहर जाना पड़ा था. जबकि सच कुछ और ही था. एक दिन की बात है. सेठ अपने साथ बहुत अधिक हीरे लेकर जा रहा था. रस्ते में उसे प्यास लगती है. उस नल के पास वह लड़का पानी पीता है. सेठ कहता है. अभी तुम क्या कर रहे हो.

वह लड़का कहता है की खेत में पानी दिया है. अब घर जा रहा था. प्यास लग रही थी. इसलिए यहां पर पानी पीने आ गया था. यह सुनकर सेठ कहता है की मुझे भगी प्यास लगी है. वह हीरे का थैला नीचे रख देता है. वह सेठ नहीं जानता था. एक बहुत चुहा आ गया है. वह थैला काट देता है. उसके बाद वह सेठ घर चला जाता है. वह लड़का भी घर आता है. जब सेठ घर गया था. उसमे एक भी हीरा नहीं था. वह सेठ सोचता है की यह हीरा कहा चले गए है. तब वह थैले में देखता है उस जगह पर सुराग़ था. वह अब समझ गया था. यह काम उस लड़के का है.

वह लड़के के पास जाता है. उसके बाद वह कहता है की मेरे हीरे तुम्हे वापिस करने होंगे मगर वह लड़का कहता है की मेने हीरे देखे भी नहीं है. मगर सेठ नहीं मानता है. बहुत से लोग जमा होते है. बात बहुत बढ़ जाती है. वह लड़का कहता है की मेरे पास हीरे नहीं है. मगर सेठ को जैसा सुनना नहीं था. अंत में लड़के को गांव से बाहर जाना पड़ता है क्योकि उस पर चोरी की बात साबित हुई थी. जबकि वह लड़का चोर नहीं था. कभी कभी हम जीवन में ऐसा भी फैसला लेते है.

जिससे किसी को बिना कुछ करे ही सजा मिल जाती है. बहुत समय बाद पता चल गया था. यह कमा चूहे का था. क्योकि कुछ हीरे रस्ते में पड़े मिले थे. मगर वह लड़का पता नहीं किस जगह पर चल गया था. अब उस सेठ को पछतावा था. मगर अब कोई फायदा नहीं था.

समय का सही उपयोग करे हिंदी कहानी :- Hindi old story

एक आदमी जब अपने दोस्त के पास जाता है. उसका दोस्त कहता है. अगर तुम अपने जीवन में अभी से अच्छे कर्म करते हो तो अब भी जीवन अच्छा बन सकता है. मगर तुम दुसरो के साथ सयम बिता रहे हो. उनकी बाते सुन रहे हो. इन सभी में तुम अपने काम पर कब ध्यान दे सकते हो. वह आदमी अपने दोस्त की बात तो सुन रहा था. मगर उन्हें मानना शायद वह अशी नहीं समझता है.

क्योकि अभी तक उसने यही काम किया है. जब भी वह काम पर जाता था. अपने खेत के काम को देखता था. मगर कुछ देर बाद ही वह बोर होने लगता है. उसके बाद वह फिर से बात करने लग जाता है. उन बातो से कुछ नहीं होगा. यह बात वह जानता नहीं है. क्योकि उसे यही लगता है. काम हर रोज होता है. अगर एक दिन नहीं होगा. तो क्या हो सकता है. कल कर सकते है. मगर उसे यह बात उसका दोस्त समझा रहा था. आज तुम काम पर ध्यान देते हो. तो यह तुम्हारे ही काम आएगा. लेकिन उसे लगता है. उसका दोस्त बेवकूफ है.

वह उसकी बात नहीं मानता है. समय बीत रहा था. मगर उसका यह काम ठीक नहीं था. समय ने सब कुछ समझा दिया था. अब वह आदमी भी समझ गया था. अगर वह बातो पर ध्यान न देता तो बहुत अच्छा होता. मगर वह अपना समय खराब कर चूका था. उसका दोस्त उसे सही समझा रहा था. मगर शायद वही समझना नहीं चाहता था. इसलिए आपको भी समझना चाहिए. अगर आप सही से काम करते है. तो उसका फल भी अच्छा होता है.

एक सच की हिंदी कहानी

रामू को जब वह पाँच साल का था तभी से रामू अकेला ही था गाव वालो ने उसका पालन पोषण किया था, रामू अपना पेट मंदिर के प्रसाद से भरता था, मंदिर के पुजारी को रामू पर बहुत विस्वास था, सोने की जगह मंदिर की सीढिया ही थी, रामू हर रात मंदिर में ही सोया करता था और वही पर ही रहता था. उसी गाव में एक प्रधान थे जो मंदिर में रोज पूजा करने जाते है, और वही मंदिर की सारी जरूरत को देखना भी प्रधान जी का काम था, प्रधान जी मंदिर में सभी समान आदि का पूरा प्रभंद करते थे और मंदिर में आयोजन का भी प्रभंद करते थे, राधा कृष्ण की मुर्तिया पर सोने का हार भी प्रधान जी ने चढ़या था और प्रधान जी को गाव के लोग भी बहुत मानत थे,

एक रात को जब रामू सोया हुआ था तो बहुत ही तेज आंधी चल रही थी, आधी की हवा इतनी तेज थी की कुछ भी दिखई नहीं दे रहा था रात का समय था उसी समय सोने से बना हुआ हार जो की राधा क्रष्ण पर चढ़ा हुआ था टूट कर वही पीछे की और गिर गया और जहाँ पर कुछ जगह बनी थी वह पर छुप गया और वह पर कोई भी देख नहीं सकता था, सुबह हुई और फिर रामू ने पानी से पूरा मंदिर को धोया और साफ़ किया

सभी लोग धीर धीरे मंदिर में पूजा करने के लिए आये और फिर प्रधान जी भी आये तो उनकी नज़र मूर्तियों पर पड़ी और सोने का हार वह पर नहीं था इस देख कर मंदिर के पुजारी को बुलाया गया और पूछा की हार कहा पर, इस पर पुजारी ने कहा की उन्हें इस बारे में कुछ पता नहीं है, और कहा की रामू ही पूरी रात यह पर रहता है शायद उसे पता होगा,

फिर रामू को बुलाया गया और पूछा गया की हार कहा पर है इस पर रामू ने कहा की इस बारे में मुझे नहीं पता, पुजारी ने कहा की हार शायद चोरी हो गया है, रामू से चोर के बारे में पूछा गया तो रामानु ने कहा की यह तो कोई भी नहीं आया, पूरी रात रामू यही पर था कोई चोर आता तो रामू को जरूर पता होता,

जब किसी भी नतजे पर कोई नहीं पंहुचा तो सभी का शक रामू पर ही गया और प्रधान ने कहा की अगर तुम हार नहीं देते हो तो तुम्हे पचास कोदो की सज़ा दी जाएगी, पर रामू ने कहा की उसे हार के बारे में कुछ नहीं पता है पुजारी ने भी कहा की रामू सच बोल रहा है शायद उसे हार के बारे में कुछ पता नहीं है.

पर प्रधान जी को विस्वास नहीं था इस लिए रामू को पचास कोड़े लागए गए और उसे गाव से निकल दिया गया फिर रामू वह से चला गया और रस्ते में यही सोच रहा था की जिस भगवान की पूजा उसने दिन रात की उसकी की वजह से आज उसे चोर सब चोर समझ रहे है, जब रामू जा रहा था तो उसे एक गाव से गुज़ारना था

Because रस्ते में वही गाव पड़ता था, उसी गाव में वह पर कीर्तन चल रहा था और एक बाबा जी उसी में पूजा कर रहे थे रामू कीर्तन की बीच में जा कर बोला की बंद करो ये ढोंग भगवान कही भी नहीं है, इस बात पर सभी लोगो  को गुस्सा आया और सभी लोग उसे पीटने लगे यह सब देख कर साधू बाबा ने कहा की रुक जाओ ऐसे मत पीटो, पर बाबा जी ये नास्तिक है और भगवान को नहीं मानता है,

जब रामू से बाबा जी ने पूछा की तुम ये सब क्यों कह रहे हो, इस पर सारी बात रामू ने बता दी और बाबा जी ने कहा की भगवान सभी की परीक्षा लेते है और वो अपने भक्तो को हमेशा खुश देखना चाहते है, इस पर भी कोई राज होगा जो तुम्हारे साथ इस कुछ हुआ है, तुम भगवान से नाराज मत होना वो तुम्हरे साथ हमेशा से है, रामू को बाबा की बात समझ में आ गयी और बाबा जी के साथ रामू ने नगर नगर घूम कर भगवान की लीला का वर्णन किया और बाबा जी के साथ मिलकर ज्ञान का भंडार दिया.

एक रात रामू के सपनो में भगवान ने दर्शन दिए और कहा की तुम मेरे अच्छे भक्त हो, और तुम्हारी सब परेशानी अब समाप्त हो जायेगी, धीरे धीरे रामू एक बड़ा आदमी बन गया और रामानु ने उस गाव में स्कूल बनाबए और रोजगार का भी इंतज़ाम करवाया और एक दिन रामू अपने गाव में गया और उसी मंदिर में जाकर रामू ने पूजा की, पुजारी ने जब रामू को देखा तो उनकी आँखों में आंसू आ गए और पुजारी ने बताया की वो हार कुछ दिन बाद मिल गया और प्रधान जी को अपनी गलती का एहसास हुआ,

दादा जी का पेड़

इस पर रामू ने कहा की ये सब तो भगवान की लीला है हम लोग इसमें कुछ नहीं कर सकते है, सब उनकी मर्जी से होता है, कुछ देर बाद प्रधान जी भी वह पर आ गए और रामू के पैरो को छू  कर माफ़ी मांगी और कहा की उन से गलती हो गयी है,

फिर रामू ने कहा की इनमे उनकी क्या गलती और माफ़ कर दिया. फिर प्रधान जी ने अपनी लड़की  की शादी रामू से कर दी और फिर रामू की घ्रस्ति की शुरुवात हुई और रामू सभी जगह जगह जाकर भजन कीर्तन करता था और भगवान की लीला में  डूबा  रहता था, दोस्तों भगवान पर हमेशा विस्वास रखो वो हमेशा आपके साथ है…

बेवकूफ दोस्त की कहानी

मानो जैसे भाई भाई हो रमेश राजा को कभी भी अकेला नहीं छोड़ता था, जब भी वह काम पर जाता तो उसे साथ ले जाता था राजा रमेश के बहुत से काम करता था, वह उसे उसके दफ्तर में खाना पहुंचाता था, उसके उसके लिए बाजार से सब्जी लाता था और रमेश के सारे छोटे मोटे काम राजा बड़ी आसानी से कर देता था, आज पड़ोस के लोग भी उन दोनों की दोस्ती को देखकर मिसाल देते थे, अगर कोई रमेश को भला बुरा कह देता था, तो राजा उसे नहीं छोड़ता था, उसको काट जाता था, 1 दिन रमेश सो रहा था उसने राजा से कहा कि मैं सो रहा हूं तुम यहीं बैठ जाना और अगर दरवाजे पर कोई आए तो मुझे उठा देना राजा वहीं पर बैठ गया और रमेश सोता रहा.

अचानक रमेश की नाक पर कहीं से एक मक्खी आ गई, वह बार-बार रमेश की नाक पर बैठती राजा उसे बार-बार उड़ाता पर वह मक्खी फिर आ जाती राजा सोचने लगा इससे तो मैं रमेश की नींद खुल जाएगी और वह परेशान हो जाएगा, वह मक्खी के पीछे इधर उधर भागता कभी इधर से उड़ाता कभी उधर से उड़ाता मानो  मक्खी को भी उस से दुश्मनी हो गई हो वह बार-बार रमेश के मुंह पर ही आकर बैठती राजा को बहुत गुस्सा आ रहा था वह अंदर से एक चाकू ले आया मक्खी रमेश की नाक पर बैठी थी

राजा ने सोचा आज मैं इस मक्खी को मार दूंगा उस ने जैसे ही मक्खी को मारने के लिए चाकू  उठाया मक्खी उड़ गई और चाकू रमेश की नाक पर लग गया और उसकी नाक कट गई रमेश खून से लतपत हो गया वह जोर-जोर से रोने लगा और चिल्लाने लगा और कहने लगा अरे पागल यह तूने क्या किया तूने तो मेरी नाक ही काट दी इसीलिए कहते हैं, बेवकूफ दोस्त से अच्छा अकलमंद दुश्मन होता है.

अगर आपको सही फैसले लेने भी है तो आप सभी को उनके नतीज़ों से वाकिफ होना चाहिए. हमेशा अपनी ज़िन्दगी में केयरफुल रहे और कभी भी गलत निर्णयो को न ले, हमारा लिया गया एक गलत फैसला हमारे लिए मुसीबत खड़ा कर सकता है इसलिए जब भी आपको फैसला लेना है तो उसे कई बार सोचना चाहिए तभी आपको जीवन में सही बात पता चल पाती है और आप जीवन में आगे बढ़ सकते है,  

जीवन में मेहनत जरुरी है हिंदी कहानी

तुम्हे भूख लगी है तुम मेरे पास आ सकते है मेरे पास थोड़ा भोजन है वह आदमी उसके पास जाता है वह कहता है की तुम नहीं जानते हो, but तुम मुझे बुला रहे हो जबकि दुनिया में कोई भी मदद नहीं करता है सभी लोग दूर जाने को कह देते है मेरे पास कुछ भी नहीं है में बहुत समय से भूखा हु, यहां तक कोई भी अमीर आदमी मुझे कुछ नहीं देता है, but तुम तो खुद ही मेरे जैसे लग रहे हो, वह आदमी कहता है की तुम्हे भूख लगी है तुम खाना खा सकते हो,

मेरे पास इतना खाना तो नहीं है मगर तुम भूखे नहीं रह सकते हो, यह सुनकर वह दुसरा आदमी कहता है की तुमने मुझे खाना दिया है यह कम नहीं हो सकता है तुम्हारा मन बहुत बड़ा है जोकि ऐसा कर रहा है, मुझे नहीं लगता था की आज मुझे खाना मिल पायेगा, but आज तुमने मेरी मदद की है, इसलिए जब भी तुम मुझे कुछ भी करने को कह दोगे तो वह काम में कर दूंगा वह आदमी कहता है, की तुम मेरी बात मानना चाहते हो, तो में एक बात कहता हु,

तुम्हे काम करना चाहिए यह जीवन बहुत मुश्किल यहां पर जीना है तो तुम्हे कमा करना चाहिए, यहां पर बहुत मुश्किल से मदद मिलती है अगर तुम्हे कोई कमा नहीं देता है तो मेरे साथ में चलो में तुम्हे अपनी जगह पर काम दिलवा सकता हु,

शिक्षा - ऐसे कब तक तुम मांगते रहोगे, तुम्हारी परेशानी भी दूर होगी, यह सुनकर वह आदमी आज सोचने पर मजबूर है Because वह समझ गया है, की वह सही कह रहा है, आज तक मांगने के अलावा मेने कुछ नहीं किया है आज वह मेहनत कर सकता है शायद उसे आज पता चल गया है की जीवन में मेहनत जरुरी है

बेवकूफ दोस्त :- Great story in hindi

तुम मेरे दोस्त हो मगर फिर भी तुम इस बात को नहीं समझते हो तुम मुझे उस जगह पर जाने के लिए कह रहे हो जिस जगह पर हमे नहीं जाना चाहिए मगर तुम इस बात को नहीं समझ रहे हो यह कल की बात है जब हम उस जगह से वापिस आये थे तभी हमने सोच लिया था की हम उस जगह नहीं जायँगे मगर तुम्हारी अब तो से तो यही लग रहा है की हमे फिर वही जाना कहहिये मुझे नहीं लगता है की यह सही है

क्योकि उस जगह पर बहुत से जानवर है जो हमारे लिए खतरा बन सकते है इसलिए हमे वहा पर नहीं जाना चाहिए लेकिन वह तो यही बात कह रहा था की उस जगह पर उनकी बॉल रह गयी थी यह सब कुछ उस समय पर हुआ था जब वह भाग रहे थे तभी उनकी बल भी रह गयी थी अब वह उस बॉल को लाना चाहता था मगर उसका दोस्त यही कह रहा था की हमे नहीं जाना चाहिए मगर वह बात नहीं माना था और बॉल को लेने चला गया था.

शिक्षा - जब वह बॉल लेने गया तो उस जगह पर बहुत से जानवर थे और उस पर हमला कर रहे थे वह बहुत मुश्किल से बॉल को लेकर आया था अब वह जब घर आया तो वह घायल हो चूका था जबकि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था, मगर वह बात नहीं माना था जिसकी वजह से ऐसा हो गया था इसलिए कोई भी काम नहीं करना चाहिए जिससे परेशानी का सामना करना पड़े।

अच्छाई की अनोखी हिंदी कहानी

एक नगर में बहुत अच्छा आदमी रहता था. सभी लोग उसकी तारीफ़ करते थे. क्योकि सभी का भला करना उनकी मदद करना. उसे बहुत अच्छा लगता था. उस आदमी की आदत बहुत अच्छी थी. कोई भी अगर उसके घर पर आता था. वह उसका स्वागत बहुत अच्छे से करता था. एक दिन की बात है. वह रत के समय में सो रहा था. तभी दरवाजे पर दस्तक होती है. वह आदमी देखता है. कोई दरवाजे पर है.

दरवाजे से अंदर एक आदमी आता है. वह बहुत ही डरा हुआ लग रहा था. मगर वह क्यों डरा हुआ था. यह बात नहीं जानता था. आदमी पूछता है. तुम कौन हो. यहां पर रत के समय में क्यों आये हो. तुम्हे कोई समस्या है. वह कहता है. में मुसाफिर हु. रात बहुत अधिक हो गयी है. इसलिए कोई नज़र नहीं आ रहा था. में यहां पर किसी को नहीं जानता था. इसलिए आपका घर नज़र आया सोचा आपसे कुछ मदद मांग सकता हु. मुझे किसी ने बताया था. आप बहुत अच्छे है. यह सुनकर वह आदमी कहता है. आप परेशान न हो.

आप मेरे यहां पर रुक सकते है. आपको कोई भी समस्या नहीं होगी. वह आदमी उस मुसाफिर को घर के अंदर बुलाता है. शायद वह भूखा होगा. इसलिए भोजन भी लाता है. वह आदमी उस मुसाफिर को नहीं जानता था. मगर फिर भी उसकी सेवा कर रहा था. कुछ समय बाद वह आदमी कहता है. आप आज यहां पर आराम कर सकते है. क्योकि रात बहुत हो गयी है. वह आदमी उसे एक कमरा देता है. जिसमे वह आराम कर सकता था. मगर जैसे वह आदमी सोता है. वह मुसाफिर उसके घर की कीमती चीज लेकर घर से बाहर चला जाता है. मग एक सिपाही उसे पकड़ लेता है. क्योकि उसे लगता है. यह चोरी करके आया है.

लब्ध प्रणांश

विष्णु शर्मा ने राजपूतों से कहा-अब मैं लब्ध प्रणांश नाम के चौथे संत्र को आरंभ करता हूं। ‘लब्ध प्रणांश’ का शाब्दिक अर्थ है, ‘जो प्राप्त हुआ वह नष्ट हो गया। का प्रथम श्लोक यह कहता है। ‘आपत्ति आने पर जिस व्यक्ति की बुद्धि कुंठित नहीं होती,

वह समस्त आपत्तियों को अपने बुद्धि बल से पार कर जाता है। उसी प्रकार, जैसे समुद्र तट पर निवास करने वाले रक्तमुख नामक एक वानर ने अपनी बुद्धि के द्वारा एक बहुत बड़ी विपत्ति को पार किया था।’

एक समुद्र के तट पर सभी ऋतुओं में फलने वाला एक जामुन का विशाल वृक्ष था। उस वृक्ष पर रक्तमुख नाम का एक वानर निवास करता था। एक दिन संयोगवश करालमुख नाम का मगर समुद्र से निकल कर उस वृक्ष के नीचे आकर बैठ गया।

वानर वृक्ष पर बैठा जामुन खा रहा था। मगर को देखकर उसने कहा-‘महाशय! आप इस समय मेरे अतिथि हैं। लीजिए, इन मीठे-मीठे फलों से आपका स्वागत-सत्कार करता हूं। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है कि जो व्यक्ति अपने घर पर आ जाए,

उसे अतिथि मानकर उसका स्वागत-सत्कार करना चाहिए। जिस घर से अतिथि निराश होकर लौट जाता है, उससे पितृगण और देवता विमुख हो जाया करते हैं।

यह कहकर रक्तमुख नाम के उस वानर ने अच्छे अच्छे जामुन चुनकर उस मगर को खाने के लिए दिए। मगर को जामुन बहुत मीठे लगे। उस दिन से दोनों में मित्रता हो गई।

मगर अब नित्यप्रति वानर के पास आने लगा। वानर भी उसका मीठे-मीठे जामुनों से स्वागत करता। मगर अब अपनी ले जाकर देखने लगा।

पाली को जामुन एक दिन मगर की पली ने कहा-‘ये अमृत तुल्य जामुन के फल नित्यप्रति आपको कहां से मिल जाते हैं ?’ मगर ने कहा-‘समुद्र तट पर रक्तमुख नाम का एक वानर मेरा परम मित्र बन गया है।

वह तट पर उगे एक जामुन के वृक्ष पर रहता है। वही मुझको यह फल दिया करता है। यह सुनकर मगर की पत्नी कहने लगी-‘जो वानर नित्यप्रति ऐसे मीठे फल खाता है, उसका हृदय तो बहुत ही मीठा होगा।

यदि तुम मुझे अपनी प्रिय पली समझते हो तो उस वानर का हृदय मुझे लाकर खिला दो। पली के ऐसे विचार सुनकर मगर को बहुत दुख हुआ। वह पली से बोला-‘प्रिये!

तुम्हें मेरे मित्र के प्रति ऐसी बातें नहीं सोचना चाहिए। वह मेरा मित्र ही नहीं, सगे भाई के समान है। जरा सोचो, वह तुम्हारे लिए कितने मीठे-मीठे फल भेजता है। उसके बाद तो यह फल मिलने बंद हो जाएंगे।

मैं उसको किसी भी भांति नहीं मार सकता। तुम अपना यह दुराग्रह छोड़ दो।’ इस पर मगर की पत्नी ने कुछ नाराजगी से कहा-‘तुम एक जलचर हो और वह वानर थल पर विचरण करने वाला ।

तुम्हारा और उसका रक्त का संबंध भी नहीं है, फिर वह वानर तुम्हारा भाई कैसे हो गया ?

मगर बोला-‘भाई दो तरह के होते हैं। एक तो वह जो माता की कोख से जन्म लेता है। उसे सहोदर भाई कहा जाता है। दूसरा भाई अपनी वाणी और व्यवहार से बनाया जाता है। वाग्दान द्वारा बनाया हुआ भाई सगे भाई से भी श्रेष्ठ माना जाता है।

उसकी पत्नी कहने लगी-‘आज तक तो तुमने मेरी कोई बात टाली तक नहीं थी। मुझे ऐसा लगता है कि यह कोई वानर न होकर वानरी है, इसलिए तुम आनाकानी कर रहे हो। आजकल मैं देख रही हूं कि तुम दिन-भर उसी के पास रहते हो।

तुम्हारे व्यवहार में भी अंतर आने लगा है मैं भली-भांति समझ गई हूं। अब तुम मेरे साथ कोई बहाना नहीं बना सकते।’ मगर ने अपनी पत्नी को बहुत समझाया कि वह अपना दुराग्रह त्याग दे; किंतु उसकी पली उसपर और भी क्रोधित होने लगी।

उसने तो यहां तक कह दिया कि यदि उसने उस वानर का हदय लाकर उसे खाने को न दिया तो वह भूखी रहकर करके अपने प्राण त्याग देगी। मगर ने पुनः अपनी पत्नी को समझाने का प्रयास किया। वह बोला-‘अरे भाग्यवान !

बुद्धि से तो काम लो। जरा बताओ तो कि मैं किस प्रकार उसको मार सकता हूं। वह वृक्ष पर रहता है और मैं तट की बालू पर बैठा रहता हूं। मैं वृक्ष पर तो नहीं चढ़ सकता। फिर मैं उसको कैसे मार सकता हूं?’

मगर की पत्नी भी जिद्दी थी। वह अपने निश्चय से न डिगी। इस प्रकार कई दिन मगर तट पर गया ही नहीं, वह अपनी पली को समझाने बुझाने में ही लगा रहा।

किंतु जब उसकी पली आमरण अनशन पर बैठ गई तो उसे विवश होकर वानर के पास जाना ही पड़ा। रास्ते भर वह यही सोचता रहा कि किस प्रकार वह उस वानर को मारे।

वानर ने जब अपने मित्र को इस प्रकार उदास आते देखा तो उसने चिंतित स्वर में पूछा-‘क्या बात है मित्र, आज कई दिनों में दिखाई दिए ? कुछ चिंतित भी दिखाई देते हो। आखिर इसका कारण क्या है ?

मगर बोला-‘क्या बताऊं मित्र । आज मुझे तुम्हारी भाभी ने बहुत डांटा-फटकारा है। उसका कहना है कि भाई के समान मेरा जो मित्र मुझे नित्य-प्रति इतने मीठे-मीठे फल खिलाता है, और उसके लिए भी भेजता है,

उस पर मैंने आज तक कोई उपकार नहीं किया। यहां तक कि मैंने उसे कभी घर पर भी निमंत्रित नहीं किया। उसने तो यहां तक कह दिया कि आज यदि मैं अपने भाई समान मित्र को घर पर नहीं लाया तो वह अपने प्राण त्याग देगी।’ ‘

बस यही मेरी उदासी का कारण है। आज सारा दिन इसी क्लेश में बीता है। अब तुम्हें मेरे साथ मेरे घर चलना होगा तुम्हारी भाभी बड़ी उत्सुकता से तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है।

उसने तुम्हारे स्वागत-सत्कार के लिए विविध प्रकार के व्यंजन भी तैयार कर लिए होंगे।’ यार बोला-‘भाभी का आग्रह उचित ही है। मित्रों में इतनी प्रगाढ़ता तो होनी ही चाहिए कि वे परस्पर एक-दूसरे का स्वागत-सत्कार कर सकें।

किंतु मैं तो वृक्षों पर विचरण करने वाला जीव हूं, और तुम रहते हो सागर के जल में, फिर मैं वहां कैसे जा पाऊंगा। तुम ऐसा करो, भाभी को यहीं लिवा लाओ।’ मगर बोला-‘नहीं मित्र। ऐसी बात नहीं है।

हम जल में अवश्य है। किंतु मेरा घर तो समुद्र के मध्य स्थित एक टापू पर है तुम मेरी पीठ पर चढ़कर वहां आनंद के साथ पहुंच सकते हो। वानर बोला-‘ऐसी ही बात है तो विलम्ब किसलिए ! चलो, हम चलते हैं।’

यह कहकर वानर उस मगर की पीठ पर जाकर बैठ गया। मगर उसे लेकर अपने स्थान की ओर चल पड़ा। जब वह मध्य समुद्र में पहुंचे तो वानर बोला-‘मित्र ! जरा धीरे चलिए। मुझे बड़ा डर लग रहा है। लगता है अब गिरा कि तब गिरा।’

मगर ने सोचा कि अब तो यह मेरे अधिकार में आ ही चुका है। यहां से जा तो सकता नहीं। मरना तो इसे है ही, फिर क्यों न इसे सच्चाई बता दूं ? सुनकर कम-से-कम यह अपने अभीष्ट देवता का स्मरण तो कर ही लेगा।

यही सोचकर वह वानर से बोला—’मित्र ! स्त्री की बातों का विश्वास दिलाकर वास्तव में मैं तुम्हें यहां मारने लाया हूँ। अतः चाहो तो अपने इष्ट देवता का स्मरण कर लो।

यह सुनकर वानर ने कहा-‘किंतु मेरा अपराध क्या है मित्र ? किस कारण तुम मुझे मारना चाहते हो ? मैंने तो भाभी का भी कुछ नहीं बिगाड़ा है ? से “बात यह है कि मेरी पत्नी तुम्हारा हृदय खाना चाहती है।

उसका विचार है कि तुम इतने मीठे फल नित्य-प्रति खाते हो तो निश्चय ही तुम्हारा हृदय उन फलों से भी अधिक मीठा होगा इसलिए तुम्हें यहां लाने के लिए मुझे यह नाटक रचना पड़ा है। यह सुनकर वानर तुरंत बोल उठा-‘मित्र!

यदि ऐसी ही बात थी तो तुमने मुझे तट पर ही क्यों न कह दिया, ताकि मैं जामुन के कोटर में सुरक्षित रखे अपने हृदय को साथ ही ले आता। अपनी भाभी को अपना हृदय देते हुए मुझे बड़ी प्रसन्नता होती।

बिना सारी बात बताए तुम मुझे व्यर्थ ही यहां ले आए। मगर बोला-मित्र ! इसमें बिगड़ा ही क्या है ? यदि तुम अपना हृदय देना ही चाहते हो तो चलो, मैं तुम्हें वापस उसी वृक्ष के पास ले चलता हूं। तुम मुझे अपना हृदय दे देना।

फिर तुम्हें मेरे साथ आने का कष्ट भी नहीं करना पड़ेगा।’ यह कहकर मगर उसको वापस तट की ओर ले चला। रास्ते-भर वानर अपने देवी-देवताओं की मनौतियां करता रहा कि किसी तरह प्राण बच जाएं।

जैसे ही तट निकट आया, उसने एक लम्बी छलांग भरी और कूदकर वृक्ष पर चढ़ गया। वृक्ष की सबसे ऊंची शाखा पर बैठकर वह सोचने लगा- मैं बहुत भाग्यशाली हूं जो आज मरते-मरते बचा हूं।

किसी ने ठीक ही कहा है कि अविश्वस्त पर तो विश्वास करना नहीं चाहिए। जो विश्वस्त हो, उस पर भी अधिक विश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि विश्वास के कारण उत्पन्न होने वाला संकट मनुष्य के मूल को भी नष्ट कर डालता है।

वानर ऐसा सोच ही रहा था कि नीचे से मगर ने आवाज लगाई–’मित्र ! अब शीघ्रता से मुझे अपना हृदय दे दो। तुम्हारी भाभी प्रतीक्षा कर रही होगी।’

वानर क्रोधपूर्वक बोला-‘अरे मूर्ख, विश्वासघाती ! तुझे इतना भी नहीं पता कि किसी के शरीर में दो हृदय नहीं होते। कुशल चाहता है तो यहां से भाग जा और फिर कभी अपना काला मुख मुझे मत दिखाना। मगर बहुत लज्जित हुआ।

वह सोचने लगा कि मैंने अपने हृदय का भेद इसे बताकर अच्छा नहीं किया। फिर भी उसका विश्वास पाने का लिए वह बोलामित्र ! मैंने तो हंसी-हंसी में यह बात कही थी और तुम उसे सच मान बैठे।

तुम्हारी भाभी बड़ी उत्सुकता से तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है वानर बोला-‘दुष्ट ! अब तू मुझे धोखा देने की चेया मत कर। मैं तेरे अभिप्राय को समझ चुका हूँ।

एक बार तेरा विश्वास कर लेने के बाद अब मैरा विश्वास तुझ पर से डिग गया है। कहा भी गया है कि भूखा व्यक्ति कौन-सा पाप नहीं करता। क्षीण व्यक्ति करुणाविहीन होते हैं।

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