मेंढक और चूहा की कहानी

मेंढक और चूहा की कहानी

एक चूहा और मेंढक दोस्त थे। हर सुबह मेंढक अपने तालाब से बाहर निकलता और अपने दोस्त से मिलने जाता, जो एक पेड़ के किनारे एक छेद में रहता था। वह दोपहर को घर लौटता था।

माउस अपने दोस्त की मित्रता से खुश था लेकिन उसे पता नहीं था की दोस्त धीरे-धीरे दुश्मन में बदल रहा था। इसकी वजह ये थी की मेंढक हर दिन माउस के घर का दौरा करता था, लेकिन चूहे ने कभी भी उससे मिलने की कोशिश नहीं की। वह कभी भी अपनी तरफ से मेंढक के घर नहीं गया था।

एक दिन उसे लगा कि वह काफी अपमानित हो चुका है। जब वो माउस से मिलकर जाने लगा तो उसने जानबूझकर अपने एक पैर को चूहे की पूँछ से बाँध लिया। अब वह फुदक फुदक कर चलता जा रहा था और चूहा बेचारा घिसटता हुआ उसके साथ चल रहा था।

मेंढक ने तालाब में गहरी डुबकी लगाई। माउस ने खुद को मुक्त करने की कोशिश की, लेकिन जल्द ही वह डूब नहीं सका। उसका फूला हुआ शरीर ऊपर तक तैर गया।

एक बाज ने तालाब की सतह पर चूहे को तैरते हुए देखा। उसने झपट्टा मारा, और चूहे को अपने तालों में पकड़कर, पास के एक पेड़ की शाखा में उड़ गया। मेंढक, ज़ाहिर है, पानी से भी बाहर था। उसने खुद को मुक्त करने की पूरी कोशिश की, लेकिन जल्द ही और उसके संघर्षों का अंत नहीं हुआ। वह चूहे के साथ ही बंधा रहा और बाज दोनों को ही ले उड़ा। अपना भोजन बनाने के लिए।

शिक्षा - अपने दुश्मन के लिए बहुत गहरा गड्ढा मत खोदो, तुम खुद उसमें गिर सकते हो’।

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