Lion and Three Bulls Story in Hindi

शेर और तीन बैलों की कहानी

एक गांव में एक किसान रहता था, उसके पास दो गाय भी थी। दोनों गाय कुछ दिनों बाद बछड़े देने वाली थी। किसान दोनों गायों को जंगल में ले जाता और चारा चरा कर वापस लाता उनकी बहुत देखभाल करता था।

2 या 3 दिनों बाद एक गाय के एक छोटा सा बछड़ा हुआ दिखने में बहुत सुंदर था, किसान ने उस बछड़े की भी बहुत देखभाल की और उसको टाइम टाइम पर दूध पिलाना और उसकी मां को चारा खिलाता था कुछ दिनों बाद फिर से दूसरी गाय के भी छोटा सा बछड़ा हुआ।

वह भी दिखने में बहुत सुंदर था, किसान ने दोनों बछड़ों की बहुत देखभाल की और उनको दूध भी पिलाता और दोनों गायों का दूध निकाल कर डेयरी में बेचा था, कुछ पैसा आता जिससे किसान के घर का लालन पालन हो रहा था। किसान जाता और दोनों गायों के लिए खेत से चारा लाता और उन्हें चारा चराता पानी पिलाता था।

कुछ दिनों बाद किसान की एक गाय का बछड़ा सर्दियों के दिनों में वह बीमार हो गया था । किसान ने उस बीमार बछड़े को रोज डॉक्टर से इंजेक्शन लगवाता और दवाइयां खिलाता फिर भी वह ठीक नहीं हो पाया और दो या तीन दिनों के बाद वह बछड़ा मर गया।

इस दुर्घटना से किसान बहुत दुखी होता है और किसान की गाय भी बहुत रोती है, किसान ने उस बछड़े को बहुत बचाने की कोशिश की फिर भी वह बछड़ा बीमारी के कारण बच नहीं पाया।

अब किसान के पास सिर्फ एक ही बछड़ा रह गया था वह बछड़ा दोनों गायों का दूध पीता था जिस कारण वह बहुत स्ट्रांग और शक्तिशाली हो गया था। वह बछड़ा बहुत बड़ा हो गया था वह एक बेल के बराबर का हो गया था, वह बैल और उसकी दोनों मां जंगल में जाती और पेट भर कर चारा खा के आ जाती थी।

एक दिन वह बेल अकेला ही जंगल में गया था, वह हरी भरी घास खा रहा था, कि उधर से एक शेर दहाड़ता हुआ आ रहा था, उसके डर के मारे सारे जानवर भाग गए परंतु वह बैल वहां से भागा नहीं मैं सोचने लगा कि कौन मूर्ख है जो इन बिचारे जानवरों को डरा रहा है।

इतने में वह शेर बेल के पास आ गया और और कहा हे बेल तुम मुझसे डर कर क्यों भागा नहीं क्या तुम्हें मुझसे डर नहीं लगता बेल ने कहा नहीं बिल्कुल नहीं डर लगता तुम्हारे डराने से मैं डरने वाला नहीं मैं बहुत ताकतवर बैल हूं!

शेर ने कहा कि तुम मेरे साथ लड़ना फिर पता चलेगा कि तू ताकतवर है या में ताकतवर बेल ने कहा ठीक है कल यहां पर ही मिलना मैं कल यहां पर आऊंगा और तुमसे लड़ाई करूंगा।

बेल वहां से गया गया और किसान के घर जाकर अपनी दोनों मां को पूरी बात बताने लगा बैल की दोनों मां ने कहा कि बेटा शेर जंगल का राजा होता है उसकी आदत है दहाड़ने की हैं तुम बिना फालतू ही उससे लड़ाई करने के जिद्द पर अड़ा हुआ है, जाकर शेर से माफी मांग लेना बेल ने कहा नहीं मां मैं आप दोनों का दूध पीता हूं जिसके बदले मैं कितना स्ट्रांग हूं।

बैल दूसरे दिन घर से निकल गया और सीधा जाकर मिट्टी की मटकी बनाने वाले के पास गया और बोला कुम्हार भाई मेरे आजू-बाजू दो मटकी लटका दो कुमार भाई ने बेल के दोनों तरफ मटकी लटका दी फिर बेल वहां से सीधा लोहार के पास गया और लोहार से बोला की लोहार भाई मेरे पूछ के पीछे एक लोहे का जुगाड़ लगा दो लोहार भाई ने उसकी पूंछ के एक लोहे का एक जुगाड़ लगा दिया।

बैल सीधा जंगल में गया और शेर का इंतजार करने लगा शेर उधर से दहाड़ता हुआ आ रहा था, बेल ने कहा शेर मैं लड़ाई करने के लिए तैयार हूं, शेर बोला की अभी मेरा लड़ाई करने का मन नहीं है बेल बोला यही कह दो ना शेर भाई की मुझे तुमसे डर लग रहा है कहीं तुम मुझे मार ना दो यह बात सुनकर शेर को बहुत गुस्सा आ गया।

शेर ने कहा बेल हो जा तैयार मैं तुमसे लड़ाई करने के लिए तैयार हूं, ऐसे बोल कर शहर उधर से दौड़ता हुआ आया और बेल के ऊपर उछला बेल उधर घूम गया घूमते ही बेल के आजू बाजू बंदे मटके फूट गए और शेर नीचे गिर गया शेर फिर से खड़ा हुआ और दौड़ता हुआ आया फिर से वह उछाला परंतु इस बार बेल जोर से घुमा बैल की पूंछ पर बंदा एक लोहे का बंदा जुगाड़ शहर के पेट में घुस गया इस प्रकार से हर की मृत्यु हो गई बैल खुश होता हुआ घर आया और अपने दोनों मां को कहा मां मैंने शेर को मार दिया।

शिक्षा - हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि डर कितना ही बड़ा क्यों ना हो अगर हम उस डर का भी सामना करें तो वह डर हमारे आगे छोटा हो जाता है।

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